Chapter 5
Chapter 5 — अध्ययन नोट्स
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प्राकृतिक वनस्पति
व्याख्याप्राकृतिक वनस्पति
प्राकृतिक वनस्पति का अर्थ है वह वनस्पति जो किसी क्षेत्र में बिना मानवीय हस्तक्षेप के स्वाभाविक रूप से पाई जाती है। यह वनस्पति जलवायु, मिट्टी, तापमान, वर्षा और स्थलाकृति जैसे प्राकृतिक कारकों पर निर्भर करती है। भारत में प्राकृतिक वनस्पति की विविधता बहुत अधिक है क्योंकि यहाँ विभिन्न प्रकार के जलवायु और भौगोलिक क्षेत्र मौजूद हैं। प्राकृतिक वनस्पति के प्रकार मुख्य रूप से उष्ण कटिबंधीय, शीतोष्ण और शुष्क क्षेत्रों के अनुसार विभाजित किए जाते हैं। वनस्पति का यह स्वरूप न केवल पर्यावरण को संतुलित रखता है बल्कि जीव-जंतुओं के लिए आवास भी प्रदान करता है। प्राकृतिक वनस्पति में वृक्ष, झाड़ियाँ, घास, और अन्य पौधे शामिल होते हैं जो स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार विकसित होते हैं। प्राकृतिक वनस्पति का संरक्षण जैव विविधता के संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है।
- प्राकृतिक वनस्पति बिना मानवीय हस्तक्षेप के स्वाभाविक रूप से उगती है।
- यह जलवायु, मिट्टी, तापमान, वर्षा और स्थलाकृति पर निर्भर करती है।
- भारत में प्राकृतिक वनस्पति की विविधता जलवायु और भौगोलिक विविधता के कारण है।
- वनस्पति के प्रकार उष्ण कटिबंधीय, शीतोष्ण और शुष्क क्षेत्रों के अनुसार विभाजित हैं।
- प्राकृतिक वनस्पति पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता के लिए आवश्यक है।
- वनस्पति जीव-जंतुओं के लिए आवास प्रदान करती है।
- 📌 प्राकृतिक वनस्पति: बिना मानवीय हस्तक्षेप के स्वाभाविक रूप से उगने वाली वनस्पति।
- 📌 जलवायु: किसी क्षेत्र की औसत मौसम की स्थिति।
- 📌 स्थलाकृति: भूमि की भौगोलिक आकृति।
उष्ण कटिबंधीय वनस्पति
व्याख्याउष्ण कटिबंधीय वनस्पति
उष्ण कटिबंधीय वनस्पति भारत के उन क्षेत्रों में पाई जाती है जहाँ वर्षा अच्छी होती है और तापमान अधिक रहता है। इस वनस्पति को मुख्य रूप से दो प्रकारों में बांटा गया है: उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन और उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन। 1. उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन: ये वन वर्ष भर हरे-भरे रहते हैं और अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं। यहाँ के पेड़ सदाबहार होते हैं, अर्थात् उनके पत्ते पूरे वर्ष हरे रहते हैं। इस वन में सागवान, शीशम, सन्दल, महुआ, नीम जैसे वृक्ष पाए जाते हैं। ये वन भारत के पश्चिमी घाट, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कुछ हिस्सों में पाए जाते हैं। 2. उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन: ये वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वर्षा की मात्रा कम होती है और शुष्क मौसम अधिक होता है। इन वनों में पेड़ सर्दियों में अपने पत्ते गिरा देते हैं ताकि पानी की कमी से बचा जा सके। इस वन में सागवान, शीशम, सागौन, साल, पीपल, बरगद आदि वृक्ष पाए जाते हैं। ये वन मध्य भारत और उत्तर भारत के कुछ भागों में पाए जाते हैं।
- उष्ण कटिबंधीय वनस्पति अधिक वर्षा और उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में पाई जाती है।
- सदाबहार वन वर्ष भर हरे-भरे रहते हैं।
- पर्णपाती वन में पेड़ सर्दियों में पत्ते गिराते हैं।
- सदाबहार वन में सागवान, शीशम, महुआ जैसे वृक्ष होते हैं।
- पर्णपाती वन मध्य और उत्तर भारत में पाए जाते हैं।
- वनस्पति की यह विविधता जलवायु और वर्षा पर निर्भर करती है।
- 📌 उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन: वर्ष भर हरे-भरे रहने वाले वन।
- 📌 उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन: जिनमें पेड़ सर्दियों में पत्ते गिराते हैं।
कंटीले वन तथा झाड़ियाँ
व्याख्याकंटीले वन तथा झाड़ियाँ
कंटीले वन और झाड़ियाँ मुख्यतः भारत के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वर्षा कम होती है। जल की कमी के कारण यहाँ की वनस्पति छोटे आकार की होती है और पौधों पर कांटे या कंटीले हिस्से होते हैं ताकि पानी की कमी से बचा जा सके। इस प्रकार क
अभ्यास प्रश्न — Chapter 5
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.एकसमान (uniform) वृत्तीय (circular) गति (motion) में निम्नलिखित में से कौन-सी भौतिक मात्रा स्थिर रहती है?
उत्तर:
चाल
व्याख्या:
[{"id": "826e32fe-0b8e-422b-ba53-39f5df270945", "type": "html", "value": " एकसमान वृत्तीय गति में चाल (speed) स्थिर रहती है। "}]
Q2.एक कीट फर्श पर 1m त्रिज्या (radius) के वृत्ताकार (circular) पथ में घूम रहा है और 4 m/s की चाल से 2 चक्कर लगाता है। कीट द्वारा चक्कर पूरा करने में कितना समय लगता है?
उत्तर:
3.14 s
व्याख्या:
[{"id": "eaa6d0cc-ad49-4a38-bc13-f2698580c4fe", "type": "html", "value": " त्रिज्या = 1 m, चाल = 4 m/s कीट द्वारा तय की गई दूरी = 2 × सिक्के की परिधि = 2× (2𝜋r) = 2 × (2 × 3.14 × 1) = 2 × 6.28 = 12. 56 m समय = दूरी/चाल = 12.56/4 = 3.14 s "}]
Q3.एकसमान वृत्तीय गति (uniform circular motion) के लिए निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?
उत्तर:
एक वृत्ताकार पथ में प्रत्येक बिंदु पर दिशा बदलती है।
व्याख्या:
[{"id": "0558424a-bd79-4a4a-90a7-c139bb2b0a70", "type": "html", "value": " जब एक वृत्त का आधा भाग आच्छादित होता है तो विस्थापन शून्य नहीं होता, इसलिए विकल्प 1 गलत है। जब कोई वस्तु वृत्ताकार पथ में धीमी होती है तो त्वरण की दिशा बदल जाती है, इसलिए विकल्प 3 गलत है। त्वरण की दिशा परिमाण नहीं बदलती है, इसलिए विकल्प 4 गलत है। वृत्ताकार पथ की दिशा प्रत्येक बिंदु पर बदलती रहती है। अत: विकल्प 2 सत्य है "}]
Q4.दीया पार्क से घर तक एक कार का टायर घुमाती है। 14 m व्यास वाली कार का टायर 4 m/s की चाल से एकसमान गोलाकार गति में घूमता है। यदि दीया को घर पहुंचने में कुल 11 मिनट का समय लगता है, तो पहिया के घूमने के स्थिति में उसके घर और पार्क के बीच की दूरी कितनी है?
उत्तर:
60 चक्कर
व्याख्या:
[{"id": "f2fa9d3a-ebc2-4dad-8de5-2cea12587c14", "type": "html", "value": " पार्क से घर की दूरी = टायर द्वारा तय की गई दूरी। टायर की त्रिज्या = 14/2 m = 7 m चाल = 4 m/s एक चक्कर में टायर द्वारा तय की गई दूरी = 2Πr = 2 × (22/7) × 7 = 44 m एक चक्कर को पूरा करने में टायर द्वारा लिया गया समय = दूरी / चाल = 44/4 = 11 s घर तक पहुँचने में लगा कुल समय = 11 minutes = 660 s टायर द्वारा किए गए कुल चक्करों की संख्या = 660/11 = 60 "}]
Q5.दूरी-समय ग्राफ का ढलान क्या निरूपित करता है?
उत्तर:
चाल
व्याख्या:
[{"id": "865ce868-19e9-4d24-b34b-c78697e8abde", "type": "html", "value": " दूरी-समय ग्राफ का ढलान चाल का निरूपण करता है। "}]
Q6.वेग-समय ग्राफ के क्षेत्रफल के अंतर्गत प्रदर्शित भौतिक मात्रा का मात्रक क्या है?
उत्तर:
m
व्याख्या:
[{"id": "ffee1bda-1576-48f5-bca7-d9d48760f3ff", "type": "html", "value": " यहां मापी गई भौतिक मात्रा विस्थापन (displacement) है। अत: विकल्प 2 सही है। "}]
Q7.जब ध्वनि तरंग एक स्थान से अन्य स्थान तक संचरण करती है तो क्या वहित होता है?
उत्तर:
ऊर्जा
व्याख्या:
[{"id": "e0e39dd5-1f37-4a33-a125-c8dc0e0016bf", "type": "html", "value": " जब ध्वनि तरंगें एक स्थान से अन्य स्थान तक संचरित होती हैं, तब ऊर्जा का वहन होता है। "}]
Q8.ध्वनि के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?
उत्तर:
ध्वनि के संचरण को घनत्व या दाब भिन्नता के प्रसार के रूप में चित्रित किया जा सकता है।
व्याख्या:
[{"id": "af64b4f5-e382-47e0-ab70-31ce8e15557a", "type": "html", "value": " किसी वस्तु को कंपित किए बिना ध्वनि उत्पन्न नहीं की जा सकती है। अतः विकल्प 1 असत्य है। कंपन माध्यम में कण तब तक संचरण नहीं करते जब तक यह हमारे कानों तक नहीं पहुंच जाते। अतः विकल्प 3 असत्य है। ध्वनि उत्पन्न होने पर ऊर्जा का उपयोग किया जाता है। अतः विकल्प 4 असत्य है। ध्वनि के संचरण को घनत्व या दबाव भिन्नता के प्रसार के रूप में चित्रित किया जा सकता है। अतः विकल्प 2 सत्य है। "}]
Samkalin Bharat-I के सभी 6 अध्याय
Social Science · Class 9