Chapter 5
Chapter 5 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
5.1 मूल
व्याख्या5.1 मूल
पुष्पी पादपों में मूल (Root) पौधे का वह भाग होता है जो मिट्टी में स्थित रहता है और पौधे को स्थिरता प्रदान करता है। अधिकांश द्विबीजपत्री पौधों में, बीज अंकुरित होने पर मूलांकुर (Primary root) विकसित होता है जो मिट्टी में लंबा होता है और प्राथमिक मूल बनाता है। इस प्राथमिक मूल से पाश्विक शाखाएँ निकलती हैं जिन्हें द्वितीयक और तृतीयक मूल कहा जाता है। ये शाखाएँ मिलकर मूसला मूल तंत्र (Tap root system) बनाती हैं, जैसे सरसों का पौधा। एकबीजपत्री पौधों में प्राथमिक मूल अल्पायु होता है और उसकी जगह तने के आधार से अनेक मूल निकलते हैं जिन्हें झकड़ा मूल तंत्र (Fibrous root system) कहते हैं, जैसे गेहूँ। कुछ पौधों में मूल मूलांकुर की बजाय पौधे के अन्य भागों से निकलती हैं, जिन्हें अपस्थानिक मूल (Adventitious roots) कहा जाता है, जैसे घास और बरगद। मूल तंत्र का मुख्य कार्य मिट्टी से जल और खनिज लवणों का अवशोषण करना, पौधे को मिट्टी में स्थिर करना, खाद्य पदार्थों का संचय करना तथा पादप हार्मोन का संश्लेषण करना होता है। मूल के शीर्ष भाग को मूल गोप (Root cap) कहते हैं जो अंगुली के आकार का होता है और कोमल शीर्ष मेरिस्टेम की रक्षा करता है। इसके ऊपर दीर्घकरण क्षेत्र (Elongation zone) होता है जहाँ कोशिकाएँ लंबाई में बढ़ती हैं। इसके बाद परिपक्व क्षेत्र (Maturation zone) आता है जहाँ कोशिकाएँ परिपक्व होती हैं और मूलरोम (Root hairs) विकसित होते हैं जो जल और खनिजों के अवशोषण में सहायक होते हैं।
- मूल पौधे का भूमिगत भाग होता है जो मिट्टी में रहता है।
- द्विबीजपत्री पौधों में मूसला मूल तंत्र होता है, जबकि एकबीजपत्री में झकड़ा मूल तंत्र।
- मूल का शीर्ष भाग मूल गोप से ढका होता है जो कोमल मेरिस्टेम की रक्षा करता है।
- दीर्घकरण क्षेत्र में कोशिकाएँ लंबाई में बढ़ती हैं।
- परिपक्व क्षेत्र में मूलरोम विकसित होते हैं जो जल और खनिजों का अवशोषण करते हैं।
- मूल पौधे को स्थिरता प्रदान करता है और खाद्य पदार्थों का संचय करता है।
- 📌 मूसला मूल तंत्र: एक मुख्य मूल और उसकी शाखाओं का तंत्र।
- 📌 झकड़ा मूल तंत्र: अनेक समानांतर मूल जो तने से निकलते हैं।
- 📌 मूल गोप: मूल के शीर्ष पर स्थित संरचना जो मेरिस्टेम की रक्षा करती है।
5.2 तना (स्तंभ)
व्याख्या5.2 तना (स्तंभ)
तना (Stem) पौधे का वह अक्ष है जो भूमिगत मूल से ऊपर की ओर बढ़ता है और जिस पर शाखाएँ, पत्तियाँ, पुष्प तथा फल विकसित होते हैं। तना भ्रूण के प्रांकुर से विकसित होता है। तने पर गाँठ (Nodes) और पोरियाँ (Internodes) होती हैं। गाँठ वह स्थान होता है जहाँ से पत्तियाँ निकलती हैं। पोरियाँ गाँठों के बीच की लंबाई होती हैं। तना प्रायः हरा होता है और बाद में काष्ठीय (लकड़ी जैसा) बन जाता है। तने का मुख्य कार्य शाखाओं को फैलाना, पत्तियाँ, पुष्प और फल को सहारा देना तथा जल, खनिज और भोजन का संवहन करना है। इसके अतिरिक्त कुछ तने भोजन संग्रह करने, सहारा देने, सुरक्षा प्रदान करने और कायिक वृद्धि करने के कार्य भी करते हैं। तने की विशेषताएँ जैसे गाँठों की उपस्थिति, पोरियाँ, बहुकोशिकीय रोम आदि तने और मूल के बीच अंतर स्पष्ट करती हैं।
- तना पौधे का ऊर्ध्व भाग है जिस पर शाखाएँ, पत्तियाँ, पुष्प और फल होते हैं।
- तने पर गाँठ और पोरियाँ होती हैं।
- तना जल, खनिज और भोजन का संवहन करता है।
- तना शाखाओं और पत्तियों को सहारा देता है।
- तना हरा या काष्ठीय हो सकता है।
- तने की संरचना से मूल और तने में अंतर पहचाना जा सकता है।
- 📌 गाँठ (Node): तने का वह भाग जहाँ से पत्तियाँ निकलती हैं।
- 📌 पोरियाँ (Internodes): गाँठों के बीच की तना की लंबाई।
- 📌 काष्ठीय तना: लकड़ी जैसा कठोर तना।
5.3 पत्ती
व्याख्या5.3 पत्ती
पत्ती (Leaf) तने पर लगी हुई पाश्वीय, चपटी संरचना होती है जो प्रकाश संश्लेषण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। पत्ती गाँठ पर स्थित होती है और उसके कक्ष में कली होती है जो बाद में शाखा बन सकती है। पत्तियाँ प्ररोह के शीर्षस्थ मेरिस्टेम से निकलती हैं और अग्नि
अभ्यास प्रश्न — Chapter 5
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.———— एक फूल के गैर जरूरी हिस्से हैं
उत्तर:
क) पुंकेसर और स्त्रीकेसर
Q2........ के फूलों में रेडियल समरूपता पाई जाती है
उत्तर:
घ) ब्रासिका
Q3.बीज का टेस्टा किससे विकसित होता है
उत्तर:
(घ) बाहरी पूर्णांक
Jeev Vigyan के सभी 19 अध्याय
Biology · Class 11
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