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Chapter 5

🎓 Class 9📖 Bharat Aur Samkalin Vishwa-I📖 10 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~15 मिनट
Chapter 4अध्याय 5 / 5

Chapter 5अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

इस अध्याय में हम आधुनिक विश्व में चरवाहों की स्थिति, उनके जीवन, आजीविका के साधन, और उनके सामने आने वाली चुनौतियों का अध्ययन करेंगे। चरवाहा समुदाय मुख्यतः पशुपालन से जुड़ा हुआ है, जिसमें भेड़, बकरी, गाय, ऊँट आदि पशुओं का पालन किया जाता है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में चरवाहा समुदायों की विविधता देखने को मिलती है, जो अपने-अपने पर्यावरण और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार अपने जीवन को ढालते हैं। चरवाहों का जीवन मुख्यतः चारागाहों और जल स्रोतों की उपलब्धता पर निर्भर करता है। वे मौसमी प्रवास करते हैं ताकि अपने पशुओं को हरे-भरे चारागाह उपलब्ध करवा सकें। इस अध्याय में हम भारत के चरवाहा समुदायों के साथ-साथ अफ्रीका के मासाई समाज का भी अध्ययन करेंगे। इसके अलावा, औपनिवेशिक काल और स्वतंत्रता के बाद चरवाहों की स्थिति, उनकी समस्याएँ और सांस्कृतिक विशेषताओं पर भी चर्चा करेंगे। इस प्रकार, यह अध्याय चरवाहा समुदायों के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहलुओं को समझने में मदद करेगा।

  • चरवाहा समुदाय पशुपालन से जुड़ा हुआ है।
  • भारत में चरवाहा समुदायों की विविधता है।
  • चरवाहों का जीवन चारागाहों और जल स्रोतों पर निर्भर करता है।
  • मौसमी प्रवास चरवाहों की आजीविका का हिस्सा है।
  • अध्याय में भारत और अफ्रीका के चरवाहा समुदायों का अध्ययन होगा।
  • 📌 चरवाहा: पशुपालक जो पशुओं की देखभाल और पालन-पोषण करते हैं।
  • 📌 चारागाह: पशुओं के लिए हरा-भरा घास का मैदान।
  • 📌 मौसमी प्रवास: मौसम के अनुसार स्थान बदलकर चरवाहों द्वारा किया जाने वाला प्रवास।

भारत में घुमंतू चरवाहा समुदाय

व्याख्या

भारत में घुमंतू चरवाहा समुदाय

भारत में कई प्रकार के घुमंतू चरवाहा समुदाय पाए जाते हैं, जो भेड़, बकरी, गाय, ऊँट आदि पशुओं का पालन करते हैं। ये समुदाय मुख्यतः हिमालयी क्षेत्र, पश्चिमी भारत, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक आदि क्षेत्रों में रहते हैं। हिमालयी क्षेत्र में गद्दी, बकरवाल, गूजर जैसे समुदाय पाए जाते हैं जो गर्मियों में ऊँचाई वाले क्षेत्रों में चरागाहों की तलाश करते हैं और सर्दियों में नीचे उतर आते हैं। पश्चिमी भारत में धंगर, रैका, मालधारी जैसे समुदाय हैं जो भेड़ों और ऊँटों का पालन करते हैं। राजस्थान और गुजरात के रेगिस्तानी इलाकों में ऊँटपालक समुदायों का विशेष महत्व है। ये चरवाहा समुदाय अपने पशुओं के साथ घुमंतू जीवन शैली अपनाते हैं और चारागाहों की उपलब्धता के अनुसार स्थान बदलते रहते हैं। इनके जीवन में पशुओं की देखभाल, ऊन काटना, दूध निकालना और पशुओं से संबंधित अन्य कार्य शामिल होते हैं। चरवाहा समुदायों की सामाजिक संरचना, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक परंपराएँ भी विशिष्ट होती हैं।

  • भारत में घुमंतू चरवाहा समुदायों की विविधता है।
  • हिमालयी क्षेत्र के गद्दी, बकरवाल, गूजर मुख्य चरवाहा समुदाय हैं।
  • पश्चिमी भारत में धंगर, रैका, मालधारी समुदाय पाए जाते हैं।
  • चरवाहा समुदाय मौसम के अनुसार प्रवास करते हैं।
  • इनकी आजीविका पशुपालन और उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर है।
  • 📌 गद्दी: हिमालयी क्षेत्र का एक घुमंतू चरवाहा समुदाय।
  • 📌 धंगर: महाराष्ट्र और आसपास के क्षेत्रों में पाए जाने वाला चरवाहा समुदाय।
  • 📌 मालधारी: गुजरात के कच्छ क्षेत्र के चरवाहा समुदाय।

मौसमी प्रवास और चरवाहों का जीवन

व्याख्या

मौसमी प्रवास और चरवाहों का जीवन

घुमंतू चरवाहा समुदायों का जीवन मौसम के अनुसार बदलता रहता है। वे अपने पशुओं के लिए हरे-भरे चारागाहों की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर जाते हैं। हिमालयी क्षेत्र के गद्दी, बकरवाल, गूजर आदि गर्मियों में ऊँचाई वाले बुग्यालों में चरते हैं और सर्दि

अभ्यास प्रश्नChapter 5

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.कल्पना कीजिए कि यह 1950 का समय है और आप 60 वर्षीय राइका पशुपालक हैं। आप अपनी पोती को बता रहे हैं कि आजादी के बाद से आपके जीवन में क्या बदलाव आए हैं। आप उसे क्या बताएँगे?

उत्तर:

1950 के समय राइका पशुपालक के रूप में, आजादी के बाद जीवन में कई बदलाव आए हैं। पहले चरागाहों की आवाजाही में कोई बड़ी बाधा नहीं थी, लेकिन अब नए कानूनों और सीमाओं ने चरवाहों की आवाजाही को सीमित कर दिया है। चरागाह कम हो गए हैं और जो बचे हैं वे अत्यधिक इस्तेमाल के कारण खराब हो गए हैं। सूखे के समय जानवरों की मृत्यु बढ़ गई है। इसके अलावा, सड़क और बड़े यातायात ने चरवाहों के नए इलाकों में जाने को कठिन बना दिया है। फिर भी, हम अपनी जीवनशैली को बदलते वक्त के अनुसार ढाल रहे हैं, जानवरों की संख्या कम कर रहे हैं, नए इलाकों में दाखिल होने के लिए लेन-देन कर रहे हैं और सरकार से मदद मांग रहे हैं। हम अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और पर्यावरण के संरक्षण में भी योगदान दे रहे हैं।

व्याख्या:

यह उत्तर उस कालखंड के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय परिवर्तनों को दर्शाता है जो आजादी के बाद चरवाहा समुदायों के जीवन में आए। इसमें चरागाहों की कमी, कानूनी प्रतिबंध, पर्यावरणीय दबाव और सामाजिक संघर्ष शामिल हैं।

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Q2.मान लीजिए कि आपको एक प्रसिद्ध पत्रिका ने उपनिवेशवाद से पहले अफ्रीका में मासाइयों की स्थिति के बारे में एक लेख लिखने के लिए कहा है। वह लेख लिखिए और उसे एक सुंदर शीर्षक दीजिए।

उत्तर:

लेख शीर्षक: 'मासाई समुदाय: उपनिवेशवाद से पहले अफ्रीका के घुमंतू योद्धा' मासाई समुदाय पूर्वी अफ्रीका के प्रमुख चरवाहा और योद्धा समुदायों में से एक था। उपनिवेशवाद से पहले, मासाई लोग घुमंतू जीवनशैली अपनाते थे, जहाँ वे अपने पशुओं के लिए चरागाहों की तलाश में बड़े इलाकों में आवागमन करते थे। उनका सामाजिक ढांचा मुख्य रूप से उम्र और योद्धा परंपराओं पर आधारित था। वे अपने चरागाहों और पशुओं की रक्षा के लिए मजबूत और संगठित थे। मासाई समाज में वरिष्ठ जनों और योद्धाओं का विशेष स्थान था, और उनकी जीवनशैली पर्यावरण के साथ सामंजस्यपूर्ण थी। वे अपने पशुओं को चराने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग करते थे। उपनिवेशवाद के आने से पहले मासाई समुदाय स्वतंत्र और स्वायत्त थे, जिनका जीवन पशुपालन और घुमंतू चरवाहगी पर आधारित था।

व्याख्या:

यह उत्तर मासाई समुदाय की उपनिवेशवाद से पहले की स्थिति का सार प्रस्तुत करता है, जिसमें उनकी सामाजिक संरचना, जीवनशैली और पर्यावरण के साथ संबंध शामिल हैं।

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Q3.चित्र 11 और 13 में चिह्नित चरवाहा समुदायों में से कुछ समुदायों के बारे में और जानकारियाँ इकट्ठा कीजिए।

उत्तर:

इस प्रश्न के उत्तर में छात्र को चित्र 11 और 13 में दिखाए गए चरवाहा समुदायों के बारे में अतिरिक्त जानकारी एकत्र करनी होगी। उदाहरण के लिए, वे समुदाय कहाँ रहते हैं, उनकी जीवनशैली, सामाजिक संरचना, पशुपालन की विधियाँ, और वे किन पर्यावरणीय परिस्थितियों में रहते हैं। छात्र पुस्तक, इंटरनेट या अन्य स्रोतों से इन समुदायों की सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक विशेषताओं के बारे में जानकारी जुटा सकते हैं।

व्याख्या:

यह प्रश्न शोध और जानकारी संग्रहण पर आधारित है, इसलिए उत्तर में विस्तृत और सटीक जानकारी शामिल होनी चाहिए जो चित्रों में दिखाए गए समुदायों को समझने में मदद करे।

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Q4.1. स्पष्ट कीजिए कि घुमंतू समुदायों को बार-बार एक जगह से दूसरी जगह क्यों जाना पड़ता है? इस निरंतर आवागमन से पर्यावरण को क्या लाभ हैं? 2. इस बारे में चर्चा कीजिए कि औपनिवेशिक सरकार ने निम्नलिखित कानून क्यों बनाए? यह भी बताइए कि इन कानूनों से चरवाहों के जीवन पर क्या असर पड़ा : - परती भूमि नियमावली - वन अधिनियम - अपराधी जनजाति अधिनियम - चराई कर 3. मासाई समुदाय के चरागाह उससे क्यों छिन गए? कारण बताएँ। 4. आधुनिक विश्व ने भारत और पूर्वी अफ्रीकी चरवाहा समुदायों के जीवन में जिन परिवर्तनों को जन्म दिया उनमें कई समानताएँ थीं। ऐसे दो परिवर्तनों के बारे में लिखिए जो भारतीय चरवाहों और मासाई गड़िरियों, दोनों के बीच समान रूप से मौजूद थे।

उत्तर:

1. घुमंतू समुदायों को बार-बार एक जगह से दूसरी जगह इसलिए जाना पड़ता है क्योंकि वे अपने पशुओं के लिए चरागाहों की तलाश करते हैं। चरागाहों में घास और पानी की उपलब्धता मौसम और पर्यावरण के अनुसार बदलती रहती है। इसलिए वे अपने पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए आवागमन करते हैं। इस निरंतर आवागमन से पर्यावरण को लाभ होता है क्योंकि चरागाहों पर अत्यधिक दबाव नहीं पड़ता, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहती है और जैव विविधता संरक्षित रहती है। 2. औपनिवेशिक सरकार ने निम्नलिखित कानून बनाए: - परती भूमि नियमावली: भूमि के स्वामित्व और उपयोग को नियंत्रित करने के लिए, जिससे चरवाहों की पारंपरिक आवाजाही सीमित हुई। - वन अधिनियम: जंगलों के संरक्षण के नाम पर चरवाहों को जंगलों से बाहर किया गया, जिससे उनकी चराई की जगहें कम हो गईं। - अपराधी जनजाति अधिनियम: कुछ जनजातियों को अपराधी घोषित कर सामाजिक और आर्थिक रूप से हाशिए पर डाल दिया गया। - चराई कर: चरवाहों से चराई के लिए कर वसूला गया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई। इन कानूनों से चरवाहों के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा, उनकी आज़ादी और पारंपरिक जीवनशैली बाधित हुई। 3. मासाई समुदाय के चरागाह उनसे इसलिए छिन गए क्योंकि औपनिवेशिक सरकारों ने भूमि के स्वामित्व और उपयोग को नियंत्रित करने वाले कानून बनाए, जिससे उनके पारंपरिक चरागाह सीमित हो गए। साथ ही, नए सीमांकन, कृषि विस्तार और वन संरक्षण के कारण उनके चरागाहों पर कब्जा हो गया। 4. दोनों भारतीय और मासाई चरवाहा समुदायों में निम्नलिखित समान परिवर्तन हुए: - चरागाहों की कमी और उनकी गुणवत्ता में गिरावट, जिससे पशुपालन कठिन हो गया। - नई सीमाओं और कानूनों के कारण उनकी पारंपरिक आवाजाही सीमित हो गई, जिससे उनकी जीवनशैली प्रभावित हुई।

व्याख्या:

प्रत्येक भाग का उत्तर सामाजिक, कानूनी और पर्यावरणीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए दिया गया है। यह समझाता है कि कैसे औपनिवेशिक नीतियों ने चरवाहा समुदायों के पारंपरिक जीवन को प्रभावित किया और पर्यावरणीय प्रबंधन में उनकी भूमिका को सीमित किया।

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Q5.कल्पना कीजिए कि यह 1950 का समय है और आप 60 वर्षीय राइका पशुपालक हैं। आप अपनी पोती को बता रहे हैं कि आजादी के बाद से आपके जीवन में क्या बदलाव आए हैं। आप उसे क्या बताएँगे?

उत्तर:

1950 के समय राइका पशुपालक के रूप में, आजादी के बाद जीवन में कई बदलाव आए हैं। पहले चरागाहों की आवाजाही में स्वतंत्रता थी, लेकिन अब नए कानूनों और सीमाओं ने चरवाहों की आवाजाही को सीमित कर दिया है। चरागाह खत्म हो रहे हैं और सूखे के समय जानवरों की मृत्यु बढ़ गई है। चरवाहों को नए इलाकों में जाने के लिए लेन-देन करना पड़ता है और सरकार से मदद मांगनी पड़ती है। सामाजिक स्तर पर अमीर और गरीब चरवाहों में भेद बढ़ा है। इस सबके बावजूद, चरवाहे अपनी जीवनशैली को बदलते वक्त के अनुसार ढाल रहे हैं।

व्याख्या:

आजादी के बाद चरवाहों के जीवन में बदलाव मुख्यतः कानूनों, सीमाओं और चरागाहों के खत्म होने से आए। इससे उनकी पारंपरिक आवाजाही बाधित हुई। सामाजिक संरचना में भी बदलाव आया। चरवाहे नई परिस्थितियों के अनुसार अपने जीवन को अनुकूलित कर रहे हैं।

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Q6.मान लीजिए कि आपको एक प्रसिद्ध पत्रिका ने उपनिवेशवाद से पहले अफ्रीका में मासाइयों की स्थिति के बारे में एक लेख लिखने के लिए कहा है। वह लेख लिखिए और उसे एक सुंदर शीर्षक दीजिए।

उत्तर:

लेख शीर्षक: 'मासाई समुदाय: उपनिवेशवाद से पहले अफ्रीका के घुमंतू चरवाहे' मासाई समुदाय पूर्वी अफ्रीका के प्रमुख घुमंतू चरवाहा थे। वे अपनी पारंपरिक जीवनशैली के अनुसार बड़े पैमाने पर पशुपालन करते थे और चरागाहों की आवाजाही करते थे। उनका सामाजिक ढांचा योद्धाओं और वरिष्ठ जनों पर आधारित था। मासाई अपने चरागाहों पर स्वतंत्र रूप से जाते थे और उनकी जीवनशैली पर्यावरण के अनुकूल थी। उपनिवेशवाद से पहले उनका जीवन प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर था और वे अपने अधिकारों को बनाए रखते थे।

व्याख्या:

यह लेख मासाई समुदाय की पारंपरिक जीवनशैली, सामाजिक संरचना और चरागाहों पर उनकी निर्भरता को दर्शाता है। उपनिवेशवाद से पहले उनका जीवन स्वतंत्र और पर्यावरण के अनुकूल था।

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Q7.चित्र 11 और 13 में चिह्नित चरवाहा समुदायों में से कुछ समुदायों के बारे में और जानकारियाँ इकट्ठा कीजिए।

उत्तर:

चित्र 11 और 13 में दिखाए गए चरवाहा समुदायों के बारे में अतिरिक्त जानकारी इकट्ठा करने के लिए स्थानीय इतिहास, जनजातीय अध्ययन, और क्षेत्रीय संसाधनों का अध्ययन किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, उनके सामाजिक संगठन, आर्थिक गतिविधियाँ, सांस्कृतिक रीति-रिवाज, और पर्यावरण के साथ उनका संबंध। इससे उनकी जीवनशैली और समस्याओं को बेहतर समझा जा सकता है।

व्याख्या:

यह प्रश्न अनुसंधान और जानकारी संग्रहण पर आधारित है। छात्र को चित्रों में दिखाए गए समुदायों के बारे में विस्तृत जानकारी जुटानी होती है।

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Q8.1. स्पष्ट कीजिए कि घुमंतू समुदायों को बार-बार एक जगह से दूसरी जगह क्यों जाना पड़ता है? इस निरंतर आवागमन से पर्यावरण को क्या लाभ हैं? 2. इस बारे में चर्चा कीजिए कि औपनिवेशिक सरकार ने निम्नलिखित कानून क्यों बनाए? यह भी बताइए कि इन कानूनों से चरवाहों के जीवन पर क्या असर पड़ा : - परती भूमि नियमावली - वन अधिनियम - अपराधी जनजाति अधिनियम - चराई कर 3. मासाई समुदाय के चरागाह उससे क्यों छिन गए? कारण बताएँ। 4. आधुनिक विश्व ने भारत और पूर्वी अफ्रीकी चरवाहा समुदायों के जीवन में जिन परिवर्तनों को जन्म दिया उनमें कई समानताएँ थीं। ऐसे दो परिवर्तनों के बारे में लिखिए जो भारतीय चरवाहों और मासाई गड़िरियों, दोनों के बीच समान रूप से मौजूद थे।

उत्तर:

1. घुमंतू समुदायों को बार-बार एक जगह से दूसरी जगह इसलिए जाना पड़ता है क्योंकि वे अपने पशुओं के लिए चरागाहों की तलाश करते हैं। मौसम, जलवायु और चरागाह की उपलब्धता के अनुसार वे स्थान बदलते रहते हैं। इस आवागमन से चरागाहों का अत्यधिक दोहन नहीं होता, जिससे पर्यावरण संतुलित रहता है और भूमि की उर्वरता बनी रहती है। 2. औपनिवेशिक सरकार ने निम्नलिखित कानून बनाए: - परती भूमि नियमावली: चरवाहों की पारंपरिक भूमि उपयोग को सीमित करने के लिए। - वन अधिनियम: जंगलों को संरक्षित करने के लिए, जिससे चरवाहों की आवाजाही बाधित हुई। - अपराधी जनजाति अधिनियम: कुछ जनजातियों को अपराधी घोषित कर उनके अधिकार सीमित किए। - चराई कर: चरागाहों पर चराई के लिए कर लगाना। इन कानूनों से चरवाहों की पारंपरिक जीवनशैली प्रभावित हुई, उनकी आवाजाही सीमित हुई और आर्थिक कठिनाइयाँ बढ़ीं। 3. मासाई समुदाय के चरागाह उनसे इसलिए छिन गए क्योंकि औपनिवेशिक सरकार ने भूमि अधिग्रहण कर ली, नए कानून बनाए और सीमाएं निर्धारित कीं, जिससे मासाई अपनी पारंपरिक चरागाहों तक पहुँच नहीं पा सके। 4. दोनों भारतीय और मासाई चरवाहा समुदायों में समान परिवर्तन थे: - चरागाहों की कमी और उनकी समाप्ति। - आवाजाही पर प्रतिबंध और नई सीमाओं का निर्माण। इन बदलावों ने दोनों समुदायों की पारंपरिक जीवनशैली को प्रभावित किया।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर पाठ्यक्रम में वर्णित ऐतिहासिक और सामाजिक परिवर्तनों के आधार पर दिया गया है। घुमंतू चरवाहों की जीवनशैली, औपनिवेशिक कानूनों के प्रभाव, और चरागाहों की हानि पर विस्तार से चर्चा की गई है।

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