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Chapter 3

🎓 Class 12📖 Antral Bhag 2📖 11 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~17 मिनट
Chapter 2अध्याय 3 / 3

Chapter 3अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

पाठ परिचय

व्याख्या

पाठ परिचय

यह पाठ विश्वनाथ त्रिपाठी की आत्मकथा 'नंगातलाई का गाँव' का एक अंश है, जिसका शीर्षक है 'बिस्कोहर की माटी'। यह आत्मकथात्मक शैली में लिखा गया है और इसमें लेखक ने अपने जीवन के विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए अपने गाँव, माँ, और आसपास के प्राकृतिक परिवेश का सजीव चित्रण प्रस्तुत किया है। पाठ में ग्रामीण जीवन की सरलता, प्राकृतिक सौंदर्य, लोक कथाएँ, और लोक मान्यताओं का समावेश है। लेखक ने गाँव की निर्भरता प्रकृति पर स्पष्ट की है, जहाँ सुविधाएँ शहरों की तरह नहीं होतीं। इसके साथ ही प्राकृतिक विपदाओं जैसे अकाल और बाढ़ का भी उल्लेख है, जो गाँव के जीवन को प्रभावित करती हैं। लेखक ने कमल ककड़ी जैसे दुर्लभ प्राकृतिक संसाधनों का वर्णन किया है, जो अकाल के समय भोजन का साधन होते हैं। इसके अलावा, गाँव की प्राकृतिक संपदा जैसे फूल, पौधे, साँप, बिच्छू आदि का वर्णन भी पाठ में है, जो ग्रामीण जीवन के भय और सौंदर्य दोनों को दर्शाते हैं। लेखक की शैली सहज, नैसर्गिक और अनूठी है, जो यथार्थ और भावनाओं को गहराई से प्रस्तुत करती है।

  • पाठ 'बिस्कोहर की माटी' विश्वनाथ त्रिपाठी की आत्मकथा का अंश है।
  • लेखक ने गाँव, माँ और प्राकृतिक परिवेश का सजीव चित्रण किया है।
  • ग्रामीण जीवन में प्रकृति पर निर्भरता और प्राकृतिक विपदाओं का उल्लेख है।
  • कमल ककड़ी जैसे प्राकृतिक संसाधनों का वर्णन किया गया है।
  • गाँव की प्राकृतिक संपदा और लोक मान्यताओं का समावेश है।
  • लेखक की शैली सहज, नैसर्गिक और अनूठी है।
  • 📌 आत्मकथा: स्वयं के जीवन का वर्णन।
  • 📌 कमल ककड़ी: कमल के तालाब में उगने वाला पौधा, जो अकाल में भोजन के काम आता है।
  • 📌 लोक मान्यताएँ: ग्रामीण समाज की प्राचीन विश्वास प्रणाली।

बिस्कोहर की माटी - प्राकृतिक सौंदर्य और संसाधन

व्याख्या

बिस्कोहर की माटी - प्राकृतिक सौंदर्य और संसाधन

इस अनुभाग में लेखक ने अपने गाँव बिस्कोहर के प्राकृतिक सौंदर्य और संसाधनों का विस्तार से वर्णन किया है। पूर्व टोले के पोखर में कमल फूलते थे, जिनके पत्ते पर भोजन परोसा जाता था। कमल के पत्ते को 'पुरुङन' और कमल के तने को 'भसीण' कहा जाता था। अकाल के समय लोग कमल तालाब से कमल ककड़ी (भसीण) खोदकर लादकर ले जाते थे, जो सामान्यतः गाँव में नहीं खाई जाती। लेखक ने जलपुष्प 'कोइयाँ' का भी वर्णन किया है, जिसे कुमुद या कोका-बेली भी कहा जाता है। यह शरद ऋतु में गड्ढों में खिलता है और इसकी गंध अत्यंत मनमोहक होती है। तालाबों में सिंघाड़ा आता है, जिसके फूल उजले और सुगंधित होते हैं। हरसिंगार के फूलों का भी उल्लेख है, जो पितृपक्ष में विशेष महत्व रखते हैं। लेखक ने गाँव की वनस्पतियों, जल के रूपों और मिट्टी के रंगों का जिक्र करते हुए बताया कि बच्चे इन्हें छूते, पहचानते और उनसे संवाद करते थे। माँ और बच्चे के बीच के संबंध को भी प्राकृतिक और भावनात्मक रूप में दर्शाया गया है। बतख की माँ की ममता का उदाहरण देकर लेखक ने माँ के प्रेम की गहराई को समझाया है।

  • पूर्व टोले के पोखर में कमल के फूल खिलते थे।
  • कमल के पत्ते को 'पुरुङन' और तने को 'भसीण' कहा जाता था।
  • अकाल में कमल ककड़ी (भसीण) भोजन के लिए उपयोग होती थी।
  • कोइयाँ (कुमुद) जलपुष्प है जो शरद ऋतु में खिलता है।
  • सिंघाड़े के फूल उजले और सुगंधित होते हैं।
  • हरसिंगार के फूलों का पितृपक्ष में विशेष महत्व है।
  • गाँव की वनस्पतियाँ, जल और मिट्टी का जीवंत वर्णन।
  • माँ और बच्चे के प्रेम को प्राकृतिक रूप में प्रस्तुत किया गया।

गाँव के जीव-जंतु और साँप

व्याख्या

गाँव के जीव-जंतु और साँप

इस भाग में लेखक ने गाँव के जीव-जंतु विशेषकर साँपों और बिच्छुओं का विस्तृत वर्णन किया है। गाँव के घास-फूस से भरे मेड़ों, मैदानों और तालाब के किनारों पर विभिन्न प्रकार के साँप पाए जाते थे। डोड़हा और मजगिदवा साँप विपहीन माने जाते थे, डोड़हा को साँपों मे

अभ्यास प्रश्नChapter 3

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.‘पुरइन’ किसे कहते हैं
A.पुरोहित को
B.कमल-पत्र को
C.कमल-ककड़ी को
D.कमल के बीज को

उत्तर:

कमल-पत्र को

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Q2.'कथरी' शब्द का क्या अर्थ है
A.चाँद
B.फूल का नाम
C.कच्चा आम
D.बिछौना

उत्तर:

बिछौना

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Q3.कौन सा फूल सूँघकर बर्रे तत्तैया का डंक झड़ जाता है
A.गुड़हल का
B.नीम का
C.बेर का
D.जूही का

उत्तर:

बेर का

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Q4.बिसनाथ को अपनी माँ के पेट का रंग कैसा लगता था
A.दूध के जैसा
B.हल्दी मिलाकर बनाई पूड़ी जैसा
C.वनस्पतियों और फसलों जैसा
D.तालाब की चिकनी मिट्टी जैसा

उत्तर:

हल्दी मिलाकर बनाई पूड़ी जैसा

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Q5.लेखक विश्वनाथ त्रिपाठी की इस रचना का मुख्य आधार है
A.प्रदूषण से मुक्ति के उपाय
B.ग्रामीण भोजन का वर्णन
C.प्राकृतिक सौंदर्य का चित्रण
D.आत्मपरकता के गुण

उत्तर:

प्राकृतिक सौंदर्य का चित्रण

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Q6.बिस्कोहर की माटी की रचना शैली है
A.आत्मकथात्मक
B.व्यंग्यात्मक
C.रचनापरक
D.निबंधात्मक

उत्तर:

आत्मकथात्मक

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Q7.1. मालवा में जब सब जगह बरसात की झाड़ी लगी रहती है तब मालवा के जनजीवन पर इसका क्या असर पड़ता है?

उत्तर:

मालवा में जब सब जगह बरसात की झाड़ी लगी रहती है, तो वहाँ की धरती समृद्ध हो जाती है। इससे फसलें अच्छी होती हैं, जल स्रोत भर जाते हैं, और जनजीवन में खुशहाली आती है। लोगों का जीवन स्तर सुधरता है और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।

व्याख्या:

बरसात की झाड़ी से माटी में नमी बनी रहती है, जिससे फसलें अच्छी होती हैं और जल स्रोत भर जाते हैं। इससे जनजीवन में समृद्धि आती है।

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Q8.2. अब मालवा में वैसा पानी नहीं गिरता जैसा गिरा करता था। उसके क्या कारण हैं?

उत्तर:

मालवा में अब वैसा पानी नहीं गिरता क्योंकि जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, और पर्यावरणीय असंतुलन के कारण वर्षा में कमी आई है। साथ ही, भूमि के दोहन और जल संरक्षण के अभाव से भी पानी की कमी हुई है।

व्याख्या:

वनों की कटाई से वर्षा चक्र प्रभावित होता है, जिससे बारिश कम होती है। जल संरक्षण के अभाव में पानी का संचय नहीं हो पाता। ये सभी कारण मिलकर पानी की कमी का कारण हैं।

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