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Chapter 2

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Business Organisation & Management (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 1अध्याय 3 / 3

Chapter 2अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

2.1 साझेदारी फर्म का अर्थ

परिभाषा

2.1 साझेदारी फर्म का अर्थ

साझेदारी फर्म व्यापार संगठन का एक महत्वपूर्ण रूप है जिसमें दो या दो से अधिक व्यक्ति किसी व्यापार को मिलकर चलाते हैं और लाभ या हानि को आपस में बांटते हैं। साझेदारी फर्म का निर्माण साझेदारी अधिनियम, 1932 के अंतर्गत होता है। साझेदारी फर्म का उद्देश्य पूंजी, कौशल और संसाधनों को एकत्रित कर व्यापार करना होता है। साझेदारी में भागीदारों के बीच स्पष्ट समझौता (साझेदारी अनुबंध) होता है, जिसमें उनके अधिकार, कर्तव्य, लाभ-हानि का वितरण आदि निर्धारित होते हैं। साझेदारी फर्म का पंजीकरण आवश्यक नहीं है, परंतु पंजीकरण से कानूनी लाभ मिलते हैं। साझेदारी फर्म का अस्तित्व भागीदारों पर निर्भर करता है, अर्थात् किसी भागीदार की मृत्यु, दिवालियापन या त्यागपत्र से फर्म का अस्तित्व समाप्त हो सकता है।

  • साझेदारी फर्म दो या दो से अधिक व्यक्तियों द्वारा बनाई जाती है।
  • साझेदारी अधिनियम, 1932 के अनुसार साझेदारी का गठन होता है।
  • लाभ और हानि का वितरण साझेदारों के बीच पूर्व निर्धारित अनुबंध के अनुसार होता है।
  • साझेदारी फर्म का पंजीकरण वैकल्पिक है, परंतु पंजीकरण से कानूनी लाभ मिलते हैं।
  • फर्म का अस्तित्व भागीदारों के अस्तित्व पर निर्भर करता है।
  • 📌 साझेदारी: दो या दो से अधिक व्यक्तियों द्वारा एक व्यापार को लाभ के उद्देश्य से मिलकर चलाना।
  • 📌 साझेदारी फर्म: साझेदारों द्वारा संचालित व्यापारिक संस्था।

2.2 साझेदारी फर्म की विशेषताएँ

अवधारणा

2.2 साझेदारी फर्म की विशेषताएँ

साझेदारी फर्म की निम्नलिखित प्रमुख विशेषताएँ होती हैं: 1. न्यूनतम दो और अधिकतम 10 (बैंकिंग व्यवसाय) या 20 (अन्य व्यवसाय) सदस्य हो सकते हैं। 2. साझेदारी अनुबंध के आधार पर फर्म का संचालन होता है, जिसमें लाभ-हानि का वितरण, पूंजी का योगदान, प्रबंधन आदि का उल्लेख होता है। 3. साझेदारी फर्म का पंजीकरण आवश्यक नहीं है, परंतु पंजीकरण से कानूनी अधिकार मिलते हैं। 4. साझेदारी फर्म का अस्तित्व साझेदारों के अस्तित्व पर निर्भर करता है। किसी साझेदार की मृत्यु, दिवालियापन या त्यागपत्र से फर्म का विघटन हो सकता है। 5. साझेदारों की देनदारी असीमित होती है, अर्थात् फर्म के ऋणों की पूर्ति के लिए साझेदारों की व्यक्तिगत संपत्ति का उपयोग किया जा सकता है। 6. फर्म का प्रबंधन साझेदारों द्वारा सामूहिक रूप से किया जाता है। 7. साझेदारी फर्म का कोई पृथक कानूनी अस्तित्व नहीं होता, अर्थात् फर्म और साझेदारों को एक ही इकाई माना जाता है।

  • साझेदारी में न्यूनतम दो और अधिकतम 10 या 20 सदस्य हो सकते हैं।
  • साझेदारी अनुबंध के अनुसार फर्म का संचालन होता है।
  • फर्म का पंजीकरण आवश्यक नहीं, परंतु लाभकारी है।
  • साझेदारों की देनदारी असीमित होती है।
  • फर्म का अस्तित्व साझेदारों पर निर्भर करता है।
  • फर्म का कोई पृथक कानूनी अस्तित्व नहीं होता।
  • 📌 असीमित देनदारी: साझेदारों की व्यक्तिगत संपत्ति भी फर्म के ऋण चुकाने के लिए जिम्मेदार होती है।
  • 📌 साझेदारी अनुबंध: साझेदारों के बीच लिखित या मौखिक समझौता।

2.3 साझेदारी अनुबंध

व्याख्या

2.3 साझेदारी अनुबंध

साझेदारी अनुबंध साझेदारों के बीच किया गया एक समझौता है, जिसमें साझेदारी फर्म के संचालन से संबंधित सभी नियम, शर्तें, अधिकार और कर्तव्य स्पष्ट रूप से लिखे होते हैं। साझेदारी अनुबंध लिखित या मौखिक हो सकता है, परंतु लिखित अनुबंध अधिक सुरक्षित और प्रमाणिक

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