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वन एवं वन्य जीव संसाधन

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वन एवं वन्य जीव संसाधनअध्ययन नोट्स

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वन और वन्य जीव संसाधन का परिचय

व्याख्या

वन और वन्य जीव संसाधन का परिचय

वन और वन्य जीव संसाधन हमारे पर्यावरण के अत्यंत महत्वपूर्ण घटक हैं। भारत में वन केवल पेड़ों का समूह नहीं हैं, बल्कि वे अनेक जीव-जंतुओं का आवास भी हैं। वन जल संरक्षण, जलवायु नियंत्रण, मृदा संरक्षण तथा आर्थिक संसाधन के रूप में भी कार्य करते हैं। यह पारिस्थितिकी तंत्र के प्राथमिक उत्पादक हैं जिन पर अन्य सभी जीव निर्भर करते हैं। वन हमें लकड़ी, फल, औषधियाँ, गोंद, राल, जड़ी-बूटियाँ आदि प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त, वन वायु को शुद्ध करते हैं, जल चक्र को नियंत्रित करते हैं, और मृदा कटाव को रोकते हैं। भारत जैव विविधता के संदर्भ में विश्व के सबसे समृद्ध देशों में से एक है, जहाँ विश्व की लगभग 8 प्रतिशत जैव उपजातियाँ पाई जाती हैं। वनस्पतिजात और प्राणिजात की यह विविधता हमारे दैनिक जीवन में गहराई से जुड़ी है। परंतु मानव गतिविधियों के कारण इन संसाधनों पर दबाव बढ़ा है, जिससे इनके संरक्षण की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।

  • वन केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि जीव-जंतुओं का आवास हैं।
  • वन जल संरक्षण, जलवायु नियंत्रण और मृदा संरक्षण में मदद करते हैं।
  • भारत विश्व की जैव विविधता में 8 प्रतिशत उपजातियाँ समेटे हुए है।
  • वन हमें लकड़ी, फल, औषधियाँ, गोंद, राल, जड़ी-बूटियाँ प्रदान करते हैं।
  • वन पारिस्थितिकी तंत्र के प्राथमिक उत्पादक हैं।
  • मानव गतिविधियों से वन संसाधनों पर दबाव बढ़ा है।
  • 📌 वन्य जीव संसाधन: वन में रहने वाले जीव-जंतु और उनके आवास।
  • 📌 जैव विविधता: विभिन्न प्रकार के जीवों और पौधों की विविधता।
  • 📌 पारिस्थितिकी तंत्र: जीवों और उनके पर्यावरण के बीच जटिल संबंध।

भारत में वनस्पतिजात और प्राणिजात

व्याख्या

भारत में वनस्पतिजात और प्राणिजात

भारत जैव विविधता के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों में से एक है। यहाँ सूक्ष्म जीवाणुओं से लेकर विशालकाय जीवों तक करोड़ों जीवधारियों की उपस्थिति है। भारत में विश्व की लगभग 8 प्रतिशत जैव उपजातियाँ पाई जाती हैं, जो अभी खोजी जाने वाली उपजातियों से भी कई गुना अधिक हैं। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग प्रकार के वनस्पतिजात और प्राणिजात पाए जाते हैं जो स्थानीय जलवायु, भूगोल और मानव गतिविधियों के अनुसार भिन्न होते हैं। वनस्पतिजात में विभिन्न प्रकार के पेड़, झाड़ियाँ, घास आदि शामिल हैं, जबकि प्राणिजात में पक्षी, स्तनधारी, सरीसृप, कीट आदि आते हैं। ये जैव विविधताएँ पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वन और वन्य जीव संसाधनों का संरक्षण इसलिए आवश्यक है ताकि ये जैव विविधताएँ बनी रहें और मानव जीवन के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध होते रहें।

  • भारत में विश्व की लगभग 8 प्रतिशत जैव उपजातियाँ पाई जाती हैं।
  • वनस्पतिजात में पेड़, झाड़ियाँ, घास आदि शामिल हैं।
  • प्राणिजात में पक्षी, स्तनधारी, सरीसृप, कीट आदि आते हैं।
  • जैव विविधता पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए आवश्यक है।
  • वन्य जीव और वनस्पतियाँ स्थानीय जलवायु और भूगोल के अनुसार भिन्न होती हैं।
  • संरक्षण से जैव विविधता बनी रहती है और संसाधन उपलब्ध रहते हैं।
  • 📌 जैव उपजाति: किसी क्षेत्र में पाए जाने वाले जीवों और पौधों की विभिन्न जातियाँ।
  • 📌 वनस्पतिजात: वन में पाए जाने वाले पौधे।
  • 📌 प्राणिजात: वन में पाए जाने वाले जीव-जंतु।

भारत में वन और वन्य जीवन का संरक्षण

व्याख्या

भारत में वन और वन्य जीवन का संरक्षण

भारत में वन और वन्य जीवन के तेज़ी से हो रहे ह्रास के कारण संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है। 1960 और 1970 के दशकों में राष्ट्रीय वन्यजीवन सुरक्षा कार्यक्रम की शुरुआत हुई। 1972 में भारतीय वन्यजीवन (रक्षण) अधिनियम लागू किया गया, जिसमें वन्य जीवों के आवास