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Chapter 18

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Micro Economic Theory (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 17अध्याय 17 / 17

Chapter 18अध्ययन नोट्स

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18.1 परिचय

व्याख्या

18.1 परिचय

इस अनुभाग में व्याज के प्रतिष्ठित सिद्धांत और तरलता पसंदगी सिद्धांत का परिचय दिया गया है। यह समझाया गया है कि अर्थशास्त्र में पूंजी के उपयोग की लागत को व्याज कहा जाता है। व्याज वह प्रतिफल है जो पूंजी के उपयोग के लिए दिया जाता है। यह अध्याय दो प्रमुख सिद्धांतों—क्लासिकल (प्रतिष्ठित) और केन्स के तरलता पसंदगी सिद्धांत—का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। क्लासिकल सिद्धांत के अनुसार, व्याज की दर बचत और निवेश के बीच संतुलन स्थापित करती है, जबकि केन्स के अनुसार, व्याज की दर धन की मांग और आपूर्ति द्वारा निर्धारित होती है। इस अध्याय में दोनों सिद्धांतों की मुख्य विशेषताओं, उनके तर्कों, समीकरणों और आलोचनाओं का विस्तार से वर्णन किया गया है।

  • व्याज पूंजी के उपयोग की लागत है।
  • क्लासिकल सिद्धांत में व्याज की दर बचत और निवेश से निर्धारित होती है।
  • केन्स के अनुसार, व्याज की दर तरलता पसंदगी और धन की आपूर्ति से निर्धारित होती है।
  • दोनों सिद्धांतों के बीच तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा।
  • अर्थशास्त्र में व्याज की भूमिका महत्वपूर्ण है।
  • 📌 व्याज: पूंजी के उपयोग की लागत।
  • 📌 प्रतिष्ठित सिद्धांत: क्लासिकल अर्थशास्त्रियों द्वारा प्रतिपादित व्याज निर्धारण का सिद्धांत।
  • 📌 तरलता पसंदगी सिद्धांत: केन्स द्वारा प्रतिपादित, जिसमें व्याज की दर धन की मांग और आपूर्ति से निर्धारित होती है।

18.2 व्याज का अर्थ और महत्व

परिभाषा

18.2 व्याज का अर्थ और महत्व

इस अनुभाग में व्याज की परिभाषा, अर्थ और अर्थव्यवस्था में उसकी भूमिका को स्पष्ट किया गया है। व्याज वह प्रतिफल है जो पूंजी के उपयोग के लिए दिया या प्राप्त किया जाता है। यह पूंजी के समय मूल्य को दर्शाता है। पूंजी का उपयोग करने वाले व्यक्ति को उसके लिए भुगतान करना पड़ता है, जिसे व्याज कहा जाता है। व्याज की दर अर्थव्यवस्था में बचत, निवेश, पूंजी निर्माण, और आय वितरण को प्रभावित करती है। उच्च व्याज दरें बचत को प्रोत्साहित करती हैं, जबकि निम्न दरें निवेश को बढ़ावा देती हैं।

  • व्याज पूंजी के उपयोग की लागत है।
  • यह पूंजी के समय मूल्य को दर्शाता है।
  • व्याज की दर बचत और निवेश को प्रभावित करती है।
  • आर्थिक विकास में व्याज की महत्वपूर्ण भूमिका है।
  • आय वितरण में भी व्याज का स्थान है।
  • 📌 मूलधन: वह राशि जिस पर व्याज दिया जाता है।
  • 📌 दर: प्रति वर्ष व्याज की प्रतिशत दर।

18.3 व्याज के प्रतिष्ठित (क्लासिकल) सिद्धांत

अवधारणा

18.3 व्याज के प्रतिष्ठित (क्लासिकल) सिद्धांत

इस अनुभाग में क्लासिकल या प्रतिष्ठित सिद्धांत का विस्तार से वर्णन किया गया है। क्लासिकल अर्थशास्त्रियों के अनुसार, व्याज की दर बचत और निवेश के बीच संतुलन से निर्धारित होती है। जब बचत अधिक होती है, तो पूंजी की आपूर्ति बढ़ती है और व्याज दर गिरती है। जब