Chapter 16
Chapter 16 — अध्ययन नोट्स
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दुष्यंत कुमार का परिचय
व्याख्यादुष्यंत कुमार का परिचय
दुष्यंत कुमार हिंदी साहित्य के एक प्रमुख कवि थे, जिनका जन्म सन् 1933 में उत्तर प्रदेश के राजपुर नवादा गाँव में हुआ था। उनका साहित्यिक जीवन इलाहाबाद में आरंभ हुआ, जहाँ वे साहित्यिक संस्था परिमल की गोष्ठियों में सक्रिय रूप से भाग लेते थे। इसके अतिरिक्त वे 'नए पत्ते' जैसे महत्वपूर्ण पत्र के साथ भी जुड़े रहे। दुष्यंत कुमार ने आकाशवाणी और मध्यप्रदेश के राजभाषा विभाग में भी कार्य किया। उनकी मृत्यु सन् 1975 में हुई, लेकिन अल्पायु जीवन के बावजूद उनकी साहित्यिक उपलब्धियाँ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। दुष्यंत कुमार ने हिंदी गजल को एक नई पहचान दी और इसे लोकप्रिय बनाने में उनका विशेष योगदान है। उनकी प्रमुख काव्य रचनाओं में 'सूर्य का स्वागत', 'आवाज़ों के घेरे', 'साये में धूप', 'जलते हुए वन का वसंत' शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने गीतिनाट्य 'एक कंठ विषपायी' और उपन्यास 'छोटे-छोटे सवाल', 'आँगन में एक वृक्ष' तथा 'दोहरी जिंदगी' भी लिखे। दुष्यंत कुमार की गजलें साहित्यिक और राजनीतिक मंचों पर लोकोक्तियों की तरह प्रचलित हैं। उनकी रचनाओं में सामाजिक और राजनीतिक चेतना स्पष्ट रूप से झलकती है।
- दुष्यंत कुमार का जन्म 1933 में उत्तर प्रदेश के राजपुर नवादा गाँव में हुआ।
- इलाहाबाद में साहित्यिक संस्था परिमल की गोष्ठियों में सक्रिय भागीदारी।
- प्रमुख काव्य संग्रह: 'सूर्य का स्वागत', 'साये में धूप' आदि।
- गजल विधा को हिंदी में प्रतिष्ठित करने में दुष्यंत कुमार का विशेष योगदान।
- आकाशवाणी और मध्यप्रदेश राजभाषा विभाग में कार्य।
- अल्पायु में निधन (1975) के बावजूद साहित्यिक योगदान अमूल्य।
- 📌 गजल: एक काव्य विधा जिसमें स्वतंत्र शेर होते हैं, जिनका तुक और मिजाज एक समान होता है।
- 📌 गीतिनाट्य: ऐसा नाटक जिसमें गीतों का समावेश होता है।
- 📌 परिमल: इलाहाबाद की एक साहित्यिक संस्था।
गजल की विशेषताएँ और दुष्यंत कुमार की गजल
अवधारणागजल की विशेषताएँ और दुष्यंत कुमार की गजल
गजल एक पारंपरिक उर्दू-काव्य विधा है, जिसमें प्रत्येक शेर स्वतंत्र होता है और अपने आप में पूर्ण अर्थ रखता है। गजल में तुक और मिजाज का विशेष ध्यान रखा जाता है। दुष्यंत कुमार की गजलें हिंदी साहित्य में गजल की लोकप्रियता बढ़ाने में सहायक रहीं। उनकी गजलें सामाजिक और राजनीतिक विषयों को सरल और प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत करती हैं। इस गजल में शीर्षक नहीं होता क्योंकि गजल के प्रत्येक शेर का अपना स्वतंत्र महत्व होता है। दुष्यंत कुमार की गजल 'साये में धूप' में तुकबंदी की व्यवस्था इस प्रकार है कि पहले शेर की दोनों पंक्तियों में तुक मिलता है, और उसके बाद के सभी शेरों की दूसरी पंक्ति में वही तुक दोहराया जाता है। इस गजल का केंद्रीय भाव राजनीतिक और सामाजिक असंतोष तथा बदलाव की चाह को दर्शाता है। इस प्रकार यह गजल हिंदी गजल की एक उत्कृष्ट मिसाल है।
- गजल में प्रत्येक शेर स्वतंत्र और पूर्ण होता है।
- तुक और मिजाज गजल की एकता बनाए रखते हैं।
- दुष्यंत कुमार की गजलें सामाजिक-राजनीतिक विषयों पर केंद्रित हैं।
- गजल में शीर्षक का अभाव होता है।
- 'साये में धूप' गजल में तुकबंदी का विशेष ध्यान रखा गया है।
- गजल का केंद्रीय भाव बदलाव और विकल्प की तलाश है।
- 📌 तुक: कविता की पंक्तियों के अंत में समान ध्वनि।
- 📌 मिजाज: कविता की भावात्मक और विषयगत एकरूपता।
- 📌 तुकबंदी: कविता में तुकों का व्यवस्थित प्रयोग।
गजल: 'साये में धूप' के शेरों का विश्लेषण
व्याख्यागजल: 'साये में धूप' के शेरों का विश्लेषण
दुष्यंत कुमार की गजल 'साये में धूप' के शेरों में सामाजिक और राजनीतिक असंतोष की गूंज सुनाई देती है। पहला शेर 'कहाँ तो तय था चिरागाँ हरेक घर के लिए, कहाँ चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए।' यह बताता है कि पहले उम्मीद थी कि हर घर में उजाला होगा, लेकिन अब पूर
अभ्यास प्रश्न — Chapter 16
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.कवि ने चंपा को क्या सलाह दी?
उत्तर:
पढ़ने-लिखने की
Q2.चंपा की बातें सुनकर कवि क्या करता था?
उत्तर:
हँसता था
Q3.कवि के अनुसार गाँधी जी की क्या इच्छा थी?
उत्तर:
सब का साक्षर होना
Q4.कवि को तंग करने के लिए चंपा क्या छुपा देती थी?
उत्तर:
कलम
Q5.‘हारे-गाढ़े काम सरेगा’-का क्या आशय है?
उत्तर:
कठिनाई के समय काम आना
Q6.‘काले-काले’ में कौन सा अलंकार है?
उत्तर:
पुनरूक्ति प्रकाश
Q7.चंपा के पिता सुंदर कौन थे?
उत्तर:
ग्वाला
Q8.प्रश्न - जनसंचार माध्यमों में नौकरी के लिए रिक्त स्थान की जानकारी किसके द्वारा प्राप्त होती है?
उत्तर:
(क) विज्ञापन
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