Chapter 13
Chapter 13 — अध्ययन नोट्स
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प्रस्तावना
व्याख्याप्रस्तावना
इस पाठ्यक्रम की प्रस्तावना में भारतीय राजनीतिक चिंतन की प्रमुख धाराओं का संक्षिप्त परिचय दिया गया है। इसमें बताया गया है कि पाठ्यक्रम में प्राचीन भारतीय विचारकों (जैसे कौटिल्य, मनु, शुक्र) से लेकर आधुनिक काल के प्रमुख राजनीतिक विचारकों (जैसे राजा राममोहन रॉय, दयानंद सरस्वती, विवेकानंद, बाल गंगाधर तिलक, गोपालकृष्ण गोखले, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, एम. एन. रॉय, जयप्रकाश नारायण) के विचारों का अध्ययन किया जाएगा। प्रस्तावना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भारतीय चिंतनधारा सतत प्रवाही (निरंतर बहती हुई) एवं प्रभावी रही है। भारतीय राजनीतिक चिंतन व्यापक भारतीय मनीषा (बुद्धि, विवेक) का अनुगामी है। इसकी मूल प्रकृति केवल बौद्धिक (बुद्धि-विलास) नहीं, बल्कि यह गहन अनुभूति से उपजा अस्तित्व-कारण है, जो व्यक्ति को उसकी पहचान देता है। भारतीय चिंतन मूलतः आध्यात्मिक और नैतिक है। इसमें 'श्रेयस' (श्रेष्ठता, कल्याण) की साधना और संधान (खोज) को महत्व दिया गया है, जो कालातीत (समय से परे) और सनातन (शाश्वत) है। भारतीय राजनीतिक चिंतन में आध्यात्मिकता और धर्म का सतत समावेश मिलता है। इसमें यह प्रश्न महत्त्वपूर्ण है कि 'व्यक्ति क्या है' और 'क्या होना चाहिए'। इन प्रश्नों के उत्तर ही राजनीतिक चिंतन की दिशा निर्धारित करते हैं। पुनरुत्थानवादी (Revivalist) और राष्ट्रवादी (Nationalist) संकल्पनाएँ भी इसी से जुड़ी हैं। लोकमान्य तिलक से लेकर महात्मा गांधी तक, धर्म और अध्यात्म राजनीतिक चिंतन में निरंतर विद्यमान रहे हैं। भारत के उदारवादी विचारक भी विशुद्ध व्यक्तिवादी नहीं, बल्कि समष्टिवादी (समाज-केन्द्रित) दृष्टिकोण रखते हैं। प्रस्तावना में यह विश्वास प्रकट किया गया है कि इन इकाइयों के अध्ययन से विद्यार्थी भारतीय भावधारा का अनुभव कर सकेंगे और भारतीयता के मूल स्वर एवं संदर्भों को समझ पाएंगे। यह इकाइयाँ विद्यार्थियों को वैचारिक संदर्भ, पृष्ठभूमि और नियामक (नियंत्रक) परिप्रेक्ष्य से परिचित कराएँगी।
- भारतीय राजनीतिक चिंतन की प्रमुख धाराओं का परिचय
- प्राचीन से आधुनिक विचारकों का समावेश
- भारतीय चिंतन की मूल प्रकृति आध्यात्मिक और नैतिक
- राजनीतिक चिंतन में धर्म और अध्यात्म का समावेश
- व्यक्ति और समाज के संबंधों की विवेचना
- 📌 भारतीय चिंतन: भारतीय मनीषा द्वारा विकसित वह विचारधारा, जो आध्यात्मिकता, नैतिकता और समाज के कल्याण पर आधारित है।
- 📌 श्रेयस: श्रेष्ठता या परम कल्याण की खोज।
- 📌 समष्टिवादी: समाज-केन्द्रित दृष्टिकोण, जिसमें व्यक्ति का कल्याण समाज के कल्याण से जुड़ा होता है।
अनुक्रमणिका
सारांशअनुक्रमणिका
अनुक्रमणिका में पाठ्यक्रम की सभी इकाइयों की सूची दी गई है। इसमें कुल 16 इकाइयाँ हैं, जिनमें प्राचीन भारतीय चिंतन, मनु, कौटिल्य, शुक्र, सामाजिक-सांस्कृतिक पुनरुत्थान एवं राष्ट्रवाद, राजा राममोहन रॉय, महर्षि दयानंद सरस्वती, गोपाल कृष्ण गोखले, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, विवेकानंद, सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तन के विविध वैचारिक आधार, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, भीमराव अंबेडकर, मानवेंद्र नाथ रॉय (एम. एन. रॉय), और जयप्रकाश नारायण के विचारों का अध्ययन किया जाएगा। प्रत्येक इकाई में संबंधित विचारक के जीवन, उनके राजनीतिक, सामाजिक और दार्शनिक विचारों का विश्लेषण किया जाएगा। यह अनुक्रमणिका विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की संरचना और अध्ययन के क्रम को समझने में सहायता करती है।
- कुल 16 इकाइयाँ
- प्राचीन से आधुनिक भारतीय राजनीतिक विचारकों का समावेश
- प्रत्येक इकाई में एक प्रमुख विचारक या वैचारिक धारा
- 📌 अनुक्रमणिका: पाठ्यक्रम की इकाइयों या अध्यायों की सूची।
इकाई-1: प्राचीन भारतीय चिंतन : प्रमुख वैचारिक आयाम
अवधारणाइकाई-1: प्राचीन भारतीय चिंतन : प्रमुख वैचारिक आयाम
इकाई-1 में प्राचीन भारतीय चिंतन के प्रमुख वैचारिक आयामों का अध्ययन किया जाएगा। इस इकाई की रूपरेखा में निम्नलिखित उपविषय शामिल हैं: उद्देश्य, प्रस्तावना, 'प्राचीन' क्या?, भारतीयता का अभिप्राय, भारतीय चिंतन के प्रमुख आयाम (धर्म और अध्यात्म, भारतीय दर्श
SLM - Indian Political Thinkers (Hindi) के सभी 16 अध्याय
Indian Political Thinkers · Vardhman Mahaveer Open University
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