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Chapter 12

🎓 Class 10📖 Kshitij-2📖 9 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~14 मिनट
Chapter 11अध्याय 12 / 12

Chapter 12अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

यशपाल – परिचय

व्याख्या

यशपाल – परिचय

यशपाल हिंदी साहित्य के प्रमुख लेखक और विचारक थे, जिनका जन्म 1903 में हुआ था। वे सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी लेखनी के लिए प्रसिद्ध हैं। यशपाल का असली नाम शिवप्रसाद शर्मा था, परंतु वे अपने साहित्यिक नाम से जाने जाते हैं। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सक्रिय भागीदारी निभाई और अपने लेखन के माध्यम से समाज में व्याप्त अन्याय, असमानता और कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। यशपाल की रचनाएँ सामाजिक यथार्थ को उजागर करती हैं और उनमें मानवीय संवेदनाओं की गहराई देखने को मिलती है। वे समाज सुधार के प्रबल समर्थक थे और उनकी लेखनी में सामाजिक न्याय, समानता और मानवता की भावना प्रमुख रूप से झलकती है।

  • यशपाल का जन्म 1903 में हुआ।
  • वे हिंदी साहित्य के प्रमुख लेखक और विचारक थे।
  • उनका असली नाम शिवप्रसाद शर्मा था।
  • वे सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय थे।
  • उनकी रचनाएँ समाज सुधार और समानता पर केंद्रित हैं।
  • वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी सक्रिय रहे।
  • 📌 सामाजिक न्याय: समाज में सभी को समान अधिकार और अवसर मिलना।
  • 📌 जातिवाद: समाज में जाति के आधार पर भेदभाव।
  • 📌 स्वतंत्रता संग्राम: भारत की आज़ादी के लिए संघर्ष।

लखनवी अंदाज़ की विशेषताएँ

व्याख्या

लखनवी अंदाज़ की विशेषताएँ

लखनवी अंदाज़ हिंदी भाषा की एक विशिष्ट शैली है जो लखनऊ क्षेत्र की सांस्कृतिक और भाषाई परंपराओं से प्रभावित है। यह अंदाज़ अपनी मिठास, सहजता और भावपूर्ण अभिव्यक्ति के लिए जाना जाता है। लखनवी भाषा में शब्दों का चयन, वाक्य विन्यास और भाव प्रकट करने का तरीका बहुत ही सरल और प्रभावशाली होता है। इसमें शिष्टाचार और विनम्रता की झलक मिलती है, जो संवाद को सौम्य और मनमोहक बनाता है। यशपाल ने अपनी रचनाओं में इसी लखनवी अंदाज़ का प्रयोग किया है, जिससे उनकी भाषा में एक खास मिठास और आकर्षण आता है। यह अंदाज़ न केवल भाषा की सुंदरता को बढ़ाता है, बल्कि पाठक को भावनात्मक रूप से भी जोड़ता है।

  • लखनवी अंदाज़ लखनऊ की सांस्कृतिक भाषा शैली है।
  • इसमें भाषा की मिठास और सहजता प्रमुख है।
  • शब्दों का चयन और वाक्य विन्यास सरल और प्रभावशाली होता है।
  • यह शैली शिष्टाचार और विनम्रता से भरपूर होती है।
  • यशपाल ने अपनी रचनाओं में इस अंदाज़ का सफल प्रयोग किया।
  • यह अंदाज़ पाठक को भावनात्मक रूप से जोड़ता है।
  • 📌 लखनवी अंदाज़: लखनऊ क्षेत्र की भाषा शैली, जो सरल, मधुर और भावपूर्ण होती है।
  • 📌 शब्द विन्यास: शब्दों को वाक्य में व्यवस्थित करने का तरीका।

लेखक की दृष्टि में ‘सभ्यता’ और ‘संस्कृति’ की समझ

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लेखक की दृष्टि में ‘सभ्यता’ और ‘संस्कृति’ की समझ

यशपाल के अनुसार, ‘सभ्यता’ और ‘संस्कृति’ की अवधारणाओं को सही ढंग से समझना आज भी एक चुनौती है। वे मानते हैं कि सभ्यता का तात्पर्य तकनीकी, वैज्ञानिक और भौतिक उन्नति से है, जबकि संस्कृति में मानवीय मूल्यों, परंपराओं, और जीवन के नैतिक पहलुओं का समावेश होत

अभ्यास प्रश्नChapter 12

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.'संतृष्ण आँखों से देखना’ से क्या तात्पर्य है ?
A.भर जाने वाली नज़रों से देखना
B.ललचाई नज़रों से देखना
C.आँखें बंद कर के देखना
D.दूसरों की आँखों से देखना

उत्तर:

ललचाई नज़रों से देखना

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Q2.लखनवी अंदाज पाठ में किसका वर्णन किया गया है ?
A.नवाबी प्रदर्शन का
B.लखनऊ स्टेशन का
C.रेलवे स्टेशन का
D.लोगों की मानसिकता का

उत्तर:

नवाबी प्रदर्शन का

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Q3.नवाब ने खीरा न खाने का क्या कारण बताया ?
A.खीरा स्वादिष्ट नहीं था
B.खीरा मेदे पर जोर डालता है
C.खीरा उन्हें पसंद नहीं था
D.उन्हें भूख नहीं थी

उत्तर:

खीरा मेदे पर जोर डालता है

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Q4.नवाब साहब ने खीरे को छीलने के बाद क्या किया ?
A.नवाब ने खा लिया
B.लेखक ने खा लिया
C.नवाब ने खिड़की से बाहर फेंक दिया
D.भिखारी को दे दिया

उत्तर:

नवाब ने खिड़की से बाहर फेंक दिया

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Q5.नवाब साहब ने लेखक को खीरे की क्या विशेषता बताई ?
A.बालम खीरा है
B.आगरे का खीरा
C.विदेशी खीरा
D.स्वादिष्ट खीरा

उत्तर:

बालम खीरा है

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Q6.‘ज्ञान चक्षु खुल जाना’ मुहावरे का क्या अर्थ है ?
A.ज्ञान हो जाना
B.अज्ञान होना
C.अपरिचित होना
D.आँखें खुल जाना

उत्तर:

ज्ञान हो जाना

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Q7.‘आदाब अर्ज़’ किस भाषा का शब्द है ?
A.हिंदी
B.उर्दू
C.संस्कृत
D.अंग्रेजी

उत्तर:

उर्दू

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Q8.लेखक किस क्लास में सफर कर रहे थे ?
A.फर्स्ट क्लास में
B.सेकेंड क्लास में
C.थर्ड क्लास में
D.स्लीपर क्लास में

उत्तर:

सेकेंड क्लास में

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