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Chapter 12

🎓 Class 6📖 Jigyasa📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Chapter 11अध्याय 12 / 12

Chapter 12अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

प्रस्तावना

व्याख्या

प्रस्तावना

इस अध्याय की शुरुआत नुब्रा, लद्दाख के एक रमणीय क्षेत्र से होती है जहाँ ग्यारह वर्ष की बालिका यांग्डोल और उसका जुड़वाँ भाई दोरजे रहते हैं। वे अपने परिवेश के गगनचुंबी पर्वत-शिखरों और हिमनदों से प्रेम करते हैं, लेकिन उन्हें सबसे अधिक आनंद रात्रि-आकाश में जगमगाते तारों को देखकर आता है। नुब्रा में मौसम लगभग बादल रहित रहता है और वायु तथा प्रकाश प्रदूषण न के बराबर होने के कारण रात में आकाश बहुत स्पष्ट दिखाई देता है। यांग्डोल और दोरजे कई रातों तक तारों का अवलोकन करते हैं और ब्रह्माण्ड की विशालता और रहस्यों को समझने की जिज्ञासा से भर जाते हैं। वे अपने परिवार के बड़े सदस्यों से तारों के बारे में रोचक कहानियाँ सुनते आए हैं। उन्होंने सुना है कि प्राचीन काल में साफ आकाश के कुछ विशिष्ट तारे यात्रियों के लिए दिशा सूचक के रूप में काम करते थे। वे तारों के बीच पैटर्न खोजने में आनंद पाते हैं, जो उन्हें परिचित वस्तुओं की याद दिलाते हैं। इस प्रकार तारों को जोड़कर बनाए गए पैटर्नों को समझना और पहचानना इस अध्याय का पहला कदम है।

  • नुब्रा, लद्दाख में आकाश बहुत स्पष्ट और अंधेरा होता है।
  • तारे दूर होते हैं और अपनी रोशनी स्वयं उत्पन्न करते हैं।
  • प्राचीन काल में तारों के पैटर्न यात्रियों के लिए दिशा सूचक होते थे।
  • तारों को जोड़कर पैटर्न बनाना एक मनोरंजक और ज्ञानवर्धक क्रिया है।
  • 📌 तारे: आकाश में चमकने वाले दूरस्थ जलते हुए गैसीय पिंड।
  • 📌 तारा-मंडल: आकाश में तारों के समूह जो विशेष आकृति बनाते हैं।

12.1 तारे और तारा-मंडल

व्याख्या

12.1 तारे और तारा-मंडल

रात्रि-आकाश में हमें अनेक तारे दिखाई देते हैं, जिनमें कुछ चमकीले और कुछ धुंधले होते हैं। तारे स्वयं के प्रकाश से चमकते हैं। प्राचीन काल में लोग तारों के समूहों को पैटर्न के रूप में देखते थे, जो जंतुओं, वस्तुओं या कहानियों के पात्रों जैसे प्रतीत होते थे। इन पैटर्नों को तारा-मंडल कहा जाता था। ये पैटर्न यात्रियों के लिए दिशा-निर्देशन में सहायक थे। आधुनिक खगोलशास्त्र में तारा-मंडल का अर्थ आकाश के निश्चित क्षेत्र से है, जिसमें वे सभी तारे सम्मिलित होते हैं। अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ ने 88 तारा-मंडलों की परिसीमाएँ निर्धारित की हैं, जिससे संपूर्ण आकाश को 88 क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। भारतीय खगोलशास्त्र में तारा-मंडलों को नक्षत्र भी कहा जाता है, जैसे आर्द्रा नक्षत्र, कृत्तिका नक्षत्र आदि। कुछ प्रसिद्ध तारा-मंडल जैसे ओरायन, वृष, कैनिस मेजर आदि की पहचान उनके पैटर्न और कहानियों से होती है। ध्रुव तारा, जो लिटिल डिपर तारा-मंडल का हिस्सा है, उत्तर दिशा का निर्धारण करता है और उत्तर गोलार्ध में लगभग स्थिर दिखाई देता है। विभिन्न संस्कृतियों ने तारा-मंडलों को अलग-अलग नाम और कहानियाँ दी हैं, जो आकाश के अध्ययन को रोचक बनाती हैं।

  • तारे स्वयं के प्रकाश से चमकते हैं।
  • तारा-मंडल तारों के समूह होते हैं जो विशेष आकृति बनाते हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ ने 88 तारा-मंडलों की परिसीमाएँ निर्धारित की हैं।
  • भारतीय खगोलशास्त्र में तारा-मंडलों को नक्षत्र कहा जाता है।
  • ध्रुव तारा उत्तर दिशा का निर्धारण करता है।
  • तारा-मंडल की पहचान पैटर्न और कहानियों से होती है।
  • 📌 तारा-मंडल: आकाश के निश्चित क्षेत्र जिनमें तारों का समूह होता है।
  • 📌 नक्षत्र: भारतीय खगोलशास्त्र में तारा या तारा-मंडल के लिए प्रयुक्त शब्द।
  • 📌 ध्रुव तारा: उत्तर दिशा का निर्धारण करने वाला तारा।

12.2 रात्रि-आकाश का अवलोकन

व्याख्या

12.2 रात्रि-आकाश का अवलोकन

रात्रि में यदि आकाश साफ और बादल रहित हो तो हम बड़ी संख्या में तारों को देख सकते हैं। परंतु यदि हम किसी बड़े शहर में रहते हैं तो प्रकाश प्रदूषण, धुएँ और धूल के कारण आकाश में केवल कुछ तारे ही दिखाई देते हैं। प्रकाश प्रदूषण का अर्थ है रात के समय कृत्रिम