Chapter 10
Chapter 10 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
पादपों में वृद्धि कैसे होती है?
अवधारणापादपों में वृद्धि कैसे होती है?
पादपों में वृद्धि का अर्थ है उनके आकार, ऊँचाई और भार में बढ़ोतरी होना। जब हम अपने आस-पास के पौधों को देखते हैं, तो उनकी वृद्धि के दौरान नए पत्ते, शाखाएँ निकलती हैं, तना मोटा होता है और पौधे की लंबाई बढ़ती है। यह वृद्धि जल, सूर्य के प्रकाश, मिट्टी और वायु जैसे तत्वों पर निर्भर करती है। जल पौधों की कोशिकाओं में जल संतुलन बनाए रखता है और पोषक तत्वों के परिवहन में सहायक होता है। सूर्य का प्रकाश पौधों की ऊर्जा का मुख्य स्रोत है, जो प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक है। मिट्टी पौधों को आवश्यक खनिज और जल प्रदान करती है। इन सभी तत्वों के अभाव में पौधों की वृद्धि रुक जाती है या धीमी हो जाती है। इस विषय को समझने के लिए एक प्रयोगात्मक क्रियाकलाप किया जाता है जिसमें तीन गमलों में समान प्रकार के पौधे लगाए जाते हैं और उन्हें अलग-अलग परिस्थितियों में रखा जाता है - एक गमला जलयुक्त और सूर्य के प्रकाश में, दूसरा जलरहित और सूर्य के प्रकाश में, तीसरा जलयुक्त पर अंधेरे में। दो सप्ताह बाद पौधों की ऊँचाई, पत्तियों की संख्या और रंग में अंतर देखा जाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि पौधों की वृद्धि के लिए जल और सूर्य का प्रकाश दोनों आवश्यक हैं। **Table on page 3 (5×8)** | विभिन्न स्थितियों में रखे गमले | उपलब्धता | | पौधों की ऊँचाई (cm) | | पत्तियों की संख्या | | पत्तियों का रंग (हरा/पीला) | | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | | | सूर्य का प्रकाश | जल | प्रथम दिन | दो सप्ताह पश्चात | प्रथम दिन | दो सप्ताह पश्चात | | | गमला ‘क’ — सीधा सूर्य के प्रकाश में रखा हुआ और जलयुक्त | | | | | | | | | गमला ‘ख’ — सीधा सूर्य के प्रकाश में रखा हुआ और जलरहित | | | | | | | | | गमला ‘ग’ — अंधेरे में रखा हुआ और जलयुक्त | | | | | | | | **Table on page 6 (3×4)** | क्र.सं. | गमले के पौधे के लिए प्रकाश की स्थितियाँ | आयोडीन परीक्षण से पहले का रंग | आयोडीन परीक्षण के बाद का रंग | | --- | --- | --- | --- | | 1. | सूर्य के प्रकाश में रखा पौधा | पत्ती पर हरित और अहरित रंग के धब्बे हैं | पत्ती के हरित धब्बे नीले-काले रंग के हो गए | | 2. | अँधेरे में रखा पौधा | पत्ती पर हरित और अहरित रंग के धब्बे हैं | रंग में कोई परिवर्तन नहीं हुआ |
- पादपों में वृद्धि के लिए जल, सूर्य का प्रकाश, मिट्टी और वायु आवश्यक हैं।
- जल पौधों की कोशिकाओं में जल संतुलन बनाए रखता है और पोषक तत्वों के परिवहन में सहायक होता है।
- सूर्य का प्रकाश पौधों को ऊर्जा प्रदान करता है जो वृद्धि के लिए आवश्यक है।
- मिट्टी पौधों को आवश्यक खनिज और जल प्रदान करती है।
- प्रयोग से पता चलता है कि जल और प्रकाश दोनों के बिना पौधों की वृद्धि रुक जाती है।
पादप अपनी वृद्धि हेतु भोजन कैसे प्राप्त करते हैं?
अवधारणापादप अपनी वृद्धि हेतु भोजन कैसे प्राप्त करते हैं?
पादप जंतुओं की तरह भोजन ग्रहण नहीं करते हैं। वे स्वयं अपने भोजन का निर्माण करते हैं। पत्तियाँ पादपों की भोजन निर्माणशाला होती हैं। पत्तियों में पर्णहरित (क्लोरोफिल) नामक हरित वर्णक होता है जो सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करता है। पत्तियाँ चौड़ी और चपटी होती हैं ताकि अधिकतम प्रकाश ग्रहण किया जा सके। भोजन का भंडारण मुख्यतः स्टार्च (मंड) के रूप में होता है, जो कार्बोहाइड्रेट है। मंड का निर्माण पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा होता है, जिसमें जल, कार्बन डाइऑक्साइड, सूर्य का प्रकाश और पर्णहरित आवश्यक होते हैं। इस प्रक्रिया को समझने के लिए पत्तियों में मंड की उपस्थिति का आयोडीन परीक्षण किया जाता है। आयोडीन के संपर्क में आने पर मंड नीला-काला रंग ग्रहण करता है। इस परीक्षण से पता चलता है कि पत्तियों के हरे भाग में मंड बनता है, जबकि अहरित भागों में मंड नहीं बनता। यह दर्शाता है कि मंड निर्माण के लिए पर्णहरित आवश्यक है।
- पादप स्वयं अपना भोजन बनाते हैं, वे जंतुओं की तरह भोजन ग्रहण नहीं करते।
- पत्तियाँ भोजन निर्माणशाला होती हैं, जिनमें पर्णहरित होता है।
- प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में जल, कार्बन डाइऑक्साइड, सूर्य का प्रकाश और पर्णहरित आवश्यक हैं।
- भोजन का भंडारण स्टार्च (मंड) के रूप में होता है।
- आयोडीन परीक्षण से मंड की उपस्थिति का पता चलता है।
भोजन निर्मित करने में वायु की भूमिका
अवधारणाभोजन निर्मित करने में वायु की भूमिका
पौधों द्वारा भोजन निर्माण की प्रक्रिया में वायु में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रकाश संश्लेषण के लिए जल, सूर्य का प्रकाश, पर्णहरित और कार्बन डाइऑक्साइड आवश्यक होते हैं। कार्बन डाइऑक्साइड वायु से पत्तियों के रंध्रों के
अभ्यास प्रश्न — Chapter 10
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.अवधारणा - लैगिंक जनन निम्न में से किस तरह के जनन में नर और मादा युग्मकों का युग्मन होता है?
उत्तर:
लैंगिक
Q2.अवधारणा - बीज प्रकीर्णन बीज प्रकीर्णन निम्न में से किसके द्वारा होता है?
उत्तर:
उपरोक्त सभी।
Q3.अवधारणा - बीज प्रकीर्णन सेहिजन और द्विफल के बीजों को हवा द्वारा लंबी दूरी तक ले जाया जाता है क्योंकि उनके पास यह होता है:
उत्तर:
पंखों वाला बीज
Q4.अवधारणा - जनन की विधियां निम्नलिखित में से कौन सा कथन पौधों में यौन प्रजनन के लिए सही है / हैं? (i) पौधे बीज से प्राप्त होते हैं। (ii) दो पौधे हमेशा आवश्यक होते हैं। (iii) परागण के बाद ही निषेचन हो सकता है। (iv) केवल कीट परागण के कारक हैं। नीचे दिए गए विकल्पों में से चुनें।
उत्तर:
(i) और (iii)
Q5.अवधारणा - लैगिंक जनन परागण से क्या तात्पर्य है:
उत्तर:
पराग को परागकोष से वर्तिकाग्र में स्थानांतरित करना।
Q6.अवधारणा - जनन की विधियां ब्रायोफिलम अपने जिस भाग द्वारा जनन करता है, निम्न में से वह कौन सा है?
उत्तर:
पत्ती
Q7.अवधारणा - जनन की विधियां बीजाणु उत्पन्न करने वाला एक पादप जीव है:
उत्तर:
डबलरोटी का फफूंद
Q8.अवधारणा - लैगिंक जनन परीपक्व होने पर अंडाशय निम्न में से किस में विकसित हो जाता है?
उत्तर:
फल में