NCERTCh 1निःशुल्क

Chapter 1

🎓 Class 9📖 Sprash📖 6 नोट्स⏱️ ~9 मिनट
अध्याय 1 / 10Chapter 2

Chapter 1अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 6 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

गद्य का पठन-पाठन

व्याख्या

गद्य का पठन-पाठन

इस अनुभाग में गद्य के पठन-पाठन की महत्ता और विधि पर विस्तार से चर्चा की गई है। गद्य को कवि की कसौटी माना गया है क्योंकि अच्छा गद्य लेखक के अनुभवों और विचारों की सरल, सरस एवं प्रभावपूर्ण अभिव्यक्ति होता है। लेखक अपने विचारों को व्यवस्थित और तर्कपूर्ण क्रम में प्रस्तुत करता है। भाषा को संप्रेषणीय बनाने के लिए मुहावरों, लोकोक्तियों, व्यंग्यपूर्ण और लाक्षणिक भाषा का प्रयोग किया जाता है। पाठ्यपुस्तक में विविध विधाओं के पाठ शामिल हैं, जैसे वैचारिक, वैज्ञानिक, ललित निबंध, यात्रा-विवरण, संस्मरण, जीवनी, व्यंग्य, कहानी आदि, ताकि विद्यार्थी विभिन्न भाषा-प्रयोगों से परिचित हो सकें। मुखर पठन में शब्दों का शुद्ध उच्चारण, वाक्यों का उचित आरोह-अवरोह, तान-अनुतान और बलाघात आवश्यक है। कठिन शब्दों को पहले से चिन्हित कर उनका अभ्यास कराना चाहिए। मौन पठन भी आज के युग की शैक्षणिक आवश्यकता है, जिसमें शिक्षक को विशेष सजगता बरतनी चाहिए। मौन पठन से पूर्व कठिन शब्दों के अर्थ समझाना और अर्थग्रहण का परीक्षण करना आवश्यक है। विचार-बोध के लिए पाठ में अनुच्छेदों का महत्व है, इन्हें उसी क्रम में पढ़ाना चाहिए। पाठ के प्रभाव की समझ के लिए विचार-बोध के प्रश्न सहायक होते हैं। भाषा-प्रयोगों पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि मुहावरों, कहावतों और अलंकारों से भाषा अधिक सहज, प्रभावपूर्ण और संप्रेषणीय बनती है। मौखिक अभिव्यक्ति के अवसरों को बढ़ावा देना चाहिए, जैसे भाषण, वाद-विवाद, आशु-रचना आदि। योग्यता-विस्तार में पाठों को आधार बनाकर विद्यार्थियों की सृजनात्मक शक्ति, ज्ञान और चिंतन को विकसित करने के प्रयास किए जाने चाहिए। कुल मिलाकर गद्य के पठन-पाठन में ऐसे प्रयत्न करने चाहिए जिससे विद्यार्थियों की लिखित एवं मौखिक अभिव्यक्ति का विकास हो और हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति रुचि जाग्रत हो।

  • गद्य को कवि की कसौटी माना गया है क्योंकि यह सरल, सरस और प्रभावपूर्ण होता है।
  • मुहावरों, लोकोक्तियों और अलंकारों का प्रयोग भाषा को संप्रेषणीय बनाता है।
  • मुखर पठन में शब्दों के शुद्ध उच्चारण और वाक्यों के आरोह-अवरोह का अभ्यास आवश्यक है।
  • मौन पठन में कठिन शब्दों के अर्थ समझाना और अर्थग्रहण का परीक्षण जरूरी है।
  • विचार-बोध के लिए अनुच्छेदों का क्रम और प्रश्नों का अध्ययन सहायक होता है।
  • मौखिक अभिव्यक्ति के अवसर जैसे भाषण, वाद-विवाद आदि से भाषा कौशल बढ़ता है।
  • 📌 गद्य: सरल और व्यवस्थित भाषा में विचारों की अभिव्यक्ति।
  • 📌 मुहावरा: भाषा में प्रयुक्त स्थायी वाक्यांश।
  • 📌 अलंकार: भाषा की शोभा बढ़ाने वाले शब्द-प्रयोग।

यशपाल

व्याख्या

यशपाल

इस खंड में लेखक यशपाल का संक्षिप्त परिचय दिया गया है। यशपाल का जन्म 1903 में फिरोजपुर छावनी में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्कूल में और उच्च शिक्षा लाहौर में प्राप्त की। विद्यार्थी काल से ही वे क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय थे और भगतसिंह जैसे अमर शहीदों के साथ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया। यशपाल की प्रमुख कृतियों में उपन्यास जैसे 'देशद्रोही', 'पार्टी कामरेड', 'दादा कामरेड', 'झूठा सच', 'मेरी, तेरी, उसकी बात' शामिल हैं। उन्हें 'मेरी, तेरी, उसकी बात' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला। उनकी कहानियों में कथा रस के साथ वर्ग संघर्ष, मनोविश्लेषण और पैना व्यंग्य प्रमुख हैं। यशपाल का मानना था कि समाज को उन्नत बनाने का एकमात्र रास्ता सामाजिक और आर्थिक समानता है। उन्होंने अपनी रचनाओं में हिंदी के साथ उर्दू और अंग्रेजी के शब्दों का भी प्रयोग किया। प्रस्तुत कहानी में वे देश में फैले अंधविश्वास, ऊँच-नीच के भेदभाव, अमानवीयता और गरीबों की मजबूरी को उजागर करते हैं। कहानी यह दिखाती है कि दुःख सभी को समान रूप से तोड़ता है, पर कुछ लोगों को दुःख मनाने का अधिकार तक नहीं मिलता।

  • यशपाल का जन्म 1903 में फिरोजपुर छावनी में हुआ।
  • वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय क्रांतिकारी थे।
  • उनकी प्रमुख कृतियों में कई उपन्यास और कहानी संग्रह शामिल हैं।
  • उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।
  • उनकी कहानियों में वर्ग संघर्ष, मनोविश्लेषण और व्यंग्य प्रमुख हैं।
  • समाज सुधार के लिए सामाजिक और आर्थिक समानता पर जोर देते थे।
  • 📌 क्रांतिकारी: स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय व्यक्ति।
  • 📌 साहित्य अकादमी पुरस्कार: साहित्य में उत्कृष्टता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार।
  • 📌 वर्ग संघर्ष: समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संघर्ष।

दु:ख का अधिकार

व्याख्या

दु:ख का अधिकार

यह पाठ समाज में पोशाक के महत्व, सामाजिक भेदभाव और दुःख के अधिकार की संवेदनशीलता को उजागर करता है। लेखक बताते हैं कि मनुष्यों की पोशाक उन्हें विभिन्न सामाजिक वर्गों में बाँटती है और यह उनके अधिकारों और दर्जे को दर्शाती है। कभी-कभी पोशाक ही हमें समाज क