Chapter 1
Chapter 1 — अध्ययन नोट्स
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अपचयोपचय अभिक्रियाएँ
व्याख्याअपचयोपचय अभिक्रियाएँ
अपचयोपचय अभिक्रियाएँ रसायन विज्ञान की वह अभिक्रियाएँ हैं जिनमें ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों साथ-साथ होते हैं। प्रारंभ में ऑक्सीकरण शब्द का प्रयोग केवल किसी पदार्थ के ऑक्सीजन से संयोजन के लिए किया जाता था, जैसे मैग्नीशियम का ऑक्सीजन से MgO बनाना (2Mg + O₂ → 2MgO)। लेकिन बाद में यह परिभाषा विस्तृत हुई और हाइड्रोजन के निष्कासन को भी ऑक्सीकरण माना गया। इसी प्रकार अपचयन को भी पदार्थ से ऑक्सीजन या ऋणविद्युती तत्व के निष्कासन या हाइड्रोजन/धनविद्युती तत्व के समावेश के रूप में परिभाषित किया गया। इस प्रकार, अपचयोपचय अभिक्रियाएँ वे अभिक्रियाएँ हैं जिनमें किसी पदार्थ का ऑक्सीकरण (इलेक्ट्रॉन का निष्कासन) और किसी अन्य पदार्थ का अपचयन (इलेक्ट्रॉन का ग्रहण) होता है। उदाहरण के लिए, मीथेन का दहन, हाइड्रोजन सल्फाइड का ऑक्सीकरण, तथा धातुओं के बीच की अभिक्रियाएँ। इन अभिक्रियाओं में एक पदार्थ इलेक्ट्रॉन खोता है (अपचय) और दूसरा इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है (अपचयन)। यह प्रक्रिया इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण के माध्यम से होती है। अपचयोपचय अभिक्रियाओं का अध्ययन रसायन विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों जैसे औद्योगिक उत्पादन, धातुनिर्माण, ऊर्जा उत्पादन, जैव रसायन, और पर्यावरण विज्ञान में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों साथ-साथ होते हैं।
- ऑक्सीकरण में पदार्थ इलेक्ट्रॉन खोता है, अपचयन में इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है।
- प्रारंभ में ऑक्सीकरण का अर्थ केवल ऑक्सीजन से संयोजन था, अब परिभाषा विस्तृत हुई है।
- अपचयोपचय अभिक्रियाएँ दैनिक जीवन, उद्योग, और जैविक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण हैं।
- इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण अभिक्रियाओं के रूप में इन्हें समझा जाता है।
- 📌 ऑक्सीकरण: किसी पदार्थ का इलेक्ट्रॉन खोना या हाइड्रोजन/धनविद्युती तत्व का निष्कासन।
- 📌 अपचयन: किसी पदार्थ का इलेक्ट्रॉन प्राप्त करना या ऑक्सीजन/ऋणविद्युती तत्व का निष्कासन।
- 📌 अपचयोपचय अभिक्रिया: ऐसी अभिक्रिया जिसमें ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों होते हैं।
इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण अभिक्रियाओं के रूप में अपचयोपचय अभिक्रियाएँ
व्याख्याइलेक्ट्रॉन स्थानांतरण अभिक्रियाओं के रूप में अपचयोपचय अभिक्रियाएँ
अपचयोपचय अभिक्रियाओं को इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण अभिक्रियाओं के रूप में समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, सोडियम के क्लोरीन, ऑक्सीजन और सल्फर के साथ अभिक्रियाएँ आयनिक यौगिकों के निर्माण के रूप में होती हैं, जिनमें सोडियम इलेक्ट्रॉन खोकर Na⁺ आयन बनता है और क्लोरीन, ऑक्सीजन या सल्फर इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनते हैं। इस प्रक्रिया को दो अर्द्ध-अभिक्रियाओं में विभाजित किया जा सकता है: एक में इलेक्ट्रॉन का निष्कासन (ऑक्सीकरण) और दूसरी में इलेक्ट्रॉन की प्राप्ति (अपचयन)। उदाहरण के लिए, सोडियम क्लोराइड के निर्माण में— 2Na(s) → 2Na⁺(g) + 2e⁻ (ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया) Cl₂(g) + 2e⁻ → 2Cl⁻(g) (अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया) इन अर्द्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ने पर पूरी अभिक्रिया संतुलित होती है। इस प्रकार, इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण की अवधारणा से अपचयोपचय अभिक्रियाओं को समझना सरल हो जाता है। इसके अतिरिक्त, धातुओं के बीच भी ऐसी अभिक्रियाएँ होती हैं, जैसे जिंक की पट्टी को कॉपर सल्फेट के विलयन में डालने पर जिंक का ऑक्सीकरण और कॉपर का अपचयन होता है। इस प्रकार की अभिक्रियाओं में धातु सक्रियता श्रेणी का निर्धारण किया जाता है, जो बताती है कि कौन सी धातु किस धातु के आयनों को विस्थापित कर सकती है।
- अपचयोपचय अभिक्रियाएँ इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण अभिक्रियाएँ होती हैं।
- दो अर्द्ध-अभिक्रियाओं में विभाजन किया जा सकता है: ऑक्सीकरण और अपचयन।
- धातु सक्रियता श्रेणी से अभिक्रिया की दिशा और संभावना ज्ञात होती है।
- जिंक और कॉपर सल्फेट के बीच अभिक्रिया इसका उदाहरण है।
- इलेक्ट्रॉन दाता अपचायक और इलेक्ट्रॉन ग्रहणकर्ता ऑक्सीकारक कहलाते हैं।
- 📌 अर्द्ध-अभिक्रिया: इलेक्ट्रॉन निष्कासन या ग्रहण की अभिक्रिया।
- 📌 धातु सक्रियता श्रेणी: धातुओं की इलेक्ट्रॉन देने की प्रवृत्ति का क्रम।
- 📌 ऑक्सीकारक: इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने वाला पदार्थ।
ऑक्सीकरण–संख्या
व्याख्याऑक्सीकरण–संख्या
ऑक्सीकरण-संख्या वह काल्पनिक आवेश है जो किसी तत्व के परमाणु को दिया जाता है यदि यौगिक में सभी इलेक्ट्रॉन पूर्णतः अधिक वैद्युत-ऋणी तत्व के पास चले जाएं। यह अवधारणा अपचयोपचय अभिक्रियाओं को समझने और संतुलित करने के लिए अत्यंत उपयोगी है। उदाहरण के लिए, जल
अभ्यास प्रश्न — Chapter 1
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.प्रश्न -निम्नलिखित में से किस यौगिक में आयोडीन की ऑक्सीकरण संख्या भिन्नात्मक होती है?
उत्तर:
ख) I 3
Q2.प्रश्न .यौगिक जो ऑक्सीकारक के साथ-साथ अपचायक के रूप में काम कर सकता है
उत्तर:
ख) H 2 O 2
Q3.प्रश्न . जब CO 2 और H 2 O का उत्पादन करने के लिए ऑक्सीजन में मिथेन को जलाया जाता है तो कार्बन के ऑक्सीकरण संख्या में परिवर्तन होता है
उत्तर:
(ग) +8
Q4.प्रश्न . CH 3 COOH में कार्बोक्जिलिक कार्बन का ऑक्सीकरण संख्या
उत्तर:
(घ) +3
Q5.प्रश्न. क्रिया 2Ag + 2H 2 S O 4 ---> Ag 2 S O 4 + 2H 2 O + S O 2 में सल्फूरिक अम्लकिस रूप में कार्य करता है
उत्तर:
(घ) एक अम्ल और साथ ही एक ऑक्सीकारक
Q6.प्रश्न . निम्नलिखित में से कौन सबसे शक्तिशाली ऑक्सीकारक है
उत्तर:
(क) O 3
Q7.प्रश्न . निम्नलिखित में से कौन सा हैलोजन अपने यौगिकों में एक सकारात्मक ऑक्सीकरण संख्या प्रदर्शित नहीं करता है?
उत्तर:
(क) F
Q8.प्रश्न 1. निम्नलिखित अणुओं में से, ब्रोमीन किसमें अधिकतम ऑक्सीकरण संख्या दिखाता है?
उत्तर:
(ग) KBrO 4
Rasayan Vigyan bhag-II के सभी 3 अध्याय
Chemistry · Class 11