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Chapter 1

🎓 Class 12📖 Bharatiya Itihas ke kuchh Vishay-I📖 15 नोट्स⏱️ ~23 मिनट
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Chapter 1अध्ययन नोट्स

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ईटें, मनके तथा अस्थियाँ हड्डीज सभ्यता

व्याख्या

ईटें, मनके तथा अस्थियाँ हड्डीज सभ्यता

हड्डीज सभ्यता, जिसे सिंधु घाटी सभ्यता भी कहा जाता है, भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीनतम और समृद्ध सभ्यताओं में से एक है। इस सभ्यता की विशिष्ट पुरावस्तुओं में हड्डीज मुहरें प्रमुख हैं, जो सेलखड़ी पत्थर से बनी होती थीं। इन मुहरों पर जानवरों के चित्र और एक रहस्यमय लिपि उत्कीर्ण होती थी, जिसे आज तक पढ़ा नहीं जा सका है। हड्डीज सभ्यता के बारे में जानकारी मुख्यतः पुरातात्विक साक्ष्यों जैसे आवास, मृद्भाण्ड, आभूषण, औजार और मुहरों के माध्यम से प्राप्त होती है। ये साक्ष्य हमें उस समय के लोगों के जीवन, उनकी सामाजिक संरचना, आर्थिक गतिविधियों और सांस्कृतिक प्रथाओं की झलक देते हैं। हालांकि सभ्यता के कई पहलू अभी भी अज्ञात हैं और संभव है कि भविष्य में भी रहस्य बने रहें। इस अध्याय में हम हड्डीज सभ्यता के विभिन्न पहलुओं का गहन अध्ययन करेंगे और समझेंगे कि पुरातत्वविद कैसे इन साक्ष्यों की व्याख्या करते हैं।

  • हड्डीज सभ्यता को सिंधु घाटी सभ्यता भी कहा जाता है।
  • मुख्य पुरावस्तुओं में सेलखड़ी पत्थर की मुहरें शामिल हैं।
  • मुहरों पर जानवरों के चित्र और एक अनपठित लिपि होती है।
  • सभ्यता के बारे में जानकारी पुरातात्विक साक्ष्यों से मिलती है।
  • कई पहलू अभी भी अज्ञात और रहस्यमय हैं।
  • 📌 हड्डीज मुहर: सेलखड़ी पत्थर से बनी मुहरें जिन पर जानवरों के चित्र और लिपि उत्कीर्ण होती है।
  • 📌 पुरातात्विक साक्ष्य: प्राचीन वस्तुएं और संरचनाएं जो इतिहास की जानकारी देती हैं।

शर्तें, स्थान और समय

व्याख्या

शर्तें, स्थान और समय

हड्डीज सभ्यता का नाम उस स्थान से लिया गया है जहाँ इसकी पहचान हुई थी। इसका काल 6000 ईसा पूर्व से 1300 ईसा पूर्व तक माना जाता है। इस काल को तीन मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है: प्रारंभिक हड्डीज (6000-2600 ईसा पूर्व), परिपक्व हड्डीज (2600-1900 ईसा पूर्व) और उत्तर हड्डीज (1900-1300 ईसा पूर्व)। परिपक्व हड्डीज सभ्यता का सबसे समृद्ध और शहरी चरण था। हड्डीज सभ्यता के प्रमुख पुरास्थल सिंध, बलूचिस्तान, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भाग और जम्मू में पाए गए हैं। कुल मिलाकर 2000 से अधिक पुरास्थल खोजे गए हैं, जिनमें पाँच प्रमुख शहर - राखीगढ़ी, मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, धोलावीरा और गनवेरीवाला शामिल हैं। यह सभ्यता सिंधु और सरस्वती नदी घाटियों के बीच मुख्य रूप से विकसित हुई।

  • हड्डीज सभ्यता का काल 6000 ईसा पूर्व से 1300 ईसा पूर्व तक है।
  • तीन चरण: प्रारंभिक, परिपक्व और उत्तर हड्डीज।
  • मुख्य स्थलों में मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, धोलावीरा, राखीगढ़ी और गनवेरीवाला शामिल हैं।
  • सभ्यता मुख्यतः सिंधु और सरस्वती नदी घाटियों में फैली हुई थी।
  • 2000 से अधिक हड्डीज पुरास्थल खोजे गए हैं।
  • 📌 प्रारंभिक हड्डीज: 6000-2600 ईसा पूर्व का प्रारंभिक चरण।
  • 📌 परिपक्व हड्डीज: 2600-1900 ईसा पूर्व का शहरी और समृद्ध चरण।
  • 📌 उत्तर हड्डीज: 1900-1300 ईसा पूर्व का पतन काल।

आरंभ

व्याख्या

आरंभ

हड्डीज सभ्यता के उद्भव से पहले भी इस क्षेत्र में कई संस्कृतियाँ थीं, जिनकी अपनी विशिष्ट मृद्भाण्ड शैली थी। ये संस्कृतियाँ कृषि, पशुपालन और शिल्पकारी में संलग्न थीं। बस्तियाँ छोटी और संरचनाएँ सीमित थीं। 7000 ईसा पूर्व के शुरुआती कृषक समुदायों के साक्ष