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विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति: कक्षा 12 के लिए सम्पूर्ण मार्गदर्शिका

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 2 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति: कक्षा 12 के लिए सम्पूर्ण मार्गदर्शिका

विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति कक्षा 12 के भौतिकी पाठ्यक्रम का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इसमें प्रकाश और पदार्थ दोनों की तरंग और कण जैसी गुणधर्मों की व्याख्या की जाती है, जो NCERT और CBSE परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं।

विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति क्या है?

विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति का अर्थ है कि प्रकाश और पदार्थ दोनों में तरंग और कण दोनों की विशेषताएँ पाई जाती हैं।

  • तरंग प्रकृति: प्रकाश में परावर्तन, अपवर्तन, और विवर्तन जैसी तरंगीय विशेषताएँ होती हैं।
  • कण प्रकृति: फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव से पता चलता है कि प्रकाश क्वांटम (फोटॉन) के रूप में ऊर्जा का संचरण करता है।

इसी प्रकार, पदार्थ के कण जैसे इलेक्ट्रॉन भी तरंग की तरह व्यवहार करते हैं, जिसे डे ब्रोगली तरंगदैर्ध्य के माध्यम से समझा जाता है।

यह अवधारणा NCERT कक्षा 12 के भौतिकी पाठ्यक्रम में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्वांटम भौतिकी की नींव रखती है।

फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव और निरोधी विभव का महत्व

फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव में जब किसी धातु पर प्रकाश पड़ता है, तो उससे इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं। इस घटना से प्रकाश की कण प्रकृति सिद्ध होती है।

निरोधी विभव (Stopping Potential): यह वह न्यूनतम ऋणात्मक विभव है जो उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों को पट्टिका तक पहुँचने से रोकता है। निरोधी विभव की विशेषताएँ:

  • यह प्रकाश की आवृत्ति पर निर्भर करता है।
  • आवृत्ति बढ़ने पर निरोधी विभव भी बढ़ता है।

महत्वपूर्ण सूत्र:

$$ K_{max} = eV_0 = h u - W_0 $$

जहाँ,

  • $K_{max}$ = इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा
  • $e$ = इलेक्ट्रॉन का आवेश
  • $V_0$ = निरोधी विभव
  • $h$ = प्लांक स्थिरांक
  • $\nu$ = प्रकाश की आवृत्ति
  • $W_0$ = कार्य-फलन (Work function)

इस सूत्र से हम प्लांक स्थिरांक और कार्य-फलन का मान निकाल सकते हैं।

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निरोधी विभव और आवृत्ति के बीच संबंध

निरोधी विभव और प्रकाश की आवृत्ति के बीच संबंध लगभग रैखिक होता है। इसका ग्राफ नीचे दिया गया है:

आवृत्ति ($\nu$)निरोधी विभव ($V_0$)
$\nu_1 < \nu_0$0 (कोई इलेक्ट्रॉन नहीं)
$\nu_2 > \nu_0$$V_0 = \frac{h\nu - W_0}{e}$

जहाँ $\nu_0$ वह सीमा आवृत्ति है जिसके नीचे कोई इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित नहीं होता।

इस रैखिकता से प्लांक स्थिरांक $h$ और कार्य-फलन $W_0$ का मान ज्ञात किया जा सकता है। यह प्रयोग NCERT कक्षा 12 के भौतिकी में फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव के अध्याय का आधार है।

डे ब्रोगली तरंगदैर्ध्य और पदार्थ की तरंग प्रकृति

लुई डे ब्रोगली ने प्रस्तावित किया कि सभी द्रव्य कणों के साथ एक तरंग भी जुड़ी होती है, जिसे डे ब्रोगली तरंगदैर्ध्य कहते हैं।

डे ब्रोगली तरंगदैर्ध्य का सूत्र:

$$ \lambda = \frac{h}{p} = \frac{h}{mv} $$

जहाँ,

  • $\lambda$ = तरंगदैर्ध्य
  • $h$ = प्लांक स्थिरांक
  • $p$ = कण का संवेग
  • $m$ = द्रव्यमान
  • $v$ = वेग

उदाहरण:

यदि इलेक्ट्रॉन की गति $1.5 \times 10^6$ m/s है, तो उसका तरंगदैर्ध्य होगा:

$$ \lambda = \frac{6.63 \times 10^{-34}}{9.11 \times 10^{-31} \times 1.5 \times 10^6} = 4.85 \times 10^{-10} m $$

यह तरंगदैर्ध्य परमाणु संरचना और इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी में महत्वपूर्ण है।

विभिन्न कणों के डे ब्रोगली तरंगदैर्ध्य की तुलना

किसी कण का डे ब्रोगली तरंगदैर्ध्य उसके द्रव्यमान और वेग पर निर्भर करता है। नीचे तालिका में विभिन्न कणों के तरंगदैर्ध्य की तुलना दी गई है:

कणद्रव्यमान (kg)वेग (m/s)डे ब्रोगली तरंगदैर्ध्य ($\lambda$)
प्रोटॉन$1.67 \times 10^{-27}$समान संभावित अंतर सेकम
न्यूट्रॉन$1.67 \times 10^{-27}$समान संभावित अंतर सेलगभग बराबर प्रोटॉन के
इलेक्ट्रॉन$9.11 \times 10^{-31}$समान ऊर्जा परअधिक

निष्कर्ष:

  • इलेक्ट्रॉन का तरंगदैर्ध्य प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की तुलना में अधिक होता है।
  • इसका कारण इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान बहुत कम होना है।

प्रयोग और गणनाएँ: प्लांक स्थिरांक निकालना

निरोधी विभव और आवृत्ति के प्रयोग से प्लांक स्थिरांक ज्ञात किया जा सकता है।

प्रयोग विधि:

1. विभिन्न आवृत्तियों के प्रकाश से धातु पर प्रकाश डालें। 2. प्रत्येक आवृत्ति के लिए निरोधी विभव मापें। 3. $V_0$ बनाम $\nu$ का ग्राफ बनाएं।

गणना:

ग्राफ की ढलान $= \frac{h}{e}$ से प्लांक स्थिरांक निकाला जाता है।

उदाहरण:

यदि ग्राफ की ढलान $4.14 \times 10^{-15}$ V·s है, तो

$$ h = e \times \text{ढलान} = 1.6 \times 10^{-19} \times 4.14 \times 10^{-15} = 6.62 \times 10^{-34} Js $$

यह मान प्लांक स्थिरांक के ज्ञात मान के बहुत करीब है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव में निरोधी विभव क्या होता है?

निरोधी विभव वह न्यूनतम ऋणात्मक विभव है जो उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों को पट्टिका तक पहुँचने से रोकता है।

डे ब्रोगली तरंगदैर्ध्य किस पर निर्भर करता है?

डे ब्रोगली तरंगदैर्ध्य कण के संवेग पर निर्भर करता है, जो द्रव्यमान और वेग का गुणनफल होता है।

निरोधी विभव और आवृत्ति के बीच क्या संबंध होता है?

निरोधी विभव आवृत्ति के साथ लगभग रैखिक रूप से बढ़ता है, जिससे प्लांक स्थिरांक ज्ञात किया जा सकता है।

कार्य-फलन (Work function) क्या है?

कार्य-फलन वह न्यूनतम ऊर्जा है जो इलेक्ट्रॉन को धातु की सतह से मुक्त करने के लिए चाहिए।

प्रकाश की द्वैत प्रकृति को किस घटना से सिद्ध किया गया?

फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव से प्रकाश की कण और तरंग दोनों की प्रकृति सिद्ध होती है।

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