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पहाड़ से ऊँचा आदमी: तेनजिंग नोर्गे की प्रेरणादायक कहानी

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 1 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

पहाड़ से ऊँचा आदमी: तेनजिंग नोर्गे की प्रेरणादायक कहानी

पहाड़ से ऊँचा आदमी अध्याय में तेनजिंग नोर्गे के साहसिक जीवन और माउंट एवरेस्ट पर उनकी सफल चढ़ाई की कहानी है। यह कक्षा 11 के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संघर्ष, धैर्य और टीमवर्क की सीख देता है।

तेनजिंग नोर्गे: एक परिचय

तेनजिंग नोर्गे का जन्म सन् 1911 में तिब्बत के खुम्बू क्षेत्र में हुआ था। वे शेरपा जाति से थे, जो हिमालय के पर्वतीय क्षेत्र में रहते हैं। तेनजिंग का बचपन कठिनाइयों से भरा था, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। पर्वतारोहण के प्रति उनकी रुचि और लगन ने उन्हें एक महान पर्वतारोही बना दिया। उनकी विनम्रता और सहनशीलता ने उन्हें सभी के दिलों में जगह दिलाई।

माउंट एवरेस्ट की चोटी पर विजय

29 मई 1953 को तेनजिंग नोर्गे और एडमंड हिलरी ने मिलकर माउंट एवरेस्ट की चोटी पर सफलता हासिल की। एवरेस्ट की ऊँचाई 8,848 मीटर है, जो पृथ्वी की सबसे ऊँची चोटी है। इस चढ़ाई में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जैसे कि ठंड, ऑक्सीजन की कमी, और खतरनाक रास्ते। इस उपलब्धि ने न केवल उन्हें बल्कि पूरे विश्व को प्रेरित किया।

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पर्वतारोहण की चुनौतियाँ और तेनजिंग का साहस

पर्वतारोहण में सबसे बड़ी समस्या ऑक्सीजन की कमी होती है क्योंकि ऊँचाई बढ़ने पर वायुमंडल में ऑक्सीजन कम हो जाती है। इससे शरीर को थकान और कमजोरी होती है। तेनजिंग ने ऑक्सीजन सिलेंडर का उपयोग किया और धैर्य से कठिन परिस्थितियों का सामना किया। इसके अलावा, ठंड, तेज हवा और खतरनाक रास्ते भी चुनौती थे। उनकी टीमवर्क और साहस ने इन समस्याओं को पार करने में मदद की।

तेनजिंग नोर्गे के व्यक्तित्व के गुण

तेनजिंग नोर्गे में कई महत्वपूर्ण गुण थे:

  • साहस: कठिन परिस्थितियों में भी वे डरे नहीं।
  • धैर्य: लंबी और कठिन यात्राओं में लगातार प्रयास करते रहे।
  • टीमवर्क: एडमंड हिलरी के साथ मिलकर काम किया।
  • विनम्रता: सफलता के बाद भी वे सरल और नम्र बने रहे।

ये गुण उन्हें एक आदर्श पर्वतारोही बनाते हैं।

पर्वतारोहण में ऑक्सीजन की कमी का प्रभाव

ऊँचाई बढ़ने पर वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। उदाहरण के लिए, समुद्र तल पर ऑक्सीजन लगभग 21% होती है, जबकि माउंट एवरेस्ट की चोटी पर यह मात्र लगभग 7% होती है। इससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे थकान, सांस फूलना और कमजोरी होती है। इसलिए पर्वतारोही ऑक्सीजन सिलेंडर का उपयोग करते हैं।

ऊँचाई (मीटर)ऑक्सीजन प्रतिशत
021%
5,00012%
8,848 (एवरेस्ट)7%

पहाड़ से ऊँचा आदमी: जीवन से सीख

इस अध्याय से हमें कई महत्वपूर्ण बातें सीखने को मिलती हैं:

  • कठिनाइयों के बावजूद हार न मानना चाहिए।
  • मेहनत और धैर्य से सफलता संभव है।
  • टीमवर्क से बड़ी चुनौतियाँ आसान हो जाती हैं।
  • विनम्रता और सहनशीलता भी सफलता के लिए जरूरी हैं।

तेनजिंग नोर्गे की कहानी हमें प्रेरित करती है कि हम अपने लक्ष्य के लिए पूरी लगन से प्रयास करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेनजिंग नोर्गे कौन थे?

तेनजिंग नोर्गे एक प्रसिद्ध शेरपा पर्वतारोही थे जिन्होंने 1953 में माउंट एवरेस्ट की चोटी पर विजय प्राप्त की।

माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई कितनी है?

माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई 8,848 मीटर है, जो पृथ्वी की सबसे ऊँची चोटी है।

पर्वतारोहण में ऑक्सीजन की कमी क्यों होती है?

ऊँचाई बढ़ने पर वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, जिससे शरीर को कम ऑक्सीजन मिलती है।

तेनजिंग नोर्गे ने अपने जीवन में कौन-कौन से गुण दिखाए?

उन्होंने साहस, धैर्य, टीमवर्क, विनम्रता और सहनशीलता के गुण दिखाए।

तेनजिंग नोर्गे का जन्म कहाँ हुआ था?

उनका जन्म तिब्बत के खुम्बू क्षेत्र में हुआ था, वे शेरपा जाति से थे।

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