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सर्ू ्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ | Class 9 Hindi Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन

सर्ू ्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ | Class 9 Hindi Notes

सर्ू ्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – this guide gives you a concise, exam-ready overview of सर्ू ्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ from Class 9 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

अर्थ और भाव

इस खंड में कविता की कुछ महत्वपूर्ण पंक्तियों का अर्थ और भाव विस्तार से समझाया गया है। उदाहरण स्वरूप, ‘लंका पदतल शतदल, गर्जितोर्मि सागर-जल धोता शुचि चरण युगल’ पंक्ति में कवि ने भारत की पवित्रता और उसकी भूमि की विशालता को दर्शाया है। यहाँ समुद्र की गर्जना और लंका के पदतल (तलवे) का उल्लेख भारत की ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्ता को उजागर करता है। दूसरी ओर, ‘प्राण प्रणव ओंकार, ध्वनित दिशाएँ उदार, शतमुख-शतरव-मुखरे’ पंक्ति में भारत की आध्यात्मिक चेतना और उसकी विविधता का चित्रण है। यहाँ ‘प्राण प्रणव ओंकार’ से ‘ॐ’ की महत्ता और जीवन की ऊर्जा का बोध होता है। ‘शतमुख-शतरव-मुखरे’ में भारत के अनेक मुखों से निकलने वाली आवाज़ों का संकेत है, जो उसकी सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है। इस प्रकार, कविता की भाषा में गहरे अर्थ और भाव छिपे हैं, जो भारत की समृद्धि, विविधता और पवित्रता को अभिव्यक्त करते हैं।

🧪 Activity: कविता के इन पंक्तियों का भावार्थ समझना और कक्षा में उनके अर्थ पर चर्चा करना।

🔗 Connection: यह भावार्थ और अर्थ की समझ विद्यार्थियों को कविता के सौंदर्य और अलंकारों के अध्ययन की ओर ले जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं? 1. “भारति, जय, विजयकरे” कविता में विशेष रूप से— (क) भारत की भौगोलिक संरचना की प्रशस्ति की गई है। (ख) भारत की सांस्कृतिक विविधता बताई गई है। (ग) भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा की गई है। (घ) भारत के खनिज पदार्थों के बारे में बताया गया है। 2. “कनक-शस्य-कमल धरे” पंक्ति का भावार्थ है— (क) भारत की धन-धान्य संपन्नता (ख) भारत की नदियों का सौंदर्य (ग) भारत के लोक-जीवन की सुंदरता (घ) भारत की सैन्य शक्ति और औद्योगिक विकास 3. समस्त विश्व में भारत के महत्व का उद्घोष करने वाली पंक्तियाँ हैं— (क) गंगा ज्योतिर्जल-कण/धवल धार हार गले (ख) गर्जितोर्मि सागर-जल/धोता शुचि चरण युगल (ग) भारति, जय, विजयकरे/कनक-शस्य-कमलधरे! (घ) ध्वनित दिशाएँ उदार/शतमुख-शतरव-मुखरे! 4. कविता की भाषा और शैली किस विशेषता से संपन्न है? (क) सरल, बोल-चाल की भाषा (ख) संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त (ग) सरस और हास्य-व्यंग्यपूर्ण (घ) संवादात्मक और विश्लेषणात्मक 5. भारत के वस्त्रों में ‘तरु-तूण-वन-लता’ और गले में ‘गंगा-धारा’ को चित्रित कर कवि किस प्रकार की चेतना का संदेश देते हैं? (क) पर्यावरणीय और सांस्कृतिक (ख) राष्ट्रीयता और देशप्रेम (ग) ऐतिहासिक और भौगोलिक (घ) सामाजिक और राजनीतिक

1. सही उत्तर है (ग) भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा की गई है। क्योंकि कविता में भारत की समृद्धि, ज्ञान और प्राकृतिक सौंदर्य की महत्ता बताई गई है। 2. सही उत्तर है (क) भारत की धन-धान्य संपन्नता। 'कनक-शस्य-कमल धरे' का अर्थ है सोने जैसी फसलें और कमल की तरह सुंदर भूमि, जो धन-धान्य की समृद्धि दर्शाता है। 3. सही उत्तर है (ग) भारति, जय, विजयकरे/कनक-शस्य-कमलधरे! क्योंकि ये पंक्तियाँ भारत के समस्त विश्व में महत्व को उद्घाटित करती हैं। 4. सही उत्तर है (ख) संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त। कविता की भ

नीचे दी गई पंक्तियों का अर्थ समझते हुए इनका भाव स्पष्ट कीजिए— (क) “लंका पदतल शतदल, गर्जितोर्मि सागर-जल धोता शुचि चरण युगल!” (ख) “प्राण प्रणव ओंकार, ध्वनित दिशाएँ उदार, शतमुख-शतरव-मुखरे!”

(क) पंक्तियों का अर्थ है कि समुद्र का जल गरजता हुआ लंका के समुद्र तट को धोता है, जो कि स्वच्छ और पवित्र चरणों का प्रतीक है। इसका भाव यह है कि भारत की भूमि पवित्र और शक्तिशाली है। (ख) इस पंक्ति का अर्थ है कि प्राण और प्रणव ओंकार की ध्वनि दिशाओं में फैल रही है, और अनेक मुखों से अनेक प्रकार के उत्सव और जयकारे हो रहे हैं। इसका भाव है कि भारत में जीवन और उत्सव की विविधता और ऊर्जा है।

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए— 1. कविता में कवि की किस भावना की अभिव्यक्ति मिलती है? 2. कविता में भारत के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किस प्रकार किया गया है? क्या आप मानते हैं कि प्रकृति का संरक्षण करना भी देशप्रेम का काम है? क्यों? 3. “कनक-शस्य-कमलधरे!” पंक्ति भारतभूमि की किन-किन विशेषताओं की ओर संकेत कर रही है? 4. “मुकुट शुभ्र हिम-तुषार” पंक्ति में हिमालय को भारत का मुकुट बताया गया है, क्यों?

1. कविता में कवि की भावना देशप्रेम, भारत की समृद्धि और उसकी सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक महत्ता की अभिव्यक्ति है। वह भारत की महानता और उसकी सुंदरता का गुणगान करता है।

2. कविता में भारत के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन बहुत ही मनोहर और चित्रात्मक भाषा में किया गया है, जैसे नदियाँ, पर्वत, वनस्पति आदि। प्रकृति का संरक्षण देशप्रेम का हिस्सा है क्योंकि प्रकृति ही देश की आत्मा है और इसके संरक्षण से हम अपनी सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को बचाते हैं।

3. “कनक-शस्य-कमलधरे!” पंक्ति भारत की कृषि संपन्नता (सोने

नीचे दी गई पंक्तियों को पढ़िए — “भारति, जय, विजयकरे! कनक-शस्य-कमलधरे!” इन पंक्तियों में कवि ने चित्रात्मक भाषा का प्रयोग करते हुए भारतभूमि का मनोरम चित्र प्रस्तुत किया है। इस कविता की कुछ अन्य विशेषताओं की सूची नीचे दी गई है। कविता में से उन विशेषताओं वाली पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए— विशेषताएँ: 1. प्रकृति का मानवीकरण 2. आलंकारिक प्रयोग 3. समस्त पद/सामासिक पद का प्रयोग 4. संस्कृतनिष्ठ भाषा प्रयोग

1. प्रकृति का मानवीकरण: "धोता शुचि चरण युगल" — यहाँ चरणों को शुद्ध और पवित्र बताया गया है, जो प्रकृति को मानवीय रूप देता है। 2. आलंकारिक प्रयोग: "कनक-शस्य-कमलधरे" — यह उपमा और समास का प्रयोग है, जो कविता को सजाता है। 3. समस्त पद/सामासिक पद का प्रयोग: "कनक-शस्य-कमलधरे" — यह समस्त पद है जिसमें कई शब्द मिलकर एक नया पद बनाते हैं। 4. संस्कृतनिष्ठ भाषा प्रयोग: "प्राण प्रणव ओंकार" — संस्कृत के शब्दों का प्रयोग कविता की भाषा को संस्कृतनिष्ठ बनाता है।

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