सर्ू ्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ | Class 9 Hindi Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन

सर्ू ्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – this guide gives you a concise, exam-ready overview of सर्ू ्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ from Class 9 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ हिंदी साहित्य के प्रमुख आधुनिक कवि थे। उनका जन्म सन् 1899 में बंगाल के महिषादल में हुआ था, जबकि वे मूलतः गढ़ाकोला (उन्नाव), उत्तर प्रदेश के निवासी थे। निराला की औपचारिक शिक्षा नौवीं कक्षा तक महिषादल में हुई, इसके बाद उन्होंने स्वाध्याय द्वारा संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेजी भाषाओं का ज्ञान प्राप्त किया। निराला की साहित्यिक यात्रा में उनकी प्रमुख काव्य रचनाएँ जैसे 'अनामिका', 'परिमल', 'गीतिका', 'कुकुरमुत्ता' और 'नए पत्ते' शामिल हैं। इसके अतिरिक्त वे उपन्यास, कहानी, आलोचना और निबंध लेखन में भी विख्यात हैं। उनकी रचनावली आठ खंडों में प्रकाशित हुई है, जिसमें दार्शनिकता, विद्रोह, क्रांति, प्रेम की तरलता और प्रकृति का विराट तथा उदात्त चित्र देखने को मिलता है। छायावादी कविताओं से अलग, निराला ने सबसे पहले मुक्त छंद का प्रयोग किया। उनकी कविताओं में उपेक्षितों और पीड़ितों के प्रति गहरी सहानुभूति मिलती है। उनका निधन सन् 1961 में हुआ। इस परिचय से हमें निराला की बहुमुखी प्रतिभा, उनकी सामाजिक चेतना और साहित्यिक योगदान की गहराई का पता चलता है।
📊 Diagram: See figure_1: 0901CH10; See figure_2: Figure on page 1; See figure_3: उनकी प्रमुख काव्य रचनाएँ हैं— अनामिका, परिमल, गीतिका, कुकुरमुत्ता और नए पत्ते। उपन्यास, कहानी, आलोचना और निबंध लेखन में भी उनकी ख्याति अविस्मरणीय है। निराला रचनावली के आठ खंडों में उनका संपूर्ण साहित्; See figure_4: Figure on page 1
🔗 Connection: यह परिचय हमें निराला की कविता 'भारति, जय, विजयकरे!' के अध्ययन के लिए तैयार करता है, जिसमें उनकी देशप्रेम की भावना और प्रकृति के चित्रण को समझा जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं? 1. “भारति, जय, विजयकरे” कविता में विशेष रूप से— (क) भारत की भौगोलिक संरचना की प्रशस्ति की गई है। (ख) भारत की सांस्कृतिक विविधता बताई गई है। (ग) भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा की गई है। (घ) भारत के खनिज पदार्थों के बारे में बताया गया है। 2. “कनक-शस्य-कमल धरे” पंक्ति का भावार्थ है— (क) भारत की धन-धान्य संपन्नता (ख) भारत की नदियों का सौंदर्य (ग) भारत के लोक-जीवन की सुंदरता (घ) भारत की सैन्य शक्ति और औद्योगिक विकास 3. समस्त विश्व में भारत के महत्व का उद्घोष करने वाली पंक्तियाँ हैं— (क) गंगा ज्योतिर्जल-कण/धवल धार हार गले (ख) गर्जितोर्मि सागर-जल/धोता शुचि चरण युगल (ग) भारति, जय, विजयकरे/कनक-शस्य-कमलधरे! (घ) ध्वनित दिशाएँ उदार/शतमुख-शतरव-मुखरे! 4. कविता की भाषा और शैली किस विशेषता से संपन्न है? (क) सरल, बोल-चाल की भाषा (ख) संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त (ग) सरस और हास्य-व्यंग्यपूर्ण (घ) संवादात्मक और विश्लेषणात्मक 5. भारत के वस्त्रों में ‘तरु-तूण-वन-लता’ और गले में ‘गंगा-धारा’ को चित्रित कर कवि किस प्रकार की चेतना का संदेश देते हैं? (क) पर्यावरणीय और सांस्कृतिक (ख) राष्ट्रीयता और देशप्रेम (ग) ऐतिहासिक और भौगोलिक (घ) सामाजिक और राजनीतिक
1. सही उत्तर है (ग) भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा की गई है। क्योंकि कविता में भारत की समृद्धि, ज्ञान और प्राकृतिक सौंदर्य की महत्ता बताई गई है। 2. सही उत्तर है (क) भारत की धन-धान्य संपन्नता। 'कनक-शस्य-कमल धरे' का अर्थ है सोने जैसी फसलें और कमल की तरह सुंदर भूमि, जो धन-धान्य की समृद्धि दर्शाता है। 3. सही उत्तर है (ग) भारति, जय, विजयकरे/कनक-शस्य-कमलधरे! क्योंकि ये पंक्तियाँ भारत के समस्त विश्व में महत्व को उद्घाटित करती हैं। 4. सही उत्तर है (ख) संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त। कविता की भ
नीचे दी गई पंक्तियों का अर्थ समझते हुए इनका भाव स्पष्ट कीजिए— (क) “लंका पदतल शतदल, गर्जितोर्मि सागर-जल धोता शुचि चरण युगल!” (ख) “प्राण प्रणव ओंकार, ध्वनित दिशाएँ उदार, शतमुख-शतरव-मुखरे!”
(क) पंक्तियों का अर्थ है कि समुद्र का जल गरजता हुआ लंका के समुद्र तट को धोता है, जो कि स्वच्छ और पवित्र चरणों का प्रतीक है। इसका भाव यह है कि भारत की भूमि पवित्र और शक्तिशाली है। (ख) इस पंक्ति का अर्थ है कि प्राण और प्रणव ओंकार की ध्वनि दिशाओं में फैल रही है, और अनेक मुखों से अनेक प्रकार के उत्सव और जयकारे हो रहे हैं। इसका भाव है कि भारत में जीवन और उत्सव की विविधता और ऊर्जा है।
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए— 1. कविता में कवि की किस भावना की अभिव्यक्ति मिलती है? 2. कविता में भारत के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किस प्रकार किया गया है? क्या आप मानते हैं कि प्रकृति का संरक्षण करना भी देशप्रेम का काम है? क्यों? 3. “कनक-शस्य-कमलधरे!” पंक्ति भारतभूमि की किन-किन विशेषताओं की ओर संकेत कर रही है? 4. “मुकुट शुभ्र हिम-तुषार” पंक्ति में हिमालय को भारत का मुकुट बताया गया है, क्यों?
1. कविता में कवि की भावना देशप्रेम, भारत की समृद्धि और उसकी सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक महत्ता की अभिव्यक्ति है। वह भारत की महानता और उसकी सुंदरता का गुणगान करता है।
2. कविता में भारत के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन बहुत ही मनोहर और चित्रात्मक भाषा में किया गया है, जैसे नदियाँ, पर्वत, वनस्पति आदि। प्रकृति का संरक्षण देशप्रेम का हिस्सा है क्योंकि प्रकृति ही देश की आत्मा है और इसके संरक्षण से हम अपनी सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को बचाते हैं।
3. “कनक-शस्य-कमलधरे!” पंक्ति भारत की कृषि संपन्नता (सोने
नीचे दी गई पंक्तियों को पढ़िए — “भारति, जय, विजयकरे! कनक-शस्य-कमलधरे!” इन पंक्तियों में कवि ने चित्रात्मक भाषा का प्रयोग करते हुए भारतभूमि का मनोरम चित्र प्रस्तुत किया है। इस कविता की कुछ अन्य विशेषताओं की सूची नीचे दी गई है। कविता में से उन विशेषताओं वाली पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए— विशेषताएँ: 1. प्रकृति का मानवीकरण 2. आलंकारिक प्रयोग 3. समस्त पद/सामासिक पद का प्रयोग 4. संस्कृतनिष्ठ भाषा प्रयोग
1. प्रकृति का मानवीकरण: "धोता शुचि चरण युगल" — यहाँ चरणों को शुद्ध और पवित्र बताया गया है, जो प्रकृति को मानवीय रूप देता है। 2. आलंकारिक प्रयोग: "कनक-शस्य-कमलधरे" — यह उपमा और समास का प्रयोग है, जो कविता को सजाता है। 3. समस्त पद/सामासिक पद का प्रयोग: "कनक-शस्य-कमलधरे" — यह समस्त पद है जिसमें कई शब्द मिलकर एक नया पद बनाते हैं। 4. संस्कृतनिष्ठ भाषा प्रयोग: "प्राण प्रणव ओंकार" — संस्कृत के शब्दों का प्रयोग कविता की भाषा को संस्कृतनिष्ठ बनाता है।
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