वाच्य परिवर्तन | Class 9 Sanskrit Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन
वाच्य परिवर्तन – this guide gives you a concise, exam-ready overview of वाच्य परिवर्तन from Class 9 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
कर्तृवाच्य
कर्तृवाच्य वह वाच्य है जिसमें क्रिया का कर्ता प्रधान होता है। इसका अर्थ है कि वाक्य में क्रिया करने वाला व्यक्ति या वस्तु स्पष्ट रूप से प्रकट होता है। संस्कृत में कर्तृवाच्य वाक्यों में कर्ता प्रथमा विभक्ति में होता है और कर्म द्वितीया विभक्ति में। क्रिया भी कर्ता के अनुसार पुरुष, लिंग और वचन में होती है। उदाहरण स्वरूप, 'रामः गृहं गच्छति' में 'रामः' कर्ता है जो प्रथमा विभक्ति में है, 'गृहम्' कर्म है जो द्वितीया विभक्ति में है और क्रिया 'गच्छति' कर्ता के अनुसार एकवचन में है। इसी प्रकार 'बालिका पाठम् पठितवती' में 'बालिका' कर्ता, 'पाठम्' कर्म और 'पठितवती' क्रिया है। कर्तृवाच्य वाक्यों में क्रिया की प्रधानता कर्ता पर होती है।
🔗 Connection: कर्तृवाच्य के बाद कर्मवाच्य की व्याख्या की जाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र. 1. उदाहरणमनुसृत्य यथानिर्दिष्टं वाच्यपरिवर्तनं कुरुत— यथा— राम: गृहं गच्छति। (कर्तृवाच्य) रामेण गृहं गम्यते। कमलया पायसम् पक्वम्। (कर्मवाच्य) कमला पायसम् पक्ववती। छात्र: हसन्ति। (भाववाच्य) छात्रै: हस्यते। i) अहं कार्यं कृतवान्। (कर्मवाच्य) ii) त्वम् पुस्तकम् पठितवान्। (कर्मवाच्य) iii) स: गायति। (भाववाच्य) iv) युवाभ्यां सुलेख: लिखित:। (कर्तृवाच्य) v) ता: रूदन्ति। (भाववाच्य) vi) मोहन: कन्दुकम् क्रीडति। (कर्तृवाच्य) vii) छात्रै: दुग्धं पीतम्। (कर्मवाच्य) viii) छात्र: हसति। (भाववाच्य) ix) मम भ्राता उद्धाने भ्रमति। (भाववाच्य) x) सैनिक: युद्धक्षेत्रं गच्छति। (कर्मवाच्य)
प्र. 1 के प्रत्येक वाक्य का वाच्य परिवर्तन इस प्रकार है:
(i) अहं कार्यं कृतवान्। (कर्मवाच्य) → मया कार्यं कृतम्।
(ii) त्वम् पुस्तकम् पठितवान्। (कर्मवाच्य) → तेन पुस्तकम् पठितम्।
(iii) स: गायति। (भाववाच्य) → सैः गायते।
(iv) युवाभ्यां सुलेख: लिखित:। (कर्तृवाच्य) → युवाभ्याम् सुलेख: लिखिताः।
(v) ता: रूदन्ति। (भाववाच्य) → ताभ्यां रुद्यते।
(vi) मोहन: कन्दुकम् क्रीडति। (कर्तृवाच्य) → मोहेन कन्दुकम् क्रीडितम्।
(vii) छात्रै: दुग्धं पीतम्। (कर्मवाच्य) → छात्रैः दुग्धं पीतं।
(viii) छात्र: हसति। (भ
प्र. 2. अधोलिखितवाक्येषु कर्तृपदे वाच्यानुसारं रिक्तस्थानानि पूर्यत— यथा— राजेन्द्र: पाटलिपुत्रं गच्छति। राजेन्द्रेण पाटलिपुत्रं गम्यते। | कर्तृवाच्य | कर्मवाच्य | | --- | --- | | i) ... रोटिकां खादति। | तेन रोटिका खाद्यते। | | ii) छात्र: ग्रन्थं पठति। | ... ग्रन्थ: पठ्यते। | | iii) ... राजभवनं गच्छति। | शकुन्तलया राजभवनं गम्यते। | | iv) दुष्यन्त: आखेटं करोति। | ... आखेट: क्रियते। | | v) ... गीतं गायति। | गायकेन गीतं गीयते। |
प्र. 2 के रिक्त स्थानों की पूर्ति इस प्रकार है:
(i) सः रोटिकां खादति। → तेन रोटिका खाद्यते।
(ii) छात्र: ग्रन्थं पठति। → छात्रेण ग्रन्थ: पठ्यते।
(iii) शकुन्तला राजभवनं गच्छति। → शकुन्तलया राजभवनं गम्यते।
(iv) दुष्यन्त: आखेटं करोति। → दुष्यन्तेन आखेट: क्रियते।
(v) गायक: गीतं गायति। → गायकेन गीतं गीयते।
प्र. 3. अधोलिखितवाक्यानां कर्मपदे परिवर्तनं कुरुत— | कर्तृवाच्य | कर्मवाच्य | | --- | --- | | i) अहं …………… पूजयामि। | मया देवः पूज्यते। | | ii) बालकः फलं खादितवान्। | बालकेन ………… खादितम्। | | iii) त्वं गृहं गच्छसि। | त्वया …………… गम्यते। | | iv) सः …………… कथितवान्। | तेन साधुः कथितः। | | v) यूयं कथां श्रुतवन्तः। | युष्माभिः …………… श्रुता। |
प्र. 3 के रिक्त स्थानों की पूर्ति इस प्रकार है:
(i) अहं देवम् पूजयामि। → मया देवः पूज्यते।
(ii) बालकः फलं खादितवान्। → बालकेन फलम् खादितम्।
(iii) त्वं गृहं गच्छसि। → त्वया गृहं गम्यते।
(iv) सः साधुं कथितवान्। → तेन साधुः कथितः।
(v) यूयं कथां श्रुतवन्तः। → युष्माभिः कथा श्रुता।
प्र. 4. अधोलिखितवाक्यानां क्रियापदे परिवर्तनं कुरुत— | कर्तृवाच्य | कर्मवाच्य | | --- | --- | | i) सः जलम् पिबति। | तेन जलम् ……………। | | ii) कपोतः आकाशे ……………। | कपोतेन आकाशे उत्पत्यते। | | iii) सुनीता आभूषणं धारयति। | सुनीतया आभूषणं …………। | | iv) नेता भाषणं करोति। | नेत्रा भाषणं ……………। | | v) सः कथां ……………। | तेन कथा श्रुता। | | vi) श्रमिकः कार्यं कृतवान्। | श्रमिकेण कार्यं ……………। | | vii) पुत्रः मातरं ……………। | पुत्रेण माता पूजिता | | viii) त्वम् आचार्यम् आदृतवान्। | त्वया आचार्यः ……………। |
प्र. 4 के रिक्त स्थानों की पूर्ति इस प्रकार है:
(i) सः जलम् पिबति। → तेन जलम् पीयते।
(ii) कपोतः आकाशे उडति। → कपोतेन आकाशे उत्पत्यते।
(iii) सुनीता आभूषणं धारयति। → सुनीतया आभूषणं धारितम्।
(iv) नेता भाषणं करोति। → नेत्रा भाषणं क्रियते।
(v) सः कथां कथयति। → तेन कथा श्रुता।
(vi) श्रमिकः कार्यं कृतवान्। → श्रमिकेण कार्यं कृतम्।
(vii) पुत्रः मातरं पूजयति। → पुत्रेण माता पूजिता।
(viii) त्वम् आचार्यम् आदृतवान्। → त्वया आचार्यः आदृतः।
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