Sanskritकक्षा 9प्रत्ययहिंदी

प्रत्यय | Class 9 Sanskrit Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

प्रत्यय – this guide gives you a concise, exam-ready overview of प्रत्यय from Class 9 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

कृत् प्रत्यय

कृत् प्रत्यय वे प्रत्यय होते हैं जो धातुओं में जुड़कर नए पद बनाते हैं, जैसे संज्ञा, विशेषण या अव्यय। कृत् प्रत्यय कई प्रकार के होते हैं, जिनमें प्रमुख हैं: क्त्वा, ल्यप्, तुमुन्, शत्, शानच्, तव्यत्, अनीयर्, यत्, तृच्, क्तिन्, प्वुल्, ल्युट् आदि।

  • क्त्वा प्रत्यय पूर्वकालिक क्रिया व्यक्त करता है, जैसे दृष्ट्वा (देखकर)।
  • ल्यप् प्रत्यय भी पूर्वकालिक क्रिया के लिए होता है, विशेषकर जब उपसर्ग लगा हो, जैसे प्रणम्य (प्रणाम करके)।
  • तुमुन् प्रत्यय निमित्तार्थक क्रिया के लिए होता है, अर्थात् 'के लिए' जैसे गन्तुम् (जाने के लिए)।
  • शत् और शानच् प्रत्यय परस्मैपदी और आत्मनेपदी धातुओं में क्रमशः 'करता हुआ' अर्थ में प्रयुक्त होते हैं।
  • क्त प्रत्यय भूतकालिक क्रिया के लिए होता है, जैसे गतः (गया)।
  • क्तवतु प्रत्यय भी भूतकालिक क्रिया के लिए होता है, परन्तु यह कर्ता अर्थ में होता है और इसके रूप तीनों लिङ्गों में चलते हैं।

कृत् प्रत्ययों के प्रयोग से क्रियाओं के भूतकाल, विशेषण, अव्यय आदि पद बनते हैं, जो वाक्यों में विभिन्न प्रकार के भाव व्यक्त करते हैं।

📊 Diagram: इस अनुभाग में कृत् प्रत्ययों के प्रकारों को दर्शाने वाली तालिका दी गई है, जिसमें प्रत्यय, उनके अर्थ और उदाहरण शब्दों का विवरण है। जैसे क्त्वा प्रत्यय के साथ धातु और बने शब्द, उनके अर्थ सहित।

🧪 Activity: अभ्यासकार्य में क्त्वा, ल्यप्, तुमुन् प्रत्ययों के योग से बने पदों को लिखना, रिक्त स्थान भरना, और वाक्य निर्माण करना शामिल है।

🔗 Connection: यह अनुभाग तद्धित प्रत्ययों के अध्ययन की ओर बढ़ता है, जहाँ संज्ञा शब्दों में प्रत्ययों के प्रयोग को समझाया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्र. 1. प्रत्ययं संयुज्य वियुज्य वा लिखत- i) दृश् + क्त्वा ii) प्रणम्य iii) उपविश्य iv) सोढुम् = v) सह् + क्त्वा = vi) आ + नी + ल्यप् =

i) दृश् + क्त्वा = दृष्ट्वा ii) प्रणम्य = प्र + नम् + ल्यप् (प्रणम्य) iii) उपविश्य = उप + विश् + ल्यप् (उपविश्य) iv) सोढुम् = सह् + तुमुन् (सोढुम्) v) सह् + क्त्वा = सहित्वा vi) आ + नी + ल्यप् = आनयित्वा

प्र. 3. उदाहरणमनुसृत्य स्थूलपदेषु धातून प्रत्ययान् च वियुज्य लिखत- यथा- बालक: गुरुं नत्वा गच्छति। नम् + क्त्वा i) सः अत्र आगत्य पठति। ii) त्वं कुत्र गत्वा क्रीडसि। iii) बालक: विहस्य वदति। iv) त्वं पुस्तकं क्रेतुम् गच्छसि। v) छात्र: पठितुं विद्यालयं गच्छति। vi) नायक: निर्देशकं द्रष्टुं गच्छति।

i) आगत्य = आ + गम् + क्त्वा ii) गत्वा = गम् + क्त्वा iii) विहस्य = वि + हस् + ल्यप् iv) क्रेतुम् = कृ + तुमुन् v) पठितुम् = पठ् + तुमुन् vi) द्रष्टुम् = दृश् + तुमुन्

प्र. 4. क्त्वाप्रत्ययस्य प्रयोगेण वाक्यानि संयोजयत- यथा- बालिका उद्यानं गच्छति। तत्र क्रीडिष्यति। बालिका उद्यानं गत्वा तत्र क्रीडिष्यति।

उत्तर: दोनों वाक्यों को क्त्वा प्रत्यय का प्रयोग करते हुए एक वाक्य में जोड़ा जाता है। उदाहरण: बालिका उद्यानं गच्छति। तत्र क्रीडिष्यति। = बालिका उद्यानं गत्वा तत्र क्रीडिष्यति।

प्र. 5. तुमुन्प्रत्ययस्य योगेन वाक्यानि संयोजयत- बालिका क्रीडिष्यति। सा उद्यानं गच्छति। बालिका क्रीडितुम् उद्यानं गच्छति। i) अहम् पठिष्यामि। अहं पुस्तकं क्रीणामि। ii) बालिका परीक्षायाम् उत्तमानि अङ्कानि प्राप्स्यति। सा परिश्रमेण पठति। iii) निशा क्रीडिष्यति। सा आपणात् कन्दुकमानयति। iv) माता भोजनं पचति। सा शाकमानयत्। v) आचार्य: पाठ्यति। सः कक्षामगच्छत्।

i) अहं पुस्तकं क्रीणितुम् पठिष्यामि। ii) बालिका उत्तमानि अङ्कानि प्राप्स्यति। सा उत्तमानि अङ्कानि प्राप्स्यति पठितुम् परिश्रमेण पठति। (सही उत्तर: बालिका उत्तमानि अङ्कानि प्राप्स्यति पठितुम् परिश्रमेण पठति।) iii) निशा कन्दुकम् आनयितुम् क्रीडिष्यति। iv) माता शाकम् आनयितुम् भोजनं पचति। v) आचार्य: कक्षां गन्तुम् पाठयति।

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