Chapter 8
Chapter 8 — अध्ययन नोट्स
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प्रत्यय
परिभाषाप्रत्यय
संस्कृत व्याकरण में प्रत्यय शब्द का अर्थ है वे शब्दांश जो किसी भी धातु या शब्द के पश्चात् जुड़कर नए शब्दों का निर्माण करते हैं। प्रत्यय शब्दों के अर्थ और रूप दोनों में परिवर्तन करते हैं। प्रत्यय मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं: कृत् प्रत्यय, तद्धित प्रत्यय, और स्त्री प्रत्यय। कृत् प्रत्यय वे होते हैं जो धातुओं में जुड़कर संज्ञा, विशेषण या अव्यय पद बनाते हैं। तद्धित प्रत्यय संज्ञा शब्दों में लगकर नए अर्थ वाले शब्द बनाते हैं। स्त्री प्रत्यय पुँल्लिङ्ग शब्दों को स्त्रीलिङ्ग में परिवर्तित करते हैं। प्रत्यय संस्कृत भाषा की शब्द रचना की आधारशिला हैं।
- प्रत्यय शब्दांश होते हैं जो मूल शब्द के बाद जुड़ते हैं।
- कृत् प्रत्यय धातुओं में जुड़ते हैं और नए पद बनाते हैं।
- तद्धित प्रत्यय संज्ञा शब्दों में लगकर अर्थ परिवर्तन करते हैं।
- स्त्री प्रत्यय पुँल्लिङ्ग शब्दों को स्त्रीलिङ्ग में बदलते हैं।
- प्रत्यय शब्दों के अर्थ और रूप दोनों को परिवर्तित करते हैं।
- 📌 प्रत्यय: शब्दांश जो मूल शब्द के बाद जुड़कर नया शब्द बनाते हैं।
- 📌 कृत् प्रत्यय: धातुओं में जुड़ने वाले प्रत्यय जो नए पद बनाते हैं।
- 📌 तद्धित प्रत्यय: संज्ञा शब्दों में लगने वाले प्रत्यय जो अर्थ बदलते हैं।
कृत् प्रत्यय
व्याख्याकृत् प्रत्यय
कृत् प्रत्यय वे प्रत्यय होते हैं जो धातुओं में जुड़कर नए पद बनाते हैं, जैसे संज्ञा, विशेषण या अव्यय। कृत् प्रत्यय कई प्रकार के होते हैं, जिनमें प्रमुख हैं: क्त्वा, ल्यप्, तुमुन्, शत्, शानच्, तव्यत्, अनीयर्, यत्, तृच्, क्तिन्, प्वुल्, ल्युट् आदि। - क्त्वा प्रत्यय पूर्वकालिक क्रिया व्यक्त करता है, जैसे दृष्ट्वा (देखकर)। - ल्यप् प्रत्यय भी पूर्वकालिक क्रिया के लिए होता है, विशेषकर जब उपसर्ग लगा हो, जैसे प्रणम्य (प्रणाम करके)। - तुमुन् प्रत्यय निमित्तार्थक क्रिया के लिए होता है, अर्थात् 'के लिए' जैसे गन्तुम् (जाने के लिए)। - शत् और शानच् प्रत्यय परस्मैपदी और आत्मनेपदी धातुओं में क्रमशः 'करता हुआ' अर्थ में प्रयुक्त होते हैं। - क्त प्रत्यय भूतकालिक क्रिया के लिए होता है, जैसे गतः (गया)। - क्तवतु प्रत्यय भी भूतकालिक क्रिया के लिए होता है, परन्तु यह कर्ता अर्थ में होता है और इसके रूप तीनों लिङ्गों में चलते हैं। कृत् प्रत्ययों के प्रयोग से क्रियाओं के भूतकाल, विशेषण, अव्यय आदि पद बनते हैं, जो वाक्यों में विभिन्न प्रकार के भाव व्यक्त करते हैं।
- कृत् प्रत्यय धातुओं में जुड़कर नए पद बनाते हैं।
- क्त्वा और ल्यप् प्रत्यय पूर्वकालिक क्रिया दर्शाते हैं।
- तुमुन् प्रत्यय क्रिया के प्रयोजन के लिए होता है।
- शत्-शानच् प्रत्यय 'करता हुआ' अर्थ में विशेषण बनाते हैं।
- क्त और क्तवतु प्रत्यय भूतकालिक क्रिया के लिए होते हैं।
- 📌 क्त्वा प्रत्यय: पूर्वकालिक क्रिया दर्शाने वाला प्रत्यय।
- 📌 ल्यप् प्रत्यय: उपसर्गयुक्त धातुओं में पूर्वकालिक क्रिया के लिए।
- 📌 तुमुन् प्रत्यय: क्रिया के प्रयोजन के लिए।
शतू-शानच् प्रत्यय
व्याख्याशतू-शानच् प्रत्यय
शतू और शानच् प्रत्यय परस्मैपदी और आत्मनेपदी धातुओं में 'करता हुआ' अर्थ व्यक्त करने के लिए प्रयोग होते हैं। शतू प्रत्यय परस्मैपदी धातुओं में 'अत्' रूप में जुड़ता है, जबकि शानच् प्रत्यय आत्मनेपदी धातुओं में 'मान' रूप में जुड़ता है। ये प्रत्यय विशेषण रू
अभ्यास प्रश्न — Chapter 8
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.प्र. 1. प्रत्ययं संयुज्य वियुज्य वा लिखत- i) दृश् + क्त्वा ii) प्रणम्य iii) उपविश्य iv) सोढुम् = v) सह् + क्त्वा = vi) आ + नी + ल्यप् =
उत्तर:
i) दृश् + क्त्वा = दृष्ट्वा ii) प्रणम्य = प्र + नम् + ल्यप् (प्रणम्य) iii) उपविश्य = उप + विश् + ल्यप् (उपविश्य) iv) सोढुम् = सह् + तुमुन् (सोढुम्) v) सह् + क्त्वा = सहित्वा vi) आ + नी + ल्यप् = आनयित्वा
व्याख्या:
प्रत्यय जोड़ने या अलग करने के लिए: - 'क्त्वा' प्रत्यय जोड़ने पर धातु के साथ 'क्त्वा' जुड़ता है, जैसे दृश् + क्त्वा = दृष्ट्वा। - 'ल्यप्' प्रत्यय जोड़ने पर धातु के साथ 'ल्यप्' जुड़ता है, जैसे प्र + नम् + ल्यप् = प्रणम्य। - 'तुमुन्' प्रत्यय जोड़ने पर धातु के साथ 'तुमुन्' जुड़ता है, जैसे सह् + तुमुन् = सोढुम्। - संयोजन या वियोजन के अनुसार प्रत्यय और धातु को अलग या जोड़कर लिखना है।
Q2.प्र. 3. उदाहरणमनुसृत्य स्थूलपदेषु धातून प्रत्ययान् च वियुज्य लिखत- यथा- बालक: गुरुं नत्वा गच्छति। नम् + क्त्वा i) सः अत्र आगत्य पठति। ii) त्वं कुत्र गत्वा क्रीडसि। iii) बालक: विहस्य वदति। iv) त्वं पुस्तकं क्रेतुम् गच्छसि। v) छात्र: पठितुं विद्यालयं गच्छति। vi) नायक: निर्देशकं द्रष्टुं गच्छति।
उत्तर:
i) आगत्य = आ + गम् + क्त्वा ii) गत्वा = गम् + क्त्वा iii) विहस्य = वि + हस् + ल्यप् iv) क्रेतुम् = कृ + तुमुन् v) पठितुम् = पठ् + तुमुन् vi) द्रष्टुम् = दृश् + तुमुन्
व्याख्या:
प्रत्यय और धातु को अलग-अलग लिखना है: - आगत्य = आ (उपसर्ग) + गम् (धातु) + क्त्वा (प्रत्यय) - गत्वा = गम् + क्त्वा - विहस्य = वि + हस् + ल्यप् - क्रेतुम् = कृ + तुमुन् - पठितुम् = पठ् + तुमुन् - द्रष्टुम् = दृश् + तुमुन्
Q3.प्र. 4. क्त्वाप्रत्ययस्य प्रयोगेण वाक्यानि संयोजयत- यथा- बालिका उद्यानं गच्छति। तत्र क्रीडिष्यति। बालिका उद्यानं गत्वा तत्र क्रीडिष्यति।
उत्तर:
उत्तर: दोनों वाक्यों को क्त्वा प्रत्यय का प्रयोग करते हुए एक वाक्य में जोड़ा जाता है। उदाहरण: बालिका उद्यानं गच्छति। तत्र क्रीडिष्यति। = बालिका उद्यानं गत्वा तत्र क्रीडिष्यति।
व्याख्या:
दो वाक्यों को जोड़ने के लिए पहले वाक्य की क्रिया में 'क्त्वा' प्रत्यय जोड़कर एक वाक्य बनाते हैं।
Q4.प्र. 5. तुमुन्प्रत्ययस्य योगेन वाक्यानि संयोजयत- बालिका क्रीडिष्यति। सा उद्यानं गच्छति। बालिका क्रीडितुम् उद्यानं गच्छति। i) अहम् पठिष्यामि। अहं पुस्तकं क्रीणामि। ii) बालिका परीक्षायाम् उत्तमानि अङ्कानि प्राप्स्यति। सा परिश्रमेण पठति। iii) निशा क्रीडिष्यति। सा आपणात् कन्दुकमानयति। iv) माता भोजनं पचति। सा शाकमानयत्। v) आचार्य: पाठ्यति। सः कक्षामगच्छत्।
उत्तर:
i) अहं पुस्तकं क्रीणितुम् पठिष्यामि। ii) बालिका उत्तमानि अङ्कानि प्राप्स्यति। सा उत्तमानि अङ्कानि प्राप्स्यति पठितुम् परिश्रमेण पठति। (सही उत्तर: बालिका उत्तमानि अङ्कानि प्राप्स्यति पठितुम् परिश्रमेण पठति।) iii) निशा कन्दुकम् आनयितुम् क्रीडिष्यति। iv) माता शाकम् आनयितुम् भोजनं पचति। v) आचार्य: कक्षां गन्तुम् पाठयति।
व्याख्या:
दो वाक्यों को जोड़ने के लिए मुख्य क्रिया में 'तुमुन्' प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है। - पठिष्यामि + क्रीणामि → क्रीणितुम् पठिष्यामि - प्राप्स्यति + पठति → प्राप्स्यति पठितुम् पठति - क्रीडिष्यति + आनयति → आनयितुम् क्रीडिष्यति - पचति + आनयति → आनयितुम् पचति - पाठयति + गच्छति → गन्तुम् पाठयति
Q5.प्र. 1. प्रत्ययान् संयुज्य यथानिर्दिष्टं लिखत- i) पठ् + शतृ (पुं.) ii) लिख् + शतृ (स्त्री.) iii) सेव् + शानच् (स्त्री.) iv) सह् + शानच् (पुं.) v) वृत् + शानच् (पुं.) vi) हस् + शतृ (स्त्री.)
उत्तर:
i) पठ् + शतृ (पुं.) = पठन् (पठन् बालकः) ii) लिख् + शतृ (स्त्री.) = लिखन्ती (लिखन्ती बालिका) iii) सेव् + शानच् (स्त्री.) = सेवमाना (सेवमाना कन्या) iv) सह् + शानच् (पुं.) = सहमानः (सहमानः छात्रः) v) वृत् + शानच् (पुं.) = वर्तमानः (वर्तमानः पुरुषः) vi) हस् + शतृ (स्त्री.) = हसन्ती (हसन्ती बालिका)
व्याख्या:
प्रत्यय जोड़ने के लिए: - शतृ प्रत्यय जोड़ने पर धातु के साथ 'न्' या 'न्ती' (स्त्रीलिंग) जुड़ता है। - शानच् प्रत्यय जोड़ने पर 'मानः' (पुं.) या 'माना' (स्त्री.) जुड़ता है। i) पठ् + शतृ = पठन् (पुं.) ii) लिख् + शतृ = लिखन्ती (स्त्री.) iii) सेव् + शानच् = सेवमाना (स्त्री.) iv) सह् + शानच् = सहमानः (पुं.) v) वृत् + शानच् = वर्तमानः (पुं.) vi) हस् + शतृ = हसन्ती (स्त्री.)
Q6.प्र. 2. यथानिर्दिष्टं परिवर्तनं कृत्वा वाक्याग्रे पुनः लिखत यथा- लिखन् बालक: पठति (स्त्रीलिङ्ग) लिखन्ती बालिका पठति। i) क्रीडन् बालक: पत्ति। (स्त्रीलिङ्गे) ii) उपविशन् छात्र: हसति। (स्त्रीलिङ्गे) iii) धावन्ती बालिका क्रन्दति। (पुल्लिङ्गे) iv) सः चलन् खादति। (स्त्रीलिङ्गे) v) अहम् नृत्यन् न गायामि। (स्त्रीलिङ्गे) vi) त्वम् याचमाना न शोभसे। (पुल्लिङ्गे) vii) ते गच्छन्तः वार्तां कुर्वन्ति। (स्त्रीलिङ्गे) viii) ते धावन्त्यौ भ्रमतः। (पुल्लिङ्गे)
उत्तर:
i) क्रीडन्ती बालिका पत्ति। ii) उपविशन्ती छात्रा हसति। iii) धावन् बालकः क्रन्दति। iv) सा चलन्ती खादति। v) अहम् नृत्यन्ती न गायामि। vi) त्वम् याचमानः न शोभसे। vii) ताः गच्छन्त्यः वार्तां कुर्वन्ति। viii) ते धावन्तौ भ्रमतः।
व्याख्या:
प्रत्यय के अनुसार लिंग परिवर्तन: - पुल्लिंग में 'न्' या 'न्तः', स्त्रीलिंग में 'न्ती', 'न्त्यः' आदि प्रयोग होता है। i) क्रीडन् (पुं.) → क्रीडन्ती (स्त्री.) ii) उपविशन् (पुं.) → उपविशन्ती (स्त्री.) iii) धावन्ती (स्त्री.) → धावन् (पुं.) iv) चलन् (पुं.) → चलन्ती (स्त्री.) v) नृत्यन् (पुं.) → नृत्यन्ती (स्त्री.) vi) याचमाना (स्त्री.) → याचमानः (पुं.) vii) गच्छन्तः (पुं. बहुवचन) → गच्छन्त्यः (स्त्री. बहुवचन) viii) धावन्त्यौ (स्त्री. द्विवचन) → धावन्तौ (पुं. द्विवचन)
Q7.प्र. 3. शतृप्रत्ययान्तस्य गच्छत्, गच्छन्ती शब्दयो: रूपाणि दृष्ट्वा पठत्, लिखत्, पठन्ती, लिखन्ती च इत्यादीनां शब्दानां रूपलेखनस्य
उत्तर:
गच्छत् (पुं.) के रूप: एकवचन: गच्छन् द्विवचन: गच्छन्तौ बहुवचन: गच्छन्तः गच्छन्ती (स्त्री.) के रूप: एकवचन: गच्छन्ती द्विवचन: गच्छन्त्यौ बहुवचन: गच्छन्त्यः लिखत् (पुं.) के रूप: एकवचन: लिखन् द्विवचन: लिखन्तौ बहुवचन: लिखन्तः लिखन्ती (स्त्री.) के रूप: एकवचन: लिखन्ती द्विवचन: लिखन्त्यौ बहुवचन: लिखन्त्यः पठन्ती (स्त्री.) के रूप: एकवचन: पठन्ती द्विवचन: पठन्त्यौ बहुवचन: पठन्त्यः
व्याख्या:
शतृ प्रत्ययान्त शब्दों के रूप: - पुल्लिंग: एकवचन 'न्', द्विवचन 'न्तौ', बहुवचन 'न्तः' - स्त्रीलिंग: एकवचन 'न्ती', द्विवचन 'न्त्यौ', बहुवचन 'न्त्यः' उदाहरण: गच्छन् (एकवचन), गच्छन्तौ (द्विवचन), गच्छन्तः (बहुवचन) गच्छन्ती (एकवचन), गच्छन्त्यौ (द्विवचन), गच्छन्त्यः (बहुवचन) इसी प्रकार लिखन्, लिखन्ती, पठन्ती आदि के रूप लिखें।
Q8.प्र. 5. उदाहरणमनुसृत्य शतृशानच्प्रत्ययौ प्रयुज्य वाक्यानि संयोजयत- यथा- बालिका गच्छति/सा क्रीडति। no बाति गच्छन्ती बालिका क्रीडति। i) बालक: पठति। सः पाठं स्मरति। ii) शिशु: चलती। सः हसति। iii) रमा पठति। सा लिखति। iv) साधु: उपदिशति। / सः ज्ञानवार्तां करोति। v) याचक: याचते। सः मार्गे चलति।
उत्तर:
i) गच्छन्त: बालक: पाठं स्मरति। ii) चलन्त: शिशु: हसति। iii) पठन्ती रमा लिखति। iv) उपदिशन्त: साधु: ज्ञानवार्तां करोति। v) याचन्त: याचक: मार्गे चलति।
व्याख्या:
शतृशानच्प्रत्यय का प्रयोग करके वाक्य संयोजन: i) 'गच्छन्त:' का प्रयोग बालक के लिए किया गया है। ii) 'चलन्त:' का प्रयोग शिशु के लिए किया गया है। iii) 'पठन्ती' का प्रयोग रमा के लिए किया गया है। iv) 'उपदिशन्त:' का प्रयोग साधु के लिए किया गया है। v) 'याचन्त:' का प्रयोग याचक के लिए किया गया है।