Sanskritकक्षा 9उपसर्गहिंदी

उपसर्ग | Class 9 Sanskrit Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन

उपसर्ग – this guide gives you a concise, exam-ready overview of उपसर्ग from Class 9 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

उपसर्गों के नियम और संधि

उपसर्गों के प्रयोग में कुछ विशेष नियम और संधि के नियम लागू होते हैं। उपसर्ग और धातु के मेल से बनने वाले क्रियापदों में संधि नियमों का पालन आवश्यक होता है। उदाहरण के लिए, जब उपसर्ग 'अनु' और धातु 'गम्' के रूप 'अगच्छत्' का संयोजन होता है, तो यण् संधि के अनुसार 'अन्वगच्छत्' या 'अनुगच्छत्' बनता है। इसी प्रकार विभिन्न लकारों (कालों) में उपसर्गयुक्त धातुरूपों का निर्माण संधि नियमों के अनुसार होता है। यह नियम शब्दों के उच्चारण को सरल और स्पष्ट बनाते हैं। इस प्रकार उपसर्गों के प्रयोग में संधि नियमों का ज्ञान आवश्यक है ताकि शब्दों का सही निर्माण और प्रयोग हो सके।

📊 Diagram: Table on page 3 (7×3)

🔗 Connection: यह अनुभाग उपसर्गों के प्रयोग और अभ्यास की ओर ले जाता है जहाँ छात्रों को उपसर्गों के प्रयोग का व्यावहारिक अभ्यास कराया जाता है।

Table on page 3 (7×3)

लकारधातुरूपउपसर्ग + धातुरूप
लट् गम्गच्छतिअनुगच्छति
लूट्गमिष्यतिअनुगमिष्यति
लड़्अगच्छत्अनुअगच्छत् - अन्वगच्छत्
(यण् सन्धि)
लोट्गच्छतुअनुगच्छतु
विधिलिड्गच्छेत्अनुगच्छेत्

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्र.1. अधोलिखितेषु पदेषु उपसर्गान् धातून् च पृथक् कृत्वा लिखत— | | उपसर्ग | धातु | क्रियापद | | --- | --- | --- | --- | | i) उत्तिष्ठतु | ... | ... | ... | | ii) निरगच्छन् | ... | ... | ... | | iii) निस्सरतु | ... | ... | ... | | iv) संवदन्ति | ... | ... | ... | | v) प्रत्यवद्त् | ... | ... | ... | | vi) सुशोभते | ... | ... | ... | | vii) विशिष्ट्यते | ... | ... | ... | | viii) अन्वकरोत् | ... | ... | ... | | ix) प्रसीदामि | ... | ... | ... | | x) अवागच्छत् | ... | ... | ... | | xi) उपविशाम: | ... | ... | ... | | xii) उत्थास्याम: | ... | ... | ... | | xiii) उन्नयनम् | ... | ... | ... | | xiv) अपाकुर्वन् | ... | ... | ... | | xv) विजयते | ... | ... | ... | | xvi) परितुष्यति | ... | ... | ... |

प्रत्येक पद में उपसर्ग, धातु और क्रियापद को पृथक् करना है। उदाहरण स्वरूप:

(i) उत्तिष्ठतु

  • उपसर्ग: उत्
  • धातु: स्था
  • क्रियापद: उत्तिष्ठतु

(ii) निरगच्छन्

  • उपसर्ग: नि:र्
  • धातु: गम्
  • क्रियापद: निरगच्छन्

(iii) निस्सरतु

  • उपसर्ग: नि:स्
  • धातु: सर्
  • क्रियापद: निस्सरतु

(iv) संवदन्ति

  • उपसर्ग: सम्
  • धातु: वद्
  • क्रियापद: संवदन्ति

(v) प्रत्यवद्त्

  • उपसर्ग: प्रति
  • धातु: वद्
  • क्रियापद: प्रत्यवद्त्

(vi) सुशोभते

  • उपसर्ग: सु
  • धातु: शोभ्
  • क्रियापद: सुशोभते

(vii) विशिष्ट्यते

  • उपसर्ग: वि
  • धातु
प्र.2. कोष्ठकात् शुद्धपदं चित्वा रिक्तस्थाने लिखत— i) हे प्रभो ! मयि ... । (प्रासीदतु/प्रसीदतु) ii) गुरु: शिष्यस्य अज्ञानम् ... । (उपहरति/अपहरति) iii) वानरा: जनान् ... । (अनुकुर्वन्ति/अन्वकुर्वन्ति) iv) अहं संस्कृतम् ... । (अवजानामि/अवाजानामि) v) ... सत्यम् एव वदनीयम्। (आजीवनम्/आजीवन:) vi) अध्यापक: प्रश्नान् पृच्छति। छात्रा: ... । (प्रतिवदन्ति/ संवदन्ति) vii) कामात् क्रोध: ______________ । (पराभवति/उद्भवति) [Page 5] viii) सभायाम् विद्वांस: एव ... । (सुशोभन्ते/सुशोभन्ति) ix) चौर: रात्रौ धनम् ... । (व्यहरत्/अहरत्) x) माता पुत्र: च परस्परम् ... । (प्रतिवदत:/संवदत:) xi) गुरु: आश्रमात् ... । (प्रविशति/निर्गच्छति) xii) नागरिका: एव स्वदेशम् ... । (उद्द्यन्ति/उन्न्यन्ति) xiii) वयं चलचित्रं द्रष्टुम् अत्र ... । (अवागच्छाम/ आगच्छाम) xiv) माता पुत्रम् ... । (संस्करोति/समकरोति) xv) नदी पर्वतात् ... । (प्रवहति/उद्द्वत)

i) प्रसीदतु

  • 'प्रसीदतु' शुद्ध पद है क्योंकि 'प्रसीदतु' का अर्थ होता है 'संतुष्ट हो'। 'प्रासीदतु' गलत है।

ii) अपहरति

  • 'अपहरति' शुद्ध है जिसका अर्थ है 'ले जाना'। 'उपहरति' गलत है।

iii) अनुकुर्वन्ति

  • 'अनुकुर्वन्ति' शुद्ध है, जिसका अर्थ है 'अनुगमन करना'। 'अन्वकुर्वन्ति' गलत है।

iv) अवजानामि

  • 'अवजानामि' शुद्ध है, जिसका अर्थ है 'अवज्ञा करना'। 'अवाजानामि' गलत है।

v) आजीवनम्

  • 'आजीवनम्' शुद्ध है, जिसका अर्थ है 'जीवन भर'। 'आजीवन:' गलत है क्योंकि ':' पुरुषवाचक है।

vi) प्रतिवदन्ति

  • 'प्रतिवदन्ति' श
प्र. 3. i) हार:, योग: इति शब्दाभ्यां सह अधोलिखितान् उपसर्गान् संयुज्य प्रत्येक पद्द्यस्य निर्माणं कुरुत। निर्मितै: पदै: च सार्थकवाक्यानि रचयत— उपसर्गा:— आ, वि, प्र, सु, सम्। ii) 'भू' ह, इति एताभ्याम् धातुभ्यां प्राक् अधोलिखितान् उपसर्गान् संयुज्य प्रत्येक पद्द्यस्य निर्माणं कुरुत। निर्मितै: पदै: च सार्थकवाक्यानि रचयत— उपसर्गा:— प्र, अनु, सम्, अप, दुर्।

i) हार:, योग: शब्दाभ्यां उपसर्गान् संयोज्य पद निर्माण:

उपसर्गाः - आ, वि, प्र, सु, सम्

  • आहारः (आ + हारः): भोजन या ग्रहण
  • विहारः (वि + हारः): भ्रमण, घूमना
  • प्रहारः (प्र + हारः): हमला
  • सुहारः (सु + हारः): अच्छा ग्रहण, शुभ ग्रहण
  • समहारः (सम् + हारः): समाहार, एकत्रीकरण

सार्थकवाक्य उदाहरण:

  • आहारः आवश्यकः अस्ति।
  • बालकः विहारं कुर्वन्ति।
  • सैनिकाः प्रहारं कुर्वन्ति।
  • सुहारः भोजनं स्वादिष्टं करोति।
  • समहारः क्रियते तदा कार्यं सिद्ध्यति।

ii) 'भू' ह् धातुभ्यां उपसर्गान् संयोज्य पद निर्माण:

उपस

संस्कृत में उपसर्ग का क्या अर्थ है और उपसर्ग शब्दों के अर्थ में किस प्रकार परिवर्तन करते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

उपसर्ग वे शब्दांश होते हैं जो धातु रूपों या धातुओं से बने शब्दों के पूर्व में लगाकर उनके अर्थ में परिवर्तन करते हैं। उपसर्गों के जुड़ने से शब्दों के अर्थ में व्यापक और विशिष्ट परिवर्तन आता है। उदाहरण के लिए, 'हार' का अर्थ है माला, परन्तु 'प्र' उपसर्ग लगने पर 'प्रहार' बनता है जिसका अर्थ होता है मारना। इसी प्रकार 'आहार' का अर्थ भोजन होता है।

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