Chapter 6
Chapter 6 — अध्ययन नोट्स
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उपसर्ग
परिभाषाउपसर्ग
संस्कृत व्याकरण में उपसर्ग का अर्थ है वे शब्दांश जो किसी धातु रूप या धातु से बने शब्द के पूर्व में लगाकर उसके अर्थ में परिवर्तन करते हैं। उपसर्ग स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं होते, वे केवल धातु के साथ मिलकर नए अर्थ वाले शब्द बनाते हैं। उपसर्गों के जुड़ने से शब्द का मूल अर्थ बदल जाता है और नए भाव, दिशा, समय, संख्या या स्थिति का बोध होता है। उदाहरण के लिए, 'हार' शब्द का अर्थ है माला, परन्तु जब इसमें 'प्र' उपसर्ग जुड़ता है तो 'प्रहार' बनता है जिसका अर्थ होता है मारना। इसी प्रकार 'आहार' का अर्थ भोजन होता है, 'संहार' का अर्थ नष्ट करना, 'विहार' का अर्थ घूमना-फिरना, और 'परिहार' का अर्थ सुधार करना या त्याग करना होता है। इस प्रकार उपसर्ग शब्दों के अर्थ को व्यापक और विशिष्ट बनाते हैं। उपसर्ग शब्द निर्माण की प्रक्रिया में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- उपसर्ग वे शब्दांश हैं जो धातु रूपों के पूर्व लगते हैं।
- उपसर्ग स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं होते, वे धातु के साथ मिलकर अर्थ बदलते हैं।
- उपसर्गों के जुड़ने से शब्दों के अर्थ में परिवर्तन होता है।
- उदाहरण: हार + प्र = प्रहार (मारना), हार + आ = आहार (भोजन)।
- उपसर्ग शब्दों के भाव, दिशा, समय, संख्या या स्थिति को प्रभावित करते हैं।
- 📌 उपसर्ग: धातु रूपों के पूर्व लगने वाले शब्दांश जो अर्थ में परिवर्तन करते हैं।
- 📌 धातु: संस्कृत क्रिया का मूल रूप।
- 📌 धातु रूप: धातु के विभिन्न रूप जो क्रियापद निर्माण करते हैं।
उपसर्गप्रयोगेण शब्दनिर्माणम्
अवधारणाउपसर्गप्रयोगेण शब्दनिर्माणम्
संस्कृत में उपसर्गों के प्रयोग से नए शब्द बनते हैं जो धातु के अर्थ को परिवर्तित या विस्तारित करते हैं। उपसर्गों का प्रयोग धातु के पूर्व में किया जाता है और इससे बने शब्दों को उपसर्गयुक्त क्रियापद कहा जाता है। उदाहरण स्वरूप— 'प्र' उपसर्ग लगने पर 'प्रभवति', 'प्रकर्ष:', 'प्रयत्न:' और 'प्रतिष्ठा' जैसे शब्द बनते हैं। इसी प्रकार 'पर' उपसर्ग से 'पराजयते', 'पराभवति' शब्द बनते हैं। 'अप' उपसर्ग से 'अपहरति', 'अपकरोति' और 'सम्' उपसर्ग से 'संस्करोति', 'सञ्चच्छते' जैसे शब्द बनते हैं। इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि उपसर्ग धातु के मूल अर्थ में विभिन्न प्रकार के भाव, क्रिया के प्रकार, दिशा, समय आदि का संकेत देते हैं। उपसर्गों के प्रयोग से शब्दों का अर्थ और भी विशिष्ट और विस्तृत हो जाता है।
- उपसर्गों के प्रयोग से नए शब्द बनते हैं।
- ये शब्द धातु के अर्थ को परिवर्तित या विस्तारित करते हैं।
- उपसर्ग धातु के पूर्व लगते हैं।
- उपसर्गयुक्त शब्दों को उपसर्गयुक्त क्रियापद कहते हैं।
- उदाहरण: प्र + भवति = प्रभवति, पर + जयते = पराजयते।
- 📌 उपसर्गयुक्त क्रियापद: उपसर्ग और धातु के संयोजन से बने क्रियापद।
- 📌 धातु: क्रिया का मूल रूप।
व्याकरणवीथि: उपसर्गों की सूची एवं उनके प्रयोग
व्याख्याव्याकरणवीथि: उपसर्गों की सूची एवं उनके प्रयोग
इस भाग में संस्कृत के प्रमुख उपसर्गों की सूची दी गई है, जिनका प्रयोग विभिन्न धातुओं के साथ होता है और जिनसे बने शब्दों के अर्थ में परिवर्तन आता है। प्रत्येक उपसर्ग के साथ उसके प्रयोग के उदाहरण भी प्रस्तुत किए गए हैं। उदाहरण के लिए— 'अनु' उपसर्ग से बन
अभ्यास प्रश्न — Chapter 6
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.प्र.1. अधोलिखितेषु पदेषु उपसर्गान् धातून् च पृथक् कृत्वा लिखत— | | उपसर्ग | धातु | क्रियापद | | --- | --- | --- | --- | | i) उत्तिष्ठतु | ... | ... | ... | | ii) निरगच्छन् | ... | ... | ... | | iii) निस्सरतु | ... | ... | ... | | iv) संवदन्ति | ... | ... | ... | | v) प्रत्यवद्त् | ... | ... | ... | | vi) सुशोभते | ... | ... | ... | | vii) विशिष्ट्यते | ... | ... | ... | | viii) अन्वकरोत् | ... | ... | ... | | ix) प्रसीदामि | ... | ... | ... | | x) अवागच्छत् | ... | ... | ... | | xi) उपविशाम: | ... | ... | ... | | xii) उत्थास्याम: | ... | ... | ... | | xiii) उन्नयनम् | ... | ... | ... | | xiv) अपाकुर्वन् | ... | ... | ... | | xv) विजयते | ... | ... | ... | | xvi) परितुष्यति | ... | ... | ... |
उत्तर:
प्रत्येक पद में उपसर्ग, धातु और क्रियापद को पृथक् करना है। उदाहरण स्वरूप: (i) उत्तिष्ठतु - उपसर्ग: उत् - धातु: स्था - क्रियापद: उत्तिष्ठतु (ii) निरगच्छन् - उपसर्ग: नि:र् - धातु: गम् - क्रियापद: निरगच्छन् (iii) निस्सरतु - उपसर्ग: नि:स् - धातु: सर् - क्रियापद: निस्सरतु (iv) संवदन्ति - उपसर्ग: सम् - धातु: वद् - क्रियापद: संवदन्ति (v) प्रत्यवद्त् - उपसर्ग: प्रति - धातु: वद् - क्रियापद: प्रत्यवद्त् (vi) सुशोभते - उपसर्ग: सु - धातु: शोभ् - क्रियापद: सुशोभते (vii) विशिष्ट्यते - उपसर्ग: वि - धातु: शि - क्रियापद: विशिष्ट्यते (viii) अन्वकरोत् - उपसर्ग: अनु - धातु: कृ - क्रियापद: अन्वकरोत् (ix) प्रसीदामि - उपसर्ग: प्र - धातु: सीद् - क्रियापद: प्रसीदामि (x) अवागच्छत् - उपसर्ग: अव - धातु: गम् - क्रियापद: अवागच्छत् (xi) उपविशाम: - उपसर्ग: उप - धातु: विश् - क्रियापद: उपविशाम: (xii) उत्थास्याम: - उपसर्ग: उत् - धातु: थम् - क्रियापद: उत्थास्याम: (xiii) उन्नयनम् - उपसर्ग: उन् - धातु: नय् - क्रियापद: उन्नयनम् (xiv) अपाकुर्वन् - उपसर्ग: अप - धातु: कृ - क्रियापद: अपाकुर्वन् (xv) विजयते - उपसर्ग: वि - धातु: जय् - क्रियापद: विजयते (xvi) परितुष्यति - उपसर्ग: परि - धातु: तुष् - क्रियापद: परितुष्यति इस प्रकार प्रत्येक पद में उपसर्ग, धातु और संपूर्ण क्रियापद को पृथक् किया जाता है।
व्याख्या:
प्रत्येक क्रियापद में उपसर्ग और धातु को पहचानना आवश्यक है। उपसर्ग वह भाग होता है जो धातु के पूर्व जुड़ा होता है और क्रिया के अर्थ को परिवर्तित करता है। धातु वह मूल क्रिया होती है। क्रियापद में उपसर्ग और धातु के संयोजन से नया अर्थ बनता है। उदाहरण स्वरूप 'उत्तिष्ठतु' में 'उत्' उपसर्ग है और 'स्था' धातु। इसी प्रकार अन्य पदों में भी उपसर्ग और धातु को अलग-अलग पहचान कर लिखना होता है।
Q2.प्र.2. कोष्ठकात् शुद्धपदं चित्वा रिक्तस्थाने लिखत— i) हे प्रभो ! मयि ... । (प्रासीदतु/प्रसीदतु) ii) गुरु: शिष्यस्य अज्ञानम् ... । (उपहरति/अपहरति) iii) वानरा: जनान् ... । (अनुकुर्वन्ति/अन्वकुर्वन्ति) iv) अहं संस्कृतम् ... । (अवजानामि/अवाजानामि) v) ... सत्यम् एव वदनीयम्। (आजीवनम्/आजीवन:) vi) अध्यापक: प्रश्नान् पृच्छति। छात्रा: ... । (प्रतिवदन्ति/ संवदन्ति) vii) कामात् क्रोध: ______________ । (पराभवति/उद्भवति) [Page 5] viii) सभायाम् विद्वांस: एव ... । (सुशोभन्ते/सुशोभन्ति) ix) चौर: रात्रौ धनम् ... । (व्यहरत्/अहरत्) x) माता पुत्र: च परस्परम् ... । (प्रतिवदत:/संवदत:) xi) गुरु: आश्रमात् ... । (प्रविशति/निर्गच्छति) xii) नागरिका: एव स्वदेशम् ... । (उद्द्यन्ति/उन्न्यन्ति) xiii) वयं चलचित्रं द्रष्टुम् अत्र ... । (अवागच्छाम/ आगच्छाम) xiv) माता पुत्रम् ... । (संस्करोति/समकरोति) xv) नदी पर्वतात् ... । (प्रवहति/उद्द्वत)
उत्तर:
i) प्रसीदतु - 'प्रसीदतु' शुद्ध पद है क्योंकि 'प्रसीदतु' का अर्थ होता है 'संतुष्ट हो'। 'प्रासीदतु' गलत है। ii) अपहरति - 'अपहरति' शुद्ध है जिसका अर्थ है 'ले जाना'। 'उपहरति' गलत है। iii) अनुकुर्वन्ति - 'अनुकुर्वन्ति' शुद्ध है, जिसका अर्थ है 'अनुगमन करना'। 'अन्वकुर्वन्ति' गलत है। iv) अवजानामि - 'अवजानामि' शुद्ध है, जिसका अर्थ है 'अवज्ञा करना'। 'अवाजानामि' गलत है। v) आजीवनम् - 'आजीवनम्' शुद्ध है, जिसका अर्थ है 'जीवन भर'। 'आजीवन:' गलत है क्योंकि ':' पुरुषवाचक है। vi) प्रतिवदन्ति - 'प्रतिवदन्ति' शुद्ध है, जिसका अर्थ है 'उत्तर देना'। 'संवदन्ति' का अर्थ 'संवाद करना' है, जो यहाँ उपयुक्त नहीं। vii) उद्भवति - 'उद्भवति' शुद्ध है, जिसका अर्थ है 'उत्पन्न होना'। 'पराभवति' का अर्थ 'पराजित होना' है, जो यहाँ उपयुक्त नहीं। viii) सुशोभन्ते - 'सुशोभन्ते' शुद्ध है, जिसका अर्थ है 'सुंदर लगना'। 'सुशोभन्ति' गलत है क्योंकि 'सुशोभन्ते' बहुवचन में सही रूप है। ix) अहरत् - 'अहरत्' शुद्ध है, जिसका अर्थ है 'चुराना'। 'व्यहरत्' गलत है। x) संवदत: - 'संवदत:' शुद्ध है, जिसका अर्थ है 'संवाद करता है'। 'प्रतिवदत:' गलत है। xi) निर्गच्छति - 'निर्गच्छति' शुद्ध है, जिसका अर्थ है 'बाहर निकलना'। 'प्रविशति' का अर्थ 'अंदर जाना' है, जो यहाँ उपयुक्त नहीं। xii) उन्न्यन्ति - 'उन्न्यन्ति' शुद्ध है, जिसका अर्थ है 'ऊपर उठना'। 'उद्द्यन्ति' गलत है। xiii) अवागच्छाम - 'अवागच्छाम' शुद्ध है, जिसका अर्थ है 'यहाँ आना'। 'आगच्छाम' गलत है। xiv) संस्करोति - 'संस्करोति' शुद्ध है, जिसका अर्थ है 'संस्कार करना'। 'समकरोति' गलत है। xv) प्रवहति - 'प्रवाहति' शुद्ध है, जिसका अर्थ है 'बहना'। 'उद्द्वत' गलत है।
व्याख्या:
प्रत्येक विकल्प में सही शब्द का चयन संस्कृत व्याकरण और अर्थ के अनुसार किया गया है। उपसर्गों और धातुओं के सही संयोजन से शब्दों का अर्थ स्पष्ट होता है। गलत विकल्पों में या तो व्याकरणिक त्रुटि है या अर्थ में असंगति। इसलिए सही विकल्पों का चयन किया गया।
Q3.प्र. 3. i) हार:, योग: इति शब्दाभ्यां सह अधोलिखितान् उपसर्गान् संयुज्य प्रत्येक पद्द्यस्य निर्माणं कुरुत। निर्मितै: पदै: च सार्थकवाक्यानि रचयत— उपसर्गा:— आ, वि, प्र, सु, सम्। ii) 'भू' ह, इति एताभ्याम् धातुभ्यां प्राक् अधोलिखितान् उपसर्गान् संयुज्य प्रत्येक पद्द्यस्य निर्माणं कुरुत। निर्मितै: पदै: च सार्थकवाक्यानि रचयत— उपसर्गा:— प्र, अनु, सम्, अप, दुर्।
उत्तर:
i) हार:, योग: शब्दाभ्यां उपसर्गान् संयोज्य पद निर्माण: उपसर्गाः - आ, वि, प्र, सु, सम् - आहारः (आ + हारः): भोजन या ग्रहण - विहारः (वि + हारः): भ्रमण, घूमना - प्रहारः (प्र + हारः): हमला - सुहारः (सु + हारः): अच्छा ग्रहण, शुभ ग्रहण - समहारः (सम् + हारः): समाहार, एकत्रीकरण सार्थकवाक्य उदाहरण: - आहारः आवश्यकः अस्ति। - बालकः विहारं कुर्वन्ति। - सैनिकाः प्रहारं कुर्वन्ति। - सुहारः भोजनं स्वादिष्टं करोति। - समहारः क्रियते तदा कार्यं सिद्ध्यति। ii) 'भू' ह् धातुभ्यां उपसर्गान् संयोज्य पद निर्माण: उपसर्गाः - प्र, अनु, सम्, अप, दुर् - प्रभू (प्र + भू): स्वामी, मालिक - अनुभू (अनु + भू): अनुभव करना - सम्भू (सम् + भू): साथ में होना, सह अस्तित्व - अपभू (अप् + भू): दूर होना, अलग होना - दुर्भू (दुर् + भू): दुर्भाग्य, कठिन स्थिति सार्थकवाक्य उदाहरण: - सः प्रभूः ग्रामस्य अस्ति। - अहं दुःखं अनुभूयामि। - ते सम्भूत्वं इच्छन्ति। - सः अपभूत् तत्र। - दुर्भूः समयः आगतः।
व्याख्या:
प्रत्येक उपसर्ग को दिए गए धातुओं के साथ जोड़कर नए पद बनाए गए हैं। इन पदों के अर्थों को समझकर सार्थक वाक्य बनाए गए हैं। यह अभ्यास उपसर्गों के प्रयोग और उनके अर्थों को स्पष्ट करता है।
Q4.संस्कृत में उपसर्ग का क्या अर्थ है और उपसर्ग शब्दों के अर्थ में किस प्रकार परिवर्तन करते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
उपसर्ग वे शब्दांश होते हैं जो धातु रूपों या धातुओं से बने शब्दों के पूर्व में लगाकर उनके अर्थ में परिवर्तन करते हैं। उपसर्गों के जुड़ने से शब्दों के अर्थ में व्यापक और विशिष्ट परिवर्तन आता है। उदाहरण के लिए, 'हार' का अर्थ है माला, परन्तु 'प्र' उपसर्ग लगने पर 'प्रहार' बनता है जिसका अर्थ होता है मारना। इसी प्रकार 'आहार' का अर्थ भोजन होता है।
व्याख्या:
उपसर्ग का अर्थ और उनका प्रभाव समझने के लिए यह आवश्यक है कि वे धातु या धातु रूपों के पूर्व में लगते हैं और शब्द के अर्थ को बदल देते हैं। उदाहरण स्वरूप, 'हार' शब्द में 'प्र' उपसर्ग लगने से 'प्रहार' बनता है जिसका अर्थ 'मारना' होता है। इस प्रकार उपसर्ग शब्दों के अर्थ को परिवर्तित और विस्तृत करते हैं।
Q5.निम्नलिखित में से कौन-सा उपसर्ग 'पराजय' और 'पराभवति' जैसे शब्द बनाने में प्रयुक्त होता है?
उत्तर:
पराः
व्याख्या:
'पराः' उपसर्ग से 'पराजयते' और 'पराभवति' जैसे शब्द बनते हैं। अन्य विकल्पों के उपसर्गों से अलग अर्थ वाले शब्द बनते हैं। उदाहरण के लिए, 'प्र' से 'प्रभवति', 'अप' से 'अपहरति', 'सम्' से 'संस्करोति'।
Q6.उपसर्ग 'अनु' के साथ बने शब्दों के अर्थ क्या होते हैं? निम्न में से सही विकल्प चुनिए: A) आगे बढ़ना B) पीछे जाना C) ऊपर उठना D) नीचे जाना
उत्तर:
पीछे जाना
व्याख्या:
उपसर्ग 'अनु' का अर्थ होता है 'पीछे' या 'अनुकरण करना'। उदाहरण के लिए, 'अनुगच्छति' का अर्थ है पीछे जाना। इसलिए सही विकल्प 'पीछे जाना' है।
Q7.उपसर्ग 'अव' के साथ बने शब्द 'अवगच्छति' का अर्थ क्या है? निम्न में से चयन करें।
उत्तर:
समझना
व्याख्या:
'अव' उपसर्ग से बने शब्द 'अवगच्छति' का अर्थ होता है 'समझना'। अन्य विकल्पों के अर्थ अलग-अलग उपसर्गों से बने शब्दों के हैं।
Q8.नीचे दिए गए पदों में से उपसर्ग और धातु को पहचानिए तथा लिखिए: (i) उत्तिष्ठतु (ii) निरगच्छन् (iii) निस्सरतु (iv) प्रत्यवद्त् (v) सुशोभते
उत्तर:
i) उपसर्ग: उत्, धातु: स्थि ii) उपसर्ग: निर्, धातु: गम् iii) उपसर्ग: निस्, धातु: सर् iv) उपसर्ग: प्रति, धातु: वद् v) उपसर्ग: सु, धातु: शोभ्
व्याख्या:
प्रत्येक पद में उपसर्ग और धातु को अलग-अलग पहचानना आवश्यक है। उदाहरण के लिए, 'उत्तिष्ठतु' में 'उत्' उपसर्ग है और 'स्थि' धातु। इसी प्रकार अन्य पदों में भी उपसर्ग और धातु को अलग किया गया है।