धातरू | Class 9 Sanskrit Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 6 मिनट का पठन
धातरू – this guide gives you a concise, exam-ready overview of धातरू from Class 9 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
पाँच लकारों में प्रत्ययों के प्रयोग के उदाहरण
इस खंड में परस्मैपदी और आत्मनेपदी धातुओं के पाँच प्रमुख लकारों में प्रत्ययों के प्रयोग के विस्तृत उदाहरण प्रस्तुत किए गए हैं। उदाहरण के लिए, परस्मैपदी धातु 'पठ्' का लट् लकार में प्रथम पुरुष एकवचन रूप 'पठति' होता है, द्विवचन 'पठतः' और बहुवचन 'पठन्ति'। आत्मनेपदी धातु 'सेव्' का लट् लकार में प्रथम पुरुष एकवचन 'सेवते', द्विवचन 'सेवेते', बहुवचन 'सेवन्ते' होता है। इसी प्रकार लड्, लूट्, लोट्, और विधिलिङ् लकारों में भी प्रत्ययों के अनुसार रूप बनाए जाते हैं। ये उदाहरण छात्रों को धातुरूपों के सही निर्माण और प्रयोग में सहायता करते हैं।
📊 Diagram: Table on page 6 (5×7); Table on page 6 (5×7); Table on page 6 (5×7); Table on page 6 (5×7); Table on page 7 (5×7)
🔗 Connection: यह अभ्यास कार्यों के माध्यम से प्रत्ययों और लकारों के अभ्यास की ओर ले जाता है।
Table on page 6 (5×7)
| प्रथम पुरुष | परस्मैपदी क्रिया प्रत्यय | आत्मनेपदी क्रिया प्रत्यय | ||||
|---|---|---|---|---|---|---|
| ए. व. | द्वि. व. | ब. व. | ए.व. | द्वि.व. | ब.व | |
| प्रथम पुरुष | पठति | पठत: | पठन्ति | सेवते | सेवेते | सेवन्ते |
| मध्यम पुरुष | पठसि | पठथ: | पठथ | सेवसे | सेवेथे | सेवध्वे |
| उत्तम पुरुष | पठामि | पठाव: | पठाम: | सेवे | सेवावहे | सेवामहे |
Table on page 6 (5×7)
| प्रथम पुरुष | परस्मैपदी क्रिया प्रत्यय | आत्मनेपदी क्रिया प्रत्यय | ||||
|---|---|---|---|---|---|---|
| ए.व. | द्वि.व. | ब.व. | ए.व. | द्वि.व. | ब.व. | |
| प्रथम पुरुष | अपठत् | अपठताम् | अपठन् | असेवत | असेवेताम् | असेवन्त |
| मध्यम पुरुष | अपठ: | अपठतम् | अपठत | असेवथा: | असेवेथाम् | असेवध्वम् |
| उत्तम पुरुष | अपठम् | अपठाव | अपठाम | असेवे | असेवावहि | असेवामहि |
Table on page 6 (5×7)
| प्रथम पु. | परस्मैपदी क्रिया प्रत्यय | आत्मनेपदी क्रिया प्रत्यय | ||||
|---|---|---|---|---|---|---|
| ए.व. | द्वि.व. | ब.व | ए.व. | द्वि.व. | ब.व | |
| प्रथम पु. | पठिष्यति | पठिष्यत: | पठिष्यन्ति | सेविष्यते | सेविष्येते | सेविष्यन्ते |
| मध्यम पु. | पठिष्यसि | पठिष्यथ: | पठिष्यथ | सेविष्यसे | सेविष्येथे | सेविष्यध्वे |
| उत्तम पु. | पठिष्यामि | पठिष्याव: | पठिष्याम: | सेविष्ये | सेविष्यावहे | सेविष्यामहे |
Table on page 6 (5×7)
| प्रथम पुरुष | परस्मैपदी क्रिया प्रत्यय | आत्मनेपदी क्रिया प्रत्यय | ||||
|---|---|---|---|---|---|---|
| ए.व. | द्वि.व. | ब.व. | ए.व. | द्वि.व. | ब.व | |
| प्रथम पुरुष | पठतु | पठताम् | पठन्तु | सेवताम् | सेवेताम् | सेवन्ताम् |
| मध्यम पुरुष | पठ | पठतम् | पठत | सेवस्व | सेवेथाम् | सेवध्वम् |
| उत्तम पुरुष | पठानि | पठाव | पठाम | सेवे | सेवावहै | सेवामहै |
Table on page 7 (5×7)
| परस्मैपदी क्रिया प्रत्यय | आत्मनेपदी क्रिया प्रत्यय | |||||
|---|---|---|---|---|---|---|
| ए.व. | द्वि.व. | ब.व. | ए.व. | द्वि.व. | ब.व. | |
| प्रथम पु. | पठेत् | पठेताम् | पठेयुः | सेवेत | सेवेयाताम् | सेवेरन् |
| मध्यम पु. | पठेः | पठेतम् | पठेत | सेवेथाः | सेवेयाथाम् | सेवध्वम् |
| उत्तम पु. | पठेयम् | पठेव | पठेम | सेवेय | सेवेवहि | सेवेमहि |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र. 1. कोष्ठके प्रदत्तधातो: निर्दिष्टलकारे समुचितप्रयोगेण वाक्यानि पूर्यत— i) बालका: पुस्तकानि ... । (पट्-लट्) ii) पुस्तकानि पठित्वा ते विद्वांस: ... । (भू-लूट्) iii) यूयम् उद्धाने कदा ... । (क्रीड्-लड्) iv) किम् आवाम् अद्य ... । (भ्रम्-लोट्) v) त्वम् ध्यानेन पाठं ... । (पट्-विधिलिङ्) vi) साधव: तप: ... । (तप्-लट्) vii) वयम् उत्तमान् अड्कान् ... । (लभ्-लूट्) viii) नाटकं दृष्ट्वा सर्वे ... । (मुद्-लड्) ix) पितरं वार्धक्ये पुत्र: अवश्यं ... । (सेव्-लोट्) x) हे प्रभो ! संसारे कोऽपि भिक्षां न ... । (याच्-विधिलिङ्)
प्र. 1 के प्रत्येक वाक्य में निर्दिष्ट धातु को दिए गए लकार में प्रयोग करते हुए वाक्य पूर्ण करें:
(i) बालका: पुस्तकानि पठन्ति । (पट्-लट्)
व्याख्या: 'पट्' धातु का लट् लकार वर्तमान काल सूचित करता है।
(ii) पुस्तकानि पठित्वा ते विद्वांस: अभवन् । (भू-लूट्)
व्याख्या: 'भू' धातु का लूट् लकार भूतकाल सूचित करता है।
(iii) यूयम् उद्धाने कदा क्रीडथ । (क्रीड्-लड्)
व्याख्या: 'क्रीड्' धातु का लड् लकार भविष्यत्काल सूचित करता है।
(iv) किम् आवाम् अद्य भ्रमामः । (भ्रम्-लोट्)
व्याख्या: 'भ्रम्' धातु का लोट् लक
प्र. 2. कोष्ठकात् समुचितं क्रियापदं चित्वा वाक्यानि पूर्यत— i) अद्य युवाम् विद्यालयं किमर्थं न ... ? (अगच्छताम्/ अगच्छतम्/अगच्छत) ii) पुरा जना: संस्कृतभाषया ... । (भाषन्ते/भाषामहे/ अभाषन्त) iii) यूयम् कं पाठम् ... ? (अपठत/ अपठत्/ अपठन्) iv) जीवा: सर्वेऽत्र ... भावयन्त: परस्परम् । (मोदताम्/ मोदेताम्/ मोदन्ताम्) v) कक्षायाम् सर्वे ध्यानेन ... । (पठतु/ पठताम्/ पठन्तु) vi) प्रभो मह्यम् बुद्धिम् ... । (यच्छ/ यच्छतम्/ यच्छत) vii) वयं सदैव सुधीरा: सुवीरा: च ... । (भवेव/ भवेम/ भवेयम्) viii) त्वं सायं कुत्र ... ? (गमिष्यसि/ गमिष्यथ:/ गमिष्यथ) ix) विद्वान् सर्वत्र ... । (पूज्यन्ते/ पूज्येते/ पूज्यते) x) अद्यत्वे समाचारपत्रस्य महत्त्वं सर्वे ... । (जानाति/ जानन्ति/ जानासि)
प्र. 2 के प्रत्येक वाक्य में कोष्ठक में दिए गए विकल्पों में से समुचित क्रियापद चुनकर वाक्य पूर्ण करें:
i) अद्य युवाम् विद्यालयं किमर्थं न अगच्छताम् ?
व्याख्या: 'अगच्छताम्' लोट् लकार द्वितीय पुरुष द्विवचन रूप है, जो आज्ञा सूचित करता है।
ii) पुरा जना: संस्कृतभाषया भाषन्ते ।
व्याख्या: 'भाषन्ते' लट् लकार बहुवचन रूप है, वर्तमान काल सूचित करता है।
iii) यूयम् कं पाठम् अपठत् ?
व्याख्या: 'अपठत्' लिट् लकार द्वितीय पुरुष द्विवचन रूप है, भूतकाल सूचित करता है।
iv) जीवा: सर्वेऽत्र मोदताम् भावयन्त: परस्
संस्कृत में जिस शब्द द्वारा किसी कार्य के होने या करने का बोध होता है, उसे क्या कहा जाता है? उदाहरण सहित समझाइए।
धातु वह शब्द है जिससे किसी कार्य के होने या करने का बोध होता है। उदाहरण के लिए, वाक्य 'राम: पुस्तकं पठति' में 'पठ' धातु है जो पढ़ने की क्रिया को दर्शाता है।
संस्कृत धातुओं के गणों का वर्गीकरण कितने प्रकार का है और उनके नामकरण का आधार क्या होता है? उदाहरण सहित समझाइए।
संस्कृत धातुओं को 10 गणों में वर्गीकृत किया गया है। प्रत्येक गण का नाम उस गण में आने वाली प्रथम धातु के आधार पर रखा जाता है। उदाहरण के लिए, भ्वादिगण का आधार 'भू' धातु है और चुरादिगण का आधार 'चुरू' धातु है।
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