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यतीींद्र मिश्र | Class 9 Hindi Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

यतीींद्र मिश्र | Class 9 Hindi Notes

यतीींद्र मिश्र – this guide gives you a concise, exam-ready overview of यतीींद्र मिश्र from Class 9 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

यतींद्र मिश्र का परिचय

यतींद्र मिश्र का जन्म सन् 1977 में उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ था। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की। यतींद्र मिश्र हिंदी साहित्य के समकालीन कवि और लेखक हैं, जिनका साहित्यिक योगदान विशेष रूप से कविता, संगीत और समाज-संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय है। वे केवल साहित्यिक क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि संगीत और ललित कलाओं में भी गहरी रुचि रखते हैं। उनकी कविताएँ जीवन के विविध पहलुओं को छूती हैं, जिनमें प्रकृति, मानवीय संवेदनाएँ, सामाजिक मुद्दे और आध्यात्मिकता प्रमुख हैं। यतींद्र मिश्र की भाषा सरल, प्रवाहमय और भावपूर्ण होती है, जो पाठकों को सहजता से प्रभावित करती है। उनकी रचनाएँ छायावाद से लेकर आधुनिक हिंदी कविता तक के मध्य एक सेतु का काम करती हैं।

📊 Diagram: See figure_1: 0901CH04; See figure_2: Figure on page 1; See figure_3: यतींद्र मिश्र के तीन काव्य-संग्रह प्रकाशित हुए हैं— यदा-कदा, अयोध्या तथा अन्य कविताएँ, ड्योढ़ी पर आलाप। इसके अलावा उन्होंने शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी के जीवन और संगीत साधना पर एक पुस्तक गिरिजा लिखी

🧪 Activity: इस अनुभाग में कोई विशेष गतिविधि नहीं है।

🔗 Connection: यह परिचय यतींद्र मिश्र के साहित्यिक कार्यों और उनकी भाषा-शैली की चर्चा की ओर ले जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. लता जी ने अपने पिताजी से क्या-क्या सीखा? (क) अनुशासन और नियम के साथ जीना (ख) भय और संशय के साथ जीना (ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना (घ) चतुराई और संयम के साथ जीना 2. पिताजी की मृत्यु के बाद परिवार सँभालने का लता जी का निर्णय किस जीवन-मूल्य का घोतक है? (क) संघर्ष (ख) निराशा (ग) भौतिकता (घ) कर्तव्यनिष्ठा 3. “बिल्कुल ठेठ गाँवई अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है...” ‘मंगलागौर’ के वर्णन से भारतीय समाज की कौन-सी परंपरा उजागर होती है? (क) संगीत पर आधुनिकता का प्रभाव (ख) लोकगीतों की लोकप्रियता में कमी (ग) धार्मिक कार्यक्रमों में संगीत का महत्व (घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका 4. “गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन” — इस कहावत का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है? (क) नाव गाँव में नहीं रहती, नदी में बहती है। (ख) इस नश्वर संसार में सब कुछ नष्ट हो जाता है। (ग) फिल्मों में गीत गाने से बहुत प्रसिद्धि मिलती है। (घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।

1. लता जी ने अपने पिताजी से अनुशासन और नियम के साथ जीना, स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना सीखा है। अतः सही उत्तर (क) और (ग) हैं।

2. पिताजी की मृत्यु के बाद परिवार सँभालने का निर्णय कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है, इसलिए सही उत्तर (घ) है।

3. ‘मंगलागौर’ के वर्णन से संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका उजागर होती है, अतः सही उत्तर (घ) है।

4. कहावत “गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन” का प्रतीकात्मक अर्थ है कि जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं, अतः सही उत्तर (घ) है।

5. कोर्स में साथ गाने वाली लड़कियों के साथ लता जी के संबंध कैसे थे? (क) औपचारिक (ख) कामकाजी (ग) आत्मीय (घ) प्रतिस्पर्धात्मक 6. लता मंगेशकर के अनुसार बाबा हरिदास और तानसेन की कथाओं से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है? (क) संगीत द्वारा दीपक जलाए जा सकते हैं। (ख) मेघराग गाने से वर्षा होने लगती है। (ग) सुर में वाद्य बजाने से तार टूट जाते हैं। (घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है। 7. पूरे साक्षात्कार में लता मंगेशकर की जो छवि बनती है, वह मुख्यत: कैसी है? (क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की (ख) प्रसिद्धि, परिवार को समर्पित और आत्ममुग्ध (ग) कठोर सिद्धांतवादी और व्यावहारिक व्यक्ति (घ) आधुनिकता विरोधी रूढ़िवादी विचारों वाली

5. लता जी के संबंध आत्मीय थे, अतः सही उत्तर (ग) है।

6. बाबा हरिदास और तानसेन की कथाओं से निष्कर्ष है कि संगीत में अपरिमित शक्ति होती है, अतः सही उत्तर (घ) है।

7. पूरे साक्षात्कार में लता मंगेशकर की छवि सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की है, अतः सही उत्तर (क) है।

1. “पिताजी उस समय पूछते थे, ‘समझ गए न?’... इसके बाद वे कहते थे कि ‘अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो।’” यह प्रसंग पारिवारिक अनुशासन और स्नेह के संतुलन का प्रतीक है। कैसे? (संकेत— यहाँ अनुशासन में डर है या सम्मान?)

यह प्रसंग दर्शाता है कि पिताजी अनुशासन के साथ स्नेह भी रखते थे। वे बच्चों से समझदारी से बात करते थे, जिससे बच्चों में डर नहीं बल्कि सम्मान और विश्वास उत्पन्न होता था। ‘समझ गए न?’ पूछकर वे बच्चों की समझ को परखते थे और ‘अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो’ कहकर उन्हें स्वतंत्रता भी देते थे। इस प्रकार अनुशासन और स्नेह का संतुलन बना रहता था।

2. लता मंगेशकर पर अपने पिताजी पं. दीनानाथ मंगेशकर के व्यक्तित्व का क्या प्रभाव पड़ा? उनके कौन-कौन से कार्यों और व्यवहार में उनके पिता का प्रभाव दिखाई देता है?

लता मंगेशकर पर उनके पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर का गहरा प्रभाव पड़ा। उनके पिता की अनुशासनप्रियता, संगीत के प्रति समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा और सादगी उनके व्यक्तित्व में झलकती है। लता जी के अनुशासन, संगीत के प्रति लगन, और परिवार के प्रति जिम्मेदारी का भाव उनके पिता से प्रेरित है।

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