Sanskritकक्षा 9वाङ्मन : प्राणस्वरूपम्हिंदी

वाङ्मन : प्राणस्वरूपम् | Class 9 Sanskrit Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

वाङ्मन : प्राणस्वरूपम् | Class 9 Sanskrit Notes

वाङ्मन : प्राणस्वरूपम् – this guide gives you a concise, exam-ready overview of वाङ्मन : प्राणस्वरूपम् from Class 9 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

गामो अरिहन्तागाम्

इस अध्याय की शुरुआत एक प्राचीन युग के राजा नाभि से होती है, जो प्रजा के प्रिय और राजनीति, युद्धतन्त्र तथा प्रशासन में निपुण थे। उनकी पत्नी मरुदेवी बुद्धिमती और करुणाशालिनी थीं। उनका पुत्र ऋषभ एक सर्वगुणसम्पन्न, अधीतविद्य और राजनीतिज्ञ राजकुमार था। यौवन में विलसमान ऋषभ को देखकर नाभि ने राज्यभार समर्पित करने का निर्णय लिया। उस समय समाज में दुर्भिक्ष और अन्य समस्याएँ उत्पन्न हुईं, जिससे जनमानस में विद्वेष की भावना फैल गई। नाभि ने इसे ऋषभ की राजनीति की परीक्षा माना और राज्यभार उसे सौंप दिया।

ऋषभ ने राजा बनते ही जनसमस्याओं का गहन अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि आलस्य, कृषिकार्य में न्यूनता और उत्पादनक्षमता की कमी प्रमुख कारण हैं। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने कृषिकार्यों, भोजननिर्माण, वस्त्रनिर्माण, पशुपालन, गृहोपयोगी वस्तुओं के निर्माण, पात्रनिर्माण, गृहनिर्माण और नगरनिर्माण में लोगों को प्रशिक्षित किया। इस प्रकार जन जीवन में सक्रियता आई और आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई। प्रजा ने स्वयं गृह निर्माण और दैनिक उपयोग की वस्तुओं का निर्माण करना आरंभ किया।

ऋषभराज की यह कथा वाङ्मय के प्राणस्वरूप होने का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करती है, जहाँ साहित्य और संवाद के माध्यम से सामाजिक समस्याओं का समाधान संभव हुआ। यह अध्याय हमें यह भी सिखाता है कि नेतृत्व और ज्ञान के माध्यम से समाज में समरसता और विकास लाया जा सकता है।

📊 Diagram: 0902CH10; Figure on page 1 showing राजा नाभि, उनकी पत्नी मरुदेवी और पुत्र ऋषभ की छवि; आसीत् युगानाम् आरम्भे प्रजानां प्रियः नाभिनामकः कश्चन महाराजः । सः राजनीती युद्धतन्त्रे प्रशासनादिषु च समर्थः । तस्य पत्नी मरुदेवी बुद्धिमती करुणाशालिनी च । तयोः एव प्रियपुत्रः ऋषभः । ऋषभः सर्वगुणसम्पन्नः, अधीतविद्यः, राजनीतिज्ञश्च आसीत् ।

🧪 Activity: इस खंड में कोई विशेष गतिविधि नहीं दी गई है।

🔗 Connection: यह खंड ऋषभराज के शासनकाल में उत्पन्न समस्याओं और उनके समाधान की ओर ले जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाठ 'वाङ्मनः प्राणस्वरूपम्' किस ग्रंथ से लिया गया है?

छान्दोग्य उपनिषद्

आरुणि के अनुसार मन किससे बनता है?

अन्न

प्राण किससे बनता है?

जल

वाक् (वाणी) किससे बनती है?

तेज

इस अध्याय में महारत हासिल करें

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