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Chapter 10

🎓 Class 9📖 Shemushi Prathmo Bhag📖 9 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~14 मिनट
Chapter 9अध्याय 10 / 16Chapter 11

Chapter 10अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

गामो अरिहन्तागाम्

व्याख्या

गामो अरिहन्तागाम्

इस अध्याय की शुरुआत एक प्राचीन युग के राजा नाभि से होती है, जो प्रजा के प्रिय और राजनीति, युद्धतन्त्र तथा प्रशासन में निपुण थे। उनकी पत्नी मरुदेवी बुद्धिमती और करुणाशालिनी थीं। उनका पुत्र ऋषभ एक सर्वगुणसम्पन्न, अधीतविद्य और राजनीतिज्ञ राजकुमार था। यौवन में विलसमान ऋषभ को देखकर नाभि ने राज्यभार समर्पित करने का निर्णय लिया। उस समय समाज में दुर्भिक्ष और अन्य समस्याएँ उत्पन्न हुईं, जिससे जनमानस में विद्वेष की भावना फैल गई। नाभि ने इसे ऋषभ की राजनीति की परीक्षा माना और राज्यभार उसे सौंप दिया। ऋषभ ने राजा बनते ही जनसमस्याओं का गहन अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि आलस्य, कृषिकार्य में न्यूनता और उत्पादनक्षमता की कमी प्रमुख कारण हैं। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने कृषिकार्यों, भोजननिर्माण, वस्त्रनिर्माण, पशुपालन, गृहोपयोगी वस्तुओं के निर्माण, पात्रनिर्माण, गृहनिर्माण और नगरनिर्माण में लोगों को प्रशिक्षित किया। इस प्रकार जन जीवन में सक्रियता आई और आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई। प्रजा ने स्वयं गृह निर्माण और दैनिक उपयोग की वस्तुओं का निर्माण करना आरंभ किया। ऋषभराज की यह कथा वाङ्मय के प्राणस्वरूप होने का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करती है, जहाँ साहित्य और संवाद के माध्यम से सामाजिक समस्याओं का समाधान संभव हुआ। यह अध्याय हमें यह भी सिखाता है कि नेतृत्व और ज्ञान के माध्यम से समाज में समरसता और विकास लाया जा सकता है।

  • नाभि एक प्राचीन राजा थे, जो राजनीति, युद्धतन्त्र और प्रशासन में निपुण थे।
  • ऋषभ, नाभि का पुत्र, सर्वगुणसम्पन्न और अधीतविद्य था।
  • समाज में दुर्भिक्ष और विद्वेष की समस्या उत्पन्न हुई।
  • ऋषभ ने कृषिकार्य, वस्त्रनिर्माण, पशुपालन आदि में प्रजा को प्रशिक्षित किया।
  • जन जीवन में सक्रियता और आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ।
  • वाङ्मय के माध्यम से सामाजिक समस्याओं का समाधान संभव हुआ।
  • 📌 दुर्भिक्ष: - अकाल या खाद्यान्न की कमी
  • 📌 राजनीति - राज्य संचालन की कला
  • 📌 अधीतविद्य: - पढ़ा-लिखा व्यक्ति

समस्याएँ और समाधान

व्याख्या

समस्याएँ और समाधान

इस खंड में ऋषभराज ने समाज में उत्पन्न समस्याओं का विश्लेषण किया। उन्होंने देखा कि जनमानस में आलस्य, कृषिकार्य की कमी और उत्पादनक्षमता का अभाव मुख्य कारण हैं। इसके समाधान के लिए उन्होंने विभिन्न योजनाएँ बनाईं। उन्होंने प्रजा को कृषिकार्य, भोजननिर्माण, वस्त्रनिर्माण, पशुपालन जैसे जीवन कौशलों में प्रशिक्षित किया। साथ ही काष्ठ, धातु और शिला से गृहोपयोगी वस्तुओं का निर्माण, पात्रनिर्माण, गृहनिर्माण और नगरनिर्माण में भी लोगों को प्रशिक्षित किया। इन प्रयासों से जन जीवन में सक्रियता आई, जीवन पद्धति में परिवर्तन हुआ और आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। प्रजा ने स्वयं गृह निर्माण और दैनिक उपयोग की वस्तुएँ बनाना आरंभ किया। इस प्रकार समस्याएँ स्वयमेव समाप्त हुईं और राज्य पुनः समृद्ध हुआ। इस खंड में यह स्पष्ट होता है कि वाङ्मय न केवल भाषा का संग्रह है, बल्कि यह सामाजिक सुधार और विकास का माध्यम भी है।

  • समाज में आलस्य, कृषिकार्य की कमी और उत्पादनक्षमता की कमी समस्याएँ थीं।
  • ऋषभराज ने प्रजा को कृषिकार्य, भोजननिर्माण, वस्त्रनिर्माण आदि में प्रशिक्षित किया।
  • गृहोपयोगी वस्तुओं का निर्माण और नगरनिर्माण भी कराया गया।
  • जन जीवन में सक्रियता और आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ।
  • समस्याएँ स्वयमेव समाप्त हुईं और राज्य समृद्ध हुआ।
  • वाङ्मय सामाजिक सुधार और विकास का माध्यम है।
  • 📌 आलस्य - काम में सुस्ती
  • 📌 उत्पादनक्षमता - उत्पादन करने की क्षमता
  • 📌 पात्रनिर्माण - बर्तन बनाने की कला

अभ्याभ

व्याख्या

अभ्याभ

इस भाग में बताया गया है कि ऋषभराज ने जन जीवन में शांति, सुरक्षा और न्यायिक व्यवस्था को पुनः सुदृढ़ किया। उन्होंने दक्ष शासन और कौशल के माध्यम से नगरों का निर्माण कराया। समाज के उत्कर्ष से वे जन मन में सुप्रतिष्ठित हुए। इस कारण प्रजा ने उन्हें प्रेमपू

अभ्यास प्रश्नChapter 10

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.१. एकपदेन उत्तरं लिखत — - (क) ऋषभेण निर्मितस्य नगरस्य नाम किम्? - (ख) ऋषभस्य प्रसिद्धे द्वे कन्ये के? - (ग) कस्यां लिप्यां नैकानि शास्त्राणि लिपिबद्धानि? - (घ) विनिता नामकं राज्यं ऋषभः कस्मै समर्पितवान्? - (ङ) ऋषभः बाहुबलिने किं राज्यं प्रदत्तवान्? - (च) प्रजाः भिक्षायां कानि वस्तूनि यच्छन्ति स्म?

उत्तर:

उत्तर: (क) पावापुरी (ख) विनिता तथा अरुणा (ग) ब्राह्मी लिप्यां (घ) बाहुबलिने (ङ) बाहुबलिने राज्यं प्रदत्तवान् (च) भिक्षायां अन्नं, जलं, वस्त्राणि च यच्छन्ति स्म।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर पाठ्यपुस्तक के अनुसार संक्षेप में एकपदेन दिया गया है।

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Q2.२. पूर्णवाक्येन प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत — - (क) देशे काः समस्या: सन्ति इति ऋषभदेवस्य कल्पना प्राप्ता? - (ख) महाराज: केषु कार्येषु प्रजाः प्रशिक्षितवान्? - (ग) ऋषभदेवस्य जीवनपरिवर्तिनी घटना का आसीत्? - (घ) ऋषभदेवस्य दीर्घकालिकस्य उपवासस्य समाप्तिः कथम् अभवत्? - (ङ) ऋषभदेव: कदा कुत्र च केवलज्ञानं प्राप्तवान्? - (च) जनानां मार्गदर्शनार्थं कं क्रमं रचितवान्?

उत्तर:

उत्तर: (क) देशे अज्ञानता, असहिष्णुता, अन्यायादयः समस्या: सन्ति इति ऋषभदेवस्य कल्पना प्राप्ता। (ख) महाराज: प्रजाः शिल्पकौशल, कृषि, व्यापारादिषु कार्येषु प्रशिक्षितवान्। (ग) ऋषभदेवस्य जीवनपरिवर्तिनी घटना तस्य दीर्घकालिक उपवासः आसीत्। (घ) दीर्घकालिक उपवासस्य समाप्तिः तस्य प्रजासु परिवर्तनं दृष्ट्वा अभवत्। (ङ) ऋषभदेव: केवलज्ञानं वनं प्राप्तवान् तत्र ध्यानमगम्य। (च) जनानां मार्गदर्शनार्थं जीवनपद्धतिः क्रमशः रचितवान्।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर पूर्ण वाक्य में दिया गया है, जो पाठ्यपुस्तक की जानकारी पर आधारित है।

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Q3.3. समस्तपदानि लिखत — विग्रहवाक्यम् समस्तपदम् (क) महान् च असौ राजा च (ख) प्रजानां सुखम् (ग) मूलाः समस्या: (घ) भोजनस्य निर्माणम् (ङ) आर्थिकी स्थिति: (च) प्राप्त: आनन्द:येन स: (छ) विधिना लिखितम् (ज) गृहं गृहं प्रति (झ) ब्राह्मीनामा लिपि:

उत्तर:

उत्तर: (क) महान् च असौ राजा च - महानः च असौ च राजा (ख) प्रजानां सुखम् - प्रजाः सुखम् (ग) मूलाः समस्या: - मूलाः समस्या: (समस्तपदम्) (घ) भोजनस्य निर्माणम् - भोजनस्य निर्माणम् (ङ) आर्थिकी स्थिति: - आर्थिकी स्थिति: (च) प्राप्त: आनन्द:येन स: - स: आनन्देन प्राप्त: (छ) विधिना लिखितम् - विधिना लिखितम् (ज) गृहं गृहं प्रति - गृहं प्रति गृहं (झ) ब्राह्मीनामा लिपि: - ब्राह्मीनाम् लिपि:

व्याख्या:

प्रत्येक समस्तपद का विग्रह (शब्द-शुद्धि) करके लिखा गया है।

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Q4.8. वाक्यानि उदाहरणानुसारं परिवर्तयत — यथा — जनैः स्वयमेव निर्माणकार्यम् आरक्ष्यम्। ‘जना: स्वयमेव निर्माणकार्यम् आरक्ष्यवन्त:1’ (क) महाराजेन राज्यं समर्पितम्। (ख) केनापि तत् न चिन्तितम्। (ग) ऋषभदेवेन दीर्घकालिक: उपवास: कृत:। (घ) जनै: जीवनपद्धति: परिवर्तिता। (ङ) ऋषभेण योजना कृता।

उत्तर:

उत्तर: (क) महाराजेन राज्यं समर्पितम्। परिवर्तितः - महाराजा: राज्यं समर्पितवान्। (ख) केनापि तत् न चिन्तितम्। परिवर्तितः - तत् केनापि न चिन्तितम्। (ग) ऋषभदेवेन दीर्घकालिक: उपवास: कृत:। परिवर्तितः - ऋषभदेव: दीर्घकालिक: उपवास: कृतवान्। (घ) जनै: जीवनपद्धति: परिवर्तिता। परिवर्तितः - जनाः जीवनपद्धतिं परिवर्तितवन्तः। (ङ) ऋषभेण योजना कृता। परिवर्तितः - ऋषभेण योजना कृताऽभवत्।

व्याख्या:

प्रत्येक वाक्य को उदाहरणानुसार रूपांतरित किया गया है।

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Q5.4. सन्धि कुरुत — (क) इति + अतः (ख) च + इति (ग) देवस्य + अपि (घ) तथा + एव (ङ) इति + एतादृशाः (च) ब्राह्मीद्वारा + एव (छ) प्रस्थितः + अयम्

उत्तर:

उत्तर: (क) इत्यतः (ख) चिति (ग) देवस्यपि (घ) तथैव (ङ) इत्येतादृशाः (च) ब्राह्मीद्वारैव (छ) प्रस्थितःअयम्

व्याख्या:

प्रत्येक युग्म शब्दों को सन्धि नियमानुसार जोड़ा गया है।

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Q6.१. जैनसम्प्रदायानुसारं भोजनपद्धति लिखत। (किं खादन्ति ? कस्मिन् समये खादन्ति ?)

उत्तर:

उत्तर: जैनसम्प्रदायानुसारं प्राणीहिंसां कारणेन मांसाहारं न कुर्वन्ति। ते शाकाहारी भवन्ति। प्रातःकाले तथा मध्याह्ने भोजनं कुर्वन्ति।

व्याख्या:

जैनधर्म में अहिंसा का पालन करते हुए शाकाहार ही भोजनपद्धति है। भोजन के समय प्रातः और मध्याह्न होते हैं।

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Q7.२. पञ्चमहाव्रतानि लिखत।

उत्तर:

उत्तर: पञ्चमहाव्रतानि - अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह।

व्याख्या:

जैनधर्म के मुख्य पाँच महाव्रतों को संक्षेप में लिखा गया है।

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Q8.३. णमोकारमहामञ्ज-दिवसस्य विषय किं जानन्त इत्युपरि कक्षायां वदत।

उत्तर:

उत्तर: णमोकारमहामञ्ज-दिवस जैनधर्म में महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें णमोकार मंत्र का जाप और महत्त्व बताया जाता है।

व्याख्या:

यह प्रश्न विद्यार्थियों से उपरि कक्षा में सीखी गई जानकारी को पुनः व्यक्त करने के लिए है।

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