पर्यावरणम् | Class 9 Sanskrit Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

पर्यावरणम् – this guide gives you a concise, exam-ready overview of पर्यावरणम् from Class 9 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
प्रकृतिः एवं पर्यावरणस्य तत्त्वानि
प्रकृति: समेषां प्राणिनां संरक्षणाय यतते। इयं सर्वान् पुष्णाति विविधै: प्रकारै:, सुखसाधनै: च तर्पयति। पृथिवी, जलम्, तेज:, वायु:, आकाश: च अस्या: प्रमुखाणि तत्त्वानि। एते तत्त्वानि मिलित्वा पर्यावरणं रचयन्ति। पृथिवी इत्यस्य अर्थः स्थलीय भागः, जलम् जलस्रोताः, तेज: सूर्यकिरणाः, वायु: वायुमण्डलः, आकाश: आकाशीय क्षेत्रम्। एतेषां तत्त्वानां सम्यक् संरक्षणं पर्यावरणस्य संतुलनाय आवश्यकम्।
प्रकृतौ अस्माकं जीवनम् आश्रितम् अस्ति। जलं न स्यात् तर्हि जीवनं न स्यात्। वायुः शुद्धः न स्यात् तर्हि श्वासप्रश्वासं कठिनं भविष्यति। तेज: प्रकाशः जीवनस्य विकासाय अनिवार्यः। अतः प्रकृतौ तत्त्वानां संरक्षणं मानवस्य प्रथमं कर्तव्यं।
📊 Diagram: Table on page 3 (14×4) में संस्कृत शब्दों के अर्थ और उनके हिंदी तथा अंग्रेजी अनुवाद प्रस्तुत हैं, जो पर्यावरण से संबंधित शब्दावली को स्पष्ट करते हैं।
🧪 Activity: प्रश्नोत्तर - प्रकृते: प्रमुखतत्वानि कानि सन्ति? स्वार्थान्ध: मानव: किं करोति? पर्यावरणे विकृते जाते किं भवति? इत्यादीनां प्रश्नानाम् संस्कृतभाषया उत्तराणि लिखत।
🔗 Connection: यह अनुभाग प्रदूषण के प्रकारों और उनके कारणों की व्याख्या के लिए आधार प्रदान करता है।
Table on page 3 (14×4)
| समेषाम् | सर्वेषाम् | सब का | Over all |
|---|---|---|---|
| पुष्णाति | पोषण करोति | पुष्ट करता है | Nurtures |
| अजात: शिशु: | अनुत्पन्नजातक: | अजन्मा शिशु | Unborn child |
| कुक्षौ | गर्भ | गर्भ में | In womb |
| जलप्लावनै: | जलौधै: | बाढ़ से | By floods |
| वात्याचक्रै: | वातचक्रै: | आँधी, बवंडर | By windstorms |
| लोकमद्भलाशंसिन: | समाजकल्याणकामा: | जनता के कल्याण को चाहने वाले | Well wisher of the society |
| श्रोत्रसायनम् | कर्णामृतम् | कान को अच्छा लगने वाला | Nector for ears |
| गिरिनिर्श्ररा: | पर्वतानां प्रपाता: | पहाड़ों से निकलने वाले झरने | Spring falls |
| यन्त्रागाराणाम् | यन्त्रालयानाम् | कारखानों के | Of miles |
| अपेयम् | पातुम् अयोग्यम् | न पीने योग्य | Undrinkable |
| वृक्षकर्तनात् | वृक्षाणाम् उच्चेदात् | पेड़ों के काटने से | From cutting trees |
| देवायतनम् | देवालय:, मन्दिरम् | मन्दिर | Temple |
| स्थलमलापनोदिन: | भूमिमलापसारिण: | भूमि की गन्दगी को दूर करने वाले | Removers of the garbage from the Earth |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. एकपदेन उत्तरं लिखत- (क) मानव: कुत्र सुरक्षित: तिष्ठति? (ख) सुरक्षितं पर्यावरणं कुत्र उपलब्धते स्म? (ग) आर्षवचनं किमस्ति? (घ) पर्यावरणमपि कस्य अङ्गमिति ऋषय: प्रतिपादितवन्त:? (ङ) लोकरक्षा कया सम्भवति? (च) अजातशिशु: कुत्र सुरक्षित: तिष्ठति? (छ) प्रकृति: केषां संरक्षणाय यतते?
उत्तर: (क) मानव: स्वर्गे वा पृथिव्यां सुरक्षित: तिष्ठति। (ख) सुरक्षितं पर्यावरणं स्वच्छे स्थानं वा प्राकृतिके क्षेत्रे उपलब्धते स्म। (ग) आर्षवचनं ऋषीणां वचनं यत् सत्यं च शाश्वतं च भवति। (घ) पर्यावरणं शरीरस्य अङ्गमिव ऋषय: प्रतिपादितवन्त:। (ङ) लोकरक्षा धर्मेण, न्यायेन, पर्यावरणरक्षणेन च सम्भवति। (च) अजातशिशु: मातृगर्भे सुरक्षित: तिष्ठति। (छ) प्रकृति: सर्वेषां जीविनां संरक्षणाय यतते।
2. अधोलिखितानां प्रश्नानामुत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत- (क) प्रकृते: प्रमुखतत्वानि कानि सन्ति? (ख) स्वार्थान्ध: मानव: किं करोति? (ग) पर्यावरणे विकृते जाते किं भवति? (घ) अस्माभि: पर्यावरणस्य रक्षा कथं करणीया? (ङ) लोकरक्षा कथं संभवति? (च) परिष्कृतं पर्यावरणम् अस्मभ्यं किं किं ददाति?
उत्तर: (क) पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश इति पञ्चतत्वानि प्रकृते: प्रमुखतत्वानि सन्ति। (ख) स्वार्थान्ध: मानव: पर्यावरणं नाशयति, स्वहितं चिन्तयति। (ग) पर्यावरणे विकृते जीवनं क्लिष्टं भवति, रोगाः वर्धन्ते, प्राणिनां विनाशः जायते। (घ) पर्यावरणस्य रक्षा: वृक्षारोपणं, प्रदूषणनिरोधः, स्वच्छता पालनं च कृत्वा करणीयम्। (ङ) लोकरक्षा धर्मपालनं, न्यायपालनं, पर्यावरणरक्षणं च कृत्वा संभवति। (च) परिष्कृतं पर्यावरणं अस्मभ्यं स्वच्छता, स्वास्थ्यं, सुखं, शान्तिं च ददाति।
3. स्थूलपदान्यधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत- (क) वनवृक्षा: निर्विवेकं छिद्यन्ते। (ख) वृक्षकर्तनात् शुद्धवायु: न प्राप्यते। (ग) प्रकृति: जीवनसुखं प्रददाति। (घ) अजातशिशुशु: मातृगर्भे सुरक्षित: तिष्ठति। (ङ) पर्यावरणरक्षणं धर्मस्य अङ्गम् अस्ति।
उत्तर: (क) वनवृक्षा: किमर्थं निर्विवेकं छिद्यन्ते? (ख) वृक्षकर्तनात् शुद्धवायु: कथं न प्राप्यते? (ग) प्रकृति: जीवनसुखं कथं प्रददाति? (घ) अजातशिशु: मातृगर्भे कथं सुरक्षित: तिष्ठति? (ङ) पर्यावरणरक्षणं धर्मस्य अङ्गम् इति कथं प्रमाणितम्? प्रत्येकं वाक्यं प्रश्नरूपेण परिवर्त्य उत्तरार्थं चिन्तनीयम्।
4. उदाहरणमनुसृत्य पदरचनां कुरुत- (क) यथा- जले चरन्ति इति - जलचरा: स्थले चरन्ति इति - ..., निशायां चरन्ति इति - ..., व्योम्नि चरन्ति इति - ..., गिरौ चरन्ति इति - ..., भूमौ चरन्ति इति - ..., (ख) यथा- न पेयम् इति - अपेयम् न वृष्टि इति - ..., न सुखम् इति - ..., न भाव: इति - ..., न पूर्ण: इति - ...
उत्तर: (क) स्थले चरन्ति इति - स्थलचराः, निशायां चरन्ति इति - निशाचराः, व्योम्नि चरन्ति इति - व्योमचराः, गिरौ चरन्ति इति - गिरिचराः, भूमौ चरन्ति इति - भूमिचराः। (ख) न वृष्टि इति - अवृष्टि, न सुखम् इति - अशुखम्, न भाव: इति - अभावः, न पूर्ण: इति - अपूर्णः।
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