सिकतासेतुः | Class 9 Sanskrit Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

सिकतासेतुः – this guide gives you a concise, exam-ready overview of सिकतासेतुः from Class 9 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
अध्याय सारांश
अध्याय 'सिकतासेतुः' में जीवन के नैतिक और दार्शनिक पक्षों पर गहन विचार प्रस्तुत किया गया है। इसमें धर्मबुद्धि और पापबुद्धि के बीच के अंतर को समझाया गया है और बताया गया है कि जीवन में धर्मबुद्धि का पालन करना आवश्यक है। अध्याय में माता-पुत्र के संवाद के माध्यम से जीवन के सही मार्ग, आत्मनिर्भरता, परिवार के प्रति सम्मान और नैतिकता की शिक्षा दी गई है। साथ ही, उपाय और पाय के बारे में सोचने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया है। भाषा और व्याकरण के माध्यम से संवाद की महत्ता को समझाया गया है। यह अध्याय विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करता है और जीवन में सही निर्णय लेने के लिए प्रेरित करता है।
📊 Diagram: अध्याय के विभिन्न चित्र और तालिकाएँ अध्याय की विषयवस्तु को स्पष्ट करती हैं।
🧪 Activity: अध्याय के अंत में विद्यार्थियों को अपने जीवन में धर्मबुद्धि अपनाने और पापबुद्धि से बचने के उपाय सोचने के लिए कहा जा सकता है।
🔗 Connection: यह सारांश अध्याय के समापन के रूप में कार्य करता है और विद्यार्थियों को आगे के अध्यायों में नैतिकता और भाषा के अध्ययन के लिए तैयार करता है।
Table on page 7 (12×5)
| उत्फुल्ललोचना: (बहुव्रीहि:, पुं.प्र.ब.व.) | उत्फुल्लानि लोचनानि येषां ते | आश्चर्य से फटी हुई आँखों वाले | With surprise | |
|---|---|---|---|---|
| खनित्वा (√ खन् + क्त्वा) | खननं कृत्वा | खोद कर | Having dug | |
| ध्वौ: (स्त्री.प्र.ए.व.) | आकाश: | आकाश | Sky | |
| धरणीपीठे (षष्ठी तत्पुरुष:, नपुं.स.ए.व) | धरण्या: पीठे | धरती पर | On the earth | |
| निक्षिप्य (नि + √ क्षिप् + ल्यप्) | स्थापियित्वा | रखकर | Having kept | |
| निशीथे (पुं.स.ए.व.) | अर्धरात्रे | आधी रात में | At midnight | |
| परिवेष्ट्य (परि + √ वेष्ट् + ल्यप्) | आवृत्य | घेरकर | Encircling | |
| प्रहष्टमना: (बहुव्रीहि:, पुं.प्र.ब.व) | प्रहष्टं मन: यस्य स: | प्रसन्न मन वाला | Joyful minded | |
| भाण्डम् (नपु.द्वि.ए.व.) | पात्रम् | घड़े को | Pot | |
| यास्यति (√या + लृट्, प्र.पु.ए.व.) | गमिष्यति | जाएगा | Will go | |
| वच्चयित्वा, (√ वच्च् + क्त्वा) | वच्चनं कृत्वा | ठग कर | Having Deceived | |
| वीक्षन्ते (वि + √ ईश्व, लट्, प्र.पु.ब.व.) | पश्यन्ति | देखते हैं | See |
Table on page 12 (4×4)
| धातु: + प्रत्यय: | पुंलिङ्गे | स्त्रीलिङ्गे | नपुंसकलिङ्गे |
|---|---|---|---|
| पट् + क्तवतु | बालक: पठितवान् | बालिका पठितवती | मित्रं पठितवत् |
| खाद् + क्तवतु | बालक: खादितवान् | बालिका खादितवती | मित्रं खादितवत् |
| कृ + क्तवतु | बालक: कृतवान् | बालिका कृतवती | मित्रं कृतवत् |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. एकपदेन उत्तरं लिखत- (क) कः बाल्ये विद्यां न अधीतवान्? (ख) तपोदत्तः कया विद्याम् अवाप्तुं प्रवृत्तः अस्ति? (ग) मकरालये कः शिलाभिः सेतुं बबन्ध? (घ) मार्गभ्रान्तः सन्ध्यां कुत्र उपैति? (ङ) पुरुषः सिकताभिः किं करोति?
उत्तर: (क) तपोदत्तः। (ख) तपश्चर्यया। (ग) श्रीरामः। (घ) मकरालये। (ङ) सेतुं निर्माति।
2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत- (क) अनधीतः तपोदत्तः कै: गर्हितोऽभवत्? (ख) तपोदत्तः केन प्रकारेण विद्यामवाप्तुं प्रवृत्तोऽभवत्? (ग) तपोदतः पुरुषस्य कां चेष्टां दृष्ट्वा अहसत्? (घ) तपोमात्रेण विद्यां प्राप्तुं तस्य प्रयास: कीदृशः कथितः? (ङ) अन्ते तपोदत्तः विद्याग्रहणाय कुत्र गतः?
उत्तर: (क) कुटुम्बिभिः मित्रैः गर्हितः अभवत्। (ख) तपश्चर्यया विद्यामवाप्तुं प्रवृत्तोऽभवत्। (ग) पुरुषस्य सिकताभिः सेतुं निर्मातुं चेष्टां दृष्ट्वा अहसत्। (घ) तपोमात्रेण विद्यां प्राप्तुं तस्य प्रयासः असफलः कथितः। (ङ) अन्ते तपोदत्तः विद्याग्रहणाय गुरुकुलम् गतः।
3. भिन्नवर्गीयं पदं चिनुत- यथा- अधिरोढुम्, गन्तुम्, सेतुम्, निर्मातुम्। (क) निःश्वस्य, चिन्तय, विमृश्य, उपेत्य। (ख) विश्वसिमि, पश्यामि, करिष्यामि, अभिलाषामि। (ग) तपोभिः, दुर्बुद्धिः, सिकताभिः, कुटुम्बिभिः।
उत्तर: (क) 'निःश्वस्य' भिन्नवर्गीय पद है (अन्य क्रिया के रूप हैं, यह विभक्ति है)। (ख) 'अभिलाषामि' भिन्नवर्गीय पद है (अन्य वर्तमान काल, यह इच्छार्थक है)। (ग) 'दुर्बुद्धिः' भिन्नवर्गीय पद है (अन्य तृतीया विभक्ति, यह प्रथमा है)।
4. ( क) रेखाङ्कितानि सर्वनामपदानि कस्मै प्रयुक्तानि? (i) अलमलं तव श्रमेण। (ii) न अहं सोपानमार्गैरट्टमधिरोढुं विश्वसिमि। (iii) चिन्तितं भवता न वा। (iv) गुरुगृहं गत्वैव विद्याभ्यासो मया करणीयः। (v) भवद्भिः उन्मीलितं में नयनयुगलम्। (ख) अधोलिखितानि कथनानि कः कं प्रति कथयति? कथनानि कः कम् (i) हा विधे! किमिदं मया कृतम्? (ii) भो महाशय! किमिदं विधीयते। (iii) भोस्तपस्विन्! कथं माम् उपरुणत्सि। (iv) सिकता: जलप्रवाहे स्थास्यन्ति किम्? (v) नाहं जाने कोऽस्ति भवान्?
(क) उत्तर: (i) तव – 'तुम्हारे' के लिए प्रयुक्त (ii) अहं – 'मैं' के लिए प्रयुक्त (iii) भवता – 'आप' के लिए प्रयुक्त (iv) मया – 'मेरे द्वारा' के लिए प्रयुक्त (v) भवद्भिः, में – 'आप लोगों' और 'मुझे' के लिए प्रयुक्त
(ख) उत्तर: (i) तपोदत्तः विधे प्रति (ii) पुरुषः तपोदत्तं प्रति (iii) पुरुषः तपोदत्तं प्रति (iv) तपोदत्तः पुरुषं प्रति (v) पुरुषः तपोदत्तं प्रति
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