Sanskritकक्षा 9लौहतुलाहिंदी

लौहतुला | Class 9 Sanskrit Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

लौहतुला | Class 9 Sanskrit Notes

लौहतुला – this guide gives you a concise, exam-ready overview of लौहतुला from Class 9 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

लौहतुला

यह पाठ विष्णुशर्मा द्वारा रचित प्रसिद्ध कथाग्रन्थ 'पञ्चतन्त्रम्' के 'मित्रभेद' नामक तन्त्र से लिया गया है। इस कथा में एक वणिक जिसका नाम जीर्णधन है, विदेश से व्यापार करके लौटता है और अपनी पूर्व में रखी हुई लौहतुला (लौह से बनी तुला) को सेठ से माँगता है। सेठ कहता है कि उसकी तुला मूषकों (चूहों) ने खा ली है। जीर्णधन अपने पुत्र धनदेव को स्नान के बहाने नदी के किनारे ले जाता है और उसे एक गुफा में छिपा देता है। जब सेठ पुत्र के विषय में पूछता है, तो जीर्णधन कहता है कि उसका पुत्र श्येन (बाज) द्वारा अपहृत हो गया है। इस प्रकार दोनों के बीच विवाद उत्पन्न होता है और वे न्यायालय पहुँचते हैं जहाँ धर्माधिकारियों द्वारा न्याय किया जाता है।

इस कथा के माध्यम से मित्रता, विश्वासघात, न्याय और नीति के महत्वपूर्ण तत्वों को समझाया गया है। लौहतुला यहाँ एक प्रतीक के रूप में कार्य करती है जो व्यापार और न्याय के संदर्भ में वस्तु के मूल्यांकन का माध्यम है। कथा में वर्णित घटनाएँ सामाजिक और नैतिक शिक्षा प्रदान करती हैं।

📊 Diagram: एवं विवदमानै तौ द्वावपि राजकुलं गतौ। तत्र श्रेष्ठी तारस्वरण अवदत्—“भो:! वञ्चितोऽहम्! वञ्चितोऽहम्! अन्नहाप्यम्! अनेन चौरेण मम शिशु: अपहत:” इति।

🧪 Activity: पाठ में दिए गए प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में लिखना, जैसे वणिकपुत्रस्य नाम, तुला की स्थिति आदि।

🔗 Connection: यह परिचय अगले भाग में कथा के विस्तार और पात्रों के संवादों की ओर ले जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. एकपदेन उत्तरं लिखत- (क) वणिक्पुत्रस्य किं नाम आसीत्? (ख) तुला कै: भक्षिता आसीत्? (ग) तुला कीदृशी आसीत्? (घ) पुत्रः केन हृतः इति जीर्णधनः वदति? (ङ) विवदमानौ तौ द्वावपि कुत्र गतौ?

(क) वणिक्पुत्रस्य नाम 'जीर्णधनः' आसीत्। (ख) तुला मूषकैः भक्षिता आसीत्। (ग) तुला लौहसहस्त्रस्य (बहुत भारी/लोहे की) आसीत्। (घ) पुत्रः गृध्रेण (बाज द्वारा) हृतः इति जीर्णधनः वदति। (ङ) विवदमानौ तौ द्वावपि धर्माधिकारिणः समीपं गतौ।

2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत- (क) देशान्तर गन्तुमिच्छन् वणिक्पुत्रः किं व्यचिन्तयत्? (ख) स्वतुलां याचमानं जीर्णधनं श्रेष्ठी किम् अकथयत्? (ग) जीर्णधनः गिरिगुहाद्वारं कया पिधाय गृहमागतः? (घ) स्नानानन्तरं पुत्रविषये पृष्टः वणिक्पुत्रः श्रेष्ठिनं किम् अवदत्? (ङ) धर्माधिकारिण: जीर्णधनश्रेष्ठिनौ कथं तोषितवन्तः?

(क) वणिक्पुत्रः 'मम लौहतुला श्रेष्ठिनः गृहे अस्ति' इति व्यचिन्तयत्। (ख) श्रेष्ठी अकथयत्—'मित्र! तव तुलां मूषकाः खादितवन्तः'। (ग) जीर्णधनः गिरिगुहाद्वारं बृहच्छिलया पिधाय गृहमागतः। (घ) वणिक्पुत्रः अवदत्—'श्रेष्ठिन्! पुत्रं गृध्रः हृतवान्'। (ङ) धर्माधिकारिणः तयोः विवादं श्रुत्वा न्यायपूर्वकं निर्णयं कृतवन्तः।

3. स्थूलपदान्यधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत- (क) जीर्णधनः विभवक्षयात् देशान्तरं गन्तुमिच्छन् व्यचिन्तयत्। (ख) श्रेष्ठिन: शिशुः स्नानोपकरणमादाय अभ्यागतेन सह प्रस्थितः। (ग) वणिक् गिरिगुहां बृहच्छिलया आच्छादितवान्। (घ) सभ्यैः तौ परस्परं संबोध्य तुला-शिशु-प्रदानेन सन्तोषितौ।

(क) जीर्णधनः के देशान्तर गमन का कारण क्या था? (ख) श्रेष्ठिनः शिशु स्नान के लिए किसके साथ गया? (ग) वणिक् ने गिरिगुहा को किस प्रकार ढका? (घ) सभ्यैः दोनों को किस प्रकार संतुष्ट किया गया?

5. तत्पदं रेखाङ्कितं कुरुत यत्र- (क) ल्यप् प्रत्ययः नास्ति विहस्य, लौहसहस्रस्य, संबोध्य, आदाय (ख) यत्र द्वितीया विभक्तिः नास्ति श्रेष्ठिनम्, स्नानोपकरणम्, सत्त्वरम्, कार्यकारणम् (ग) यत्र षष्ठी विभक्तिः नास्ति पश्यतः, स्ववीर्यतः, श्रेष्ठिन: सभ्यानाम्

(क) ल्यप् प्रत्ययः नास्ति — लौहसहस्रस्य (ख) द्वितीया विभक्तिः नास्ति — सत्त्वरम् (ग) षष्ठी विभक्तिः नास्ति — पश्यतः

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