Chapter 6
Chapter 6 — अध्ययन नोट्स
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लौहतुला
व्याख्यालौहतुला
यह पाठ विष्णुशर्मा द्वारा रचित प्रसिद्ध कथाग्रन्थ 'पञ्चतन्त्रम्' के 'मित्रभेद' नामक तन्त्र से लिया गया है। इस कथा में एक वणिक जिसका नाम जीर्णधन है, विदेश से व्यापार करके लौटता है और अपनी पूर्व में रखी हुई लौहतुला (लौह से बनी तुला) को सेठ से माँगता है। सेठ कहता है कि उसकी तुला मूषकों (चूहों) ने खा ली है। जीर्णधन अपने पुत्र धनदेव को स्नान के बहाने नदी के किनारे ले जाता है और उसे एक गुफा में छिपा देता है। जब सेठ पुत्र के विषय में पूछता है, तो जीर्णधन कहता है कि उसका पुत्र श्येन (बाज) द्वारा अपहृत हो गया है। इस प्रकार दोनों के बीच विवाद उत्पन्न होता है और वे न्यायालय पहुँचते हैं जहाँ धर्माधिकारियों द्वारा न्याय किया जाता है। इस कथा के माध्यम से मित्रता, विश्वासघात, न्याय और नीति के महत्वपूर्ण तत्वों को समझाया गया है। लौहतुला यहाँ एक प्रतीक के रूप में कार्य करती है जो व्यापार और न्याय के संदर्भ में वस्तु के मूल्यांकन का माध्यम है। कथा में वर्णित घटनाएँ सामाजिक और नैतिक शिक्षा प्रदान करती हैं।
- कथा 'पञ्चतन्त्रम्' के 'मित्रभेद' तन्त्र से ली गई है।
- जीर्णधन नामक वणिक विदेश से व्यापार करके लौटा।
- उसकी लौहतुला चूहों ने खा ली, ऐसा सेठ ने कहा।
- जीर्णधन ने पुत्र को नदी किनारे गुफा में छिपाया।
- सेठ ने पुत्र के अपहरण का आरोप लगाया।
- दोनों न्यायालय पहुँचे और न्यायाधिकारियों ने न्याय किया।
- 📌 लौहतुला: लोहे से बनी तुला जो वस्तुओं के भार मापन के लिए उपयोग होती है।
- 📌 वणिक: व्यापारी।
- 📌 श्येन: बाज, एक पक्षी।
शब्दार्थाः
अवधारणाशब्दार्थाः
इस भाग में पाठ में प्रयुक्त महत्वपूर्ण संस्कृत शब्दों के अर्थ दिए गए हैं। ये शब्द पाठ को समझने में सहायक होते हैं। उदाहरण के लिए, 'अधिष्ठाने' का अर्थ है 'स्थान पर', 'विभवक्षयात्' का अर्थ है 'धन के अभाव के कारण', 'स्ववीर्यत:' का अर्थ है 'अपने पराक्रम से' आदि। ये शब्द संस्कृत भाषा के व्याकरण और शब्दार्थ की समझ को बढ़ाते हैं। शब्दार्थों के माध्यम से विद्यार्थी न केवल शब्दों के अर्थ सीखते हैं, बल्कि उनका प्रयोग भी समझते हैं। इससे भाषा की पकड़ मजबूत होती है और पाठ का भावपूर्ण अध्ययन संभव होता है। **Table on page 3 (12×4)** | अधिष्ठाने | स्थाने | स्थान पर | At establishment | | --- | --- | --- | --- | | विभवक्षयात् | धनाभावात् | धन के अभाव के कारण | Due to loss of weather | | स्ववीर्यंत: | स्वपराक्रमेण | अपने पराक्रम से | With own effort | | लौहघटिता तुला | लौहनिर्मिता तुला | लोहे से बनी | Iron balance | | निक्षेप: | न्यास: | हुई तराजू | | | भ्रान्त्वा | भ्रमणं कृत्वा | धरोहर | Deposit | | | (देशाटनं कृत्वा) | पर्यटन करके | After visit | | त्वदीया | तव, भवदीया | तुम्हारी | Yours (f) | | ईदृश: | एतादृश: | ऐसा ही | Like this | | एनम् | एतम्/एनम् च पुंसि | इसे, एतत् शब्द पुं. द्वि. वि. | This (m) | | | द्वितीयैकवचने उभे | ए. व. में एतत्/ एनम् दोनों ही | | | | एव रूपे भवत:। | रूप होते हैं। | |
- अधिष्ठाने = स्थान पर
- विभवक्षयात् = धन के अभाव के कारण
- स्ववीर्यत: = अपने पराक्रम से
- लौहघटिता तुला = लोहे से बनी तुला
- निक्षेप: = हुई तराजू
- भ्रान्त्वा = भ्रमण करके
- 📌 शब्दार्थ: शब्दों के अर्थ।
- 📌 अधिष्ठाने: किसी स्थान या आधार पर।
- 📌 विभवक्षयात्: धन की कमी के कारण।
कथा विस्तार और संवाद
व्याख्याकथा विस्तार और संवाद
कथा में बताया गया है कि जीर्णधन का पुत्र धनदेव स्नान के लिए नदी के किनारे गया। जीर्णधन ने उसे एक गुफा में छिपा दिया और गुफा का द्वार बड़ी चट्टान से बंद कर दिया। जब सेठ ने पुत्र के विषय में पूछा, तो जीर्णधन ने कहा कि उसका पुत्र बाज द्वारा अपहृत हो गया
अभ्यास प्रश्न — Chapter 6
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. एकपदेन उत्तरं लिखत- (क) वणिक्पुत्रस्य किं नाम आसीत्? (ख) तुला कै: भक्षिता आसीत्? (ग) तुला कीदृशी आसीत्? (घ) पुत्रः केन हृतः इति जीर्णधनः वदति? (ङ) विवदमानौ तौ द्वावपि कुत्र गतौ?
उत्तर:
(क) वणिक्पुत्रस्य नाम 'जीर्णधनः' आसीत्। (ख) तुला मूषकैः भक्षिता आसीत्। (ग) तुला लौहसहस्त्रस्य (बहुत भारी/लोहे की) आसीत्। (घ) पुत्रः गृध्रेण (बाज द्वारा) हृतः इति जीर्णधनः वदति। (ङ) विवदमानौ तौ द्वावपि धर्माधिकारिणः समीपं गतौ।
व्याख्या:
प्रत्येक प्रश्न का उत्तर पाठ के अनुसार एक शब्द में दिया गया है। (क) पाठ में स्पष्ट लिखा है कि वणिक्पुत्र का नाम जीर्णधन था। (ख) श्रेष्ठी ने कहा कि तुला को मूषकों ने खा लिया। (ग) तुला भारी और लोहे की थी, अतः लौहसहस्त्रस्य। (घ) जीर्णधन ने श्रेष्ठी से कहा कि तुम्हारा पुत्र गृध्र (बाज) द्वारा उठा लिया गया। (ङ) दोनों न्याय के लिए धर्माधिकारी के पास गए।
Q2.2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत- (क) देशान्तर गन्तुमिच्छन् वणिक्पुत्रः किं व्यचिन्तयत्? (ख) स्वतुलां याचमानं जीर्णधनं श्रेष्ठी किम् अकथयत्? (ग) जीर्णधनः गिरिगुहाद्वारं कया पिधाय गृहमागतः? (घ) स्नानानन्तरं पुत्रविषये पृष्टः वणिक्पुत्रः श्रेष्ठिनं किम् अवदत्? (ङ) धर्माधिकारिण: जीर्णधनश्रेष्ठिनौ कथं तोषितवन्तः?
उत्तर:
(क) वणिक्पुत्रः 'मम लौहतुला श्रेष्ठिनः गृहे अस्ति' इति व्यचिन्तयत्। (ख) श्रेष्ठी अकथयत्—'मित्र! तव तुलां मूषकाः खादितवन्तः'। (ग) जीर्णधनः गिरिगुहाद्वारं बृहच्छिलया पिधाय गृहमागतः। (घ) वणिक्पुत्रः अवदत्—'श्रेष्ठिन्! पुत्रं गृध्रः हृतवान्'। (ङ) धर्माधिकारिणः तयोः विवादं श्रुत्वा न्यायपूर्वकं निर्णयं कृतवन्तः।
व्याख्या:
प्रत्येक उत्तर संस्कृत में पाठ के अनुसार दिया गया है। (क) विदेश जाने से पूर्व जीर्णधन ने सोचा कि उसकी तराजू श्रेष्ठी के घर है। (ख) श्रेष्ठी ने झूठ बोला कि तराजू चूहे खा गए। (ग) जीर्णधन ने गुफा के द्वार को बड़ी शिला से ढक दिया। (घ) स्नान के बाद श्रेष्ठी ने पुत्र के विषय में पूछा तो जीर्णधन ने कहा कि बाज उठा ले गया। (ङ) धर्माधिकारी ने दोनों को न्याय दिया और संतुष्ट किया।
Q3.3. स्थूलपदान्यधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत- (क) जीर्णधनः विभवक्षयात् देशान्तरं गन्तुमिच्छन् व्यचिन्तयत्। (ख) श्रेष्ठिन: शिशुः स्नानोपकरणमादाय अभ्यागतेन सह प्रस्थितः। (ग) वणिक् गिरिगुहां बृहच्छिलया आच्छादितवान्। (घ) सभ्यैः तौ परस्परं संबोध्य तुला-शिशु-प्रदानेन सन्तोषितौ।
उत्तर:
(क) जीर्णधनः के देशान्तर गमन का कारण क्या था? (ख) श्रेष्ठिनः शिशु स्नान के लिए किसके साथ गया? (ग) वणिक् ने गिरिगुहा को किस प्रकार ढका? (घ) सभ्यैः दोनों को किस प्रकार संतुष्ट किया गया?
व्याख्या:
यह प्रश्न छात्रों से अपेक्षा करता है कि वे दिए गए स्थूलपदों (मुख्य वाक्यांशों) के आधार पर प्रश्न बनाएँ। उत्तर में प्रत्येक वाक्यांश से संबंधित प्रश्न बनाए गए हैं।
Q4.5. तत्पदं रेखाङ्कितं कुरुत यत्र- (क) ल्यप् प्रत्ययः नास्ति विहस्य, लौहसहस्रस्य, संबोध्य, आदाय (ख) यत्र द्वितीया विभक्तिः नास्ति श्रेष्ठिनम्, स्नानोपकरणम्, सत्त्वरम्, कार्यकारणम् (ग) यत्र षष्ठी विभक्तिः नास्ति पश्यतः, स्ववीर्यतः, श्रेष्ठिन: सभ्यानाम्
उत्तर:
(क) ल्यप् प्रत्ययः नास्ति — लौहसहस्रस्य (ख) द्वितीया विभक्तिः नास्ति — सत्त्वरम् (ग) षष्ठी विभक्तिः नास्ति — पश्यतः
व्याख्या:
प्रत्येक श्रेणी में दिए गए शब्दों में से वह शब्द चुनना है जिसमें निर्दिष्ट प्रत्यय या विभक्ति न हो। (क) 'लौहसहस्रस्य' में ल्यप् प्रत्यय नहीं है। (ख) 'सत्त्वरम्' में द्वितीया विभक्ति नहीं है। (ग) 'पश्यतः' में षष्ठी विभक्ति नहीं है।
Q5.7. समस्तपदं विग्रहं वा लिखत- विग्रह: समस्तपदम् (क) स्नानस्य उपकरणम् (ख) .. .. .. = = गिरिगुहायाम्
उत्तर:
(क) स्नानस्य उपकरणम् = स्नानोपकरणम् (ख) गिरिगुहायाम् = गिरिगुहा + याम्
व्याख्या:
प्रत्येक समस्तपद का विग्रह (टुकड़ों में विभाजन) लिखा गया है। (क) स्नान के उपकरण — स्नानोपकरणम् (ख) गुफा में — गिरिगुहायाम्
Q6.(अ) यथापेक्षम् अधोलिखितानां शब्दानां सहायतया "लौहतुला" इति कथायाः सारांशं संस्कृतभाषया लिखत- वणिकपुत्र: स्नानार्थम् लौहतुला अयाचत् वृत्तान्तं ज्ञात्वा श्रेष्ठिन® प्रत्यागतः गतः प्रदानम्
उत्तर:
लौहतुला इति कथा: वणिकपुत्रः जीर्णधनः विभवक्षयात् देशान्तरं गन्तुम् इच्छन् स्वलौहतुलां श्रेष्ठिनः समीपे निक्षिप्य गतः। किञ्चित्कालानन्तरं प्रत्यागतः सः श्रेष्ठिनं स्वलौहतुलां दातुम् अयाचत्। श्रेष्ठी अवदत्—'मित्र! तव लौहतुलां मूषकाः खादितवन्तः'। ततः जीर्णधनः श्रेष्ठिनः पुत्रं स्नानार्थम् नदीतीरं नीत्वा गिरिगुहायाम् गुप्तवान्। श्रेष्ठी पुत्रविषये पृष्टः, जीर्णधनः अवदत्—'गृध्रः पुत्रं हृतवान्'। विवादः धर्माधिकारीसमक्षं गतः। धर्माधिकारी न्यायपूर्वकं निर्णयं कृतवन्तः। अन्ते श्रेष्ठिना लौहतुला जीर्णधनाय प्रदत्ता, जीर्णधनः अपि श्रेष्ठिनः पुत्रं प्रत्यागच्छत्।
व्याख्या:
प्रश्न में दिए गए शब्दों की सहायता से लौहतुला कथा का सारांश संस्कृत में लिखा गया है। इसमें कथा के मुख्य बिंदुओं का समावेश है—जीर्णधन का विदेश गमन, लौहतुला श्रेष्ठी के पास रखना, लौटकर माँगना, श्रेष्ठी का बहाना, पुत्र को छिपाना, न्यायालय में विवाद, और न्याय द्वारा समाधान।
Q7.पाठ 'लौहतुला' किस ग्रन्थ से लिया गया है?
उत्तर:
पञ्चतन्त्रम्
व्याख्या:
'लौहतुला' पाठ विष्णुशर्मा द्वारा रचित 'पञ्चतन्त्रम्' के 'मित्रभेद' तन्त्र से लिया गया है।
Q8.जीर्णधन ने अपनी लौह की तुला किसके घर में धरोहर के रूप में रखी थी?
उत्तर:
श्रेष्ठी के घर
व्याख्या:
जीर्णधन ने अपनी लौह की तुला श्रेष्ठी के घर में धरोहर के रूप में रखी थी।
Shemushi Prathmo Bhag के सभी 16 अध्याय
Sanskrit · Class 9
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