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लौहतुला | Class 9 Sanskrit Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

लौहतुला | Class 9 Sanskrit Notes

लौहतुला – this guide gives you a concise, exam-ready overview of लौहतुला from Class 9 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

शब्दार्थाः

इस भाग में पाठ में प्रयुक्त महत्वपूर्ण संस्कृत शब्दों के अर्थ दिए गए हैं। ये शब्द पाठ को समझने में सहायक होते हैं। उदाहरण के लिए, 'अधिष्ठाने' का अर्थ है 'स्थान पर', 'विभवक्षयात्' का अर्थ है 'धन के अभाव के कारण', 'स्ववीर्यत:' का अर्थ है 'अपने पराक्रम से' आदि। ये शब्द संस्कृत भाषा के व्याकरण और शब्दार्थ की समझ को बढ़ाते हैं।

शब्दार्थों के माध्यम से विद्यार्थी न केवल शब्दों के अर्थ सीखते हैं, बल्कि उनका प्रयोग भी समझते हैं। इससे भाषा की पकड़ मजबूत होती है और पाठ का भावपूर्ण अध्ययन संभव होता है।

📊 Diagram: Table on page 3 (12×4)

🧪 Activity: विद्यार्थी दिए गए शब्दों के अर्थ याद करें और वाक्यों में उनका प्रयोग करें।

🔗 Connection: यह भाग अगले संवादों और कथा विस्तार को समझने में मदद करता है।

Table on page 3 (12×4)

अधिष्ठानेस्थानेस्थान परAt establishment
विभवक्षयात्धनाभावात्धन के अभाव के कारणDue to loss of weather
स्ववीर्यंत:स्वपराक्रमेणअपने पराक्रम सेWith own effort
लौहघटिता तुलालौहनिर्मिता तुलालोहे से बनीIron balance
निक्षेप:न्यास:हुई तराजू
भ्रान्त्वाभ्रमणं कृत्वाधरोहरDeposit
(देशाटनं कृत्वा)पर्यटन करकेAfter visit
त्वदीयातव, भवदीयातुम्हारीYours (f)
ईदृश:एतादृश:ऐसा हीLike this
एनम्एतम्/एनम् च पुंसिइसे, एतत् शब्द पुं. द्वि. वि.This (m)
द्वितीयैकवचने उभेए. व. में एतत्/ एनम् दोनों ही
एव रूपे भवत:।रूप होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. एकपदेन उत्तरं लिखत- (क) वणिक्पुत्रस्य किं नाम आसीत्? (ख) तुला कै: भक्षिता आसीत्? (ग) तुला कीदृशी आसीत्? (घ) पुत्रः केन हृतः इति जीर्णधनः वदति? (ङ) विवदमानौ तौ द्वावपि कुत्र गतौ?

(क) वणिक्पुत्रस्य नाम 'जीर्णधनः' आसीत्। (ख) तुला मूषकैः भक्षिता आसीत्। (ग) तुला लौहसहस्त्रस्य (बहुत भारी/लोहे की) आसीत्। (घ) पुत्रः गृध्रेण (बाज द्वारा) हृतः इति जीर्णधनः वदति। (ङ) विवदमानौ तौ द्वावपि धर्माधिकारिणः समीपं गतौ।

2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत- (क) देशान्तर गन्तुमिच्छन् वणिक्पुत्रः किं व्यचिन्तयत्? (ख) स्वतुलां याचमानं जीर्णधनं श्रेष्ठी किम् अकथयत्? (ग) जीर्णधनः गिरिगुहाद्वारं कया पिधाय गृहमागतः? (घ) स्नानानन्तरं पुत्रविषये पृष्टः वणिक्पुत्रः श्रेष्ठिनं किम् अवदत्? (ङ) धर्माधिकारिण: जीर्णधनश्रेष्ठिनौ कथं तोषितवन्तः?

(क) वणिक्पुत्रः 'मम लौहतुला श्रेष्ठिनः गृहे अस्ति' इति व्यचिन्तयत्। (ख) श्रेष्ठी अकथयत्—'मित्र! तव तुलां मूषकाः खादितवन्तः'। (ग) जीर्णधनः गिरिगुहाद्वारं बृहच्छिलया पिधाय गृहमागतः। (घ) वणिक्पुत्रः अवदत्—'श्रेष्ठिन्! पुत्रं गृध्रः हृतवान्'। (ङ) धर्माधिकारिणः तयोः विवादं श्रुत्वा न्यायपूर्वकं निर्णयं कृतवन्तः।

3. स्थूलपदान्यधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत- (क) जीर्णधनः विभवक्षयात् देशान्तरं गन्तुमिच्छन् व्यचिन्तयत्। (ख) श्रेष्ठिन: शिशुः स्नानोपकरणमादाय अभ्यागतेन सह प्रस्थितः। (ग) वणिक् गिरिगुहां बृहच्छिलया आच्छादितवान्। (घ) सभ्यैः तौ परस्परं संबोध्य तुला-शिशु-प्रदानेन सन्तोषितौ।

(क) जीर्णधनः के देशान्तर गमन का कारण क्या था? (ख) श्रेष्ठिनः शिशु स्नान के लिए किसके साथ गया? (ग) वणिक् ने गिरिगुहा को किस प्रकार ढका? (घ) सभ्यैः दोनों को किस प्रकार संतुष्ट किया गया?

5. तत्पदं रेखाङ्कितं कुरुत यत्र- (क) ल्यप् प्रत्ययः नास्ति विहस्य, लौहसहस्रस्य, संबोध्य, आदाय (ख) यत्र द्वितीया विभक्तिः नास्ति श्रेष्ठिनम्, स्नानोपकरणम्, सत्त्वरम्, कार्यकारणम् (ग) यत्र षष्ठी विभक्तिः नास्ति पश्यतः, स्ववीर्यतः, श्रेष्ठिन: सभ्यानाम्

(क) ल्यप् प्रत्ययः नास्ति — लौहसहस्रस्य (ख) द्वितीया विभक्तिः नास्ति — सत्त्वरम् (ग) षष्ठी विभक्तिः नास्ति — पश्यतः

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