स्वर्णकाक: | Class 9 Sanskrit Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

स्वर्णकाक: – this guide gives you a concise, exam-ready overview of स्वर्णकाक: from Class 9 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
चक्रवृद्धि ब्याजः - धनस्य तीव्रवृद्धिः
चक्रवृद्धि ब्याजः आर्थिक व्यवहारस्य एकः महत्वपूर्णः सिद्धान्तः अस्ति। एषः ब्याजः पूर्ववर्ती मूलधनसहितं गण्यते, यत् धनस्य तीव्रवृद्धिं जनयति। साधारणब्याजात् भिन्नः चक्रवृद्धि ब्याजः अधिकं लाभदायकः अस्ति। चक्रवृद्धि ब्याजस्य गणना पद्धतिः वित्तीय व्यवहारस्य सम्यक् अवबोधाय आवश्यकः। स्वर्णकाकस्य कथायाम् चक्रवृद्धि ब्याजस्य महत्त्वं स्पष्टं कृतम्। निम्नलिखित तालिकायाम् चक्रवृद्धि ब्याजेन धनस्य वृद्धिः साधृतः अस्ति।
📊 Diagram: See table_5: Table on page 9 (11×5)
🧪 Activity: छात्राः चक्रवृद्धि ब्याजस्य गणनां कृत्वा धनस्य वृद्धिं अनुभवतु।
🔗 Connection: अगले अनुभागे आर्थिकसाक्षरतायाः महत्त्वं छात्रजीवने विवेच्यते।
Table on page 9 (11×5)
| वर्षाणि | आरम्भिकधनम् | वार्षिकः वृद्ध्यंशः (10%) | चक्रवृद्ध्यंश- सहितं धनम् | साधारणवृद्ध्यंशेन सह धनम् |
|---|---|---|---|---|
| 1. | 1,000.00 | 100.00 | 1,100.00 | 1100 |
| 2. | 1,100.00 | 110.00 | 1,210.00 | 1200 |
| 3. | 1,210.00 | 121.00 | 1,331.00 | 1300 |
| 4. | 1,331.00 | 133.10 | 1,464.10 | 1400 |
| 5. | 1,464.10 | 146.41 | 1,610.51 | 1500 |
| 6. | 1,610.51 | 161.05 | 1,771.56 | 1600 |
| 7. | 1,771.56 | 177.16 | 1,948.72 | 1700 |
| 8. | 1,948.72 | 194.87 | 2,143.59 | 1800 |
| 9. | 2,143.59 | 214.36 | 2,357.95 | 1900 |
| 10. | 2,357.95 | 235.80 | 2,593.74 | 2000 |
Table on page 5 (10×5)
| शब्द: | अर्थ: | हिन्दी | English | मातृभाषया अर्थ लिखत |
|---|---|---|---|---|
| अपव्यय: (पुं.प्र.ए.व.) | व्यर्थव्यय: | अनुचित व्यय | Unnecessary expense | |
| अवाप्तुम् (अव + √आप् + तुमुन्, अव्ययम्) | प्राप्तुम् | प्राप्त करने के लिए | To get | |
| अविच्छिन्न: (नञ्ज् तत्पुरुष:, पुं.प्र.ए.व.) | न विच्छिन्न: | अटूट | Inseparable | |
| अर्जितस्य (√अर्जु + क्त, पुं.प्र.ए.व.) | उपार्जितस्य | कमाए हुए का | Of the earned | |
| अर्थोपार्जनम् (ष.तत्पुरुष:, नपुं.प्र.ए.व.) | अर्थस्य उपार्जनम् | धन कमाना | Earning | |
| आजीविका (स्त्री.प्र.ए.व.) | वृत्ति: | व्यवसाय | Livelihood | |
| आडम्बरपूर्ण: (पुं.प्र.ए.व.) | पाखण्डयुक्त: | दिखावे से भरा | Ostentatious | |
| आर्थिकव्यवहार: (पुं.प्र.ए.व.) | धनविषयक: व्यवहार: | आर्थिक लेन-देन | Financial behavior | |
| आर्थिकसाक्षरता (कर्मधारय: स्त्री.प्र.ए.व.) | आर्थिकी साक्षरता | वित्तीय साक्षरता | Financial literacy |
Table on page 6 (1×5)
| --- | --- | --- | --- | --- |
|---|
| उचितनिवेशम्
Table on page 7 (1×4)
| --- | --- | --- | --- |
|---|
| पुटीकृतभोजनम्
Table on page 8 (1×5)
| --- | --- | --- | --- | --- |
|---|
| वरिष्ठ-नागरिक-संचय-योजना
Table on page 11 (2×4)
| विद् | विद्यते | विद्येते | विद्यन्ते |
|---|---|---|---|
| लभ् | ………………… | लभेते | लभन्ते |
Table on page 12 (2×3)
| अपेक्ष | अपेक्षते | अपेक्षन्ते |
|---|
| वर्ध | ...
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. एकपदेन उत्तरं लिखत- (क) माता काम् आदिशत्? (ख) स्वर्णकाकः कान् अखादत्? (ग) प्रासादः कीदृशः वर्तते? (घ) गृहमागत्य तया का समुद्घाटिता? (ङ) लोभाविष्टा बालिका कीदृशीं मज्जूषां नयति?
(क) माता तण्डुलान् आदिशत्। (ख) स्वर्णकाकः तण्डुलान् अखादत्। (ग) प्रासादः सुवर्णमयः वर्तते। (घ) गृहमागत्य तया मञ्जूषा समुद्घाटिता। (ङ) लोभाविष्टा बालिका गुरुतमां मज्जूषां नयति।
1. (अ) अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत- (क) निर्धनायाः वृद्धायाः दुहिता कीदृशी आसीत्? (ख) बालिकया पूर्वं कीदृशः काकः न दृष्टः आसीत्? (ग) निर्धनायाः दुहिता मञ्जूषायां कानि अपश्यत्? (घ) बालिका किं दृष्ट्वा आश्चर्यचकिता जाता? (ङ) गर्विता बालिका कीदृशं सोपानम् अयाचत कीदृशं च प्राप्नोत्।
(क) निर्धनायाः वृद्धायाः दुहिता विनयी आसीत्। (ख) बालिकया पूर्वं स्वर्णकाकः न दृष्टः आसीत्। (ग) निर्धनायाः दुहिता मञ्जूषायां सुवर्णमणीन् अपश्यत्। (घ) बालिका सुवर्णकाकं दृष्ट्वा आश्चर्यचकिता जाता। (ङ) गर्विता बालिका सुवर्णमयं सोपानम् अयाचत, लोहमयं च प्राप्नोत्।
2. (क) अधोलिखितानां शब्दानां विलोमपदं पाठात् चित्वा लिखत- (i) पश्चात् (ii) हसितुम् (iii) अधः (iv) श्वेत: (v) सूर्यास्त: (vi) सुप्तः
(i) पूर्वम् (ii) रोदितुम् (iii) उपरि (iv) कृष्णः (v) सूर्योदयः (vi) जाग्रतः
2. (ख) सन्धिं कुरुत- (i) नि + अवसत् (ii) सूर्य + उदयः (iii) वृक्षस्य + उपरि (iv) हि + अकारयत् (v) च + एकाकिनी (vi) इति + उक्त्वा (vii) प्रति + अवदत् (viii) प्र + उक्तम् (ix) अत्र + एवं (x) तत्र + उपस्थिता (xi) यथा + इच्छम्
(i) न्यवसत् (ii) सूर्योदयः (iii) वृक्षस्योपरि (iv) ह्यकारयत् (v) चैकाकिनी (vi) इत्युक्त्वा (vii) प्रत्यवदत् (viii) प्रोक्तम् (ix) अत्रैवम् (x) तत्रोपस्थिता (xi) यथैच्छम्
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