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अपवाह | Class 9 Social Science Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

अपवाह | Class 9 Social Science Notes

अपवाह – this guide gives you a concise, exam-ready overview of अपवाह from Class 9 Social Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

अपवाह क्या है?

अपवाह का अर्थ है जल का वह प्रवाह जो किसी विशेष क्षेत्र से होकर गुजरता है और अंततः किसी नदी, झील, समुद्र या अन्य जलस्रोत में मिलता है। जब वर्षा होती है, तो वर्षा जल भूमि की सतह पर बहता है। यह बहाव उस क्षेत्र के जलग्रहण क्षेत्र या अपवाह क्षेत्र से होकर गुजरता है। अपवाह जल भूमि के विभिन्न भागों से होकर बहता है, जिसमें नदियाँ, नाले, और अन्य जलस्रोत शामिल होते हैं। अपवाह की प्रक्रिया में वर्षा जल भूमि की सतह पर बहता है, कुछ जल भूमि में रिस जाता है, और कुछ जल वाष्पित होकर वापस वातावरण में चला जाता है। अपवाह जल का संचलन प्राकृतिक भू-आकृतिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है, जैसे भूमि की ढाल, मिट्टी का प्रकार, वनस्पति आदि। अपवाह जल का अध्ययन जल संसाधनों के प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण, और कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

📊 Diagram: चित्र 3.1 : जल विभाजक

🧪 Activity: वर्षा जल के बहाव को समझने के लिए अपने आस-पास के क्षेत्र में वर्षा के बाद जल के बहाव का अवलोकन करें और नोट करें कि जल कहाँ से होकर बह रहा है।

🔗 Connection: यह अनुभाग अपवाह क्षेत्र और जल विभाजक की अवधारणा से जुड़ता है, जहाँ अपवाह क्षेत्र की सीमाएँ और जल विभाजक की भूमिका समझाई जाती है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अपवाह क्या है? अपवाह जल किस प्रकार बहता है और यह किन प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है?

अपवाह वह जल प्रवाह है जो किसी क्षेत्र से होकर नदी, झील या समुद्र में मिलता है। यह वर्षा जल भूमि की सतह पर बहता है और भूमि की ढाल, मिट्टी, वनस्पति जैसे प्राकृतिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है।

चित्र 3.1 : जल विभाजक में दिखाए गए जल विभाजक की भूमिका क्या है? इसे विस्तार से समझाइए। यह चित्र एक पहाड़ी क्षेत्र को दर्शाता है जहाँ ऊंची भूमि की रेखा दो अपवाह क्षेत्रों को अलग करती है। एक ओर जल एक नदी की ओर बहता है और दूसरी ओर दूसरी नदी की ओर।

जल विभाजक वह ऊंची भूमि या पहाड़ी रेखा होती है जो दो अपवाह क्षेत्रों को अलग करती है। यह निर्धारित करता है कि वर्षा जल किस नदी में जाएगा। जल विभाजक जल संसाधन प्रबंधन में महत्वपूर्ण है।

नदी के प्रवाह की तीन अवस्थाएँ कौन-कौन सी हैं? प्रत्येक अवस्था के मुख्य लक्षण लिखिए।

नदी की तीन अवस्थाएँ हैं: स्रोत, मध्य भाग, और मुहान। स्रोत में नदी तेज बहती है और कटाव अधिक होता है। मध्य भाग में नदी की गति धीमी होती है और तलछट जमा होता है। मुहान में नदी समुद्र या झील से मिलती है और तलछट जमाने की क्रिया होती है।

चित्र 3.3 : नदी की विभिन्न अवस्थाएँ में नदी के स्रोत, मध्य भाग और मुहान को पहचानिए और उनके भू-आकृतिक प्रभावों का वर्णन कीजिए। यह चित्र नदी के तीन भागों को दर्शाता है: पहाड़ी स्रोत से लेकर मैदानों में बहने और अंत में समुद्र में मिलने तक।

स्रोत वह भाग है जहाँ नदी तेज बहती है और घाटियाँ बनती हैं। मध्य भाग में नदी की गति धीमी होती है और तलछट जमा होता है। मुहान में नदी समुद्र से मिलती है और डेल्टा बनता है।

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