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भारत में औपनिवेशिक काल | Class 8 Social Science Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 8 मिनट का पठन

भारत में औपनिवेशिक काल | Class 8 Social Science Notes

भारत में औपनिवेशिक काल – this guide gives you a concise, exam-ready overview of भारत में औपनिवेशिक काल from Class 8 Social Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का उदय

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1600 में हुई थी। प्रारंभ में यह कंपनी केवल व्यापार के लिए भारत आई थी। कंपनी ने धीरे-धीरे भारत के तटीय क्षेत्रों में अपने व्यापारिक केंद्र स्थापित किए। स्थानीय शासकों के साथ समझौते कर उन्होंने अपने प्रभाव को बढ़ाया। कंपनी ने सैन्य शक्ति का उपयोग कर अपने हितों की रक्षा की और धीरे-धीरे राजनीतिक नियंत्रण भी स्थापित किया। 18वीं शताब्दी के मध्य तक कंपनी ने बंगाल, बिहार और उड़ीसा पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया।

📊 Diagram: Figure 6, Table 3 — ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक केंद्रों और राजनीतिक विस्तार का चित्र।

🧪 Activity: छात्रों से पूछें कि वे कंपनी के व्यापार से राजनीतिक सत्ता में परिवर्तन के कारणों पर चर्चा करें।

🔗 Connection: यह खंड ब्रिटिश सत्ता के विस्तार और उसके प्रभाव की चर्चा से जुड़ता है।

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| | 1690 1740 1790 1840 1890 1770–1772 — बंगाल का 1848–49 — सिख साम्रजा ््य क प्रथम भीषण अकाल पतन, ईस््ट इडंिया कंपनी द्वरा ा पं का अधिग्रहण 1746–1763 — ब्रिटिश 1829–1833 — वर्तमान और फ््ाांसर ीसियोों के मध््य मघे ालय म ेंखासी जनक््रंाति 1857 — महान कर््टना क यदु ्ध भारतीय क््ाारंति | ा जाब |

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| | परंत ु ‘औपनिव ेशिक यगु ’ सामान््यत: 15वीीं शताब्् ददी से आरंभ हुए यरू ोपीय विस्् ततार को इगं ित करता ह ै जि‍सने कुछ ही शताब््ददिोयो ं म ें विश्‍व के विशाल भभू ागोों तक अपना प्रसार किया । उच््च कक्षाओ ं में आप जानेंगे कि यरू ोपीय शक््‍ततियोों— विशेषकर स््पपेन, परु ््तगाल, ब्रिटेन, फ््ाांरस और नी दरलैंड ने अफ्रीका, एशिया , अमरे िका, ऑस्टर्ेलिया तथा प्रशांत महासागर के अनेक दव् ीपोों पर अधिकार कर उपनिव ेश स््‍थथापित किए। ये विजय अभियान प्राय : सैन्‍य बल से संपन्‍न होते थे, जिसमें मलू निवासियो ों का नरसंहार अथवा दासत््व सम््ममिलति था। ऐसे अभियानो ों के लिए उन राष्टट्र रों को किसने पे्ररित किया ? यरू ोपीय शक््‍तोतियो ं के बी च राजन ैतिक प्रतिस्् पर्धधा ने भौगोलिक विस््तरता तथा वैश््‍वविक प्रभाव के लिए एक प्रतिस््पर्धधा उत््पन््न कर दी। भौगोलिक विस्् ततार के स्् पष्‍ ट आर्थथ िक लाभ थे— नए प्राकृतिक संसाधनोों की प्राप्‍त‍ि, नए बाजारो ों तथा नए व््ययापार मा्र ग गोंतक पहुचँ और प्राय : लटू भी, जैसा कि हम आगे दखे ेंगे। स्् थथानीय जनसंख््यया का ईसाई धर््म में परिवर्नत एक अन््य पब्र ल पे्ररणा थी। एक अपेक्षाकृत गौण किंत ुमहत्् वपरू ्ण कारण था वैज्ञानिक जिज्ञासा— पथृ ्् ववी के भौगोलिक | दासत्् व किसी व््यक््‍ तति को दास बना दने े की क्रिया । |

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| अध््यक्षाधीन मंडलोों (परे्सीडेंसी) को इस दशे और इसकी प्रजा को लटू के लिए शि रूप में दखे ते थे... उत्तरवर्ती अंग्रेजोों के अधीन प्रशासकोों के रूप में... यह लटू आज भी परू ्ववर्ती काल से कहीीं अधिक उग्र रूप में चल रही ह.ै .. आधनु िक इगं््लैंड भारती से महान बना ह.ै .. संपदा सदवै शक््‍ततिशाली लोगोों के बल और कौशल द्वारा छीन रही ह।ै — वि�लि�यम डि�ग्बीी ( | | कार के किसी य संपदा ी जाती 1901) |

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| ्र 4.1 — यनू ानी चित्रकार स््पपिरिडियोन रोमा द्वारा वर ्ष1778 में निर्तममि चित्र सका शीर्षक ह,ै ‘द ईस््ट ऑफरिंग इट्स रिचजे टू ब्रितानिया’ (इस चित्र पर | महत्‍ | वपरू ्ण प्रश्‍न | | | 1. उपनि�वेशवाा 2. यूरोोपीीय शक् ओर आकर् क्याा थे? 3. औपनि�वेशि� उसकेे दौौराान एवं भू-रााजनै 4. ब्रि�ताानीी (ब्रि प्रभुत्व काा भ पड़ाा? | द क्याा है? ‍ति�ि�योंं कोो भाारत क षि�ित करने वााले काा क कााल से पूर्वव त भाारत कीी आर्थि�ि ति�क स्थि�िति� क्याा �टि�श) औपनि�वेशि ाारत पर क्याा प्रभाा |

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| | अन््य पश ु भी मारे गए) की कुल संख््यया 5 करोड ़ से 10 करोड ़ के मध््य रही, जो द्वितीय विश्‍वयदु ्ध में मतृ लोगोों की संख््यया के समकक्ष ह।ै बर् िटिश शासन ने कुछ नगरोों में अकाल-राहत शिविर तो आरंभ किए (चित्र 4.9) किंत ु अल््प संख््यया तथा अपर््पया ्‍ त आपरू ् तति के साथ। कुछ अधिकारियोों का तो यह मत था कि अकाल-राहत जान -बझू कर अत्् ययंत‍ कम रखी जानी चाहि ए। उदाहरण के लिए, 1878–80 के अकाल आयोग की एक टिप््पणी में लिखा गया — “यह सिदध्् ांत कि अकाल के समय दरिद्र जन सहाय ता की माँग करने के अधिकारी हैं... संभवत: यह विश्् ‍ववास उत््पन्् न करेगा कि वे हर परिस््थथिति में सहाय ता पान े के अधिकारी हैं।” हमें यह ध््ययान में रखना चाहि ए कि भारत में अकालोों का इतिहास हर काल में रहा ह,ै जो सखू ा, बा ढ,़ यदु ्ध अभियानो ों एवं अन््य कारकोों से उत््पन््न हुए, परंत ु इतने व््ययापक स््तर पर कभी नहीीं। औपनिव ेशिक काल में भारत, विशषे कर गर् ामीण भारत, गहन निर्धनता में डूब गया और कभी उबर नहीीं पाया । भारत की संपदा का नि कास जैसा कि हमने परू ्व में दखे ा, भारत का आर्थथ िक शोषण, ब्रिटिश औपनिव ेशिक नीति की आधारशिला था। 1895 में अमरे िकी इतिहासकार और राजन ैतिक विचारक बू्र क््स एडम््स ने लिखा— | |

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| | “प््लसला ी के यदु ्ध के तरु ंत बा द, बंगाल की लटू लंदन पहुचँ ना आरंभ हुई और उसका प्रभाव लगभग तत्कक्षण अनभु व किया गया क््ोयो ंकि सभी विद्वान इस तथ््य पर सहमत हैं कि औद्योगिक क््ारांति का आरंभिक तिथि वर् ष1760 ह.ै .. संभवत: विश्‍व के इतिहास में किसी भी निव ेश ने उतना लाभ नीह ी ं दिया , जितना कि भारत की लटू से प्राप्‍त हुआ।” | | | | दसू रे शब्् दोों में, एडम््स के अनसु ार— बर् िटेन में औद्योगिक क््ारांति, जिसे भारी निव ेश की आवश््यकता थी, आशिक रूप से भारत से लटी गई सपदा से सभव हो पाई (यह वाक् ्ययशां | |

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| “गर् ाम समदु ाय लघ ु गणराज््योों के सदृश हैं, जिनमें प्राय ः वह सब कुछ होता ह ै जिसकी उन््हें आवश््यकता होती ह।ै वे वहाँ बन े रहते ह ैं जहाँ अन््य सब कुछ नष्‍ट हो जाता ह।ै एक के बा द एक राजव ंश समाप्‍त हो जाते हैं, क््ारांति के पश््‍चचात पनु ः क्् ारांति होती ह ै किंत ु ग्रमा समदु ाय यथाव त बना रहता ह.ै .. गर् ाम समदु ायोों की यह संगठित अवस््थथा, जहाँ प्रत््येक समदु ाय अपने आप में एक लघ ु राज््य के रूप में कार्य् करता ह,ै भारत की जनसंपदा के संरक्ष ण म ें किसी भी अन््य कारण की अपेकष् ा अधिक सहायक रही ह।ै ” | | |

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| | जिसकी उन््हें आवश््यकता होती ह।ै वे वहाँ बन े रहते ह ैं जहाँ अन््य सब कुछ नष्‍ट हो जाता ह।ै एक के बा द एक राजव ंश समाप्‍त हो जाते हैं, क््ारांति के पश््‍चचात पनु ः क्् ारांति होती ह ै किंत ु ग्रमा समदु ाय यथाव त बना रहता ह.ै .. गर् ाम समदु ायोों की यह संगठित अवस््थथा, जहाँ प्रत््येक समदु ाय अपने आप में एक लघ ु राज््य के रूप में कार्य् करता ह,ै भारत की जनसंपदा के संरक्ष ण म ें किसी भी अन््य कारण की अपेकष् ा अधिक सहायक रही ह।ै ” | | | | बर् टि िश शासन न े इन दशे ी शासन पण्र ला यि ो ो ं को कम्र बद ्ध रपू स े न्ष ‍ट किया और इनक े स्् थाथ न पर एक केंदे र् की ृत नौकरशाही स्् थपथा ित की जिसका पम्र खु उद्दशे ‍् य कर-सगं ह्र और विध ि-व््वय स््थथा बना ए रखना था, न कि जनहि त को बढ़़ावा दने ा । इस परिवर्नत न ेसमदु ाय -आधारित निरय्ण -नि्र ्णमा की शता्ब ्दद िोयो ंपरु ाीन व्् वय स्् थओथा ंको समा्प त‍ कर दिया । ब्रिटिश कान नू -संहिताओ ं की स्् थथापना ने उन प्रथागत विध ियोों और परंपराओ ं की उपेकष् ा की जो पीढ़़ियोो ं से भारतीय समदु ायोो ं को संचालि त करती थीीं। इसे आधनु िक ता के रूप में प्रस््तततु किया गया , परंत ु वा स््तव में यह एक ऐसा विदशे ी ढाँचा था जो भारत की आवश््यकताओ ंके अनकु ूल नहीीं था और इसने सामान््य जन को न््ययया िक व््वय स््थथा से विमखु कर दिया । न््ययया ा लय महगँ े, अधिक समय लेने और एक विदशे ी भाषा में संचालि त होने वा ले बन गए। भारतीय शि क्षा का रूपांतरण— ‘भूरे अंगरे्ज’ तैयार करना शिक्षा एक प्रभाव शाली उपकरण बन गई जिसके द्वारा ऐसे भारतीयोों का वर्ग निर््तममि किया गया जो ब्रिटिश हितोो ं की सेवा करे। परू ्ववर्त ीशताब््ददियोों में भारत म ेंविविध शिक्ष णपरंपराए ँ थीीं — पाठ शालाए,ँ मदरसे, विहार तथा विभि न््न प्रकार की शिष््य-पश्र िक्षण प्रणा ली। इन संस््थथानोों द्वारा न केवल व््ययावहारिक ज्ञान अपित ुसांस््कृतक िक मलू ््योों और परंपराओ ंका भी प्रसारण होता था। यहाँ तक कि 19वीीं शताब्् ददी के प्रारभ में ब्रिटिश प्रतिवेदनोों म ें भारत में | |

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डिंब या अंडों का निर्माण होता है

अंडाशय

सौर परिवार का सबसे दूर का ग्रह कौन सा है?

नेप्टयून

शिशु का विकास किस भाग में होता है?

गर्भाशय (Uterus)

तारे ______________ की ओर गति करते प्रतीत होते हैं ।

पूर्व से पश्चिम

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