Chapter 4
Chapter 4 — अध्ययन नोट्स
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औपनिवेशिक काल का परिचय
व्याख्याऔपनिवेशिक काल का परिचय
औपनिवेशिक काल वह ऐतिहासिक समय था जब भारत पर यूरोपीय शक्तियों का शासन स्थापित हुआ। यह काल लगभग 15वीं शताब्दी से शुरू होकर 20वीं शताब्दी तक चला। इस अवधि में भारत के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन में गहरा परिवर्तन आया। यूरोपीय शक्तियों ने भारत में अपने व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए सैन्य और प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित किया। इस काल में भारत के संसाधनों का दोहन हुआ, भारतीय समाज में नई शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाएं आईं, लेकिन साथ ही आर्थिक शोषण और सामाजिक असमानताएं भी बढ़ीं। औपनिवेशिक काल ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम की नींव रखी।
- औपनिवेशिक काल में भारत पर यूरोपीय शक्तियों का शासन स्थापित हुआ।
- यह काल 15वीं शताब्दी से शुरू होकर 20वीं शताब्दी तक चला।
- इस काल में भारत के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन में गहरा परिवर्तन आया।
- यूरोपीय शक्तियों ने भारत में व्यापारिक और सैन्य नियंत्रण स्थापित किया।
- भारत के संसाधनों का दोहन हुआ और आर्थिक शोषण बढ़ा।
- औपनिवेशिक काल ने स्वतंत्रता संग्राम की नींव रखी।
- 📌 औपनिवेशिक काल: वह समय जब भारत पर विदेशी शक्तियों का शासन था।
- 📌 ईस्ट इंडिया कंपनी: ब्रिटिश कंपनी जो भारत में व्यापार और शासन के लिए आई।
यूरोपीय शक्तियों का भारत में आगमन
व्याख्यायूरोपीय शक्तियों का भारत में आगमन
15वीं शताब्दी के अंत में यूरोपीय देशों ने समुद्री मार्गों से भारत तक पहुंचना शुरू किया। पुर्तगाल सबसे पहले भारत पहुंचा और गोवा में अपना उपनिवेश स्थापित किया। इसके बाद डच, फ्रांसीसी और ब्रिटिश भी भारत आए। इन शक्तियों का मुख्य उद्देश्य भारत के समृद्ध व्यापारिक संसाधनों का लाभ उठाना था। उन्होंने समुद्री मार्गों का विकास किया और भारत के तटीय क्षेत्रों में व्यापारिक केंद्र बनाए। इन शक्तियों के बीच भारत में व्यापार और क्षेत्रीय प्रभुत्व के लिए प्रतिस्पर्धा हुई। **Table on page 2 (3×4)** | चित्र | | 1440 1490 1540 1590 164 1560 — गोवा म ेंधर ््म न््ययायाधिकरण (इकं््वविजिशन) की स्् थथापना 1612–1690 — अगं ्रेज ी ईस््ट इडंिया कंपनी द्वरा ा सरू त, मदर्ास, बंबई एवं कलकतत्ा में व््ययापारिक केंेद्ररों की स््थथापना। 4.2 | | | --- | --- | --- | --- | | | | | | | | चित्र | 4.2 | | | का अ ् ध य यन: भारत और उस े क आगे | क ् का ष 8, भाग 1 | | पिछले अध््ययया में हमने दखे ा कि मराठोों ने मगु ल साम्राज््य को अत््यधिक दरु ्बल कर दिया किंत ु 19वीीं शताब््दद ी के आरंभ में वे स््वयं ब्रिटिश सने ा द्वारा पराज ित हो गए। तथापि भारत के ब्रटि िश साम्राज्य की ‘मकु ुटमणि’ बनन े का कारण केवल सैन् य अभियान ही नही था। वा स्तव में भारत बर् िटिश साम्राज््य का सबसे विशाल उपनिव ेश था। उपनिवेशवाद का युग इस प्रसंग पर पहुचँ ने से परू ्व हम ें कालावध ि में थोड़ा पीछे जाक र उपनिव ेशवा द स्् वरूप पर विचार करना आवश्् कय ह।ै इसकी सामान््य परिभाषा यह ह ै कि जब एक दे किसी अन््य प्रदशे पर अधिकार कर वहाँ अपनी बस््ततियाँ स््थथापित करता ह ै और अपन राजन ैतिक, आर्थथिक तथा सांस््कृकतिक तंत्र आरोपित करता ह,ै तब उसे उपनिव ेशवा द कह हैं। यह कोई नवीन घटना नहीीं ह।ै उपनिव ेशवा द की परंपरा प्रथम सहसर् ाब्् ददी सा.सं प.ू महान साम्रजा ््योों के काल तक पहुचँ ती ह।ै प्रथम सहस्राब््दद ी सा.सं. में ईसाई तथा इस्् ललाम धर्ममों के प्रसार के साथ-साथ जिन क्षेत्ररों को नए धर्ममों में परिवर््ततित किया गया , वहाँ क | | **Table on page 12 (3×2)** | | इसे अनदेखा न करेें | | --- | --- | | | भारतीय परिपे्रक्षष्य में एक रिया सती राज््य वह क्षेत्र था जो किसी भारतीय राजक ुमार, महाराज अथवा नवाब के अधीन शासन में था, किंत ु जिसने आंतरिक स््ववायत्तता बना ए रखने के लिए ब्रिटिश संरक्षण एवं मार्गदर््शन स््ववीकार कर लिया था। ऐसे सैकड़ों राज््य थे— कुछ बड़ (जैसे— हदै राबा द, मैसरू , त्रावणक ोर अथवा जम्् ममू और कश््ममीर) तथा कुछ छोटे। भारत की स््वतंत्रता के समय लगभग 500 से अधिक रिया सती राज््य विद्यमान थे, जो संपरू ्ण उपमहाद्वीप के लगभग 40 प्रतिशत क्षेत्र में थे। | | का अ ् ध य यन: भारत और उस े क आगे | क ् का ष 8, भाग 1 | के लगभग 40 प्रतिशत क्षेत्र में थे। | | | ‘हड़प नीति ’ के परिणा मस्वरूप अनेक राज््योों का विलय हुआ, जिससे ब्रिटिशोों क भौगोलिक सत्ता का विस््ततार हुआ। इस नीति से भारतीय समाज के कुछ वर्ग गों में ती असंतोष उत््नप ््न हुआ, जिसने 1857 के विद्रोह की प्ृष ठ भमू ि तैया र की (जिसकी चर हम आगे करगें े)। एक अन््य यकु ््,तति जिसे सहायक सधं ि (सब््ससिडरिय ी अलाइसं ) कहा जाता ह,ै अतं र््गत भारतीय शासकोों के दरबा र में एक ब्रिटिश रेसिडटें निय कु ्त किया जाता था, ज उन््हें आतं रिक अथवा बा ह्य संकटोो ं से सरु क्षा प्रदान करता था। इसके प्रत््ुय त्तर म ें भारतीय शासकोों को अपने व््यय पर ब्रिटिश सैनिकोों को रखना पडत़ ा था तथा विदशे ी संबं केवल बर् िटिशोों के माध््यम से ही संपन््न करने होते थे। यद्यपि यह प्रणा ली रिया सती राज्् की प्रभसु तत् ा को बना ए रखने का आभास कराती थी, परंत ु वा स््तविक सत्ता ब्रिटिशोों क हस््ताांततरित हो गई और भारतीय शासकोों पर उनक ी ही पराधीन ता की कीमत का बो डाल दिया गया । 1798 में हदै रााब द का शासक इस पक्र ार की संधि में सम््ममिलित होने वा ला प्रथ शासक था। शीघ्र ही, अन््य कई शासकोो ं ने भी इसका अनकु रण किया । ये तथाकथि सधं िया ँ ब्रटि िशोों को बिना प्रत््कय ्ष शासन किए ही विशाल प्रदशे ोों पर निय ंत्रण की अनमु त दते ी थीीं, जिससे ‘कम व््यय में साम्राज््य’ की स््थथापना संभव हो सकी। एक बा र जब को राज््य इस पण्र ा ली म ें सम््ममिलित हो जाता, तब उससे बा हर निक लना लगभग असंभव ह जाता था क््योोकं ि स्वतंत्र होने के किसी भी प्रया स में उसे ब्रिटिश सेना का सामना करन पड़ता था। | **Table on page 16 (4×3)** | का निर््वाचिव त निम््न सदन ह।ै इस सदन में निर््वाचवि त होने वा ले प्रथम भारतीय दादाभाई नौरोजी थे। 1 भाग 8, ् का ष क | आगे े क उस चित्र 4.1 और एड भारत यन: य ् ध अ का | निष््कर्षण किया । एक नवीन तम अनमु ान (उत््ससा पटनायक द्वारा) के अनसु ार 1765 1938 तक की अवध ि में भारत से लगभग 45 ट्रिलियन अमरे िकी डॉलर (वर्तमान मलू ्् का धन निष््ककासि त हुआ। यह राशि वर् ष 2023 में ब्रिटेन के सकल घरेल ू उत्् पदपा क लगभग 13 गनु ा ह!ै यह धन केवल करोों के माध््यम से ही नहीीं, अपित ुऔपनिव ेशिक सत द्वरा ा भारतीयोों से रेलवे निर््णमा , टेलीग्राफ नेटवर््क तथा यदु ्धधों पर होने वा ले व््ययोों की परू हते ु भी वसलू किया गया । यदि यह संपत्ति भारत में ही निव ेशित होती, तो स्् वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत ए अत््तयं भिन््न स्् वरूप वा ला राष्टट ्र होता। आइए पता लगाएँ | | | --- | --- | --- | | | आइए पता लगाएँ | | | | आपके अनसु ार ‘अन-ब्रिटिश रूल इन इडं िया ’ से दादाभाई नौरोजी का क््यया तात््प््यर ह?ै (सचू ना संकेत— वे 1892 में हाउस ऑफ कॉमन््स में संसद सदस््य थे।) | | | | 0 — ब्ुर क््स चित्र 4.11 — विलिय म चित्र 4.12 — दादाभाई चित्र 4.13 — आर.सी. म्् स डिग््बबी नौरोजी दत्त आइए वि�चाार करें | | | | | | **Table on page 18 (3×3)** | दिखाई द।े 1 भाग 8, ् का ष क | आगे े क उस और भारत यन: य ् ध अ का | आइए पता लगाएँ | | | --- | --- | --- | | | आइए पता लगाएँ | | | | क्याा आप ऊपर दि�ए गए सभीी शब्दोंं कोो समझते ह ैंंजोो भाारतीीय वस्त्रोंं काा वर्णन करते ह?ैंं यदि� नहींं, तोो चाार याा पाँ�च वि�द्याार्थि�ियोंं केे समूह बनााएँ ँ और इन शब्दोंं कीी जाानकाारीी प्रााप्त करेंं, फि�र अपने शि�क्षक कीी सहाायताा से अपने नि�ष्कर्षोंं कीी तुलनाा करेंं। | | | | ब्रटि िश नीति ने भारतीय वस्त्ररों पर ब्रटि ेन में भारी कर लगाए, जबक ि भारत को ब्रिटि निर््तममि वस््एततु ँ अत्् ययंत कम करोो ं के साथ स््ववीकार करने को बा ध््य किया गया । इस अतिरिक्त, अब ब्रिटेन ने समदु ्री व््ययापार तथा विनि मय दरोों पर निय ंत्रण स््थथापित कर लिय जिससे भारतीय व््ययपा ारियोों के लिए पहले की भाँति निर््यायत करना अत््तयं कठिन हो गया इसका परिणा म यह हुआ कि भारत का वस्त्र उद्योग नष्ट हो गया । 19वीीं शताब्् दद ी म ेंभार का वस्त्र निर््यातय तीव्रता से घटा, जबक ि ब्रिटेन से भारत म ें आया त और भी तीवत्र ा बढ़़ा। कुशल कारीगरोो ं के समदु ाय जो पीढ़़ी-दर-पीढ़़ी अपने शिल््प म ें निपणु थे, निर्धनत म ें धकेल दिए गए और उन्् हें अधिक कर वा ले कृषि कषेत् ्ररों में जीविका के लिए लौटने क विव श होना पड़़ा। 1834 म ें भारत के तत््ककालीन गवर्नर् -जनरल विलिय म बैंटिक ने कह था, “सतू ी बनु करोो ं की अस््थथियँा भारत के मदै ानोों का विरंजन कर रही ह।ैं ” ऐसी ही स््थथि ति भारत के लोहा, स््टटील, कागज एवं अन््य उत््पपादोों के लिए भी उत््पन् हुई। उपनिव ेशकालीन शासन के दौरान विश्व के सकल घरेल ू उत्् पपाद में भारत क भागीदारी निरंतर घटती रही और स्् वतंत्रता के समय यह घटकर मात्र 5 पत्र िशत रह ग दो शताब््ददिोयो ं से भी कम समय में संसार के सबसे समदृ ्ध भभू ागोों में से एक, सबसे निर्ध दशे ोों में से एक बन गया । परंपरागत शासन संरचनाओ ंका वि घटन | | **Table on page 20 (1×2)** | अब एक प्राय ः अप्रचलित शब्् द, जिसका प्रयोग पश््चचिम एशिया से लेकर सदु रू परू ्व तक के कषेत् ्ररों के विद्वानोों के लिए होता था। भारत में प्राच््यवा दी प्राय ः संस््कृकत, पाली, फारसी आदि भाषाओ ंके विद्वान होते थे (अब इन््हें ‘भारतविद’् कहा जाता ह)ै । 1 भाग 8, ् का ष क | आगे े क उस और भारत यन: य ् ध अ का | साहि त््य की अपेकष् ा कहीीं शे्र ष्ठ ह—ै “मैंने किसी भी प्राच््यवादी को ऐसा नहीीं पाया जो यह स््ववीकार न करे कि एक अच््छछे यरू ोपीय पसु ््तकालय की मात्र एक शले ्् ,फ भार और अरब के संपरू ्ण दशे ज साहि त््य की तलु ना में अधिक मलू ््यवान ह।ै ” इसलिए, उनक अनसु ार भारतीयोों को ब्रिटिश शिकष् ा की आवश््कय ता थी, जिसका उद्दशे ् य एक ऐसे वर का निर््णमा करना था जो “रक्त और रंग से तो भारतीय हो परंत ु स्् ववाद, विचार, नैतिकत और बदु ् धि से अगं ्रे।ज ” यद्यपि कुछ प्रमखु ब्रिटिश प्राच््यवा दी यह तर््क दते े रह े कि भारतीय विद्यार्थथोियो ं क उनक ी अपनी भाषाओ ं में अध््यय न करने दिया जाना चाहि ए, किंत ु मकै ॉले की नीति प्रभावी सिद्ध हुई। परिणामस्वरूप पारंपरिक भारतीय विद्यालय धीरे-धीरे विलपु ्त हो गए अगं रे् जी भाषा पत्र िष्ठ ा की भाषा बन गई क््ोयो ंकि यह अौपनिव ेशिक शासकोो ं से जडु ़़ी ह थी। इसने भारतीय समाज में अगं रे् जी शिक्षित अभिजनोों और सामान््य जनोों के बी च ए स््थथायी विभाजन उत्् नप ््न कर दिया । नवीन शिक्ष ा पण्र ा ली ने अौपनिव ेशिक शासन के अनेक उदद् शे ् ोय ं की परू ्तति की। इस भारतीय लिपिकोों और कनिष्ठ करच््म ारियोों का ऐसा वर्ग तैया र हुआ, जो प्रशासन निचले स्् तर की सवे ा ओ ंको ब्रटि िश करच््म ारियोों की तलु ना में अत््यंत न््ूय न व््यय पर निभ सके। साथ ही यह, यह पण्र ा ली पारंपरिक ज्ञान और अधिकार के सो्र तोो ं को भी हाशि ए प ले गई जिससे पीढ़़ियोो ं तक भारतीय अपनी सांस््कृकतिक विरासत से कटे रह।े आइए वि चार करेें | | --- | --- | | | मकै ॉल े दव्रा ा लिख े गए इस वका ् ्—य “एक अच्् छछे यरू ोपीय पसु ्् तकला य की मात ्र एक शले ्् ,फ भारत और अरब के सपं रू ्ण दशे ज सािह त्् य स े अधिक मलू ्् वय ना ह”ै का वास्् तवकि अभिपा्र य क्् यय ा था? और उन्् ोहोनं े ऐसा क्् ोयो ं चाहा कि भारतीय “स्् ववदा , विचार, नतैिकता और बदु् धि में अगं ेर् ज बन जाए”ँ ? इसका सबं धं अध्् ययया के पा्ररंभ म ें उल्ल् लितखि ‘सभ्् कय ारी अभियना ’ स े | **Table on page 21 (4×4)** | इसे प्राय ः उपनिव ेशवा द का वरदान कहा जाता ह।ै यद्यपि रेलमार्गगों ने लोगोों को एक-दसू रे के निकट लान े में भमू िका नभि ाई और भारत के आतं रिक बाजा र को एकीकृत किया , परंत ु इसका वा स्तविक उद्दशे ्य कच्् चचेमाल को आतं रिक कषेत् ्ररों से बंदरगाहोों तक पहुचँ ाना तथा ब्रिटिश निर््तममि वस््ओततु ंको संपरू ्ण भारत में वितरित करना था। रेलमार्गगों का निर््धारण प्राय ः विद्यमान व््ययापार मार्ग गों की उपेक्षा करते हुए केवल उपनिव ेशी आर्थथ िक हितोों की परू ्तति हते ु चित्र 4.15 — 1860 में मद्रास रेलवे (ब्रिटिश भारत में रेल नेटवर््क का संचालन करने वाली कंपनियोों में एक) का एक भाप इजं न | | | से | | --- | --- | --- | --- | | | | | | | | योों में | | | | | | | से | | | | | |
- पुर्तगाल ने भारत में सबसे पहले 1498 में समुद्री मार्ग से आगमन किया।
- गोवा में पुर्तगाल ने अपना पहला उपनिवेश स्थापित किया।
- डच, फ्रांसीसी और ब्रिटिश भी भारत आए और व्यापारिक केंद्र बनाए।
- यूरोपीय शक्तियों का उद्देश्य भारत के व्यापारिक संसाधनों का दोहन था।
- इन शक्तियों के बीच भारत में प्रभुत्व के लिए प्रतिस्पर्धा हुई।
- 📌 पुर्तगाल: पहला यूरोपीय देश जिसने भारत में उपनिवेश स्थापित किया।
- 📌 इंक्विजिशन: धार्मिक न्यायाधिकरण जो पुर्तगाल ने गोवा में स्थापित किया।
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का उदय
व्याख्याब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का उदय
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1600 में हुई थी। प्रारंभ में यह कंपनी केवल व्यापार के लिए भारत आई थी। कंपनी ने धीरे-धीरे भारत के तटीय क्षेत्रों में अपने व्यापारिक केंद्र स्थापित किए। स्थानीय शासकों के साथ समझौते कर उन्होंने अपने प्रभाव को बढ़ाया
अभ्यास प्रश्न — Chapter 4
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.अलैंगिक जनन में जनन कहाँ होता है ?
उत्तर:
जननांगों के अलावा देह के अंगों पर
व्याख्या:
[{"id": "5e63d179-c15c-4b0f-a00b-159dda7f0c82", "type": "html", "value": " परिभाषा के अनुसार अलैंगिक जनन का अर्थ है जनन जिसमें युग्मकों का संलयन सम्मिलित नहीं है, अर्थात जननांगों के माध्यम से नहीं। इसलिए, अलैंगिक जनन में, देह के अन्य भागों में जनन होता है जिसमें जननांग सम्मिलित नहीं होते हैं। "}]
Q2.हाइड्रा निम्नलिखित में से किस प्रक्रम के माध्यम से जनन करता है?
उत्तर:
मुकुलन (Budding)
व्याख्या:
[{"id": "9266723c-e86a-4832-9226-d0ad770f2bda", "type": "html", "value": " हाइड्रा एक सूक्ष्मदर्शी, मीठे पानी (freshwater) का जीव है जो मुकुलन के माध्यम से जनन करता है। "}]
Q3.स्टारफिश निम्न में से किस प्रक्रम के माध्यम से जनन करती है?
उत्तर:
द्विखंडन (Binary Fission)
व्याख्या:
[{"id": "e3c04b2f-90bd-4623-9847-eee990a02e1b", "type": "html", "value": " स्टारफिश या समुद्री तारे ऐसे जीव हैं जो अलैंगिक रूप से जनन करते हैं। वे द्विखंडन की प्रक्रम के माध्यम से प्रजनन करते हैं। "}]
Q4.निम्न में से कौन-सा नर जननांग (male reproductive organ) नहीं है?
उत्तर:
डिंबवाहिनी (Oviducts)
व्याख्या:
[{"id": "acdef4d0-8fea-469f-bf24-90215b17718b", "type": "html", "value": " वृषण की जोड़ी, दो शुक्राणु नलिकाएं और शिश्न सभी मानव नर जननांग हैं, जबकि डिंबवाहिनी एक मानव मादा जननांग है। "}]
Q5.निम्न में से कौनसा मादा जननांग (female reproductive organ) नहीं है?
उत्तर:
दो शुक्राणु नलिकाएँ (Two sperm ducts)
व्याख्या:
[{"id": "4ad27dd0-02da-4865-828b-9c01c2b96da9", "type": "html", "value": " अंडाशय की जोड़ी, डिंबवाहिनी और गर्भाशय सभी मादा जननांग हैं, जबकि दो शुक्राणु नलिकाएँ नर जननांग हैं। "}]
Q6.नर युग्मक _____ है और मादा युग्मक _____ है।
उत्तर:
एक शुक्राणु, एक अंडाणु
व्याख्या:
[{"id": "e3955306-eca6-43d2-87d0-818011d4fe10", "type": "html", "value": " नर युग्मक एक शुक्राणु होता है जबकि मादा युग्मक एक अंडाणु होता है। शुक्राणु महिला के जननांग में जमा होते हैं जहां शुक्राणु और अंडाणु निषेचित होते हैं। "}]
Q7.मानवों में, प्रत्येक ________ एक अंडाशय द्वारा एक विकसित अंडा डिंबवाहिनी में निर्मोचित किया जाता है।
उत्तर:
मास
व्याख्या:
[{"id": "dc1d1cdf-8dbe-4011-bd7b-5b9af9ce6773", "type": "html", "value": " हर मास एक अंडाशय द्वारा एक विकसित अंडा डिंबवाहिनी में निर्मोचित जाता है। "}]
Q8.शिशु का विकास किस भाग में होता है?
उत्तर:
गर्भाशय (Uterus)
व्याख्या:
[{"id": "8e5f747b-7621-488b-82e4-64a5f9133929", "type": "html", "value": " शिशु का विकास गर्भाशय में होता है। "}]
Samaj Ka Aadhyan: Bharat or uske aage Part-I के सभी 7 अध्याय
Social Science · Class 8