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भारत में औपनिवेशिक काल | Class 8 Social Science Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

भारत में औपनिवेशिक काल | Class 8 Social Science Notes

भारत में औपनिवेशिक काल – this guide gives you a concise, exam-ready overview of भारत में औपनिवेशिक काल from Class 8 Social Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

आर्थिक शोषण और अकाल

ब्रिटिश शासन के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा। ब्रिटिशों ने भारतीय कृषि और उद्योग को अपने हितों के अनुसार नियंत्रित किया। किसानों पर भारी कर लगाए गए, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति खराब हुई। ब्रिटिशों ने भारत को कच्चे माल का स्रोत और तैयार माल का बाजार बनाया। इस नीति के कारण भारतीय कुटीर उद्योग और हस्तशिल्प का विनाश हुआ। 1770-72 के बंगाल अकाल में लगभग एक करोड़ लोग मारे गए। ब्रिटिश प्रशासन की नीतियों और करों ने अकाल की स्थिति को और गंभीर बना दिया।

📊 Diagram: Figure 9, Figure 10, Table 8 — अकाल के दौरान अनाज निर्यात और अकाल राहत शिविरों का चित्रण।

🧪 Activity: छात्रों से पूछें कि वे अकाल के कारणों और ब्रिटिश नीतियों के प्रभावों पर चर्चा करें।

🔗 Connection: यह खंड भारतीय समाज पर ब्रिटिश शासन के प्रभाव की व्याख्या से जुड़ता है।

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| | विना शकारी प्रभाव पड़़े। 1770 से 1772 के मध््य, जब दो वर्ष षों तक फसल की विफलता पहले से ही लोगोों को पीड़़ित कर रही थी, उस समय बंगाल में ईस्् ट इडं िया कंपनी दव् ारा लगाए गए कठोर कर लकष्ष ्ययों जिनेम ं कृषकोों को, चाह ेफसल हो या न हो, अपनी भमू ि की उपज पर उच्् च दर से नक द कर दने ा अनिवार््य था। इसके कारण एक भयाव ह अकाल की स््थथिति उत््पन््न हुई। इस अकाल में लगभग एक-तिहाई जनसंख््यया या अनमु ान तः एक करोड ़ लोग मारे गए। वा स््तव में, कंपनी ने अकाल के समय न केवल कठोर कर-प्राप्‍त‍ि लक्षष्य बना ए रख ेअपित ु भमू ि-कर को और बढ़़ ा भी दिया । ऐसी करू्रता की ि‍नंदा बा द में न केवल भारतीय लोगोो ं द्वारा अपित ुकुछ बर् िटिश अधिकारियोों और विद्वानोों (जैसे इस अध््ययाय के आरंभ में उद्धतृ विलिय म डिग््बब)ी द्वारा भी की गई। उदाहरण के लिए, एक शताब्् ददी बा द ब्रिटिश अधिकारी डब्््ल .यू डब्््ल यू. हटं र ने लिखा— | स्् वर््ग धार््िमम क संदर ््भम स््वर।््ग इस संदर में एक आदर,््श समदृ ्ध या परू ्णतः सखु मय स््थथान। |

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| | “जब दशे प्रत््येक वर् ष एक परू ्ण अपव््यय में परिवर््ततित हो गया , तब भी अगं रे् जी शासन लगातार अधिक भमू ि-कर की माँग करता रहा... वर् ष 1770 की दाहक ग्रीष््म ऋत ु में लोग मरते रह।े कृषक अपने पशओु ं को बेचते रह,े वे कृषि उपकरणोों को बेचते रह,े वे अपने अनजा के बीज खा गए, उन््होोंने अपने पतु ्ररों और पतु ्रियोो ं को तब तक बेचा जब तक कोई खरीदार नहीीं बचा। उन्् होोंने वृषक् षो ं की पत्तियाँ और खते की घास तक खा डाली... दिन-रात भखू से व््ययका ुल और रोगग्रस्् त दरिद्रजन नगरोों की ओर उमड़ते रह।े ” | | | | इस प्रकार की दःु खद अकाल घटना ए ँ संपरू ्ण ब्रिटिश शासनका ल में बा र-बा र घटि‍त होती रहीीं। उदाहरण के लिए, 1876 –1878 के भीषण अकाल में मखु ््यत: दक््कन के पठा री क्षेत ्र म ें लगभग 80 लाख भारतीयोो ं की मतृ ्् यु हुई। | |

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| 1 भाग 8, ् का ष क

आगे े क उस और भारत चित्र 4. ‍यन: राहत हते य ् ध अ का | | | चित्र 4.8 — एक ओर जहाँ लोग बड़ी संख््यया में भखू से मर रह ेथे, वहीीं मद्रास के समदु ्र तट पर निर््ययात हते ुतैयार अनाज की बोरियाँ। संकट की गंभीरता की उपेकष् ा करते हुए कु भारतीय व््ययापारी मलू ््यवृधद् ि की आशा म ें अप भडं ार को रोककर रखते थे, जिससे कृत्रिम अभाव उत्् पन््न होता था। दसू री ओर, ब्रिटिश शासन ब्रिटे को निरंतर अनाज निर््यायत करता रहा। अका के तीन वर्षषों के दौरान केवल चाव ल ही पत्र िवर लगभग दस लाख टन की मात्रा में निर््यायत किय गया (चित्र 4.8 दखे ें)। उपरययु् क्‍त कारणोो ं के अतिरिक्‍त ब्रिटिश शास की ‘मकु ्‍ त बाजा र’ की नीति , जिसके अतं र््ग वस््ओततु ं के मलू ््य को स््वतंत्र रूप से घटने-बढ़ दिया गया , उसने भी अकाल की भयवा हत (बेंगलरू ु) म ें1877 के अकाल के समय को और अधिक बढ़़ाया । इस पक्र ार, भारत न (चित्र स्रोत— इलस्टर्ेेटड लंदन न््यूज)। तत््ककालीन वा इसराय लॉर््ड लिटन ने 1876–187 | | | 9 — बैं ुपत्र ीक्ष | गलोर ारत ज | |

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डिंब या अंडों का निर्माण होता है

अंडाशय

सौर परिवार का सबसे दूर का ग्रह कौन सा है?

नेप्टयून

शिशु का विकास किस भाग में होता है?

गर्भाशय (Uterus)

तारे ______________ की ओर गति करते प्रतीत होते हैं ।

पूर्व से पश्चिम

इस अध्याय में महारत हासिल करें

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