भारत का संविधान- एक परिचय | Class 7 Social Science Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

भारत का संविधान- एक परिचय – this guide gives you a concise, exam-ready overview of भारत का संविधान- एक परिचय from Class 7 Social Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
भारतीय संविधान के मार्गदर्शक मूल्य और उद्देशिका
भारतीय संविधान के मार्गदर्शक मूल्य संविधान के उद्देशिका में संक्षेप में प्रस्तुत हैं। उद्देशिका में संविधान के आदर्शों और मूल्यों को स्पष्ट किया गया है, जिन्हें सरकार और नागरिक दोनों को पालन करना होता है।
उद्देशिका में कहा गया है कि हम, भारत के लोग, इस संविधान को स्वयं अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से बनाया है। भारत एक संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य है। यहाँ सभी नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व प्राप्त है।
संप्रभुता का अर्थ है कि भारत की राजनीतिक सत्ता पूरी तरह से जनता के पास है। समाजवादी अर्थव्यवस्था में संसाधनों का लाभ समाज के सभी वर्गों में समान रूप से वितरित किया जाता है। पंथनिरपेक्षता का मतलब है कि सभी धर्मों को समान सम्मान मिलता है। लोकतंत्र में सभी नागरिकों को समान राजनीतिक अधिकार प्राप्त हैं और वे अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं। गणराज्य का अर्थ है कि राष्ट्राध्यक्ष निर्वाचित होता है।
न्याय का अर्थ है कि सभी नागरिकों के साथ जाति, धर्म, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा। स्वतंत्रता का मतलब है कि नागरिकों को अपने विचार व्यक्त करने और अपने विश्वासों के अनुसार कार्य करने की स्वतंत्रता है। समानता का अर्थ है कि सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं। बंधुत्व का मतलब है कि हम सभी को एक परिवार की तरह व्यवहार करना चाहिए।
42वें संविधान संशोधन (1976) के बाद ‘समाजवादी’ और ‘पंथनिरपेक्ष’ शब्द उद्देशिका में जोड़े गए। ये मूल्य भारतीय संविधान के सभी प्रावधानों का आधार हैं और देश के सामाजिक-राजनीतिक जीवन को दिशा देते हैं।
📊 Diagram: चित्र 10.16 — भारतीय संविधान की उद्देशिका की एक झलक
🧪 Activity: छात्रों को उद्देशिका में वर्णित मूल्यों के दैनिक जीवन में उदाहरण खोजने और कक्षा में साझा करने के लिए प्रोत्साहित करें।
🔗 Connection: यह अनुभाग संविधान के प्रश्नों और क्रियाकलापों के माध्यम से ज्ञान को सुदृढ़ करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. ‘संविधान सभा में भारत के विभिन्न क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों के प्रतिनिधि सम्मिलित थे।’ आपके अनुसार ऐसा होना क्यों महत्वपूर्ण था?
संविधान सभा में भारत के विभिन्न क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों के प्रतिनिधि शामिल होने से यह सुनिश्चित हुआ कि संविधान में देश के सभी हिस्सों, संस्कृतियों, भाषाओं और समुदायों के हितों का समुचित प्रतिनिधित्व हो। इससे संविधान अधिक समावेशी, न्यायसंगत और व्यापक बना, जो पूरे देश के लोगों की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं को ध्यान में रखता है। यह विविधता संविधान को मजबूत और लोकतांत्रिक बनाती है।
2. नीचे दिए गए कथनों को ध्यान से पढ़िए और पहचानिए कि इनमें भारतीय संविधान की कौन-कौन सी प्रमुख विशेषताएँ या मूल्य दिखाई देते हैं — (क) शीना, रजत और हर्ष एक पंक्ति में खड़े हैं। वे आम चुनावों में अपना पहला वोट डालने के लिए उत्साहित हैं। (ख) राधा, इमोन और हर्पीत एक ही विद्यालय की एक ही कक्षा में पढ़ते हैं। (ग) माता-पिता को अपने बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था करनी चाहिए। (घ) गाँव के कुएँ का उपयोग सभी जाति, धर्म और लिंग के लोग कर सकते हैं।
(क) आम चुनावों में वोट डालना – लोकतंत्र और सार्वभौमिक मताधिकार की विशेषता। (ख) एक ही विद्यालय की कक्षा में पढ़ना – समानता और समान अवसर। (ग) बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करना – कर्तव्य और सामाजिक उत्तरदायित्व। (घ) कुएँ का उपयोग सभी के लिए – समानता, बंधुत्व और पंथनिरपेक्षता।
इस प्रकार ये कथन संविधान के लोकतांत्रिक, समानता, बंधुत्व, और सामाजिक न्याय के मूल्यों को दर्शाते हैं।
3. यह कहा जाता है कि ‘भारत में सभी नागरिक कानून के समक्ष समान है।’ क्या आपको लगता है कि यह एक सच्चाई है? यदि हाँ, तो क्यों? यदि नहीं, तो क्यों नहीं? तकों के साथ उत्तर दीजिए।
हाँ, संविधान के अनुसार सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं। यह संविधान का मूल सिद्धांत है कि कोई भी व्यक्ति जाति, धर्म, लिंग या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव का शिकार नहीं होगा। हालांकि व्यवहार में कुछ जगहों पर भेदभाव और असमानताएँ देखी जाती हैं, लेकिन संविधान और कानून इसे रोकने के लिए सख्त प्रावधान करते हैं। इसलिए, यह एक आदर्श और कानूनी सच्चाई है, जिसे समाज को पूरी तरह लागू करना है।
4. आपने पढ़ा कि ‘भारत एकमात्र ऐसा देश है, जिसने आरंभ से ही अपने नागरिकों को सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार प्रदान किया।’ क्या आप बता सकते हैं कि भारत ने ऐसा क्यों किया?
भारत ने सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार इसलिए दिया क्योंकि यह एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सभी वर्गों और समुदायों ने भाग लिया था, इसलिए सभी को समान रूप से मतदान का अधिकार देना न्यायसंगत था। इससे सभी नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित होती है और सरकार अधिक प्रतिनिधि और जवाबदेह बनती है।
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