NCERTCh 10निःशुल्क

Chapter 10

🎓 Class 7📖 Samaj Ka Aadhyan: Bharat or uske aage Part-I📖 12 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~18 मिनट
Chapter 9अध्याय 10 / 12Chapter 11

Chapter 10अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 12 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

भारत का संविधान—एक परिचय

व्याख्या

भारत का संविधान—एक परिचय

भारत का संविधान हमारे देश का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है, जो भारत के शासन और प्रशासन के लिए नियमों और कानूनों का समूह है। यह संविधान यह निर्धारित करता है कि भारत में सरकार कैसे चलेगी, सरकार के तीन अंग—विधायिका, कार्यपालिका, और न्यायपालिका—की संरचना, भूमिकाएँ और उत्तरदायित्व क्या होंगे। साथ ही यह नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों का भी उल्लेख करता है। संविधान के बिना किसी देश में शासन का सुचारू संचालन संभव नहीं होता, क्योंकि संविधान वह नियम-पुस्तिका है जो सभी के लिए समान होती है और जिसके पालन से ही समाज में न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व स्थापित होता है। संविधान के अनुसार ही भारत में लोकतंत्र का शासन चलता है, जिसमें सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं और वे अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं। संविधान के सफल कार्यान्वयन के लिए आवश्यक है कि सभी लोग एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करें और लचीलेपन के साथ काम करें। संविधान केवल कानूनों का समूह नहीं, बल्कि एक जीवंत दस्तावेज़ है जो समय के साथ देश की आवश्यकताओं के अनुसार संशोधित भी होता रहता है। संविधान की महत्ता को समझने के लिए हमें यह जानना आवश्यक है कि यह न केवल सरकार के कामकाज को नियंत्रित करता है, बल्कि हमारे अधिकारों की रक्षा भी करता है। संविधान के कारण ही भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य बना है, जहाँ सभी नागरिकों को समान अवसर और न्याय मिलता है। **Table on page 18 (8×2)** | प्रस्तावना की विशेषताएँ | हम इन्हें अपने दैनिक जीवन में कैसे देखते हैं | | --- | --- | | संप्रभु | | | पंथनिरपेक्ष | किसी व्यक्ति को यदि अपने धर्म के रीति-रिवाजों का पालन करना है और वह दूसरे के जीवन में बाधा नहीं डालता, तो उसे इसके लिए राज्य से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। | | गणतंत्र | | | न्याय | राज्य नौकरियों और अवसरों में सभी नागरिकों को जाति, धर्म, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव किए बिना समान अवसर प्रदान करता है। | | स्वतंत्रता | | | समानता | | | बंधुत्व | |

  • संविधान भारत का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है।
  • यह सरकार के तीन अंगों की संरचना और कार्य निर्धारित करता है।
  • संविधान नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों को सुनिश्चित करता है।
  • लोकतंत्र के सफल कार्यान्वयन के लिए संविधान का पालन आवश्यक है।
  • संविधान एक जीवंत दस्तावेज़ है, जिसे समय-समय पर संशोधित किया जाता है।
  • 📌 संविधान: किसी देश के मूल सिद्धांतों और कानूनों का समूह।
  • 📌 विधायिका: कानून बनाने वाली संस्था।
  • 📌 कार्यपालिका: कानून लागू करने वाली संस्था।

संविधान क्या है?

परिभाषा

संविधान क्या है?

संविधान वह लिखित प्रलेख है जो किसी देश के शासन के मूल सिद्धांतों, कानूनों और नियमों को स्पष्ट रूप से निर्धारित करता है। यह सरकार के तीन अंगों—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—की संरचना, उनकी भूमिकाएँ और उनके बीच संतुलन स्थापित करता है। संविधान यह सुनिश्चित करता है कि सभी नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों का सम्मान हो और सरकार जवाबदेह रहे। इसके अतिरिक्त, संविधान राष्ट्र के दीर्घकालिक लक्ष्यों और आकांक्षाओं की रूपरेखा भी प्रस्तुत करता है। सरल शब्दों में, संविधान वह नियम-पुस्तिका है जिसके बिना देश में शासन व्यवस्था सुचारू रूप से नहीं चल सकती। यह नियम-पुस्तिका सभी नागरिकों के लिए समान होती है और सभी को इसके नियमों का पालन करना होता है। संविधान के बिना समाज में अराजकता और अन्याय फैल सकता है। इसलिए संविधान की आवश्यकता हर देश को होती है।

  • संविधान एक लिखित प्रलेख है।
  • यह सरकार के तीन अंगों की संरचना और कार्य निर्धारित करता है।
  • संविधान नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों को परिभाषित करता है।
  • यह सरकार के अंगों के बीच संतुलन और नियंत्रण की व्यवस्था करता है।
  • संविधान राष्ट्र के दीर्घकालिक लक्ष्यों को निर्धारित करता है।
  • 📌 विधायिका: कानून बनाने वाली संस्था।
  • 📌 कार्यपालिका: कानून लागू करने वाली संस्था।
  • 📌 न्यायपालिका: कानूनों की निगरानी और व्याख्या करने वाली संस्था।

हमें संविधान की आवश्यकता क्यों है?

व्याख्या

हमें संविधान की आवश्यकता क्यों है?

संविधान की आवश्यकता इसलिए होती है क्योंकि यह देश में शासन व्यवस्था को सुचारू, न्यायसंगत और व्यवस्थित बनाता है। यदि किसी देश में नियम नहीं होंगे, तो अराजकता फैल सकती है, और लोगों के अधिकारों की रक्षा नहीं हो पाएगी। संविधान एक नियम-पुस्तिका की तरह है,

अभ्यास प्रश्नChapter 10

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. ‘संविधान सभा में भारत के विभिन्न क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों के प्रतिनिधि सम्मिलित थे।’ आपके अनुसार ऐसा होना क्यों महत्वपूर्ण था?

उत्तर:

संविधान सभा में भारत के विभिन्न क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों के प्रतिनिधि शामिल होने से यह सुनिश्चित हुआ कि संविधान में देश के सभी हिस्सों, संस्कृतियों, भाषाओं और समुदायों के हितों का समुचित प्रतिनिधित्व हो। इससे संविधान अधिक समावेशी, न्यायसंगत और व्यापक बना, जो पूरे देश के लोगों की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं को ध्यान में रखता है। यह विविधता संविधान को मजबूत और लोकतांत्रिक बनाती है।

व्याख्या:

भारत एक विशाल और विविध देश है, जिसमें विभिन्न भाषाएँ, धर्म, जातियाँ और सांस्कृतिक पृष्ठभूमियाँ हैं। यदि संविधान सभा में केवल कुछ ही क्षेत्रों या समुदायों के प्रतिनिधि होते, तो संविधान उन सभी की आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाता। इसलिए विभिन्न क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों के प्रतिनिधि शामिल होना आवश्यक था ताकि संविधान सभी के लिए समान रूप से स्वीकार्य और न्यायसंगत हो।

MediumNCERT
Q2.2. नीचे दिए गए कथनों को ध्यान से पढ़िए और पहचानिए कि इनमें भारतीय संविधान की कौन-कौन सी प्रमुख विशेषताएँ या मूल्य दिखाई देते हैं — (क) शीना, रजत और हर्ष एक पंक्ति में खड़े हैं। वे आम चुनावों में अपना पहला वोट डालने के लिए उत्साहित हैं। (ख) राधा, इमोन और हर्पीत एक ही विद्यालय की एक ही कक्षा में पढ़ते हैं। (ग) माता-पिता को अपने बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था करनी चाहिए। (घ) गाँव के कुएँ का उपयोग सभी जाति, धर्म और लिंग के लोग कर सकते हैं।

उत्तर:

(क) आम चुनावों में वोट डालना – लोकतंत्र और सार्वभौमिक मताधिकार की विशेषता। (ख) एक ही विद्यालय की कक्षा में पढ़ना – समानता और समान अवसर। (ग) बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करना – कर्तव्य और सामाजिक उत्तरदायित्व। (घ) कुएँ का उपयोग सभी के लिए – समानता, बंधुत्व और पंथनिरपेक्षता। इस प्रकार ये कथन संविधान के लोकतांत्रिक, समानता, बंधुत्व, और सामाजिक न्याय के मूल्यों को दर्शाते हैं।

व्याख्या:

भारतीय संविधान में सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर प्रदान किए गए हैं। मतदान का अधिकार सभी व्यस्क नागरिकों को दिया गया है, जो लोकतंत्र की नींव है। शिक्षा का अधिकार और सामाजिक कर्तव्य संविधान के मूलभूत सिद्धांत हैं। साथ ही, जाति, धर्म या लिंग के आधार पर भेदभाव न करना संविधान की पंथनिरपेक्षता और समानता के सिद्धांतों को दर्शाता है।

MediumNCERT
Q3.3. यह कहा जाता है कि ‘भारत में सभी नागरिक कानून के समक्ष समान है।’ क्या आपको लगता है कि यह एक सच्चाई है? यदि हाँ, तो क्यों? यदि नहीं, तो क्यों नहीं? तकों के साथ उत्तर दीजिए।

उत्तर:

हाँ, संविधान के अनुसार सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं। यह संविधान का मूल सिद्धांत है कि कोई भी व्यक्ति जाति, धर्म, लिंग या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव का शिकार नहीं होगा। हालांकि व्यवहार में कुछ जगहों पर भेदभाव और असमानताएँ देखी जाती हैं, लेकिन संविधान और कानून इसे रोकने के लिए सख्त प्रावधान करते हैं। इसलिए, यह एक आदर्श और कानूनी सच्चाई है, जिसे समाज को पूरी तरह लागू करना है।

व्याख्या:

भारतीय संविधान की प्रस्तावना और अनुच्छेद 14 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं। इसका अर्थ है कि सभी को समान अधिकार और न्याय मिलेगा। असमानताएँ सामाजिक और आर्थिक कारणों से हो सकती हैं, लेकिन संविधान उन्हें समाप्त करने का प्रयास करता है। इसलिए यह एक सच्चाई है जिसे हमें पूरी तरह से लागू करना है।

MediumNCERT
Q4.4. आपने पढ़ा कि ‘भारत एकमात्र ऐसा देश है, जिसने आरंभ से ही अपने नागरिकों को सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार प्रदान किया।’ क्या आप बता सकते हैं कि भारत ने ऐसा क्यों किया?

उत्तर:

भारत ने सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार इसलिए दिया क्योंकि यह एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सभी वर्गों और समुदायों ने भाग लिया था, इसलिए सभी को समान रूप से मतदान का अधिकार देना न्यायसंगत था। इससे सभी नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित होती है और सरकार अधिक प्रतिनिधि और जवाबदेह बनती है।

व्याख्या:

सार्वभौमिक मताधिकार का मतलब है कि सभी वयस्क नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के वोट देने का अधिकार। भारत ने इसे इसलिए अपनाया क्योंकि यह स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सभी वर्गों की भागीदारी को मान्यता देता है और लोकतंत्र को मजबूत बनाता है। इससे सरकार जनता की इच्छाओं के अनुसार बनती है।

MediumNCERT
Q5.5. स्वतंत्रता संग्राम ने भारतीय संविधान के निर्माण को कैसे प्रेरित किया? भारतीय सभ्यता की विरासत ने संविधान की किन प्रमुख विशेषताओं को किस प्रकार प्रेरित किया? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

स्वतंत्रता संग्राम ने संविधान के निर्माण को प्रेरित किया क्योंकि इसने सभी वर्गों को समान अधिकार, स्वतंत्रता और न्याय की मांग सिखाई। यह आंदोलन लोगों में लोकतंत्र, समानता और बंधुत्व के विचारों को मजबूत करने वाला था। भारतीय सभ्यता की विरासत जैसे सहिष्णुता, विविधता में एकता, और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों ने संविधान की पंथनिरपेक्षता, समानता और सामाजिक न्याय की विशेषताओं को प्रेरित किया।

व्याख्या:

स्वतंत्रता संग्राम ने लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया और उन्हें लोकतांत्रिक शासन की आवश्यकता समझाई। भारतीय सभ्यता की विविधता और सहिष्णुता ने संविधान को एक समावेशी दस्तावेज बनाने में मदद की, जो सभी धर्मों और समुदायों का सम्मान करता है। इस प्रकार संविधान में स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बंधुत्व के सिद्धांत शामिल हुए।

HardNCERT
Q6.6. क्या आपको लगता है कि हम एक समाज के रूप में संविधान के सभी आदर्शों को प्राप्त कर चुके हैं? यदि नहीं, तो एक नागरिक के रूप में हम में से प्रत्येक क्या कर सकता है जिससे कि हमारा देश इन आदर्शों के और निकट पहुँच सके?

उत्तर:

हम पूर्ण रूप से संविधान के सभी आदर्शों को प्राप्त नहीं कर पाए हैं क्योंकि अभी भी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक असमानताएँ मौजूद हैं। एक नागरिक के रूप में हमें संविधान के मूल्यों का सम्मान करना चाहिए, समानता और न्याय के लिए काम करना चाहिए, जाति, धर्म या लिंग के आधार पर भेदभाव से बचना चाहिए, और अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी पालन करना चाहिए। शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक सेवा के माध्यम से हम देश को संविधान के आदर्शों के करीब ला सकते हैं।

व्याख्या:

संविधान के आदर्शों को प्राप्त करना एक सतत प्रक्रिया है। समाज में बदलाव लाने के लिए प्रत्येक नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। हमें अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए अन्याय और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने में योगदान देना चाहिए।

MediumNCERT
Q7.7. अगले पृष्ठ पर दी गई शब्द-पहेली को भारतीय संविधान की महत्वपूर्ण अवधारणाओं का प्रयोग करते हुए हल कीजिए। ऊपर से नीचे 2. वे अधिकार जो हर नागरिक को मिलते हैं, जैसे—स्वतंत्रता और समानता का अधिकार। 1. वह गैस जिसमें मूल संविधान की प्रति सुरक्षित रखी गई है। 4. लोगों का वह समूह जिसने भारतीय संविधान तैयार किया। 7. संविधान का आरंभिक कथन, जो वे मूल्य व आदर्श बताता है, जिनका वह संरक्षण करता है। बाएँ से दाएँ 6. वह प्रक्रिया जो संविधान में परिवर्तन के लिए प्रयोग की जाती है। 5. सरकार का अंग, जो कानून बनाता है। 8. सरकार का अंग, जो कानून को क्रियान्वित करता है। 3. संविधान का वह भाग जो नागरिकों के कर्तव्य को दर्शाता है।

उत्तर:

ऊपर से नीचे: 1. अमोनिया (यहाँ संकेत है कि मूल संविधान की प्रति अमोनिया गैस में सुरक्षित रखी गई थी) 2. अधिकार 4. संविधान सभा 7. प्रस्तावना बाएँ से दाएँ: 3. मूल कर्तव्य 5. विधायिका 6. संशोधन 8. कार्यपालिका यह शब्द-पहेली भारतीय संविधान की महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझने में मदद करती है।

व्याख्या:

यह शब्द-पहेली संविधान के विभिन्न महत्वपूर्ण भागों और अवधारणाओं को याद करने का एक तरीका है। जैसे कि संविधान सभा ने संविधान बनाया, प्रस्तावना संविधान के आदर्शों को दर्शाती है, विधायिका कानून बनाती है, कार्यपालिका कानून लागू करती है, संशोधन प्रक्रिया संविधान में बदलाव के लिए है, और मूल कर्तव्य नागरिकों के कर्तव्यों को बताता है।

MediumNCERT
Q8.संविधान क्या है और यह किसी देश के लिए क्यों आवश्यक होता है?

उत्तर:

संविधान वह लिखित प्रलेख है जो किसी देश के शासन के मूल सिद्धांतों, कानूनों और नियमों को स्पष्ट रूप से निर्धारित करता है। यह सरकार के तीन अंगों—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—की संरचना, भूमिकाएँ और संतुलन सुनिश्चित करता है। संविधान आवश्यक है क्योंकि इसके बिना शासन व्यवस्था सुचारू रूप से नहीं चल सकती और समाज में अराजकता फैल सकती है।

व्याख्या:

संविधान एक नियम-पुस्तिका की तरह होता है जो सभी नागरिकों के लिए समान होती है और जिसके पालन से समाज में न्याय, समानता और स्वतंत्रता बनी रहती है। यह सरकार के अंगों के बीच संतुलन स्थापित करता है और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है। इसलिए किसी भी देश के लिए संविधान आवश्यक होता है।

Easy