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भारत का संविधान- एक परिचय | Class 7 Social Science Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन

भारत का संविधान- एक परिचय | Class 7 Social Science Notes

भारत का संविधान- एक परिचय – this guide gives you a concise, exam-ready overview of भारत का संविधान- एक परिचय from Class 7 Social Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

भारत का संविधान—एक परिचय

भारत का संविधान हमारे देश का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है, जो भारत के शासन और प्रशासन के लिए नियमों और कानूनों का समूह है। यह संविधान यह निर्धारित करता है कि भारत में सरकार कैसे चलेगी, सरकार के तीन अंग—विधायिका, कार्यपालिका, और न्यायपालिका—की संरचना, भूमिकाएँ और उत्तरदायित्व क्या होंगे। साथ ही यह नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों का भी उल्लेख करता है। संविधान के बिना किसी देश में शासन का सुचारू संचालन संभव नहीं होता, क्योंकि संविधान वह नियम-पुस्तिका है जो सभी के लिए समान होती है और जिसके पालन से ही समाज में न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व स्थापित होता है।

संविधान के अनुसार ही भारत में लोकतंत्र का शासन चलता है, जिसमें सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं और वे अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं। संविधान के सफल कार्यान्वयन के लिए आवश्यक है कि सभी लोग एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करें और लचीलेपन के साथ काम करें। संविधान केवल कानूनों का समूह नहीं, बल्कि एक जीवंत दस्तावेज़ है जो समय के साथ देश की आवश्यकताओं के अनुसार संशोधित भी होता रहता है।

संविधान की महत्ता को समझने के लिए हमें यह जानना आवश्यक है कि यह न केवल सरकार के कामकाज को नियंत्रित करता है, बल्कि हमारे अधिकारों की रक्षा भी करता है। संविधान के कारण ही भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य बना है, जहाँ सभी नागरिकों को समान अवसर और न्याय मिलता है।

📊 Diagram: चित्र 10.1 — गणतंत्र दिवस परेड की झलकियाँ; चित्र 10.2 — हीलियम गैस से भरे काँच के डिब्बे में संरक्षित भारत के संविधान की मूल प्रति

🧪 Activity: छात्रों को गणतंत्र दिवस परेड देखने के अनुभव साझा करने और संविधान के महत्व पर चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित करें।

🔗 Connection: यह परिचय हमें संविधान की आवश्यकता और इसके निर्माण की प्रक्रिया को समझने के लिए आगे बढ़ाता है।

Table on page 18 (8×2)

प्रस्तावना की विशेषताएँहम इन्हें अपने दैनिक जीवन में कैसे देखते हैं
संप्रभु
पंथनिरपेक्षकिसी व्यक्ति को यदि अपने धर्म के रीति-रिवाजों का पालन करना है और वह दूसरे के जीवन में बाधा नहीं डालता, तो उसे इसके लिए राज्य से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।
गणतंत्र
न्यायराज्य नौकरियों और अवसरों में सभी नागरिकों को जाति, धर्म, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव किए बिना समान अवसर प्रदान करता है।
स्वतंत्रता
समानता
बंधुत्व

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. ‘संविधान सभा में भारत के विभिन्न क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों के प्रतिनिधि सम्मिलित थे।’ आपके अनुसार ऐसा होना क्यों महत्वपूर्ण था?

संविधान सभा में भारत के विभिन्न क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों के प्रतिनिधि शामिल होने से यह सुनिश्चित हुआ कि संविधान में देश के सभी हिस्सों, संस्कृतियों, भाषाओं और समुदायों के हितों का समुचित प्रतिनिधित्व हो। इससे संविधान अधिक समावेशी, न्यायसंगत और व्यापक बना, जो पूरे देश के लोगों की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं को ध्यान में रखता है। यह विविधता संविधान को मजबूत और लोकतांत्रिक बनाती है।

2. नीचे दिए गए कथनों को ध्यान से पढ़िए और पहचानिए कि इनमें भारतीय संविधान की कौन-कौन सी प्रमुख विशेषताएँ या मूल्य दिखाई देते हैं — (क) शीना, रजत और हर्ष एक पंक्ति में खड़े हैं। वे आम चुनावों में अपना पहला वोट डालने के लिए उत्साहित हैं। (ख) राधा, इमोन और हर्पीत एक ही विद्यालय की एक ही कक्षा में पढ़ते हैं। (ग) माता-पिता को अपने बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था करनी चाहिए। (घ) गाँव के कुएँ का उपयोग सभी जाति, धर्म और लिंग के लोग कर सकते हैं।

(क) आम चुनावों में वोट डालना – लोकतंत्र और सार्वभौमिक मताधिकार की विशेषता। (ख) एक ही विद्यालय की कक्षा में पढ़ना – समानता और समान अवसर। (ग) बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करना – कर्तव्य और सामाजिक उत्तरदायित्व। (घ) कुएँ का उपयोग सभी के लिए – समानता, बंधुत्व और पंथनिरपेक्षता।

इस प्रकार ये कथन संविधान के लोकतांत्रिक, समानता, बंधुत्व, और सामाजिक न्याय के मूल्यों को दर्शाते हैं।

3. यह कहा जाता है कि ‘भारत में सभी नागरिक कानून के समक्ष समान है।’ क्या आपको लगता है कि यह एक सच्चाई है? यदि हाँ, तो क्यों? यदि नहीं, तो क्यों नहीं? तकों के साथ उत्तर दीजिए।

हाँ, संविधान के अनुसार सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं। यह संविधान का मूल सिद्धांत है कि कोई भी व्यक्ति जाति, धर्म, लिंग या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव का शिकार नहीं होगा। हालांकि व्यवहार में कुछ जगहों पर भेदभाव और असमानताएँ देखी जाती हैं, लेकिन संविधान और कानून इसे रोकने के लिए सख्त प्रावधान करते हैं। इसलिए, यह एक आदर्श और कानूनी सच्चाई है, जिसे समाज को पूरी तरह लागू करना है।

4. आपने पढ़ा कि ‘भारत एकमात्र ऐसा देश है, जिसने आरंभ से ही अपने नागरिकों को सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार प्रदान किया।’ क्या आप बता सकते हैं कि भारत ने ऐसा क्यों किया?

भारत ने सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार इसलिए दिया क्योंकि यह एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सभी वर्गों और समुदायों ने भाग लिया था, इसलिए सभी को समान रूप से मतदान का अधिकार देना न्यायसंगत था। इससे सभी नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित होती है और सरकार अधिक प्रतिनिधि और जवाबदेह बनती है।

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