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विज्ञान के चमत्कार | Class 7 Hindi Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

विज्ञान के चमत्कार | Class 7 Hindi Notes

विज्ञान के चमत्कार – this guide gives you a concise, exam-ready overview of विज्ञान के चमत्कार from Class 7 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

बिरजू महाराज से साक्षात्कार

इस अनुभाग में कथक नृत्य के महान कलाकार पद्मविभूषण श्री बिरजू महाराज का परिचय और उनके जीवन की संघर्षपूर्ण यात्रा प्रस्तुत की गई है। बिरजू महाराज का बचपन आर्थिक कठिनाइयों से भरा था, जब उनके पिता का निधन हो गया तो परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। उनके परिवार में कथक नृत्य की परंपरा थी, जिसके कारण उन्होंने बचपन से ही कथक सीखना शुरू कर दिया था। गुरु-शिष्य के पवित्र संबंध को दर्शाने वाली गंडा बाँधने की परंपरा में उन्होंने बदलाव किया और शिष्य की लगन और भेंट की सामर्थ्य को परखना आवश्यक माना। बिरजू महाराज ने बताया कि नृत्य सीखने के लिए संगीत की समझ आवश्यक है क्योंकि संगीत में लय होती है जो नृत्य को सुंदरता और संतुलन प्रदान करती है। उन्होंने कथक की पुरानी परंपरा को बनाए रखते हुए उसमें नई भाव-भंगिमाएँ और प्रस्तुतिकरण के तरीके जोड़े। बिरजू महाराज ने शास्त्रीय नृत्य और लोक नृत्य के बीच के अंतर को स्पष्ट किया और कहा कि लोक नृत्य सामूहिक होता है जबकि शास्त्रीय नृत्य में एक नर्तक अकेला होता है। उन्होंने बच्चों को संगीत, नृत्य सीखने की सलाह दी और अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों की रुचि को समझें और उन्हें कला के क्षेत्र में प्रोत्साहित करें। इस साक्षात्कार के माध्यम से हमें नृत्य की गहराई, परंपरा और कलाकार की मेहनत का बोध होता है।

📊 Diagram: 0771CH08; श्रेया; Reprint 2026-27

🧪 Activity: पाठ में बिरजू महाराज से पूछे गए प्रश्नों और उनके उत्तरों के आधार पर चर्चा करना।

🔗 Connection: अगले अनुभाग में बिरजू महाराज के कथक नृत्य की परंपरा, उसकी शुरुआत और विभिन्न घरानों के बारे में विस्तार से बताया गया है।

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शब्दसंदर्भ या अवधारणा
1. कर्नाटक संगीत शैली1. भारत की प्राचीन गायन-वादन गीत-नृत्य अभिनय परंपरा का अभिन्न अंग है। इसमें शब्दों की अपेक्षा सुरों का महत्व होता है। इसमें नियमों की प्रधानता होती है।
2. घराना2. भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक शैली, जो मुख्य रूप से दक्षिण भारत के राज्यों में प्रचलित है। इसमें स्वर शैली की प्रधानता होती है। जल तरंगम, वीणा, मृदंग, मंडोलिन वाद्ययंत्रों से संगत दी जाती है।
3. शास्त्रीय संगीत3. हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में एक है, यह कान में सोने या चाँदी का तार पहनाने से संबंधित है।
4. हिंदुस्तानी संगीत शैली4. हिंदुस्तानी संगीत में कलाकारों का एक समुदाय या कुटुंब, जो संगीत नृत्य की विशिष्ट शैली साझा करते हैं। संगीत या नृत्य की परंपरा, जिसमें सिद्धांत और शैली पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रशिक्षण के द्वारा आगे बढ़ती है।
5. कनछेदन5. किसी क्षेत्र विशेष में लोक द्वारा किए जाने वाले पारंपरिक नृत्य। लोक नृत्य, क्षेत्र विशेष की संस्कृति एवं रीति-रिवाजों को दर्शाते हैं। ये विशेष रूप से फसल कटाई, उत्सवों आदि के अवसर पर किए जाते हैं।
6. लोक नृत्य6. भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक शैली, जो मुख्य रूप से उत्तर भारत के राज्यों में प्रचलित है। तबला, सारंगी, सितार, संतूर वाद्ययंत्रों से संगत दी जाती है। इसके प्रमुख रागों की संख्या छह है।

Table on page 15 (7×6)

तीरूति
क्षमी
वा
झूराड़ा
दीचंदीदा
ड़ढ़
रा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

‘उथल-पुथल’ शब्द में कौन-सा समास है ?

द्वंद्व समास

माधवदास अकेलापन क्यों महसूस करते थे ?

वे अकेले रहते थे ।

राजा विराट के यहाँ अर्जुन ने कौन-सा कार्य किया ?

संगीत व नृत्य की शिक्षा देना

धनराज अपना प्रेरणा स्रोत किसे मानते हैं ?

अपनी माँ को

इस अध्याय में महारत हासिल करें

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