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Chapter 8

🎓 Class 7📖 Malhar📖 13 notes🧠 15 Q&A⏱️ ~20 min
Chapter 7Chapter 8 of 10Chapter 9

Chapter 8Study Notes

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बिरजू महाराज से साक्षात्कार

Explanation

बिरजू महाराज से साक्षात्कार

इस अनुभाग में कथक नृत्य के महान कलाकार पद्मविभूषण श्री बिरजू महाराज का परिचय और उनके जीवन की प्रारंभिक परिस्थितियों का वर्णन है। बिरजू महाराज का जन्म एक संगीत परिवार में हुआ था, जहाँ कथक नृत्य की परंपरा विरासत में मिली। बचपन में आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उनकी माँ ने उन्हें नृत्य के अभ्यास के लिए प्रेरित किया। बिरजू महाराज ने अपने पिता, चाचा और परिवार के अन्य सदस्यों से कथक का प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि कथक की तालीम शुरू होने पर गुरु-शिष्य के बीच गंडा बाँधने की परंपरा होती है, जो गुरु-शिष्य के पवित्र संबंध का प्रतीक है। उन्होंने इस परंपरा में बदलाव किया और गंडा बाँधने से पहले शिष्य की लगन और भेंट की सामर्थ्य को परखा। बिरजू महाराज ने बचपन से ही तबला बजाना और गाना भी शुरू कर दिया था। उन्होंने नौकरी के साथ-साथ नृत्य को जारी रखा और दृढ़ निश्चय से महाराज बनने का लक्ष्य रखा। इस खंड में कथक नृत्य की उत्पत्ति, लखनऊ, जयपुर और बनारस घरानों की परंपरा, और कथक की प्राचीनता का भी उल्लेख है। बिरजू महाराज ने बताया कि कथक नृत्य में संगीत का ज्ञान आवश्यक है क्योंकि नृत्य में लय और ताल का समन्वय होना चाहिए। उन्होंने कथक के प्रस्तुतीकरण में भाव-भंगिमाओं और आधुनिक कविताओं को भी शामिल किया। बिरजू महाराज के अनुसार, संगीत और नृत्य जीवन के लिए आवश्यक हैं और बच्चों को लय के साथ खेलने देना चाहिए।

  • बिरजू महाराज का जन्म संगीत परिवार में हुआ और बचपन में आर्थिक संघर्षों का सामना किया।
  • कथक नृत्य की परंपरा विरासत में मिली और उन्होंने अपने पिता व चाचा से प्रशिक्षण लिया।
  • गुरु-शिष्य के बीच गंडा बाँधने की परंपरा को उन्होंने शिष्य की लगन और भेंट की सामर्थ्य के आधार पर बदला।
  • कथक नृत्य में संगीत की समझ और लय का ज्ञान आवश्यक है।
  • उन्होंने कथक के प्रस्तुतीकरण में भाव-भंगिमाओं और आधुनिक कविताओं को जोड़ा।
  • संगीत और नृत्य को जीवन का अभिन्न हिस्सा माना और बच्चों को लय के साथ खेलने की सलाह दी।
  • 📌 कथक: भारतीय शास्त्रीय नृत्य की एक शैली, जो कथा कहने के माध्यम से भाव-भंगिमाओं द्वारा प्रस्तुत होती है।
  • 📌 गंडा: गुरु-शिष्य के बीच बाँधा जाने वाला ताबीज़, जो नृत्य की तालीम की पवित्रता को दर्शाता है।
  • 📌 ताल: संगीत में लय की इकाई, जो नृत्य में समय और गति का निर्धारण करती है।

बचपन और संगीत की शुरुआत

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बचपन और संगीत की शुरुआत

इस भाग में बिरजू महाराज के बचपन के संघर्षों और संगीत की शुरुआत का वर्णन है। बचपन में आर्थिक तंगी के बावजूद उनकी माँ ने उन्हें नृत्य के अभ्यास के लिए प्रोत्साहित किया। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने पर वे कभी-कभी कर्ज लेकर गुजारा करते थे और पुरानी जरी की साड़ियों को बेचकर जीवन यापन करते थे। बिरजू महाराज ने बताया कि उन्होंने बचपन में ही कथक नृत्य सीखना शुरू कर दिया था क्योंकि घर में कथक का माहौल था। उन्होंने अपने पिता, चाचा से कथक की तालीम ली। बचपन में ही वे नवाब के दरबार में नाचने लगे थे। उन्होंने गुरु-शिष्य के बीच गंडा बाँधने की परंपरा और उसकी महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस रस्म को उल्टा कर दिया है, यानी गंडा तभी बाँधते हैं जब शिष्य में सच्ची लगन हो। बिरजू महाराज ने यह भी बताया कि संगीत और नृत्य के साथ पढ़ाई और नौकरी करना संभव है, बशर्ते व्यक्ति में दृढ़ निश्चय और मेहनत हो।

  • बचपन में आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद बिरजू महाराज ने संगीत और नृत्य का अभ्यास जारी रखा।
  • उनकी माँ ने हमेशा अभ्यास करने की प्रेरणा दी, चाहे भोजन कम मिलता हो।
  • कथक नृत्य की तालीम परिवार में विरासत में मिली थी।
  • गुरु-शिष्य के बीच गंडा बाँधने की रस्म को उन्होंने शिष्य की लगन के आधार पर बदला।
  • संगीत और नृत्य के साथ पढ़ाई और नौकरी करना संभव है, यदि दृढ़ निश्चय हो।
  • 📌 गंडा बाँधना: गुरु-शिष्य के बीच नृत्य सीखने की पवित्र रस्म।
  • 📌 तालीम: किसी कला या विषय का प्रशिक्षण।
  • 📌 दृढ़ निश्चय: किसी कार्य को करने का मजबूत संकल्प।

कथक की परंपरा और घराने

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कथक की परंपरा और घराने

इस खंड में कथक नृत्य की प्राचीनता, उसकी उत्पत्ति और विभिन्न घरानों का विकास बताया गया है। कथक की शुरुआत महाभारत और रामायण के आदिपर्व में मिलती है। प्रारंभ में कथक एक कथा कहने का तरीका था जो मंदिरों तक सीमित था। हरिया गाँव में कथिकों की संख्या अधिक थी

Practice QuestionsChapter 8

15 practice questions with detailed answers

Q1.बिरजू महाराज कौन हैं और उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत में क्या योगदान दिया है?

Answer:

बिरजू महाराज भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रसिद्ध तबला वादक हैं। उन्होंने तबला वादन को एक नई ऊँचाई दी है और इसे केवल ताल बजाने का यंत्र नहीं बल्कि संगीत की आत्मा माना है।

Explanation:

बिरजू महाराज एक महान तबला वादक हैं जिन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत में अपनी विशिष्ट शैली विकसित की। उन्होंने तबला वादन को कला के साथ-साथ जीवन दर्शन भी माना। उनका योगदान तबला वादन की तकनीक और भावपूर्ण प्रस्तुति में महत्वपूर्ण है।

Easy
Q2.बिरजू महाराज के बचपन और संगीत सीखने की प्रक्रिया का वर्णन करें।

Answer:

बिरजू महाराज का जन्म एक संगीत परिवार में हुआ था जहाँ संगीत उनकी जीवनशैली का हिस्सा था। बचपन से ही उन्होंने तबला बजाने की इच्छा जताई और गुरु से कठोर अभ्यास के साथ तबला सीखना शुरू किया। परिवार ने उनका पूरा सहयोग किया।

Explanation:

बचपन में बिरजू महाराज ने संगीत के प्रति रुचि दिखाई और गुरु के मार्गदर्शन में तबला सीखना शुरू किया। उन्होंने नियमों को समझकर और मेहनत से अभ्यास करके संगीत को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया। परिवार का सहयोग भी उनकी सफलता में महत्वपूर्ण था।

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Q3.तबला में कितने ड्रम होते हैं और उनके क्या कार्य होते हैं?
A.A) तीन ड्रम; दायां ताल और बायां तान उत्पन्न करता है
B.B) दो ड्रम; दायां तान और ताल की ध्वनि उत्पन्न करता है, बायां गहरा और ताल संतुलित करता है
C.C) एक ड्रम; जो ताल और तान दोनों उत्पन्न करता है
D.D) चार ड्रम; दो दायां और दो बायां

Answer:

दो ड्रम; दायां तान और ताल की ध्वनि उत्पन्न करता है, बायां गहरा और ताल संतुलित करता है

Explanation:

तबला में दो ड्रम होते हैं: दायां ड्रम मुख्य रूप से तान और ताल की ध्वनि उत्पन्न करता है जबकि बायां ड्रम गहरा स्वर देता है और ताल को संतुलित करता है। यह तबले की विशिष्टता और स्वरूप को बनाता है।

Easy
Q4.बिरजू महाराज ने तबला वादन को केवल ताल बजाने का यंत्र क्यों नहीं माना?

Answer:

बिरजू महाराज ने तबला को संगीत की आत्मा माना क्योंकि उनकी शैली में तकनीक, ताल की समझ और भावपूर्ण प्रस्तुति शामिल है। वे इसे केवल ताल बजाने का यंत्र नहीं बल्कि एक कला और जीवन दर्शन मानते हैं।

Explanation:

उनकी सोच में तबला वादन केवल ताल बजाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संगीत की गहराई और आत्मा को व्यक्त करता है। उनकी विशिष्ट शैली और भावपूर्ण प्रस्तुति इसे कला का रूप देती है।

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Q5.बिरजू महाराज के अनुसार संगीत से मनुष्य के व्यक्तित्व पर क्या प्रभाव पड़ता है?
A.A) संगीत से मनुष्य का व्यक्तित्व निखरता है और जीवन में अनुशासन आता है
B.B) संगीत से मनुष्य आलसी और उदास हो जाता है
C.C) संगीत का व्यक्तित्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता
D.D) संगीत से मनुष्य केवल मनोरंजन प्राप्त करता है

Answer:

संगीत से मनुष्य का व्यक्तित्व निखरता है और जीवन में अनुशासन आता है

Explanation:

बिरजू महाराज का मानना है कि संगीत से व्यक्ति का व्यक्तित्व निखरता है और वह जीवन में अनुशासन सीखता है। संगीत एक आध्यात्मिक अनुभव है जो मन को शांति और आनंद प्रदान करता है।

Easy
Q6.संगीत में निरंतर अभ्यास और समर्पण क्यों आवश्यक है, बिरजू महाराज के अनुसार?

Answer:

बिरजू महाराज के अनुसार संगीत में निरंतर अभ्यास और समर्पण आवश्यक है क्योंकि इससे मनुष्य का व्यक्तित्व निखरता है और संगीत में महारत हासिल होती है। यह आध्यात्मिक अनुभव भी प्रदान करता है।

Explanation:

निरंतर अभ्यास से तकनीक सुधरती है और समर्पण से संगीत के प्रति लगाव बढ़ता है। बिरजू महाराज इसे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं जो शांति और आनंद देता है।

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Q7.बिरजू महाराज की सफलता के पीछे कौन-कौन से कारण हैं?
A.A) केवल प्रतिभा और भाग्य
B.B) मेहनत, अनुशासन, सही मार्गदर्शन और समर्पण
C.C) केवल गुरु की शिक्षाएँ
D.D) केवल संगीत का अभ्यास

Answer:

मेहनत, अनुशासन, सही मार्गदर्शन और समर्पण

Explanation:

बिरजू महाराज ने बताया कि सफलता के लिए केवल प्रतिभा नहीं बल्कि मेहनत, अनुशासन, गुरु का सही मार्गदर्शन और संगीत के प्रति समर्पण आवश्यक है। ये सभी कारण मिलकर उनकी सफलता का आधार बने।

Easy
Q8.बिरजू महाराज ने संगीत में निरंतर सीखने की प्रक्रिया को क्यों महत्वपूर्ण बताया है?

Answer:

बिरजू महाराज के अनुसार संगीत में निरंतर सीखने की प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे कलाकार को नए प्रयोग और सुधार करने का अवसर मिलता है, जिससे उसकी कला और बेहतर होती है।

Explanation:

संगीत एक जीवंत कला है जिसमें समय-समय पर नए प्रयोग और सुधार आवश्यक होते हैं। निरंतर सीखने से कलाकार अपने कौशल को निखारता रहता है और संगीत में नवीनता बनाए रखता है।

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