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रहीम के दोहे* | Class 6 Hindi Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

रहीम के दोहे* – this guide gives you a concise, exam-ready overview of रहीम के दोहे* from Class 6 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

रहीम के दोहे और उनका अर्थ

इस अनुभाग में हम रहीम के कुछ प्रसिद्ध दोहों का अध्ययन करेंगे और उनके अर्थ को विस्तार से समझेंगे। रहीम के दोहे जीवन के विभिन्न पहलुओं को सरल और प्रभावी भाषा में प्रस्तुत करते हैं।

पहला दोहा है - 'रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय। टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय।' इस दोहे में रहीम प्रेम को धागे के समान बताते हैं, जो बहुत नाजुक होता है। यदि प्रेम का धागा टूट जाता है, तो उसे फिर से जोड़ना मुश्किल होता है और यदि जुड़ भी जाता है तो गाँठ पड़ जाती है, जो प्रेम में बाधा बनती है। यह दोहा हमें प्रेम की नाजुकता और उसे संभालने की आवश्यकता की सीख देता है।

दूसरा दोहा है - 'जो रहीम उत्तम प्रकृति, सोई सुमिरन हरि का।' इस दोहे में कहा गया है कि जो व्यक्ति अच्छा स्वभाव रखता है, वही सच्चे मन से भगवान का स्मरण करता है। अच्छा स्वभाव भगवान की भक्ति का सबसे बड़ा प्रमाण है।

तीसरा दोहा - 'बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर।' इस दोहे में रहीम बताते हैं कि केवल बड़ा होना या ऊंचा पद प्राप्त करना महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि दूसरों के लिए उपयोगी होना जरूरी है। खजूर का पेड़ ऊंचा होता है, लेकिन उसकी छाया नहीं मिलती और फल भी दूर होते हैं। इसलिए व्यक्ति को बड़ा बनने के साथ-साथ दूसरों के लिए सहायक भी होना चाहिए।

इन दोहों के माध्यम से रहीम ने जीवन के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया है, जो आज भी प्रासंगिक हैं।

📊 Diagram: इस अनुभाग में रहीम के दोहों के अर्थ को समझाने के लिए दोहे के शब्दों को उनके भावार्थ के साथ अलग-अलग रंगों में प्रस्तुत किया गया है।

🧪 Activity: विद्यार्थियों से कहा जाता है कि वे दिए गए दोहों को अपने शब्दों में समझाएं और अपने जीवन में उनके महत्व पर चर्चा करें।

🔗 Connection: यह अनुभाग रहीम के दोहों के अर्थ को समझाने के बाद, उनके सामाजिक और नैतिक संदेशों पर विस्तार से चर्चा वाले अगले अनुभाग से जुड़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रहीम का पूरा नाम क्या था और वे किस मुगल सम्राट के दरबार में थे?

अब्दुल रहीम खान-ए-खाना, अकबर

रहीम के दोहे मुख्य रूप से किन विषयों पर आधारित होते हैं?

नीति, जीवन के मूल्य, मानव व्यवहार

रहीम के दोहे कितनी पंक्तियों के होते हैं और उनकी पहली व दूसरी पंक्ति में क्या होता है?

दोहे दो पंक्तियों के होते हैं। पहली पंक्ति में विषय प्रस्तुत होता है और दूसरी पंक्ति में उसका सार या उपदेश होता है।

रहीम के दोहे 'रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय। टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय।' का क्या अर्थ है?

यह दोहा प्रेम को धागे के समान नाजुक बताता है। यदि प्रेम का धागा टूट जाए तो उसे फिर से जोड़ना मुश्किल होता है और अगर जुड़ भी जाए तो गाँठ पड़ जाती है, जो प्रेम में बाधा बनती है। यह प्रेम की नाजुकता और संभालने की आवश्यकता सिखाता है।

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