योगस्य वैशिष्ट्यम् | Class 12 Sanskrit Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन
योगस्य वैशिष्ट्यम् – this guide gives you a concise, exam-ready overview of योगस्य वैशिष्ट्यम् from Class 12 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
चित्तवृत्तिनिरोधः एवं प्रमाणविपर्ययविकल्पनिद्रास्मृतयः
योगशास्त्र में 'चित्तवृत्तिनिरोधः' का अर्थ है मन की चंचलताओं, विक्षेपों और विचारों का निरोध करना। पतञ्जलि के अनुसार योग का मुख्य उद्देश्य चित्त की वृत्तियों को नियंत्रित कर मन को एकाग्र और शांत बनाना है। चित्त में विभिन्न प्रकार की वृत्तियाँ होती हैं जिन्हें योगसूत्रों में पाँच प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है: प्रमाण, विपर्यय, विकल्प, निद्रा और स्मृति।
प्रमाण का अर्थ है प्रत्यक्ष, अनुमान और शाब्दिक प्रमाण, जो सत्य ज्ञान प्रदान करते हैं। विपर्यय मिथ्या या गलत ज्ञान है, जो वास्तविकता के विपरीत होता है। विकल्प शब्दज्ञान पर आधारित होता है, जिसमें वस्तु का अभाव होता है। निद्रा वह स्थिति है जिसमें चित्त निष्क्रिय होकर शून्य सा हो जाता है, परन्तु यह जागरूकता का अभाव है। स्मृति वह है जिसमें अनुभूत विषयों का स्मरण होता है।
योगाभ्यास का लक्ष्य इन वृत्तियों के निरोध से चित्त को स्थिर करना है, जिससे व्यक्ति को आत्मज्ञान और शांति प्राप्त होती है। इस खंड में योगशिक्षक द्वारा इन वृत्तियों के भेद और उनके निरोध के महत्व को विस्तार से समझाया गया है।
📊 Diagram: श्यामपट्ट पर योगाचार्य द्वारा चित्तवृत्तियों के प्रकारों का लेखन।
🧪 Activity: छात्रों द्वारा चित्तवृत्तियों के भेदों पर चर्चा और उदाहरण प्रस्तुत करना।
🔗 Connection: अगले खंड में पतञ्जलि के अष्टांग योग के अंगों का वर्णन होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. अधोलिखितप्रश्नानां उत्तराणि संस्कृतेन लिखत । (क) योगः कः कथ्यते? (ख) मातुः मुखाद् योगशिक्षाया: विषये का श्रुतवती? (ग) छात्राः कस्मिन् विषये ज्ञातुम् उत्सुकाः सन्ति? (घ) प्रमाणानि कानि? (ङ) स्मृतिः का कथ्यते? (च) निद्रा का भवति? (छ) योगाङ्गानि कानि? (ज) अहिंसा का कथ्यते? (झ) अपरिग्रहः कः भवति? (ञ) के नियमाः?
1. (क) योगः चित्तवृत्तिनिरोधः इति कथ्यते। (ख) मातुः मुखात् योगशिक्षाया: विषयं श्रुतवती। (ग) छात्राः योगस्य महत्त्वं, योगाङ्गानि, नियमाः इत्यादिषु विषयेषु ज्ञातुम् उत्सुकाः सन्ति। (घ) प्रमाणानि प्रत्यक्षं, अनुमानं, शब्दं च सन्ति। (ङ) स्मृतिः पूर्वानुभवानां चित्ते सञ्चितं ज्ञानं कथ्यते। (च) निद्रा चित्तस्य विश्रामः भवति। (छ) योगाङ्गानि यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि इति अष्टाङ्गानि सन्ति। (ज) अहिंसा सर्वप्राणिनां प्रति हिंसा न कर्तव्येति कथ्यते। (झ) अपरिग्रहः वस्तूनां आस
2. वाक्यांशानाम् आशयं स्पष्टीकुरुत । (क) स्थिरसुखमासनम्। (ख) देशबन्धशिचत्स्य धारणा। (ग) ब्रह्मचर्यप्रतिष्ठायां वीर्यलाभः। (घ) सन्तोषादनुतमः सुखलाभः। (ङ) स्वाध्यायादिष्टदेवतासम्प्रयोगः।
2. (क) स्थिरसुखमासनम् — ऐसा आसन जो स्थिर और सुखद हो। (ख) देशबन्धशिचत्स्य धारणा — मन को किसी निश्चित स्थान पर स्थिर रखना। (ग) ब्रह्मचर्यप्रतिष्ठायां वीर्यलाभः — ब्रह्मचर्य के पालन से शक्ति की प्राप्ति। (घ) सन्तोषादनुतमः सुखलाभः — संतोष से उत्तम सुख की प्राप्ति। (ङ) स्वाध्यायादिष्टदेवतासम्प्रयोगः — स्वाध्याय द्वारा अपनी इच्छित देवता के साथ संपर्क।
3. ‘अ’स्तम्भस्य वाक्यांशैः सह ‘ब’ स्तम्भस्य वाक्यांशान् मेलयत । (अ) (ब) (क) शब्दज्ञानानुपाती वस्तुशून्य: धारणा (ख) स्थिरसुखम् वीर्यलाभः (ग) देशबन्धचित्तस्य सर्वरत्नोपस्थानम् (घ) अस्तेयप्रतिष्ठायाम् विकल्पः (ङ) ब्रह्मचर्यप्रतिष्ठायाम् ध्यानम् (च) प्रत्ययैकतानता आसनम्
3. मिलान: (क) शब्दज्ञानानुपाती वस्तुशून्य: — विकल्पः (ख) स्थिरसुखम् — आसनम् (ग) देशबन्धचित्तस्य — धारणा (घ) अस्तेयप्रतिष्ठायाम् — सर्वरत्नोपस्थानम् (ङ) ब्रह्मचर्यप्रतिष्ठायाम् — वीर्यलाभः (च) प्रत्ययैकतानता — ध्यानम्
4. रिक्तस्थानानां पूर्ति कुरुत । (क) योगशास्त्रे शरीरस्य मनसः:……………………………प्रतिपादनं वर्तते। (ख) अन्ताराष्ट्रिययोगदिवसः: जूनमासस्य……………………………मान्यते। (ग) शौचसन्तोषतपः……………………………प्रणिधानानि नियमाः। (घ) ………………………………क्रियाफलाश्रयत्वम्। (ङ) ………………………………मिथ्याज्ञानमतदूपप्रतिष्ठम्।
4. (क) योगशास्त्रे शरीरस्य मनसः: संयोजनं प्रतिपादनं वर्तते। (ख) अन्ताराष्ट्रिययोगदिवसः: जूनमासस्य 21 तमे दिनं मान्यते। (ग) शौचसन्तोषतपः संयमः प्रणिधानानि नियमाः। (घ) अभ्यासः क्रियाफलाश्रयत्वम्। (ङ) अविद्या मिथ्याज्ञानमतदूपप्रतिष्ठम्।
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