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योगस्य वैशिष्ट्यम् | Class 12 Sanskrit Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

योगस्य वैशिष्ट्यम् – this guide gives you a concise, exam-ready overview of योगस्य वैशिष्ट्यम् from Class 12 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

धारणा, ध्यान, समाधि - मानसिक एकाग्रता के उच्चतम चरण

धारणा, ध्यान और समाधि योग के अंतिम तीन अंग हैं जो मानसिक नियंत्रण के उच्चतम स्तर को दर्शाते हैं।

धारणा का अर्थ है मन को किसी एक बिंदु, वस्तु या विचार पर केंद्रित करना, जो ध्यान की पूर्व अवस्था है। इसमें चित्त की एकाग्रता होती है, परन्तु अभी भी विचारों का प्रवाह होता है।

ध्यान वह अवस्था है जिसमें चित्त पूरी तरह से एकाग्र होकर उस वस्तु में लीन हो जाता है। ध्यान में मन की एकता और स्थिरता होती है, जिससे गहन मनन और अनुभूति होती है।

समाधि योग की अंतिम अवस्था है, जिसमें चित्त का संपूर्ण विलीन होना होता है। समाधि में व्यक्ति अपने स्वरूप की अनुभूति करता है, जो पूर्ण शून्यता और निर्विकारता की स्थिति है।

इस खंड में इन तीनों अवस्थाओं का विस्तार से वर्णन है, जो योगाभ्यास के उच्चतम लक्ष्य को दर्शाते हैं।

📊 Diagram: योगाचार्य द्वारा श्यामपट्ट पर धारणा, ध्यान और समाधि की परिभाषा लिखित।

🧪 Activity: छात्रों द्वारा धारणा, ध्यान और समाधि के अनुभवों पर विचार-विमर्श।

🔗 Connection: अगले खंड में योगाङ्गानां फलानि एवं महत्त्वम् का वर्णन होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. अधोलिखितप्रश्नानां उत्तराणि संस्कृतेन लिखत । (क) योगः कः कथ्यते? (ख) मातुः मुखाद् योगशिक्षाया: विषये का श्रुतवती? (ग) छात्राः कस्मिन् विषये ज्ञातुम् उत्सुकाः सन्ति? (घ) प्रमाणानि कानि? (ङ) स्मृतिः का कथ्यते? (च) निद्रा का भवति? (छ) योगाङ्गानि कानि? (ज) अहिंसा का कथ्यते? (झ) अपरिग्रहः कः भवति? (ञ) के नियमाः?

1. (क) योगः चित्तवृत्तिनिरोधः इति कथ्यते। (ख) मातुः मुखात् योगशिक्षाया: विषयं श्रुतवती। (ग) छात्राः योगस्य महत्त्वं, योगाङ्गानि, नियमाः इत्यादिषु विषयेषु ज्ञातुम् उत्सुकाः सन्ति। (घ) प्रमाणानि प्रत्यक्षं, अनुमानं, शब्दं च सन्ति। (ङ) स्मृतिः पूर्वानुभवानां चित्ते सञ्चितं ज्ञानं कथ्यते। (च) निद्रा चित्तस्य विश्रामः भवति। (छ) योगाङ्गानि यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि इति अष्टाङ्गानि सन्ति। (ज) अहिंसा सर्वप्राणिनां प्रति हिंसा न कर्तव्येति कथ्यते। (झ) अपरिग्रहः वस्तूनां आस

2. वाक्यांशानाम् आशयं स्पष्टीकुरुत । (क) स्थिरसुखमासनम्। (ख) देशबन्धशिचत्स्य धारणा। (ग) ब्रह्मचर्यप्रतिष्ठायां वीर्यलाभः। (घ) सन्तोषादनुतमः सुखलाभः। (ङ) स्वाध्यायादिष्टदेवतासम्प्रयोगः।

2. (क) स्थिरसुखमासनम् — ऐसा आसन जो स्थिर और सुखद हो। (ख) देशबन्धशिचत्स्य धारणा — मन को किसी निश्चित स्थान पर स्थिर रखना। (ग) ब्रह्मचर्यप्रतिष्ठायां वीर्यलाभः — ब्रह्मचर्य के पालन से शक्ति की प्राप्ति। (घ) सन्तोषादनुतमः सुखलाभः — संतोष से उत्तम सुख की प्राप्ति। (ङ) स्वाध्यायादिष्टदेवतासम्प्रयोगः — स्वाध्याय द्वारा अपनी इच्छित देवता के साथ संपर्क।

3. ‘अ’स्तम्भस्य वाक्यांशैः सह ‘ब’ स्तम्भस्य वाक्यांशान् मेलयत । (अ) (ब) (क) शब्दज्ञानानुपाती वस्तुशून्य: धारणा (ख) स्थिरसुखम् वीर्यलाभः (ग) देशबन्धचित्तस्य सर्वरत्नोपस्थानम् (घ) अस्तेयप्रतिष्ठायाम् विकल्पः (ङ) ब्रह्मचर्यप्रतिष्ठायाम् ध्यानम् (च) प्रत्ययैकतानता आसनम्

3. मिलान: (क) शब्दज्ञानानुपाती वस्तुशून्य: — विकल्पः (ख) स्थिरसुखम् — आसनम् (ग) देशबन्धचित्तस्य — धारणा (घ) अस्तेयप्रतिष्ठायाम् — सर्वरत्नोपस्थानम् (ङ) ब्रह्मचर्यप्रतिष्ठायाम् — वीर्यलाभः (च) प्रत्ययैकतानता — ध्यानम्

4. रिक्तस्थानानां पूर्ति कुरुत । (क) योगशास्त्रे शरीरस्य मनसः:……………………………प्रतिपादनं वर्तते। (ख) अन्ताराष्ट्रिययोगदिवसः: जूनमासस्य……………………………मान्यते। (ग) शौचसन्तोषतपः……………………………प्रणिधानानि नियमाः। (घ) ………………………………क्रियाफलाश्रयत्वम्। (ङ) ………………………………मिथ्याज्ञानमतदूपप्रतिष्ठम्।

4. (क) योगशास्त्रे शरीरस्य मनसः: संयोजनं प्रतिपादनं वर्तते। (ख) अन्ताराष्ट्रिययोगदिवसः: जूनमासस्य 21 तमे दिनं मान्यते। (ग) शौचसन्तोषतपः संयमः प्रणिधानानि नियमाः। (घ) अभ्यासः क्रियाफलाश्रयत्वम्। (ङ) अविद्या मिथ्याज्ञानमतदूपप्रतिष्ठम्।

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