कार्यं वा साध्येयम्, देहं वा पातयेयम् | Class 12 Sanskrit Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

कार्यं वा साध्येयम्, देहं वा पातयेयम् – this guide gives you a concise, exam-ready overview of कार्यं वा साध्येयम्, देहं वा पातयेयम् from Class 12 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
नायक का परिचय एवं उसकी दृढ़संकल्पिता
इस भाग में नायक का विस्तृत परिचय दिया गया है। नायक लगभग षोडशवर्षीय युवा है, जिसका शरीर सुघटित और दृढ़ है। उसके बाल श्याम-श्याम हैं, जो गुच्छों में कुञ्चित हैं। उसके गाल सुंदर और आकर्षक हैं। ललाट, कपोल, नासिका का अग्रभाग तथा ओंठ पसीने की बूँदों से भीगा हुआ है, जो उसकी यात्रा की कठिनाइयों को दर्शाता है।
उसका मुख कमल के समान प्रसन्न है, जो उसके दृढ़संकल्प और उत्साह को प्रकट करता है। वह राजतसूत्र से बनी हरी पगड़ी पहने हुए है, जो उसकी शाही प्रतिष्ठा और वीरता का प्रतीक है। उसकी हरित पगड़ी टेढ़ी बँधी हुई है, जो उसकी कार्यक्षमता और दृढ़ता को दर्शाती है।
यह युवक घोड़े पर सवार है और पर्वतश्रेणी के ऊपर से यात्रा कर रहा है। उसकी चाल दृढ़ और निश्चयपूर्ण है। वह शिवाजी का विश्वासपात्र है, जो सिंहदुर्ग से पत्र लेकर तोरणदुर्ग जा रहा है।
नायक की यह छवि वीरता, निष्ठा और कर्मठता का आदर्श प्रस्तुत करती है। उसकी दृढ़संकल्पिता इस बात को स्पष्ट करती है कि वह अपने कार्य को पूरा करने के लिए किसी भी प्रकार की बाधा से नहीं डरता। यह पाठ विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और कठिनाइयों का सामना करने की प्रेरणा देता है।
📊 Diagram: Figure 1: तावदकस्मादुत्थितो महान् झञ्ज्ञावात:, एक: सायंसमयप्रयुक्त: स्वभाव- वृत्तोऽन्धकार:, स च द्विगुणितो मेघमालाभि:। झञ्ज्ञावातोद्धृते: रेणुभि: श्रीर्णपत्रै: कुसुमपरागै: शुष्कपुष्पैश्च पुनरेष द्वैगुण्यं प्राप
🧪 Activity: विद्यार्थियों से नायक के व्यक्तित्व और उसके दृढ़संकल्प पर चर्चा कराना तथा उनके जीवन में दृढ़संकल्प के महत्व को समझाना।
🔗 Connection: यह अनुभाग प्राकृतिक बाधाओं और नायक की प्रतिक्रिया के वर्णन की ओर बढ़ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. संस्कृतेन उत्तरं दीयताम् । - (क) सायं समये भगवान् भास्कर: कुत्र जिगमिषु: भवति? - (ख) अस्ताचलगमनकाले भास्करस्य वर्ण: कीदृश: भवति? - (ग) नीडेषु के प्रतिनिवर्तन्ते? - (घ) शिववीरस्य विश्वासपात्रं किं स्थानं प्रयाति स्म? - (ङ) प्रतिक्षणमधिकाधिकां श्यामतां कानि कलयन्ति? - (च) शिववीरविश्वासपात्रस्य उष्णीषं कीदृशमासीत्? - (छ) मेघमाला कथं शोभते?
उत्तर: (क) सायं समये भगवान् भास्कर: नीडेषु जिगमिषु: भवति। (ख) अस्ताचलगमनकाले भास्करस्य वर्ण: लालवर्ण: भवति। (ग) नीडेषु पक्षिणः प्रतिनिवर्तन्ते। (घ) शिववीरस्य विश्वासपात्रं तोरणदुर्गं प्रयाति स्म। (ङ) प्रतिक्षणमधिकाधिकां श्यामतां मेघमाला कलयन्ति। (च) शिववीरविश्वासपात्रस्य उष्णीषं हरितोष्णीषशोभितम् आसीत्। (छ) मेघमाला आकाशे झन्झावातेन सह शोभते।
2. समीचीनोत्तरसङ्ख्यां कोष्ठके लिखत । अ. शिवराजविजयस्य रचयिता क: अस्ति? ( ) (क) बाणभट्टः (ख) श्रीहर्षः (ग) अम्बिकादत्तव्यासः (घ) माघः आ. कतिवर्षदेशीयो युवा हयेन पर्वतश्रेणीरुपर्युपरि गच्छति स्म । ( ) (क) चतुर्दशवर्षदेशीयः (ख) द्वादशवर्षदेशीयः (ग) पञ्चदशवर्षदेशीयः (घ) षोडशवर्षदेशीयः इ. शिववीरस्य विश्वासपात्रं किम् आदाय तोरणदुर्गं प्रयाति ?( ) (क) संवादम् आदाय (ख) पत्रम् आदाय (ग) पुष्पगुच्छम् आदाय (घ) अश्वम् आदाय
उत्तर: अ. शिवराजविजयस्य रचयिता बाणभट्टः अस्ति। अतः विकल्प (क) सही है। आ. युवा हयेन पर्वतश्रेणीरुपर्युपरि गच्छति स्म द्वादशवर्षदेशीयः। अतः विकल्प (ख) सही है। इ. शिववीरस्य विश्वासपात्रं पत्रम् आदाय तोरणदुर्गं प्रयाति। अतः विकल्प (ख) सही है।
3. रिक्तस्थानानि पूर्यत । (क) अथाकस्मात् परितो मेघमाला ... प्रादुरभूत्। (ख) क्षणे क्षणे ... खुराशिचक्कणपाषाणखण्डेषु प्रस्थलन्ति। (ग) पदे पदे ... वृक्षशाखाः सम्मुखमाघ्नन्ति। (घ) कृतप्रतिज्ञोऽसौ ... निजकार्यात्र विरमति।
उत्तर: (क) अथाकस्मात् परितो मेघमाला प्रादुरभूत्। (ख) क्षणे क्षणे झन्झावातः खुराशिचक्कणपाषाणखण्डेषु प्रस्थलन्ति। (ग) पदे पदे पक्षिणः वृक्षशाखाः सम्मुखमाघ्नन्ति। (घ) कृतप्रतिज्ञोऽसौ वीरः निजकार्यात्र विरमति।
4. अधोलिखितानां पदानाम् अर्थान् विलिख्य वाक्येषु प्रयुञ्जत । भास्करः, मेघमाला, वनानि, मार्गः, वीरः, गगनतलम्, झन्झावातः, मासः, सायम्।
उत्तर: 1. भास्करः - सूर्यः। 2. मेघमाला - बादल की माला। 3. वनानि - जंगल। 4. मार्गः - रास्ता। 5. वीरः - बहादुर पुरुष। 6. गगनतलम् - आकाश की सतह। 7. झन्झावातः - तेज़ हवा या तूफ़ान। 8. मासः - महीना। 9. सायम् - शाम।
वाक्य उदाहरण:
- भास्करः आकाशे तेजस्वी प्रकाशं ददाति।
- मेघमाला आकाशे घनघोर रूपेण शोभते।
- वनानि अनेकप्रकारस्य जीवजंतूनां निवासस्थानम्।
- मार्गः पर्वतश्रेणीनां मध्ये अस्ति।
- वीरः युद्धे साहसं दर्शयति।
- गगनतलम् नीलवर्णेन आच्छादितम् अस्ति।
- झन्झावातः वृक्षान् कम्पयति।
- मासः वर्षस्य एकः भ
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