Sanskritकक्षा 12कार्यं वा साध्येयम्, देहं वा पातयेयम्हिंदी

कार्यं वा साध्येयम्, देहं वा पातयेयम् | Class 12 Sanskrit Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

कार्यं वा साध्येयम्, देहं वा पातयेयम् | Class 12 Sanskrit Notes

कार्यं वा साध्येयम्, देहं वा पातयेयम् – this guide gives you a concise, exam-ready overview of कार्यं वा साध्येयम्, देहं वा पातयेयम् from Class 12 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

मासोऽयमाषाढः, अस्ति च सायं समयः

इस अनुभाग में आषाढ़ मास के सायंकाल का विस्तृत वर्णन है। आषाढ़ मास भारतीय पंचांग के अनुसार वर्षा ऋतु का प्रारंभिक महीना होता है, जो प्रकृति में परिवर्तन का संकेत देता है। सूर्य अस्ताचलगमन के लिए जा रहा है, अर्थात् दिन समाप्त हो रहा है और शाम का समय है।

आसमान में सिन्दूर के रंग के बादल हैं, जो वरुण देवता के दिगवलम्बी हैं। वरुण देवता पश्चिम दिशा के अधिपति माने जाते हैं, इसलिए बादलों का रंग और उनका फैलाव पश्चिम दिशा की ओर है। यह वर्णन वातावरण की रंगत और दिशा का सूक्ष्म चित्रण करता है।

कलविङ्क (गौरैया के बच्चे) चाटक (छोटे पक्षी) अपने घोंसलों में लौट रहे हैं। यह पक्षियों के जीवन चक्र और प्राकृतिक नियमों का संकेत है। वन प्रतिक्षण अधिकाधिक श्यामिमा (अंधकार) से भर रहे हैं, जो दिन के समाप्त होने का प्रतीक है।

अचानक मेघमाला पर्वतश्रेणी के ऊपर प्रकट होती है। यह मेघमाला लम्बी सूंडों जैसी आकृतियों से युक्त है, जो दिगन्त-दन्तावल के समान भयानक दिखती है। यह बादलों की भीषणता और वातावरण की गंभीरता को दर्शाता है। मेघमाला ने पूरे गगनतल को घेर लिया है, जिससे वातावरण और भी भयावह हो गया है।

यह प्राकृतिक वातावरण नायक की यात्रा के लिए चुनौतीपूर्ण है। पाठ में यह सूक्ष्म प्राकृतिक चित्रण नायक के साहस और दृढ़संकल्प को और भी प्रभावशाली बनाता है।

📊 Diagram: Figure 1: तावदकस्मादुत्थितो महान् झञ्ज्ञावात:, एक: सायंसमयप्रयुक्त: स्वभाव- वृत्तोऽन्धकार:, स च द्विगुणितो मेघमालाभि:। झञ्ज्ञावातोद्धृते: रेणुभि: श्रीर्णपत्रै: कुसुमपरागै: शुष्कपुष्पैश्च पुनरेष द्वैगुण्यं प्राप

🧪 Activity: विद्यार्थियों से आषाढ़ मास के प्राकृतिक परिवर्तनों पर चर्चा कराना तथा वातावरण में रंगों और दिशाओं के महत्व को समझाना।

🔗 Connection: यह अनुभाग नायक के परिचय और उसकी यात्रा के कठिन प्राकृतिक वातावरण के वर्णन की ओर बढ़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. संस्कृतेन उत्तरं दीयताम् । - (क) सायं समये भगवान् भास्कर: कुत्र जिगमिषु: भवति? - (ख) अस्ताचलगमनकाले भास्करस्य वर्ण: कीदृश: भवति? - (ग) नीडेषु के प्रतिनिवर्तन्ते? - (घ) शिववीरस्य विश्वासपात्रं किं स्थानं प्रयाति स्म? - (ङ) प्रतिक्षणमधिकाधिकां श्यामतां कानि कलयन्ति? - (च) शिववीरविश्वासपात्रस्य उष्णीषं कीदृशमासीत्? - (छ) मेघमाला कथं शोभते?

उत्तर: (क) सायं समये भगवान् भास्कर: नीडेषु जिगमिषु: भवति। (ख) अस्ताचलगमनकाले भास्करस्य वर्ण: लालवर्ण: भवति। (ग) नीडेषु पक्षिणः प्रतिनिवर्तन्ते। (घ) शिववीरस्य विश्वासपात्रं तोरणदुर्गं प्रयाति स्म। (ङ) प्रतिक्षणमधिकाधिकां श्यामतां मेघमाला कलयन्ति। (च) शिववीरविश्वासपात्रस्य उष्णीषं हरितोष्णीषशोभितम् आसीत्। (छ) मेघमाला आकाशे झन्झावातेन सह शोभते।

2. समीचीनोत्तरसङ्ख्यां कोष्ठके लिखत । अ. शिवराजविजयस्य रचयिता क: अस्ति? ( ) (क) बाणभट्टः (ख) श्रीहर्षः (ग) अम्बिकादत्तव्यासः (घ) माघः आ. कतिवर्षदेशीयो युवा हयेन पर्वतश्रेणीरुपर्युपरि गच्छति स्म । ( ) (क) चतुर्दशवर्षदेशीयः (ख) द्वादशवर्षदेशीयः (ग) पञ्चदशवर्षदेशीयः (घ) षोडशवर्षदेशीयः इ. शिववीरस्य विश्वासपात्रं किम् आदाय तोरणदुर्गं प्रयाति ?( ) (क) संवादम् आदाय (ख) पत्रम् आदाय (ग) पुष्पगुच्छम् आदाय (घ) अश्वम् आदाय

उत्तर: अ. शिवराजविजयस्य रचयिता बाणभट्टः अस्ति। अतः विकल्प (क) सही है। आ. युवा हयेन पर्वतश्रेणीरुपर्युपरि गच्छति स्म द्वादशवर्षदेशीयः। अतः विकल्प (ख) सही है। इ. शिववीरस्य विश्वासपात्रं पत्रम् आदाय तोरणदुर्गं प्रयाति। अतः विकल्प (ख) सही है।

3. रिक्तस्थानानि पूर्यत । (क) अथाकस्मात् परितो मेघमाला ... प्रादुरभूत्। (ख) क्षणे क्षणे ... खुराशिचक्कणपाषाणखण्डेषु प्रस्थलन्ति। (ग) पदे पदे ... वृक्षशाखाः सम्मुखमाघ्नन्ति। (घ) कृतप्रतिज्ञोऽसौ ... निजकार्यात्र विरमति।

उत्तर: (क) अथाकस्मात् परितो मेघमाला प्रादुरभूत्। (ख) क्षणे क्षणे झन्झावातः खुराशिचक्कणपाषाणखण्डेषु प्रस्थलन्ति। (ग) पदे पदे पक्षिणः वृक्षशाखाः सम्मुखमाघ्नन्ति। (घ) कृतप्रतिज्ञोऽसौ वीरः निजकार्यात्र विरमति।

4. अधोलिखितानां पदानाम् अर्थान् विलिख्य वाक्येषु प्रयुञ्जत । भास्करः, मेघमाला, वनानि, मार्गः, वीरः, गगनतलम्, झन्झावातः, मासः, सायम्।

उत्तर: 1. भास्करः - सूर्यः। 2. मेघमाला - बादल की माला। 3. वनानि - जंगल। 4. मार्गः - रास्ता। 5. वीरः - बहादुर पुरुष। 6. गगनतलम् - आकाश की सतह। 7. झन्झावातः - तेज़ हवा या तूफ़ान। 8. मासः - महीना। 9. सायम् - शाम।

वाक्य उदाहरण:

  • भास्करः आकाशे तेजस्वी प्रकाशं ददाति।
  • मेघमाला आकाशे घनघोर रूपेण शोभते।
  • वनानि अनेकप्रकारस्य जीवजंतूनां निवासस्थानम्।
  • मार्गः पर्वतश्रेणीनां मध्ये अस्ति।
  • वीरः युद्धे साहसं दर्शयति।
  • गगनतलम् नीलवर्णेन आच्छादितम् अस्ति।
  • झन्झावातः वृक्षान् कम्पयति।
  • मासः वर्षस्य एकः भ

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