Sanskritकक्षा 12कार्यं वा साध्येयम्, देहं वा पातयेयम्हिंदी

कार्यं वा साध्येयम्, देहं वा पातयेयम् | Class 12 Sanskrit Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

कार्यं वा साध्येयम्, देहं वा पातयेयम् | Class 12 Sanskrit Notes

कार्यं वा साध्येयम्, देहं वा पातयेयम् – this guide gives you a concise, exam-ready overview of कार्यं वा साध्येयम्, देहं वा पातयेयम् from Class 12 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

कार्यं वा साधयेयम्, देहं वा पातयेयम्

यह पाठ संस्कृत के प्रसिद्ध ऐतिहासिक उपन्यास 'शिवराजविजयम्' के प्रथम विराम के चतुर्थ निःश्वास से संकलित है, जिसका रचयिता अभिकादत्तव्यास हैं। अभिकादत्तव्यास संस्कृत एवं हिन्दी दोनों भाषाओं में शताधिक ग्रंथों के रचयिता थे। उनकी कृतियों में कल्पनाशक्ति और पात्रों के चरित्रों में उच्च आदर्शों का समावेश विद्वानों को आकर्षित करता है।

इस पाठ में वीर, विश्वासपात्र, कर्मठ और दृढ़संकल्प वाले व्यक्ति की छवि प्रस्तुत की गई है, जो मानवीय और प्राकृतिक बाधाओं के बावजूद अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संकल्पित रहता है। शिवाजी के विश्वासपात्र गुप्तचर की यात्रा का वर्णन है, जो सिंहदुर्ग से पत्र लेकर तोरणदुर्ग जाता है। रास्ते में अनेक भीषण प्राकृतिक बाधाएँ आती हैं जैसे झंझावात, पाषाण-पात, प्रपात और अंधकार, परन्तु वह विचलित नहीं होता। उसका निश्चय है कि या तो कार्य सिद्ध होगा या देह त्याग दी जाएगी। इस दृढ़संकल्पिता का भाव 'कार्यं वा साधयेयम्, देहं वा पातयेयम्' में संक्षेपित है।

पाठ की शुरुआत आषाढ़ मास के सायंकाल से होती है, जब सूर्य अस्ताचलगमन के लिए जा रहा होता है। वातावरण में सिन्दूर के रंग के बादल होते हैं जो वरुण (पश्चिम दिशा के देवता) के दिगवलम्बी हैं। पक्षी अपने घोंसलों में लौट रहे हैं। वन श्यामिमा से भर रहे हैं। अचानक मेघमाला पर्वतश्रेणी के ऊपर प्रकट होती है, जो भयानक आकृतियों से युक्त है।

ऐसे वातावरण में एक लगभग षोडशवर्षीय युवा, सुघटित और दृढ़ शरीर वाला, घोड़े पर सवार होकर पर्वतश्रेणी के ऊपर से यात्रा कर रहा है। उसका शरीर पसीने की बूँदों से भीगा हुआ है, उसके गाल सुंदर हैं, माथा, नाक और ओंठ पसीने से भीगे हुए हैं। वह राजतसूत्र से बनी हरी पगड़ी पहने हुए है। यह युवक शिवाजी का विश्वासपात्र है जो अपने कार्य के प्रति पूर्ण समर्पित है।

यात्रा के दौरान तेज झंझावात उठता है, धूल, सूखे पत्ते और पराग उड़ते हैं, गहरे अंधकार में घिरा वातावरण भयावह हो जाता है। पर्वतश्रेणियों के बीच रास्ते कठिन और खतरनाक हैं। घोड़े के खुर पत्थरों पर फिसलते हैं, वृक्ष शाखाएँ रास्ते में आती हैं, परन्तु युवक अपने दृढ़संकल्प से विचलित नहीं होता। वह बार-बार कहता है, 'कार्यं वा साधयेयम्, देहं वा पातयेयम्' अर्थात् कार्य सिद्ध करूँगा या प्राण त्याग दूँगा।

इस प्रकार पाठ में नायक की वीरता, दृढ़संकल्प और कर्मठता का चित्रण किया गया है, जो प्राकृतिक बाधाओं को भी परास्त कर अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहता है। यह पाठ विद्यार्थियों को जीवन में कठिनाइयों के सामने हार न मानने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है।

📊 Diagram: Figure 1: तावदकस्मादुत्थितो महान् झञ्ज्ञावात:, एक: सायंसमयप्रयुक्त: स्वभाव- वृत्तोऽन्धकार:, स च द्विगुणितो मेघमालाभि:। झञ्ज्ञावातोद्धृते: रेणुभि: श्रीर्णपत्रै: कुसुमपरागै: शुष्कपुष्पैश्च पुनरेष द्वैगुण्यं प्राप

🧪 Activity: विद्यार्थियों को प्राकृतिक बाधाओं के बीच नायक की दृढ़संकल्पिता पर चर्चा कराना तथा पाठ के मुख्य भावों को समझने के लिए प्रश्नोत्तरी कराना।

🔗 Connection: यह परिचयात्मक अनुभाग नायक के चरित्र और यात्रा के प्राकृतिक वातावरण के विस्तृत वर्णन की ओर ले जाता है, जिससे पाठ की गहराई समझ में आती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. संस्कृतेन उत्तरं दीयताम् । - (क) सायं समये भगवान् भास्कर: कुत्र जिगमिषु: भवति? - (ख) अस्ताचलगमनकाले भास्करस्य वर्ण: कीदृश: भवति? - (ग) नीडेषु के प्रतिनिवर्तन्ते? - (घ) शिववीरस्य विश्वासपात्रं किं स्थानं प्रयाति स्म? - (ङ) प्रतिक्षणमधिकाधिकां श्यामतां कानि कलयन्ति? - (च) शिववीरविश्वासपात्रस्य उष्णीषं कीदृशमासीत्? - (छ) मेघमाला कथं शोभते?

उत्तर: (क) सायं समये भगवान् भास्कर: नीडेषु जिगमिषु: भवति। (ख) अस्ताचलगमनकाले भास्करस्य वर्ण: लालवर्ण: भवति। (ग) नीडेषु पक्षिणः प्रतिनिवर्तन्ते। (घ) शिववीरस्य विश्वासपात्रं तोरणदुर्गं प्रयाति स्म। (ङ) प्रतिक्षणमधिकाधिकां श्यामतां मेघमाला कलयन्ति। (च) शिववीरविश्वासपात्रस्य उष्णीषं हरितोष्णीषशोभितम् आसीत्। (छ) मेघमाला आकाशे झन्झावातेन सह शोभते।

2. समीचीनोत्तरसङ्ख्यां कोष्ठके लिखत । अ. शिवराजविजयस्य रचयिता क: अस्ति? ( ) (क) बाणभट्टः (ख) श्रीहर्षः (ग) अम्बिकादत्तव्यासः (घ) माघः आ. कतिवर्षदेशीयो युवा हयेन पर्वतश्रेणीरुपर्युपरि गच्छति स्म । ( ) (क) चतुर्दशवर्षदेशीयः (ख) द्वादशवर्षदेशीयः (ग) पञ्चदशवर्षदेशीयः (घ) षोडशवर्षदेशीयः इ. शिववीरस्य विश्वासपात्रं किम् आदाय तोरणदुर्गं प्रयाति ?( ) (क) संवादम् आदाय (ख) पत्रम् आदाय (ग) पुष्पगुच्छम् आदाय (घ) अश्वम् आदाय

उत्तर: अ. शिवराजविजयस्य रचयिता बाणभट्टः अस्ति। अतः विकल्प (क) सही है। आ. युवा हयेन पर्वतश्रेणीरुपर्युपरि गच्छति स्म द्वादशवर्षदेशीयः। अतः विकल्प (ख) सही है। इ. शिववीरस्य विश्वासपात्रं पत्रम् आदाय तोरणदुर्गं प्रयाति। अतः विकल्प (ख) सही है।

3. रिक्तस्थानानि पूर्यत । (क) अथाकस्मात् परितो मेघमाला ... प्रादुरभूत्। (ख) क्षणे क्षणे ... खुराशिचक्कणपाषाणखण्डेषु प्रस्थलन्ति। (ग) पदे पदे ... वृक्षशाखाः सम्मुखमाघ्नन्ति। (घ) कृतप्रतिज्ञोऽसौ ... निजकार्यात्र विरमति।

उत्तर: (क) अथाकस्मात् परितो मेघमाला प्रादुरभूत्। (ख) क्षणे क्षणे झन्झावातः खुराशिचक्कणपाषाणखण्डेषु प्रस्थलन्ति। (ग) पदे पदे पक्षिणः वृक्षशाखाः सम्मुखमाघ्नन्ति। (घ) कृतप्रतिज्ञोऽसौ वीरः निजकार्यात्र विरमति।

4. अधोलिखितानां पदानाम् अर्थान् विलिख्य वाक्येषु प्रयुञ्जत । भास्करः, मेघमाला, वनानि, मार्गः, वीरः, गगनतलम्, झन्झावातः, मासः, सायम्।

उत्तर: 1. भास्करः - सूर्यः। 2. मेघमाला - बादल की माला। 3. वनानि - जंगल। 4. मार्गः - रास्ता। 5. वीरः - बहादुर पुरुष। 6. गगनतलम् - आकाश की सतह। 7. झन्झावातः - तेज़ हवा या तूफ़ान। 8. मासः - महीना। 9. सायम् - शाम।

वाक्य उदाहरण:

  • भास्करः आकाशे तेजस्वी प्रकाशं ददाति।
  • मेघमाला आकाशे घनघोर रूपेण शोभते।
  • वनानि अनेकप्रकारस्य जीवजंतूनां निवासस्थानम्।
  • मार्गः पर्वतश्रेणीनां मध्ये अस्ति।
  • वीरः युद्धे साहसं दर्शयति।
  • गगनतलम् नीलवर्णेन आच्छादितम् अस्ति।
  • झन्झावातः वृक्षान् कम्पयति।
  • मासः वर्षस्य एकः भ

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