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राष्ट्रीय आय का लेखांकन | Class 12 Economics Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

राष्ट्रीय आय का लेखांकन | Class 12 Economics Notes

राष्ट्रीय आय का लेखांकन – this guide gives you a concise, exam-ready overview of राष्ट्रीय आय का लेखांकन from Class 12 Economics, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

2.1 समष्टि अर्थशास्त्र की कुछ मूलभूत संकल्पनाएँ

इस खंड में समष्टि अर्थशास्त्र की मूलभूत संकल्पनाओं का परिचय दिया गया है। एडम स्मिथ की प्रसिद्ध कृति 'एन इनक्वायरी इंटू द नेचर एंड काउजेज ऑफ द वेल्थ ऑफ नेशंस' का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि किसी राष्ट्र की आर्थिक संपत्ति कैसे बढ़ती है और देश अमीर अथवा गरीब कैसे बनते हैं। प्राकृतिक संसाधनों की उपस्थिति ही किसी देश की समृद्धि का निर्धारण नहीं करती, क्योंकि संसाधन संपन्न अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्र भी विश्व के गरीब देशों में आते हैं। आर्थिक संपत्ति का सृजन उत्पादन प्रक्रिया के माध्यम से होता है, जहाँ संसाधनों का कुशल उपयोग आवश्यक होता है।

उत्पादन के प्रवाह की उत्पत्ति सामाजिक और तकनीकी ढाँचे के अंतर्गत होती है, जहाँ मानव श्रम, पूँजी, उद्यमिता और भूमि जैसे उत्पादन कारकों का संयोजन होता है। उत्पादन के पश्चात् वस्तुएँ और सेवाएँ उपभोक्ताओं को विक्रय के लिए प्रस्तुत की जाती हैं। अंतिम वस्तुएँ वे होती हैं जिनका अंतिम उपयोग उपभोक्ताओं द्वारा किया जाता है और जो पुनः उत्पादन प्रक्रिया में नहीं जातीं। अंतिम वस्तुओं को उपभोग वस्तुएँ और पूँजीगत वस्तुएँ दो भागों में बांटा जाता है। उपभोग वस्तुएँ वे हैं जिनका उपयोग तुरंत होता है, जैसे आहार और वस्त्र, जबकि पूँजीगत वस्तुएँ वे हैं जो उत्पादन प्रक्रिया में उपयोग होती हैं, जैसे मशीनरी और उपकरण।

मध्यवर्ती वस्तुएँ वे होती हैं जो उत्पादन प्रक्रिया में कच्चे माल के रूप में उपयोग होती हैं और अंतिम वस्तु नहीं होतीं। आर्थिक मापन के लिए वस्तुओं की मात्रा नहीं बल्कि उनका मूल्य आवश्यक होता है, इसलिए मुद्रा का उपयोग सामान्य माप के रूप में किया जाता है। मूल्यांकन में केवल अंतिम वस्तुओं का मूल्य शामिल किया जाता है ताकि मध्यवर्ती वस्तुओं के मूल्य का दोहरा गणना न हो।

यहाँ स्टॉक और प्रवाह की संकल्पना भी महत्वपूर्ण है। स्टॉक किसी निश्चित समय पर वस्तुओं या पूँजी का मापन है, जबकि प्रवाह एक निश्चित अवधि में उत्पन्न होने वाली वस्तुओं या आय का मापन है। पूँजीगत वस्तुओं में टूट-फूट होती है जिसे मूल्यहास कहा जाता है। मूल्यहास को प्रतिस्थापित करने के लिए निवेश आवश्यक होता है। इस प्रकार, निवल निवेश = सकल निवेश – मूल्यहास।

अर्थव्यवस्था में उत्पादन, आय और व्यय के बीच एक वर्तुल प्रवाह होता है, जहाँ फर्म उत्पादन के लिए कारकों को भुगतान करती है और परिवार अपनी आय का उपयोग वस्तुओं और सेवाओं की खरीद में करते हैं। इस प्रकार, समष्टि अर्थशास्त्र में उत्पादन, आय और व्यय के बीच गहरा संबंध होता है।

📊 Diagram: Reprint 2026-27

🧪 Activity: इस खंड में कोई विशेष गतिविधि नहीं दी गई है।

🔗 Connection: यह खंड राष्ट्रीय आय के वर्तुल प्रवाह और गणना की विधियों के परिचय के लिए आधार तैयार करता है, जो अगले खंड 2.2 में विस्तार से समझाया गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निम्नलिखित में से किसे राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं किया जाता?

जीवन बीमा प्रीमियम के भुगतान में व्यक्तिगत सहयोग

कौन – सी आय कारक लागत पर भारतीय घरेलू उत्पाद का अंश नहीं है?

विदेशों से निवल कारक आय

1. उत्पादन के चार कारक कौन-कौन से हैं और इनमें से प्रत्येक के पारिश्रमिक को क्या कहते हैं?

उत्पादन के चार कारक हैं: भूमि, श्रम, पूंजी और उद्यमिता।

  • भूमि का पारिश्रमिक: रेंट (भूमि का किराया)
  • श्रम का पारिश्रमिक: मजदूरी
  • पूंजी का पारिश्रमिक: ब्याज
  • उद्यमिता का पारिश्रमिक: लाभ
2. किसी अर्थव्यवस्था में समस्त अंतिम व्यय समस्त कारक अदायगी के बराबर क्यों होता है? व्याख्या कीजिए।

किसी अर्थव्यवस्था में समस्त अंतिम व्यय (जैसे उपभोग, निवेश, सरकार का व्यय, शुद्ध निर्यात) समस्त कारक अदायगी (मजदूरी, ब्याज, रेंट, लाभ) के बराबर होता है क्योंकि उत्पादन की प्रक्रिया में जो मूल्य जोड़ा जाता है, वह अंततः कारकों को उनके योगदान के अनुसार भुगतान के रूप में जाता है। इसलिए, कुल व्यय = कुल आय। यह राष्ट्रीय आय के सैद्धांतिक सिद्धांत का आधार है।

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